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अभी कुछ नहीं होगा” — डायबिटीज में ये सोच सबसे खतरनाक क्यों है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

डायबिटीज यानी मधुमेह एक ऐसी बीमारी है जिसे अक्सर "खामोश हत्यारा" कहा जाता है। बहुत से लोग शुगर लेवल थोड़ा बढ़ जाने पर यह सोचकर बैठ जाते हैं कि "अभी कुछ नहीं होगा" या "अभी तो कोई दिक़्क़त महसूस नहीं हो रही"। यह सोच सबसे ज़्यादा खतरनाक है क्योंकि जब तक लक्षण गंभीर रूप लेते हैं, तब तक शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को काफी नुकसान पहुँच चुका होता है। समय पर इसका इलाज करना इसलिए बेहद ज़रूरी है क्योंकि अनियंत्रित शुगर आपकी आँखों, किडनी और दिल की ज़िंदगी को खतरे में डाल देती है। आयुर्वेद कहता है कि बीमारी को शुरू में ही जड़ से पकड़ना समझदारी है, इंतज़ार करना नहीं।

डायबिटीज या मधुमेह क्या होता है?

इसे बिल्कुल आसान भाषा में समझें तो, हमारा शरीर भोजन से ऊर्जा बनाने के लिए 'इंसुलिन' नामक हार्मोन का उपयोग करता है। डायबिटीज वह स्थिति है जहाँ या तो शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता या उसका सही इस्तेमाल नहीं कर पाता। इसके कारण खून में शुगर ग्लूकोज का स्तर बहुत ज़्यादा बढ़ जाता है। सरल शब्दों में, यह आपके शरीर के ईंधन प्रबंधन की खराबी है, जहाँ मीठा आपके खून में जहर की तरह घुलने लगता है।

डायबिटीज के विभिन्न प्रकार और उनकी अवस्थाएं

मधुमेह को उसके कारणों और चरणों के आधार पर इन मुख्य श्रेणियों में समझा जा सकता है

टाइप-1 डायबिटीज इसमें शरीर का रक्षा तंत्र ही इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं को खत्म कर देता है, जिससे इंसुलिन की सख़्त ज़रूरत पड़ती है।

टाइप-2 डायबिटीज यह सबसे आम प्रकार है, जो गलत जीवनशैली और मोटापे के कारण होता है जहाँ शरीर इंसुलिन के प्रति सुस्त हो जाता है।

प्री-डायबिटीज यह वह चेतावनी वाला चरण है जहाँ शुगर लेवल सामान्य से ज़्यादा होता है, लेकिन अभी बीमारी पूरी तरह नहीं बनी होती।

गर्भावधि मधुमेह यह केवल गर्भावस्था के दौरान होता है, लेकिन भविष्य में टाइप-2 डायबिटीज का ख़तरा बढ़ा देता है।

सेकेंडरी डायबिटीज किसी दूसरी बीमारी या दवाओं के दुष्प्रभाव के कारण होने वाला मधुमेह।

शरीर में दिखने वाले मुख्य लक्षण

बार-बार पेशाब आना विशेष रूप से रात के वक़्त शुगर को बाहर निकालने के लिए शरीर को ज़्यादा पानी की ज़रूरत होती है।

अत्यधिक प्यास और भूख शरीर की कोशिकाएं ऊर्जा के लिए तरसती हैं, जिससे हर वक़्त कुछ खाने और पीने का मन करता है।

अकारण थकान पर्याप्त नींद के बावजूद शरीर में ताक़त महसूस न होना और हर वक़्त सुस्ती रहना।

धुंधली दृष्टि शुगर का स्तर बढ़ने से आँखों के लेंस में सूजन आ सकती है, जिससे साफ़ दिखाई नहीं देता।

ज़ख्मों का धीरे भरना शरीर की हीलिंग क्षमता कम हो जाती है, जिससे मामूली चोट भी हफ्तों तक ठीक नहीं होती।

डायबिटीज होने के मुख्य कारण

खराब खान-पान बहुत ज़्यादा मीठा, मैदा और प्रोसेस्ड फूड का सेवन इंसुलिन को थका देता है।

शारीरिक निष्क्रियता व्यायाम न करना और घंटों एक जगह बैठे रहना मेटाबॉलिज्म को सुस्त बनाता है।

मानसिक तनाव तनाव के हार्मोन शुगर लेवल को तेज़ी से बढ़ाते हैं, जिससे पैंक्रियास पर दबाव बढ़ता है।

नींद की कमी रात को देर तक जागना शरीर के हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ देता है।

अनुवांशिकता परिवार में किसी को डायबिटीज होने पर इसका ख़तरा कई गुना बढ़ जाता है।

जोखिम बढ़ाने वाले कारण और होने वाली जटिलताएं

 जोखिम बढ़ाने वाले 5 प्रमुख कारण

मोटापा पेट के आस-पास की चर्बी  इंसुलिन को काम करने से रोकती है।

उच्च रक्तचाप हाई बीपी और डायबिटीज एक साथ मिलकर नसों को ज़्यादा नुकसान पहुँचाते हैं।

उम्र 35-40 की उम्र के बाद मेटाबॉलिज्म धीमा होने से ख़तरा बढ़ता है।

धूम्रपान और शराब ये बुरी आदतें शरीर की इंसुलिन संवेदनशीलता को खत्म कर देती हैं।

पीसीओडी महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन डायबिटीज के जोखिम को बढ़ाता है।

होने वाली 5 गंभीर जटिलताएं

किडनी फेल होना खून में मौजूद शुगर किडनी की बारीक नसों को छलनी कर देती है।

डायबिटिक रेटिनोपैथी आँखों की रोशनी हमेशा के लिए जाने का ख़तरा रहता है।

हृदय रोग डायबिटीज वाले मरीज़ों में हार्ट अटैक की संभावना ज़्यादा होती है।

नसों की क्षति पैरों में सुन्नपन या जलन होना, जिससे भविष्य में 'गैंगरीन' हो सकता है।

कमज़ोर इम्युनिटी शरीर बार-बार संक्रमण और बीमारियों की चपेट में आने लगता है।

आयुर्वेद में डायबिटीज 'प्रमेह' और 'मधुमेह'

आयुर्वेद में डायबिटीज को 'मधुमेह' कहा गया है, जो 20 प्रकार के प्रमेह रोगों में से एक है

दोषों का असंतुलन यह मुख्य रूप से बढ़े हुए 'कफ' और 'वात' का रोग है जो शरीर के 'ओजस' ऊर्जा को पेशाब के ज़रिए बाहर निकाल देता है।

मंदाग्नि का संबंध जब हमारी पाचन अग्नि कमज़ोर होती है, तो शरीर में विषाक्त तत्व आम जमा होते हैं जो इंसुलिन के मार्ग को अवरुद्ध Block करते हैं।

धातु क्षय आयुर्वेद मानता है कि डायबिटीज शरीर की धातुओं ऊतकों को सुखा देती है, इसलिए केवल शुगर कम करना काफी नहीं, धातुओं को पोषण देना भी ज़रूरी है।

डायबिटीज में क्या खाएं और क्या न खाएं

क्या खाएं

साबुत अनाज जौ, रागी और बाजरा जैसे मोटे अनाज जो धीरे-धीरे शुगर रिलीज़ करते हैं।

हरी सब्जियाँ लौकी, तोरई, करेला और मेथी जैसी सब्जियाँ जो फाइबर से भरपूर हों।

दालें और फल मूंग की दाल और फाइबरयुक्त फल जैसे सेब या पपीता सीमित मात्रा में।

क्या न खाएं

सफेद ज़हर चीनी, मैदा और सफेद चावल का सेवन बिल्कुल बंद कर देना ज़रूरी है।

मीठे फल आम, चीकू, अंगूर और केले जैसे फलों से बचें क्योंकि ये शुगर को तेज़ी से बढ़ाते हैं।

तला-भुना भोजन बाहर का जंक फूड और पैकेट बंद जूस शरीर में 'आम' Toxins बढ़ाते हैं

मरीज़ों का अनुभव

मेरा नाम रेनू लूम्बा है, मेरी उम्र 60 साल है और मैं पेशे से टीचर रही हूँ। मुझे पिछले 25 सालों से सेहत से जुड़ी कुछ समस्याएं रहती थीं और मैं बॉर्डरलाइन डायबिटीज पर थी। लेकिन इसी साल जनवरी में जब मैंने टेस्ट करवाया, तो मेरी डायबिटीज अचानक बहुत ज़्यादा निकली। हम बहुत घबरा गए थे। एलोपैथिक डॉक्टर ने दवाइयाँ बताईं, लेकिन हम एलोपैथी शुरू नहीं करना चाहते थे क्योंकि हमें पता था कि वो दवाइयाँ उम्र भर खानी पड़ेंगी। मेरे हस्बैंड हमेशा टीवी पर डॉक्टर प्रताप चौहान जी को फॉलो करते थे, तो उन्होंने सुझाव दिया कि हमें जीवा चलना चाहिए। 

हम जीवा के कालकाजी क्लिनिक गए, जहाँ हमें डायबिटीज मैनेजमेंट प्रोग्राम के बारे में पता चला। उस प्रोग्राम के तहत मेरे हाथ पर 15 दिन के लिए एक सेंसर लगाया गया, जो यह मॉनिटर करता था कि किस चीज को खाने से मेरा शुगर लेवल अप-डाउन हो रहा है। 

मॉनिटरिंग के बाद मेरी दवाइयाँ शुरू की गईं और उसके बहुत अच्छे परिणाम आए। मेरा HbA1c जो पहले 8.2 था, अब घटकर 6.4 आ गया है। मैं जीवा की मेडिसिंस और उनके द्वारा दिए गए डाइट चार्ट से बहुत खुश हूँ। 

4 महीने के पैकेज के बाद मैं खुद को बहुत हेल्दी, एक्टिव और एनर्जेटिक महसूस कर रही हूँ। मैं डॉक्टर प्रताप चौहान और जीवा की पूरी टीम की बहुत शुक्रगुजार हूँ क्योंकि यहाँ पर्सनल अटेंशन दी जाती है। मैं आप सबसे भी यही कहूँगी कि अगर आपको डायबिटीज की प्रॉब्लम है, तो प्लीज जीवा जॉइन कीजिए।

आधुनिक उपचार और आयुर्वेदिक उपचार में अंतर?

विशेषता आधुनिक इलाज  आयुर्वेदिक इलाज
लक्ष्य इसका मुख्य ध्यान रक्त में मौजूद शुगर को तुरंत नियंत्रित करने पर होता है। इसका लक्ष्य पाचन अग्नि को बढ़ाकर और पेनक्रियाज को सक्रिय कर शुगर के मूल कारण को ठीक करना है।
तरीका यह इंसुलिन या ओरल दवाओं के माध्यम से शरीर को बाहर से मदद देता है। यह शरीर की अपनी इंसुलिन बनाने और इस्तेमाल करने की क्षमता को सक्रिय करता है।
साइड इफ़ेक्ट लंबे समय तक दवाओं के सेवन से किडनी और पाचन तंत्र पर नुकसान का खतरा रहता है। जड़ी-बूटियों और संतुलित आहार पर आधारित, अपेक्षाकृत सुरक्षित और पोषण देने वाला उपचार।
दृष्टिकोण यह बीमारी के लक्षणों का इलाज करता है। यह मरीज़ की प्रकृति और 'होलिस्टिक हीलिंग' Holistic Healing पर ज़ोर देता है।

डॉक्टर से कब संपर्क करना चाहिए?

  •   यदि आपको धुंधला दिखाई देने लगे या आँखों के आगे अंधेरा आए।
  •   यदि पैरों में सुन्नपन, झनझनाहट या घाव होने लगे जो ठीक न हो रहा हो।
  •   यदि बार-बार चक्कर आएं या पसीना आए, जो शुगर गिरने का संकेत हो सकता है।
  •   यदि आपका वज़न बिना किसी कोशिश के बहुत तेज़ी से गिरने लगे।
  •   यदि पेशाब में झाग आए या सांसों से फलों जैसी गंध आने लगे।

 निष्कर्ष

"अभी कुछ नहीं होगा" वाली सोच डायबिटीज के मरीज़ के लिए सबसे बड़ी दुश्मन है। यह बीमारी धीमी आग की तरह है जो अंदर ही अंदर शरीर को खोखला करती रहती है। आयुर्वेद का होलीस्टिक हीलिंग नज़रिया आपको दवाओं के बोझ से बचाकर एक संतुलित और खुशहाल ज़िंदगी दे सकता है। अपनी प्रकृति को पहचानें, समय पर जाँच कराएं और आज ही एक स्वास्थ्यपूर्ण कल की ओर कदम बढ़ाएं।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

प्री-डायबिटीज को जीवनशैली और आयुर्वेद से पूरी तरह पलटा जा सकता है, जबकि टाइप-2 को दवा और डाइट से बेहतरीन ढंग से नियंत्रित रखा जा सकता है।

हाँ, लेकिन डॉक्टर की सलाह पर ही शुरू करें ताकि वे आपके शुगर लेवल के अनुसार दवाओं का तालमेल बैठा सकें।

सीमित मात्रा में यह बहुत फायदेमंद है, लेकिन बहुत ज़्यादा सेवन से कभी-कभी पाचन संबंधी दिक़्क़त हो सकती है।

बिल्कुल, तनाव के दौरान शरीर में 'कोर्टिसोल' हार्मोन बढ़ता है जो शुगर लेवल को बहुत तेज़ी से ऊपर ले जाता है।

सेब, पपीता और अमरूद जैसे फल सीमित मात्रा में ले सकते हैं, लेकिन बहुत मीठे फलों से बचना ही बेहतर है।

डायबिटीज में तेज़ पैदल चलना (Brisk Walking) सबसे बेहतरीन व्यायाम माना जाता है क्योंकि यह इंसुलिन के उपयोग में सुधार लाता है।

खाना छोड़ना सही समाधान नहीं है, बल्कि रात का खाना हल्का और जल्दी खाना ज़्यादा ज़रूरी है।

हाँ, रात भर भीगे मेथी के दानों का पानी पीना मेटाबॉलिज्म सुधारने और शुगर कंट्रोल करने में मदद करता है।

लंबे समय तक अनियंत्रित शुगर नसों को प्रभावित करती है, जिससे एकाग्रता और याददाश्त में थोड़ी कमी आ सकती है।

जीवा आपको केवल दवा नहीं, बल्कि सही आहार, विहार और आचार का पूरा मार्गदर्शन देता है जो स्थायी स्वास्थ्य की नींव है।

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