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स्पर्म काउंट कम – क्या प्राकृतिक सुधार संभव है?

Information By Dr. Keshav Chauhan
  • category-iconPublished on 28 Mar, 2026
  • category-iconUpdated on 28 Mar, 2026
  • category-iconSexual Health
  • blog-view-icon5006

आप दोनों बहुत समय से माता-पिता बनने की कोशिश कर रहे हैं। समाज हमेशा पहले महिला की तरफ ही देखता है। लेकिन जब रिपोर्ट आती है, तो पता चलता है कि समस्या आपके स्पर्म काउंट में है। यह सच में बहुत बड़ा झटका लगता है। यह एक ऐसी बात है जिस पर अक्सर पुरुष खुलकर बात नहीं कर पाते। आपको अंदर ही अंदर एक अजीब सी शर्मिंदगी महसूस होती है। आप सोचते हैं कि ऐसा क्यों हुआ। आप तनाव में आ जाते हैं।

ज्यादातर डॉक्टर आपको बस कुछ मल्टीविटामिन पकड़ा देते हैं। या फिर सीधे आईवीएफ या आईयूआई की महंगी प्रक्रिया की तरफ धकेल देते हैं। लेकिन स्पर्म काउंट का कम होना कोई स्थायी बीमारी नहीं है। आपका शरीर बस अंदर से बहुत ज्यादा थका हुआ है। यह एक पोषण की कमी है। अगर आप सही तरीके से अपने शरीर को समझें, तो आप इन फर्टिलिटी इश्यूज को आसानी से पार कर सकते हैं। आप अपनी एंग्जायटी को मैनेज कर सकते हैं और प्राकृतिक रूप से अपनी क्षमता वापस पा सकते हैं।

लो स्पर्म काउंट आखिर क्या है?

एक स्वस्थ प्रेगनेंसी के लिए पुरुष के वीर्य में शुक्राणुओं (स्पर्म) की सही मात्रा होना बहुत जरूरी है। जब आपके वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या सामान्य से बहुत कम हो जाती है। तो इसे मेडिकल भाषा में ओलिगोस्पर्मिया कहते हैं।

  • संख्या की कमी: अगर एक मिलीलीटर सीमेन में 15 मिलियन से कम स्पर्म हों, तो उसे लो स्पर्म काउंट माना जाता है।
  • गति और आकार: सिर्फ संख्या ही काफी नहीं है। स्पर्म को तेजी से तैरना (Motility) भी आना चाहिए। उसका आकार (Morphology) भी बिल्कुल सही होना चाहिए। अगर स्पर्म टेढ़े-मेढ़े या सुस्त हैं, तो वे अंडे तक पहुंच ही नहीं सकते।

स्पर्म काउंट कम होने के प्रकार

यह समस्या सिर्फ एक तरह की नहीं होती। अंदरूनी गड़बड़ी के हिसाब से यह अलग-अलग रूप लेती है।

  • ओलिगोस्पर्मिया: इसमें स्पर्म बनते तो हैं, लेकिन उनकी गिनती बहुत कम होती है।
  • एस्थेनोजूस्पर्मिया: इसमें गिनती ठीक हो सकती है। लेकिन स्पर्म इतने सुस्त होते हैं कि वे आगे बढ़ ही नहीं पाते।
  • टेराटोजूस्पर्मिया: इसमें स्पर्म का आकार बिल्कुल खराब होता है। किसी की पूंछ नहीं होती तो किसी का सिर बड़ा होता है।
  • एजोस्पर्मिया: यह सबसे गंभीर स्थिति है। इसमें वीर्य में एक भी स्पर्म नहीं पाया जाता।

इसके लक्षण कैसे पहचानें?

आमतौर पर इसका कोई बाहरी लक्षण नहीं दिखता। लेकिन शरीर कुछ सूक्ष्म संकेत जरूर देता है।

  • सेक्स की इच्छा (Libido) में अचानक बहुत ज्यादा कमी आना।
  • इरेक्शन बनाए रखने में मुश्किल होना।
  • शरीर पर या चेहरे पर बालों का कम होना। यह हार्मोनल गड़बड़ी का संकेत है।
  • बिना किसी वजह के अचानक वजन बढ़ना और हमेशा थकान रहना।
  • कभी-कभी यह बिल्कुल वैसे ही हार्मोनल बदलाव लाता है जैसे थायरॉइड के लक्षण शरीर को सुस्त कर देते हैं।

स्पर्म काउंट कम होने के मुख्य कारण

  • गर्मी का असर: लगातार गोद में लैपटॉप रखकर काम करना। या बहुत टाइट कपड़े पहनना। अंडकोष (Testicles) का तापमान बढ़ा देता है। गर्मी स्पर्म को मार देती है।
  • मानसिक तनाव: आज की भागदौड़ में तनाव के प्रभाव सबसे ज्यादा खतरनाक हैं। स्ट्रेस हार्मोन टेस्टोस्टेरोन को बनने ही नहीं देता।
  • खराब लाइफस्टाइल: शराब, सिगरेट और जंक फूड। यह सब खून में जहर घोलते हैं।
  • नींद की कमी: लगातार काम करना और नींद की कमी आपके शरीर की नई कोशिकाएं बनाने की क्षमता को खत्म कर देती है।

इसे नज़रअंदाज़ करने पर क्या जटिलताएं हो सकती हैं?

अगर इस समस्या को छिपाया जाए और इलाज न हो, तो यह रिश्ते को तोड़ सकती है।

  • बांझपन: यह सबसे बड़ा और सीधा जोखिम है। प्रेगनेंसी रुकने की संभावना बिल्कुल खत्म हो जाती है।
  • मनोवैज्ञानिक तनाव: पुरुष का आत्मविश्वास पूरी तरह टूट जाता है। वह डिप्रेशन में चला जाता है।
  • रिश्तों में दरार: बच्चा न होने का तनाव अक्सर पति-पत्नी के रिश्ते में बहुत ज्यादा कड़वाहट ले आता है।

इसकी जांच कैसे होती है?

डॉक्टर इस समस्या की गहराई जानने के लिए कुछ खास टेस्ट करते हैं।

  • सीमेन एनालिसिस: यह सबसे जरूरी टेस्ट है। इसमें वीर्य की मात्रा, स्पर्म की गिनती, गति और आकार देखा जाता है।
  • हार्मोन टेस्ट: टेस्टोस्टेरोन और अन्य हार्मोन्स का लेवल चेक किया जाता है।
  • स्क्रोटल अल्ट्रासाउंड: यह देखने के लिए कि अंडकोष की नसों में कोई सूजन (वेरिकोसील) तो नहीं है।

आयुर्वेद इसे कैसे समझता है?

आयुर्वेद में वीर्य को 'शुक्र धातु' कहा जाता है। यह शरीर की सबसे अंतिम और सबसे शक्तिशाली धातु है।

  • शुक्र धातु की कमजोरी: आप जो भी खाते हैं, वह सात स्तरों से गुजरकर वीर्य बनता है। अगर आपका पाचन तंत्र खराब है, तो पोषण शुक्र धातु तक पहुंचता ही नहीं है।
  • अग्नि का बुझना: जब आपकी पाचन अग्नि कमजोर होती है, तो शरीर में चिपचिपा 'आम' (गंदगी) बनता है।
  • आम का जमाव: यह गंदगी प्रजनन की सूक्ष्म नलियों को ब्लॉक कर देती है। इससे स्पर्म का निर्माण रुक जाता है। आयुर्वेद इसी गंदगी को साफ करता है। यही पीसीओडी का प्राकृतिक इलाज हो या पुरुषों की इनफर्टिलिटी, दोनों का मूल आधार है।

जीवा आयुर्वेद की समग्र चिकित्सा

हम सिर्फ आपको मल्टीविटामिन नहीं देते। हम आपके शरीर की मशीनरी को अंदर से रिपेयर करते हैं।

  • दोष संतुलन: वात और पित्त को शांत करके प्रजनन अंगों तक साफ खून पहुंचाना।
  • डिटॉक्सिफिकेशन: शरीर के सारे टॉक्सिन्स बाहर निकालना।
  • धातु पोषण: शुक्र धातु को सीधे ताकत देने वाली औषधियां देना।
  • तनाव मुक्ति: दिमाग को शांत रखना। इसके लिए तनाव कम करने की खास तकनीकें अपनाना।

फर्टिलिटी के लिए 4 बेहतरीन आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां

  • अश्वगंधा: यह पुरुषों के लिए वरदान है। यह स्ट्रेस को खत्म करता है। टेस्टोस्टेरोन लेवल को प्राकृतिक रूप से बढ़ाता है और स्पर्म की गति को तेज करता है।
  • शिलाजीत: यह पहाड़ों से मिलने वाला एक जादुई रसायन है। यह शरीर की थकावट मिटाता है और स्पर्म की क्वालिटी और डीएनए को बहुत मजबूत बनाता है।
  • सफेद मूसली: इसे 'दिव्य औषधि' कहा जाता है। यह वीर्य को गाढ़ा करती है और सीधे तौर पर स्पर्म काउंट की संख्या को बहुत तेजी से बढ़ाती है।
  • गोक्षुर: यह नसों में ब्लड फ्लो को सुधारता है। यह प्रजनन अंगों को अंदर से ताकत देता है और इरेक्शन की समस्याओं को दूर करता है।

आयुर्वेदिक थेरेपी

  • बस्ति: यह औषधीय काढ़े और तेल का एनीमा है। यह अपान वात को शांत करता है जो प्रजनन के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार है।
  • शिरोधारा: माथे पर गर्म तेल की धार। यह सीधे नर्वस सिस्टम को रिलैक्स करती है। यह स्ट्रेस और एंग्जायटी को जड़ से खत्म कर देती है।
  • अभ्यंग: औषधीय तेलों से पूरे शरीर की मालिश। यह खून का दौरा सुधारती है और शरीर की सारी नसों को खोल देती है।

हार्मोनल और मेटाबॉलिक संतुलन के लिए डाइट प्लान

पावर फूड्स:

  • गाय का शुद्ध घी और दूध: यह शुक्र धातु को बनाने का सबसे बेहतरीन स्रोत है। यह वीर्य को गाढ़ा करता है।
  • भीगे हुए बादाम और अखरोट: इनमें जिंक और ओमेगा-3 होता है। यह स्पर्म के तैरने की क्षमता (Motility) को बहुत ज्यादा बढ़ा देते हैं।
  • ताजे फल: अनार और केले शरीर को एंटीऑक्सीडेंट देते हैं।
  • पाचन सहायक: पेट को साफ रखने के लिए त्रिफला के फायदे जरूर अपनाएं। पेट साफ होगा तभी शुक्र धातु बनेगी।

इन चीजों से बिल्कुल बचें:

  • बहुत ज्यादा मसालेदार खाना: यह शरीर में पित्त (गर्मी) बढ़ाता है। यह गर्मी स्पर्म के पैदा होने से पहले ही जला देती है।
  • सोया प्रोडक्ट्स: सोयाबीन का ज्यादा सेवन टेस्टोस्टेरोन को कम कर सकता है।
  • पैकेट बंद जंक फूड: यह जठराग्नि को बुझा देते हैं। यह गंभीर पाचन संबंधी समस्याएं पैदा करते हैं।

जीवा आयुर्वेद में हम मरीजों की जांच कैसे करते हैं?

  • नाड़ी परीक्षा: पल्स चेक करके यह समझना कि आपके अंदर कौन सा दोष (वात, पित्त या कफ) वीर्य बनने में रुकावट डाल रहा है।
  • सीमेन रिपोर्ट का विश्लेषण: आपकी पुरानी रिपोर्ट्स को बहुत बारीकी से समझना।
  • लाइफस्टाइल रिव्यू: आपके काम के घंटे, तनाव और खाने की आदतों को गहराई से परखना।
  • मूल कारण की पहचान: यह तय करना कि समस्या स्ट्रेस की वजह से है या शरीर में धातु पोषण की भारी कमी हो गई है।

हमारे यहाँ इलाज का सफर

  • संपर्क करें: सीधे 0129 4264323 पर कॉल करें। हमारे विशेषज्ञ आपसे बात करेंगे।
  • अपॉइंटमेंट फिक्स करें: आप हमारे 80+ क्लिनिक में आ सकते हैं।
  • ऑनलाइन वीडियो कंसल्टेशन: घर बैठे वीडियो कॉल से सिर्फ 49 रुपये में बात करें। शर्मिंदगी महसूस करने की कोई जरूरत नहीं है।
  • विस्तृत जांच: आपकी पूरी मेडिकल हिस्ट्री बहुत ध्यान से सुनी जाती है।
  • व्यक्तिगत प्लान: आपके लिए खास जड़ी-बूटियों, डाइट और तनाव से राहत का एक पूरा रूटीन तैयार किया जाता है।

ठीक होने में लगने वाला समय

  • शुरुआती कुछ हफ्ते: आपकी नींद बेहतर होगी। शरीर से थकान और भारीपन बिल्कुल खत्म हो जाएगी।
  • पहले से तीसरे महीने तक: स्पर्म बनने में लगभग 72 से 90 दिन लगते हैं। इसलिए अंदरूनी सफाई और नई कोशिकाओं के बनने की प्रक्रिया इसी समय शुरू होती है।
  • तीसरे से छठे महीने तक: अगर आप सही डाइट लेते हैं और वजन कम होना सुनिश्चित करते हैं, तो आपकी नई सीमेन रिपोर्ट में स्पर्म काउंट और गति में बहुत शानदार उछाल देखने को मिलता है।

आप किन परिणामों की उम्मीद कर सकते हैं?

  • स्पर्म की गिनती में प्राकृतिक और स्थायी वृद्धि।
  • स्पर्म की गति (Motility) का तेज होना।
  • शरीर में एक नई ऊर्जा और स्टेमिना का आना।
  • मानसिक तनाव का बिल्कुल खत्म होना।
  • बिना आईवीएफ के प्राकृतिक प्रेगनेंसी की पूरी संभावना का तैयार होना।

मरीजों के अनुभव

बिना प्रिस्क्रिप्शन मिलने वाले परफॉर्मेंस बढ़ाने वाले उत्पादों पर पैसा खर्च करना मेरे लिए पूरी तरह बेकार साबित हुआ। जिवा के डॉक्टर से परामर्श लेना एक साधारण फोन कॉल जितना आसान था—मुझे किसी से व्यक्तिगत रूप से मिलने की ज़रूरत नहीं पड़ी, जो बहुत सुविधाजनक था। दवाइयाँ वास्तव में बहुत सहायक रहीं और मैंने पूरा उपचार कोर्स पूरा किया, जिससे मुझे काफी लाभ मिला। मेरी मदद करने के लिए धन्यवाद, जिवा आयुर्वेद।

रवि

फरीदाबाद

जीवा आयुर्वेद में इलाज का अनुमानित खर्च

आपके स्वास्थ्य के लिए आवश्यक आर्थिक निवेश को समझना महत्वपूर्ण है। जीवा आयुर्वेद में, हम अपनी सेवाओं के खर्च में पूरी पारदर्शिता रखते हैं, जिससे आप अपनी चिकित्सीय जरूरतों के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प चुन सकें।

इलाज का खर्च

जो मरीज मानक और निरंतर देखभाल चाहते हैं, उनके लिए दवा और परामर्श का मासिक खर्च आमतौर पर Rs.3,000 से Rs.3,500 के बीच होता है। कृपया ध्यान दें कि यह एक अनुमानित आधार है। अंतिम खर्च मरीज की स्थिति की सटीक प्रकृति और गंभीरता पर निर्भर करता है।

प्रोटोकॉल

अधिक व्यापक और व्यवस्थित दृष्टिकोण के लिए, हम विशेष पैकेज प्रोटोकॉल प्रदान करते हैं। ये योजनाएं शारीरिक लक्षणों और समग्र जीवनशैली सुधार दोनों को संबोधित करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।

पैकेज में शामिल हैं:

  • दवा
  • परामर्श
  • मानसिक स्वास्थ्य सत्र
  • योग और ध्यान मार्गदर्शन
  • आहार योजना
  • थेरेपी

इस प्रोटोकॉल के खर्च में Rs.15,000 से Rs.40,000 तक का एकमुश्त भुगतान शामिल है, जो इलाज की पूरी 3 से 4 महीने की अवधि को कवर करता है।

जीवाग्राम

गहन और पूरी तरह से समर्पित देखभाल की आवश्यकता वाले मरीजों के लिए, हमारे जीवाग्राम केंद्र उपचार का बेहतरीन अनुभव प्रदान करते हैं। जीवाग्राम एक शांत, पर्यावरण के अनुकूल माहौल में स्थित एक समग्र स्वास्थ्य केंद्र है।

कार्यक्रम में आमतौर पर शामिल हैं:

  • प्रामाणिक पंचकर्म चिकित्सा
  • सात्विक भोजन
  • आधुनिक उपचार सेवाएं
  • आरामदायक आवास
  • जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने वाली कई अन्य सुविधाएं

जीवाग्राम में 7-दिनों के स्वास्थ्य प्रवास का खर्च लगभग Rs.1 लाख है, जो आपके शरीर और दिमाग को फिर से तरोताजा करने में मदद करने के लिए निरंतर व्यक्तिगत देखभाल सुनिश्चित करता है।

मरीज जीवा आयुर्वेद पर भरोसा क्यों करते हैं?

  • जड़ से इलाज: हम सिर्फ एक सप्लीमेंट नहीं देते। हम आपकी पूरी पाचन और हार्मोन प्रणाली को ठीक करते हैं।
  • विशेषज्ञ डॉक्टर: हमारे पास पुरुष बांझपन के इलाज में सालों का अनुभव रखने वाले डॉक्टर हैं।
  • पूरी प्राइवेसी: हम आपकी परेशानी को समझते हैं और पूरी प्राइवेसी के साथ बहुत सम्मानजनक तरीके से इलाज करते हैं।
  • प्राकृतिक समाधान: कृत्रिम हार्मोन्स के बिना, पूरी तरह प्राकृतिक रूप से शरीर की क्षमता को वापस लाना।

आधुनिक बनाम आयुर्वेदिक दृष्टिकोण

  • आधुनिक चिकित्सा: वे अक्सर कहते हैं कि कुछ नहीं हो सकता। वे आपको सीधे डोनर स्पर्म या आईवीएफ जैसे खर्चीले और मानसिक रूप से थका देने वाले रास्तों पर भेज देते हैं।
  • आयुर्वेद: यह शरीर को खुद को ठीक करने का मौका देता है। आयुर्वेद मानता है कि सही जड़ी-बूटियों, रसायन चिकित्सा और साफ पेट से शुक्र धातु को फिर से नया और ताकतवर बनाया जा सकता है।

डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

यदि आपको इनमे से कोई परेशानी हो रही हो तो डॉक्टर को तुरंत संपर्क करें:

  • अगर आप अपनी पत्नी के साथ एक साल से बिना प्रोटेक्शन के प्रेगनेंसी की कोशिश कर रहे हैं और सफलता नहीं मिल रही।
  • अगर सेक्स के दौरान आपको इरेक्शन में बहुत ज्यादा दिक्कत आने लगी है।
  • अगर अंडकोष में किसी तरह की गांठ या सूजन महसूस हो रही हो।
  • अगर काम की वजह से आपका स्ट्रेस लेवल इतना बढ़ गया है कि आपका सेक्स से बिल्कुल मन उठ गया है।

निष्कर्ष

स्पर्म काउंट का कम होना कोई श्राप या जीवनभर की सजा नहीं है। यह बस आपके शरीर का अलार्म है जो कह रहा है कि आपका लाइफस्टाइल, तनाव और खान-पान उसे अंदर से सूखा रहा है। घबराने या सीधे कृत्रिम गर्भधारण की तरफ भागने के बजाय, अपने शरीर को आयुर्वेद की प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से सींचें। अश्वगंधा और घी को अपने जीवन में शामिल करें। तनाव को पीछे छोड़ें। जीवा आयुर्वेद से आज ही संपर्क करें और प्राकृतिक रूप से पिता बनने के सुख को प्राप्त करें। आपकी समस्या का समाधान बिल्कुल संभव है।

FAQs

बिल्कुल। अगर समस्या किसी जेनेटिक ब्लॉकेज की वजह से नहीं है। तो आयुर्वेद की सही डाइट, रसायन जड़ी-बूटियों और लाइफस्टाइल बदलाव से इसे प्राकृतिक रूप से बहुत आसानी से बढ़ाया जा सकता है।

मोटिलिटी का मतलब है स्पर्म की गति। अगर वे सुस्त हैं और आगे नहीं तैर पाते। तो वे कभी भी महिला के अंडे तक पहुंचकर उसे फर्टिलाइज नहीं कर पाएंगे।

हां। अंडकोष शरीर के बाहर इसलिए होते हैं ताकि उनका तापमान शरीर से थोड़ा कम रहे। लैपटॉप की भारी गर्मी या बहुत टाइट पैंट पहनने से उनका तापमान बढ़ जाता है, जिससे स्पर्म मर जाते हैं।

अश्वगंधा और सफेद मूसली। अश्वगंधा स्ट्रेस को मारता है और सफेद मूसली सीधे वीर्य को गाढ़ा करके स्पर्म की संख्या को तेजी से बढ़ाती है।

सौ प्रतिशत। स्ट्रेस लेने से शरीर में कॉर्टिसोल बढ़ता है जो टेस्टोस्टेरोन हार्मोन को बनने से रोक देता है। टेस्टोस्टेरोन के बिना स्पर्म का निर्माण पूरी तरह से रुक जाता है।

बहुत बड़ा सुधार होगा। शराब और निकोटीन स्पर्म के आकार को खराब करते हैं और उनका डीएनए डैमेज करते हैं। इन्हें छोड़ते ही कुछ हफ्तों में क्वालिटी सुधरने लगती है।

एक स्पर्म को बनने और पूरी तरह परिपक्व होने में लगभग 72 से 90 दिन का समय लगता है। इसलिए किसी भी आयुर्वेदिक इलाज का पूरा असर दिखने में 3 महीने लगते हैं।

आयुर्वेद के अनुसार पाचन ही सब कुछ है। जो आप खाते हैं, वह पचकर रस, रक्त और अंत में शुक्र (वीर्य) बनता है। हाजमा खराब होगा तो शुक्र धातु तक पोषण कभी नहीं पहुंचेगा।

बिल्कुल। पेट की ज्यादा चर्बी टेस्टोस्टेरोन को फीमेल हार्मोन (एस्ट्रोजन) में बदलने लगती है। इससे स्पर्म बनना रुक जाता है। वजन कम करना फर्टिलिटी के लिए बहुत जरूरी है।

रोजाना सेक्स करने से वीर्य में स्पर्म का कंसंट्रेशन थोड़ा कम हो सकता है। प्रेगनेंसी के लिए डॉक्टर अक्सर ओव्यूलेशन के दिनों में एक दिन छोड़कर संबंध बनाने की सलाह देते हैं ताकि स्पर्म जमा हो सकें।

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