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रात 10 बजे के बाद dinner: अगले दिन की भूख और digestion पर क्या असर पड़ सकता है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

रात 10 बजे के बाद डिनर करना एक आम बात हो गई है। ऑफिस से लेट आना देर तक टीवी देखने की आदत या फिर देर रात तक जगने के शौक ने हमारे खाने के समय को पूरी तरह बिगाड़ कर रख दिया है। लेकिन क्या आपने कभी से सोचा है कि जब आप इतनी रात गए खाना खाते हैं तो इसका आपके शरीर पर क्या असर होता है? रात 10 बजे के बाद खाया गया खाना सिर्फ उस रात की नींद ही खराब नहीं करता बल्कि यह अगले दिन की भूख आपकी एनर्जी और सबसे ज़रूरी आपके डाइजेशन को भी प्रभावित करता है। देर रात का डिनर हमारे शरीर के नेचुरल क्लॉक के बिल्कुल खिलाफ जाता है। 

क्या रात 10 बजे के बाद Dinner करना सही है?

आयुर्वेद और आधुनिक मेडिकल साइंस दोनों ही रात 10 बजे के बाद खाना खाने को सेहत के लिए बहुत नुकसानदायक मानते हैं। जैसे-जैसे सूरज ढलता है हमारे शरीर का पाचन तंत्र भी धीमा पड़ने लगता है। रात 10 बजे तक शरीर पूरी तरह से आराम के मोड में जा चुका होता है। उस वक्त जब हम खाना खाते हैं तो शरीर को उसे पचाने के लिए एक्स्ट्रा मेहनत करनी पड़ती है। यह समय शरीर की हीलिंग और रिकवरी का होता है न कि खाना पचाने का। इसीलिए देर रात का डिनर आज के समय में मोटापे, शुगर और दिल की बीमारियों का एक बड़ा कारण बन रहा है।

क्या देर से भोजन करने से सुबह की भूख कम हो सकती है?

देर रात में ज़्यादा भोजन करने के बाद एक ये चीज़ पता चलती है कि आपको नाश्ते में भूख नहीं लगती ऐसा इसलिए हो सकता है क्यूंकि  सोने से कुछ देर पहले ही आपने भोजन कर लिया और सो गए इससे हमारा भोजन सही से नहीं पचता और हमारा पेट भरी सा लगता है एक्सपर्ट के अनुसार किए गए अध्यन से पता चलता है शाम के समय ज़्यादा भोजन खाने  देर से या भारी भोजन करने से अगली सुबह की भूख कम हो सकती है। जब आप रात में देर से खाते हैं, विशेष रूप से वसा या प्रोटीन से भरपूर भोजन तो पाचन तंत्र को उसे पचाने में अधिक समय लगता है। इससे सुबह के समय पेट भरा हुआ महसूस होता है और भूख कम करने वाले हार्मोन सक्रिय रहते हैं

रात का खाना सोने से कुछ देर पहले खाना कैसा है?

सोने से ठीक पहले रात का खाना खाना सेहत के लिए बहुत नुकसानदायक है। विशेषज्ञों के अनुसार खाने और सोने के बीच कम से कम 2 से 3 घंटे का अंतर होना चाहिए ताकि शरीर को भोजन पचाने का पूरा समय मिल सके। चाहे आधुनिक विज्ञान हो या आयुर्वेद दोनों ही इस बात पर पूरी तरह सहमत हैं कि सूरज ढलने के बाद हमारे शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ जाता है। जब हम रात के खाने और सोने के बीच सही गैप नहीं रखते तो शरीर रातभर खुद को अंदर से रिपेयर हील करने के बजाय अपनी पूरी ऊर्जा उस देर से खाए हुए भोजन को पचाने में ही लगा देता है। यह स्थिति न केवल आपके हाजमे को पूरी तरह बिगाड़ देती है बल्कि भविष्य में होने वाली कई गंभीर बीमारियों की मुख्य वजह भी बनती है।

रात के समय भोजन से जुड़ी कुछ आदतें 

लोगों की दिनचर्या और काम के टाइम के अनुसार रात के भोजन की आदतें कई प्रकार की होती हैं:

  • देर रात का खाना : रात 10 या 11 बजे भरपेट खाना खाना और उसके 15-20 मिनट बाद ही सो जाना।
  • मिडनाइट स्नैकिंग: सोने से ठीक पहले मीठा खाने या टीवी देखते हुए अनहेल्दी जंक फूड खाने की क्रेविंग होना।
  • भारी भोजन: दिन भर काम के कारण कुछ न खा पाना और फिर रात को एक साथ पनीर, मैदा और भारी भोजन करना।

खाने के तुरंत बाद सोना और शरीर क्या संकेत देता है?

  • सुबह उठकर भारीपन: 8 घंटे सोने के बाद भी शरीर में भयंकर थकान, ऊर्जा की कमी और भारीपन महसूस होना।
  • कब्ज़ और पेट की गैस: सुबह पेट ठीक से साफ न होना, मरोड़ उठना और लगातार रहने वाली कब्ज़, की शुरुआत होना।
  • खराब नींद: रात में बार-बार आँख खुलना और बैठे-बैठे मानसिक तनाव महसूस होना।
  • मांसपेशियों में अकड़न: एसिडिटी के कारण सही तरीके से से न सो पाना जिससे सुबह उठने पर गर्दन का खिंचाव और पीठ में दर्द रहता है।

रात का भोजन करते हुए हम कौन सी गलतियां करते हैं?

हम अक्सर रात का भोजन करते हुए कुछ गलतियां करते हैं जिनसे हमारा मेटाबॉलिज़्म धीमा हो जाता है और वो गलतियां कुछ इस प्रकार हैं:

  • टीवी या मोबाइल देखते हुए खाना: स्क्रीन देखते हुए खाने से शरीर को तृप्ति का सिग्नल नहीं मिलता और इंसान ज़रूरत से ज़्यादा खा लेता है।
  • रात में ठंडी चीज़ें खाना: सोने से पहले आइसक्रीम या कोल्ड ड्रिंक पीना जो शरीर की प्राकृतिक पाचक अग्नि को पूरी तरह बुझा देता है।
  • भविष्य की क्रोनिक बीमारियाँ: इन गलत आदतों से भविष्य में टाइप 2 डायबिटीज़ फैटी लिवर और थायरॉइड  जैसी गंभीर जटिलताएँ पैदा होती हैं।

डॉक्टर से कब मिलें?

  • सीने में दर्द: अगर रात में खाने के बाद सीने में तेज़ दर्द हो। 
  • उल्टी में ताज़ा खून आना: अगर आपको खट्टी डकार के साथ उल्टी हो। 
  • भोजन निगलने में कठिनाई: अगर गले में हर वक्त कुछ अटका हुआ महसूस हो और पानी या खाना निगलने में तेज़ दर्द हो। 
  • बिना वजह अचानक तेज़ी से वज़न गिरना: अगर पेट खराब रहने के साथ-साथ आपका वज़न बिना किसी डायटिंग के बहुत तेज़ी से गिर रहा हो।

निष्कर्ष

रात को सोने और खाने के बीच कम से कम 2 से 3 घंटे का अंतर रखना कोई पुरानी बात नहीं बल्कि एक प्रूवन साइंस है। जब आप अपने शरीर को सोने से पहले भोजन पचाने का पूरा समय देते हैं तो आपकी नींद गहरी होती है मेटाबॉलिज़्म तेज़ होता है और शरीर खुद को हील Heal कर पाता है। देर रात का खाना भारी खाना और फिर सीधे बिस्तर पर जाना आपके सिस्टम को धीरे-धीरे अंदर से खोखला कर रहा है। रात का भोजन हमेशा हल्का रखें और सोने से पहले थोड़ा टहलने की आदत डालें।इस एसिडिटी गैस और खराब नींद के डर और केमिकल दवाइयों के चक्रव्यूह से बाहर निकलें। और अपनी जीवनशैली सही करके अपने स्वस्थ को सही करें।

References 

https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC7337187/

https://www.healthline.com/nutrition/what-time-should-you-stop-eating

https://www.aicr.org/resources/blog/healthtalk-is-eating-a-late-dinner-hurting-my-health/

https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC6893547/

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

सोने से ठीक पहले खाना खाने से रात भर पाचन क्रिया और हार्मोन में बदलाव आ सकता है, जिससे अगली सुबह आपको अधिक भूख लग सकती है।

देर से खाना खाने से हमारे शरीर के हार्मोन का संतुलन, पाचन चक्र और इंटरनल क्लॉक बिगड़ जाते हैं। इससे अगले दिन या अगली बार भूख लगने का तरीका बदल जाता है और बार-बार ज्यादा खाने की इच्छा होने लगती है।

हाँ, रात के खाने के बाद 15-20 मिनट धीमी गति से टहलना पाचन के लिए बहुत अच्छा होता है। यह खाने को नीचे की ओर धकेलता है और गैस बनने से रोकता है। हालांकि, बहुत तेज़ दौड़ने या व्यायाम करने से बचना चाहिए।

नाइट शिफ्ट वालों की बायोलॉजिकल क्लॉक अलग होती है। उन्हें भारी खाना खाने के बजाय हल्का सुपाच्य और गर्म भोजन लेना चाहिए ताकि पाचन तंत्र पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।

लगातार खाली पेट सोने से वात दोष बढ़ सकता है, जिससे नींद न आने और कमज़ोरी की समस्या हो सकती है। अगर आपको भूख नहीं है, तो भारी खाने के बजाय सिर्फ हल्का सूप या दूध लेकर सोना बेहतर है।

रात के समय दही या छाछ का सेवन पूरी तरह वर्जित है। ये प्रकृति में ठंडे और कफवर्धक होते हैं। रात में इन्हें खाने से शरीर के स्रोत ब्लॉक हो जाते हैं जिससे गले में खराश बलगम और जोड़ों का दर्द बढ़ सकता है।

भारी भोजन के बाद लगभग 2-3 घंटे सोना एक सामान्य दिशानिर्देश है सोने के ठीक पहले भोजन करने से अगली सुबह की भूख पर अधिक प्रभाव पड़ सकता है।

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