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Insomnia का आयुर्वेदिक इलाज: रातभर करवटें बदलने से पाएं छुटकारा

  • category-iconPublished on 17 Apr, 2025
  • category-iconUpdated on 03 Mar, 2026
  • category-iconMental Health
  • blog-view-icon5520

शरीर थका होता है, आँखें भारी होती हैं, लेकिन दिमाग़ चल रहा होता है — कल की मीटिंग, अधूरा प्रोजेक्ट, परिवार की ज़िम्मेदारियाँ या कोई पुराना तनाव। आप बिस्तर पर जाते हैं, लेकिन नींद नहीं आती। करवटें बदलते हुए सुबह के तीन बज जाते हैं, और फिर आप सुबह थके हुए उठते हैं।
अगर आपके साथ यह स्थिति अक्सर होती है, तो यह सामान्य नहीं है। हो सकता है कि आपको अनिद्रा (Insomnia) की समस्या हो, और इसे समय रहते समझना और संभालना बेहद ज़रूरी है।
आयुर्वेद में नींद को 'निद्रा' कहा गया है और इसे जीवन के तीन स्तंभों में से एक माना गया है। यानी नींद सिर्फ आराम नहीं, बल्कि स्वास्थ्य का मूल आधार है। आइए समझते हैं कि अनिद्रा क्या है, इसके कारण क्या हैं, और आयुर्वेद इसमें आपकी कैसे सहायता कर सकता है।

अनिद्रा (Insomnia) क्या है?

अनिद्रा का अर्थ है:

  • सोने में कठिनाई
  • बार-बार नींद टूटना
  • सुबह जल्दी जाग जाना
  • नींद पूरी होने के बाद भी थकान रहना

आयुर्वेद के अनुसार यह मुख्यतः वात दोष वृद्धि, मानसिक अशांति, चिंता, रजस-तमस असंतुलन से जुड़ी होती है। आधुनिक विज्ञान इसे न्यूरो-हॉर्मोनल असंतुलन, तनाव, कोर्टिसोल वृद्धि और मेलाटोनिन की गड़बड़ी से जोड़ता है

इसकी दो प्रमुख अवस्थाएँ होती हैं:

  • Acute Insomnia: जो कुछ दिनों या हफ़्तों तक रहता है, आमतौर पर तनाव या किसी बदलाव के कारण होता है।
  • Chronic Insomnia: जब नींद की समस्या महीनेभर या उससे ज़्यादा समय तक बनी रहे।

अनिद्रा के लक्षण

आपको कैसे पता चलेगा कि यह सिर्फ एक-दो दिन की थकावट है या Insomnia की शुरुआत? निम्न लक्षणों पर ध्यान दें:

  1. नींद आने में ज़्यादा समय लगना (30 मिनट से ज़्यादा)
  2. रात में बार-बार नींद का टूटना
  3. सुबह बहुत जल्दी जाग जाना
  4. नींद के बाद भी थकान महसूस होना
  5. दिनभर नींद आना लेकिन रात में सो न पाना
  6. चिड़चिड़ापन, बेचैनी या मूड स्विंग्स

नींद न आने के कारण

नींद न आना यानी अनिद्रा की समस्या किसी एक वजह से नहीं होती। यह अक्सर कई शारीरिक, मानसिक और व्यवहारिक कारणों के मेल से पैदा होती है।

  • मानसिक तनाव और चिंता: अगर आपका दिमाग़ किसी बात को लेकर चिंतित है, कोई निर्णय लेने का दबाव है या रिश्तों की उलझनों से आप परेशान हैं, तो यह बेचैनी दिमाग़ को आराम नहीं लेने देती और नींद बाधित होती है।
  • स्क्रीन टाइम का ज़्यादा होना: मोबाइल, लैपटॉप या टीवी स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट मेलाटोनिन नामक नींद लाने वाले हार्मोन को दबा देती है। इसके कारण दिमाग़ को यह संकेत नहीं मिल पाता कि अब सोने का समय है।
  • अनियमित दिनचर्या: अगर आप हर दिन अलग-अलग समय पर सोते और उठते हैं, देर रात तक काम करते हैं या रात को भारी भोजन करते हैं, तो यह आदतें आपकी बॉडी क्लॉक को बिगाड़ देती हैं। इससे नींद का नेचुरल पैटर्न गड़बड़ा जाता है।
  • चाय, कॉफी और शराब का ज़्यादा सेवन: इन चीज़ों में मौजूद स्टिमुलेंट्स दिमाग़ को सक्रिय कर देते हैं। अगर आप शाम या रात में इनका सेवन करते हैं, तो यह नींद आने में देरी कर सकते हैं या नींद की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं।
  • शारीरिक बीमारियाँ और दवाइयाँ: एसिडिटी, थायरॉइड, हॉर्मोनल असंतुलन, डिप्रेशन, या ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएँ भी नींद को प्रभावित कर सकती हैं। साथ ही कुछ दवाइयों के साइड इफेक्ट्स से भी नींद टूट सकती है या गहरी नहीं आ पाती।

जब इन सभी कारणों में से एक या एक से ज़्यादा लगातार बने रहते हैं, तो नींद न आना एक आदत बन जाती है — और यही आदत आगे चलकर गंभीर अनिद्रा का रूप ले सकती है।

आयुर्वेद में अनिद्रा को कैसे समझा जाता है?

आयुर्वेद में अनिद्रा को 'निद्रानाश' कहा गया है और यह मुख्यतः वात और पित्त दोष के असंतुलन के कारण होता है। जब वात बढ़ता है, तो मन बेचैन होता है, और जब पित्त असंतुलित होता है, तो शरीर में गर्मी और चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है। यह दोनों मिलकर नींद की प्राकृतिक प्रक्रिया को बाधित करते हैं।
आयुर्वेद यह मानता है कि नींद केवल शरीर की ज़रूरत नहीं, बल्कि मन और आत्मा की संतुलन की प्रक्रिया है। अगर पाचन अग्नि गड़बड़ हो, मन शांत न हो या शरीर में टॉक्सिन्स जमा हो जाएँ — तो नींद आने में परेशानी होना स्वाभाविक है।
इसलिए निदान सिर्फ नींद लाने की दवा से नहीं, बल्कि शरीर और मन दोनों के संतुलन से जुड़ा होना चाहिए — यही आयुर्वेद का दृष्टिकोण है

आयुर्वेदिक नुस्ख़े जो अनिद्रा में दें राहत

अगर आप बिना किसी साइड इफेक्ट के गहरी और सुकून भरी नींद चाहते हैं, तो ये आयुर्वेदिक उपाय अपनाएँ:

ब्राम्ही और शंखपुष्पी का सेवन करें

ये दोनों जड़ी-बूटियाँ मानसिक तनाव को कम करती हैं और दिमाग़ को शांत करती हैं। कैसे लें?

  • 1/2 चम्मच ब्राम्ही और शंखपुष्पी चूर्ण गुनगुने दूध के साथ रात को सोने से पहले लें।

गुनगुने तेल से सिर और पैरों की मालिश करें

नारियल या ब्राह्मी तेल से सिर और तलवों की मालिश वात को शांत करती है। कैसे करें?

  • सोने से 30 मिनट पहले हल्के हाथों से तेल लगाकर मसाज करें।

दूध में जायफल या अश्वगंधा मिलाकर पिएँ

जायफल नींद लाने में सहायता करता है और अश्वगंधा तनाव कम करता है। कैसे लें?

  • रात को सोने से पहले 1 कप गर्म दूध में चुटकीभर जायफल या 1/2 चम्मच अश्वगंधा चूर्ण मिलाकर लें।

त्रिफला चूर्ण का सेवन करें

त्रिफला शरीर की सफाई करता है और नींद को बेहतर बनाता है। कैसे लें?

  • रात को सोने से पहले 1 चम्मच त्रिफला चूर्ण गुनगुने पानी के साथ लें।

गर्म पानी से स्नान या भाप लें

गर्म पानी से स्नान करने से शरीर रिलैक्स होता है और नींद आने में सहायता मिलती है। कैसे करें?
सोने से पहले हल्के गर्म पानी से स्नान करें या पैरों को गर्म पानी में डुबोकर रखें।

अच्छी नींद के लिए इन आदतों को बनाएँ

अच्छी और गहरी नींद सिर्फ औषधियों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि आपकी रोज़मर्रा की आदतों पर भी टिकी होती है। अगर आप अपनी दिनचर्या को थोड़ा बेहतर करें, तो यह न केवल अनिद्रा की समस्या से राहत दिला सकता है, बल्कि आपकी नींद की गुणवत्ता को भी काफी हद तक सुधार सकता है। नीचे कुछ ऐसी आसान लेकिन असरदार आदतें दी गई हैं जिन्हें अपनाकर आप नींद से जुड़ी परेशानियों को काफी हद तक कम कर सकते हैं:

  • हर दिन एक ही समय पर सोने और जागने की आदत डालें
  • रात में मोबाइल और स्क्रीन से दूरी रखें (कम से कम 1 घंटा पहले)
  • सोने से पहले चाय, कॉफी और भारी भोजन न करें
  • हल्का म्यूज़िक या ध्यान (Meditation) आज़माएँ
  • कमरे की लाइट्स मद्धम रखें और शांत माहौल बनाएँ
  • सुबह की धूप लें — इससे मेलाटोनिन बैलेंस होता है

क्लिनिकल एविडेंस और रिसर्च बैकिंग (आयुर्वेद के नुस्खे)

अब सवाल यह उठता है कि क्या आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां सच में नींद सुधारने में मदद करती हैं। आज का पाठक केवल परंपरा पर नहीं बल्कि वैज्ञानिक प्रमाणों पर भी भरोसा करना चाहता है। इसलिए यह समझना जरूरी है कि आधुनिक शोध क्या कहता है।

  • अश्वगंधा 

अश्वगंधा  को आयुर्वेद में “रसायन” माना जाता है।

पारंपरिक मान्यता:

  • तनाव कम करती है
  • मन को शांत करती है
  • गहरी नींद में मदद करती है

वैज्ञानिक शोध क्या कहते हैं?

कई क्लिनिकल स्टडीज़ में पाया गया है कि अश्वगंधा:

  • कोर्टिसोल स्तर कम कर सकती है
  • नींद की गुणवत्ता सुधार सकती है
  • चिंता और तनाव कम करने में सहायक हो सकती है

2. जटामांसी 

पारंपरिक उपयोग:

  • मानसिक शांति
  • चिंता और घबराहट में लाभ
  • मस्तिष्क को शीतलता

आधुनिक दृष्टिकोण:

कुछ पशु-आधारित और सीमित मानव अध्ययन संकेत देते हैं कि जटामांसी में:

  • हल्का सिडेटिव  प्रभाव हो सकता है
  • गाबा न्यूरोट्रांसमीटर पर प्रभाव पड़ सकता है

3. ब्राह्मी 

ब्राह्मी को “मस्तिष्क टॉनिक” कहा जाता है।

पारंपरिक लाभ:

  • स्मरण शक्ति बढ़ाना
  • मानसिक तनाव कम करना
  • मन को शांत करना

शोध क्या कहता है?

ब्राह्मी पर हुए अध्ययन बताते हैं:

  • यह संज्ञानात्मक कार्यों में सुधार कर सकती है
  • तनाव कम करने में मददगार हो सकती है

4. तगर

तगर को आयुर्वेद में निद्रा लाने वाली औषधि माना जाता है।

आधुनिक समानता:

यह पश्चिमी वैलेरियन से मिलती-जुलती मानी जाती है, जिसे:

  • हल्के अनिद्रा में उपयोग किया जाता है
  • नींद की अवधि और गुणवत्ता सुधारने में सहायक पाया गया है

यह समझना जरूरी है कि आयुर्वेद केवल जड़ी बूटियों पर आधारित नहीं है। इसमें दिनचर्या, आहार, अभ्यंग, ध्यान, प्राणायाम और मानसिक संतुलन सब शामिल होते हैं। इसलिए यदि कोई व्यक्ति केवल एक दवा लेकर जीवनशैली में कोई बदलाव नहीं करता तो अपेक्षित परिणाम नहीं मिलते।

कब स्वयं उपचार नहीं करना चाहिए

  • यदि आपकी नींद की समस्या तीन सप्ताह से अधिक समय से लगातार बनी हुई है तो इसे सामान्य तनाव या थकान समझकर नजरअंदाज न करें। लंबे समय तक अनिद्रा रहना शरीर और मन दोनों के लिए हानिकारक हो सकता है।
  • अगर अनिद्रा के साथ अचानक वजन कम हो रहा है, दिल की धड़कन तेज रहती है, अत्यधिक घबराहट होती है या दिन भर बहुत ज्यादा थकान और कमजोरी महसूस होती है तो यह किसी आंतरिक बीमारी का संकेत हो सकता है।
  • यदि व्यक्ति लगातार उदास रहता है, जीवन में रुचि कम हो गई है या नकारात्मक विचार आने लगे हैं तो यह डिप्रेशन का लक्षण हो सकता है। ऐसी स्थिति में केवल नींद की जड़ी-बूटियाँ लेना पर्याप्त नहीं है।
  • जिन लोगों को थायरॉइड, हृदय रोग, हार्मोन असंतुलन या अन्य गंभीर बीमारियां हैं उन्हें बिना चिकित्सक की सलाह आयुर्वेदिक औषधि नहीं लेनी चाहिए। गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग और जो पहले से किसी दवा पर हैं उन्हें विशेष सावधानी रखनी चाहिए।

याद रखें आयुर्वेद सुरक्षित है लेकिन हर व्यक्ति की स्थिति अलग होती है। सही निदान के बिना उपचार अधूरा रह सकता है।

कब डॉक्टर से मिलना ज़रूरी है?

अगर आपको हफ्तों से नींद नहीं आ रही है, आप दिन में काम करने में अक्षम महसूस करते हैं, या चिंता, डिप्रेशन जैसे मानसिक लक्षण ज़्यादा दिख रहे हैं — तो आयुर्वेदिक विशेषज्ञ से परामर्श लेना ज़रूरी है।
कई बार अनिद्रा किसी और बीमारी का लक्षण होती है — जैसे थायरॉइड, ब्लड प्रेशर या न्यूरोलॉजिकल समस्याएँ। ऐसे में स्वनियंत्रण से ज़्यादा जरूरी होता है सही निदान। आयुर्वेदिक चिकित्सा में ऐसे मामलों में पंचकर्म, विशेष औषधियाँ और मनोबल बढ़ाने वाले उपायों का प्रयोग किया जाता है।

आयुर्वेदिक दिनचर्या की

अब बात करते हैं आयुर्वेदिक दिनचर्या की, जिसे आज की भाषा में स्लीप हाइजीन भी कहा जाता है। कई बार केवल दिनचर्या सुधारने से ही नींद में अद्भुत सुधार देखा जाता है।

  • सोने से एक घंटा पहले स्क्रीन बंद करना

मोबाइल, टीवी और लैपटॉप की नीली रोशनी हमारे मस्तिष्क को यह संकेत देती है कि अभी दिन है। इससे मेलाटोनिन हार्मोन का स्राव कम हो जाता है और नींद आने में देर लगती है। कोशिश करें कि सोने से कम से कम एक घंटा पहले स्क्रीन से दूरी बना लें। इस समय को आप हल्की बातचीत, किताब पढ़ने या शांत संगीत सुनने में लगा सकते हैं।

  • गुनगुना स्नान

रात को गुनगुने पानी से स्नान करने से शरीर की मांसपेशियां ढीली होती हैं और मन को आराम मिलता है। यह शरीर को संकेत देता है कि अब विश्राम का समय है। खासकर जिन लोगों को तनाव या शारीरिक थकान अधिक रहती है उनके लिए यह बहुत लाभकारी हो सकता है।

  • तेल मालिश

आयुर्वेद में अभ्यंग यानी तेल मालिश को बहुत महत्व दिया गया है। सोने से पहले पैरों के तलवों और सिर पर हल्की गर्म तेल से मालिश करने से वात दोष शांत होता है और मन स्थिर होता है। तिल का तेल या नारियल का तेल उपयोग किया जा सकता है। यह न केवल नींद में मदद करता है बल्कि पूरे तंत्रिका तंत्र को संतुलित करता है।

  • नियमित सोने और जागने का समय

शरीर की अपनी एक जैविक घड़ी होती है। यदि हम रोज अलग-अलग समय पर सोते और जागते हैं तो यह घड़ी भ्रमित हो जाती है। कोशिश करें कि हर दिन लगभग एक ही समय पर सोएं और सुबह उठें। छुट्टी के दिन भी बहुत अधिक बदलाव न करें। नियमितता से शरीर खुद ही उस समय नींद के लिए तैयार होने लगता है।

  • प्राणायाम

गहरी और धीमी सांस लेने की प्रक्रिया मन को तुरंत शांत करती है। सोने से पहले पाँच से दस मिनट तक अनुलोम विलोम या गहरी श्वास का अभ्यास करें। इससे तनाव हार्मोन कम होते हैं और मन वर्तमान में स्थिर होता है। जिन लोगों को चिंता के कारण नींद नहीं आती उनके लिए यह विशेष रूप से लाभकारी है।

अच्छी नींद के लिए इन आदतों को बनाएँ

अच्छी और गहरी नींद सिर्फ औषधियों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि आपकी रोज़मर्रा की आदतों पर भी टिकी होती है। अगर आप अपनी दिनचर्या को थोड़ा बेहतर करें, तो यह न केवल अनिद्रा की समस्या से राहत दिला सकता है, बल्कि आपकी नींद की गुणवत्ता को भी काफी हद तक सुधार सकता है। नीचे कुछ ऐसी आसान लेकिन असरदार आदतें दी गई हैं जिन्हें अपनाकर आप नींद से जुड़ी परेशानियों को काफी हद तक कम कर सकते हैं:

  • हर दिन एक ही समय पर सोने और जागने की आदत डालें
  • रात में मोबाइल और स्क्रीन से दूरी रखें (कम से कम 1 घंटा पहले)
  • सोने से पहले चाय, कॉफी और भारी भोजन न करें
  • हल्का म्यूज़िक या ध्यान (Meditation) आज़माएँ
  • कमरे की लाइट्स मद्धम रखें और शांत माहौल बनाएँ
  • सुबह की धूप लें — इससे मेलाटोनिन बैलेंस होता है

 दोष आधारित व्यक्तिगत सलाह

अब समझते हैं दोष आधारित व्यक्तिगत सलाह। आयुर्वेद का मानना है कि हर व्यक्ति की प्रकृति अलग होती है और उसी के अनुसार उपचार होना चाहिए।

  • वात प्रकृति या वात असंतुलन में अनिद्रा

ऐसे लोग संवेदनशील, रचनात्मक और जल्दी चिंतित होने वाले होते हैं। उनकी नींद हल्की होती है और बार बार टूटती है। इनके लिए गर्म और सुकून देने वाली दिनचर्या जरूरी है। नियमित समय पर भोजन, गर्म दूध, तेल मालिश और ध्यान बहुत लाभदायक होते हैं। ठंडी हवा, उपवास और देर रात तक जागना इनके लिए हानिकारक है।

  • पित्त असंतुलन में अनिद्रा

पित्त प्रकृति के लोग मेहनती और लक्ष्य केंद्रित होते हैं। वे अक्सर आधी रात को जाग जाते हैं और दिमाग सक्रिय हो जाता है। इनके लिए शीतल वातावरण, हल्का भोजन और मानसिक विश्राम जरूरी है। मसालेदार और भारी भोजन कम करें। सोने से पहले ठंडा दूध या शांतिदायक जड़ी-बूटी उपयोगी हो सकती है।

  • कफ असंतुलन में नींद समस्या

कफ प्रकृति वाले लोगों को सामान्यतः अच्छी नींद आती है लेकिन यदि दिन में अधिक सोते हैं या भारी भोजन करते हैं तो रात की नींद प्रभावित हो सकती है। इनके लिए नियमित व्यायाम, हल्का रात्रि भोजन और दिन में लंबी नींद से बचना जरूरी है।

कब डॉक्टर से मिलना ज़रूरी है?

अगर आपको हफ्तों से नींद नहीं आ रही है, आप दिन में काम करने में अक्षम महसूस करते हैं, या चिंता, डिप्रेशन जैसे मानसिक लक्षण ज़्यादा दिख रहे हैं — तो आयुर्वेदिक विशेषज्ञ से परामर्श लेना ज़रूरी है।
कई बार अनिद्रा किसी और बीमारी का लक्षण होती है — जैसे थायरॉइड, ब्लड प्रेशर या न्यूरोलॉजिकल समस्याएँ। ऐसे में स्वनियंत्रण से ज़्यादा जरूरी होता है सही निदान। आयुर्वेदिक चिकित्सा में ऐसे मामलों में पंचकर्म, विशेष औषधियाँ और मनोबल बढ़ाने वाले उपायों का प्रयोग किया जाता है।

अंतिम विचार

नींद का आना कोई विलासिता नहीं, बल्कि जीवन का बुनियादी हिस्सा है। जब यह प्रभावित होती है, तो उसका असर आपके शरीर, मन और भावनात्मक स्थिति पर पड़ता है। अनिद्रा को नज़रअंदाज़ करना आपकी ऊर्जा, निर्णय लेने की क्षमता और जीवन की गुणवत्ता को सीधे तौर पर प्रभावित करता है।
आयुर्वेद आपको एक ऐसा रास्ता दिखाता है जहाँ बिना किसी साइड इफेक्ट के, आप अपने शरीर और मन को प्राकृतिक तरीके से संतुलित कर सकते हैं। दवाइयों से ज़्यादा ज़रूरी है आपकी आदतें, दिनचर्या और सोच का सही होना — और यही है आयुर्वेद का असली समाधान।

FAQ’s

1.अनिद्रा क्या है?

अनिद्रा वह अवस्था है जब व्यक्ति को ठीक से नींद नहीं आती हो या नींद टूटने लगती हो, जिससे शरीर और मन व्याकुल हो जाएँ।

  1. अनिद्रा के सामान्य लक्षण क्या हैं?

अनिद्रा में देर से नींद आना, रात में कई बार जागना, सुबह भारीपन और दिनभर चिड़चिड़ापन आदि मुख्य लक्षण हैं।

  1. अनिद्रा क्यों होती है?

ज्यादा तनाव, चिंता, मोबाइल का अधिक उपयोग, दिनचर्या में अनियमितता और खानपान में गलत आदि अनिद्रा के बड़े कारण हो सकते हैं।

4.आयुर्वेद में अनिद्रा को कैसे देखा जाता है?

अनिद्रा को आयुर्वेद में वात और पित्त दोष के विकार के कारण माना जाता है, जिससे मन बेचैन हो जाता है।

  1. क्या तनाव से नींद पर असर पड़ता है?

हाँ, तनाव और अधिक सोचने से मन शांत नहीं होता है, जिससे नींद आने में दिक्कत होती है।

  1. क्या जीवनशैली में परिवर्तन से अनिद्रा में सुधार हो सकता है?

 नियमित समय पर सोना-जागना, हल्का खाना खाना, और स्क्रीन से दूरी बनाए रखने से नींद में काफी सुधार हो सकता है। 

  1. किन आयुर्वेदिक हर्ब्स का उपयोग अनिद्रा में किया जा सकता है?

 अश्वगंधा, ब्राह्मी, शंखपुष्पी, आदि जड़ी-बूटियों का उपयोग मन को शांत करके नींद अच्छी लाने में मदद मिलती है। सोने से पहले क्या करना होगा ताकि नींद अच्छी हो। हल्का टहलना, ध्यान, प्राणायाम, और शांत वातावरण बनाए रखने से नींद स्वाभाविक रूप से अच्छी होगी।

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