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मॉनसून में सुबह भूख कम लेकिन शाम को चटपटा खाने की craving ज्यादा क्यों हो जाती है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

बारिश का मौसम आते ही हमारी खाने-पीने की आदतों में  बदलाव देखने को मिलता है। आपने भी गौर किया होगा कि सावन भादों की सुबह में उठने के बाद कुछ भी भारी खाने का मन नहीं करता भूख एकदम गायब सी रहती है। लेकिन जैसे जैसे दिन ढलने लगता है और शाम की ठंडी हवाएं चलती हैं, वैसे ही अचानक समोसे, पकोड़े या तीखी चाट जैसी चटपटी चीज़ें खाने का मन करने लगता है। आखिर ऐसा क्यों होता है? क्या यह महज़ मौसम का सुहानापन है, या इसके पीछे हमारे शरीर का कोई गहरा विज्ञान और हार्मोनल बदलाव छिपा है? आइए समझते हैं। 

मॉनसून में सुबह भूख कम क्यों लगती है?

मॉनसून में सुबह भूख कम लगने की वजह हमारे धीमे मेटाबॉलिज़्म और मौसम की नमी है। बारिश के दिनों में हवा में बहुत ज़्यादा नमी होने के कारण हमारी पाचन शक्ति बहुत सुस्त पड़ जाती है जिसे आयुर्वेद में मंद अग्नि भी कहा जाता है।

इसके अतिरिक्त, सुबह धूप न निकलने और बादल छाए रहने से शरीर में प्राकृतिक रूप से सुस्ती बनी रहती है। रात भर के आराम के बाद जब पाचन तंत्र पहले से ही धीमा होता है तो ऐसे ठंडे मौसम में शरीर ज़्यादा भोजन पचाने के लिए तैयार नहीं हो पाता। यही मुख्य कारण है कि सुबह उठते ही हमें भूख नहीं लगती है। 

सुबह पेट भारी क्यों महसूस होता है?

सुबह उठने पर पेट भारी महसूस होने की कई वजहें होती हैं। सबसे बड़ी  वजह रात में देर से या बहुत भारी भोजन करना है। सोते समय हमारा पाचन तंत्र काफी धीमा काम करता है, जिससे खाना पूरी तरह पच नहीं पाता। इसके अलावा, रात में पानी कम पीने या खाने के तुरंत बाद सो जाने से पेट में गैस और एसिडिटी बनने लगती है। यही अपच और रुकी हुई गैस सुबह पेट में भारीपन, सूजन पैदा करती है।

बारिश में पाचन धीमा क्यों हो सकता है?

बारिश के मौसम में पाचन तंत्र धीमा होने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  • अत्यधिक नमी: हवा में भारी नमी होने से शरीर का मेटाबॉलिज़्म सुस्त पड़ जाता है, जिससे खाना देरी से पचता है।
  • कमज़ोर पाचन: आयुर्वेद के अनुसार, मॉनसून में शरीर की पाचन अग्नि कमज़ोर हो जाती है और वात दोष बढ़ जाता है, जिससे अपच होती है।
  • कम शारीरिक गतिविधि: बारिश के कारण बाहर निकलना या टहलना कम हो जाता है। व्यायाम की इस कमी से पाचन तंत्र भी सुस्त हो जाता है।
  • बैक्टीरिया का प्रभाव: नमी में बैक्टीरिया जल्दी पनपते हैं, जो आंतों के सामान्य को धीमा कर देते हैं।

शाम को चटपटा खाने का मन क्यों करता है?

शाम के समय चटपटा खाने का मन करता है, इसके पीछे हमारे हार्मोन और मौसम का गहरा प्रभाव होता है:

  • तापमान में कमी: शाम ढलते ही मौसम में ठंडक आती है। ऐसे में शरीर गर्माहट के लिए तीखे भोजन की मांग करता है।
  • हार्मोनल बदलाव: दिनभर की थकान से सेरोटोनिन कम हो जाता है। चटपटा खाने से डोपामिन रिलीज़ होता है।  
  • मानसिक जुड़ाव: बारिश की शाम और चाय-पकोड़े का संबंध भी इस क्रेविंग को बढ़ाता है।

आयुर्वेदिक नज़रिया क्या है?

आयुर्वेद के नज़रिए से मॉनसून में हमारे शरीर का पाचन तंत्र बहुत धीमा या कमज़ोर पड़ जाता है। इस मौसम में वात दोष बढ़ जाता है और पित्त का संचय होने लगता है। सुबह के समय वातावरण में कफ का प्रभाव अधिक होता है, जिससे शरीर में भारीपन और सुस्ती रहती है। इसी कारण जठराग्नि सुस्त होने से सुबह भूख बिल्कुल नहीं लगती। वहीं, जैसे-जैसे शाम होती है, वात दोष का प्रभाव होने लगता है। इस बढ़े हुए वात को शांत करने और ठंडे मौसम में शरीर को अंदर से गर्माहट देने के लिए हमारा शरीर स्वाभाविक रूप से तीखे, नमकीन और चटपटे खाने की चीज़ों की मांग करने लगता है।

मॉनसून में क्या खाना बेहतर रहता है?

मॉनसून में पाचन तंत्र काफी कमज़ोर होता है, इसलिए हल्का और अच्छा भोजन करना सबसे बेहतर रहता है:

  • हल्का भोजन: खिचड़ी, दलिया, ओट्स और मूंग दाल जैसी आसानी से पचने वाली चीज़ें खाएं।
  • रोग प्रतिरोधक मसाले: भोजन में अदरक, लहसुन, हल्दी, काली मिर्च, लौंग और जीरा का उपयोग करें। यह इम्यूनिटी बढ़ाते हैं।
  • गर्म और ताज़ा खाना: हमेशा ताज़ा और गर्म भोजन ही करें। सब्ज़ियों के गर्म सूप और हर्बल चाय का सेवन बहुत फायदेमंद है।
  • मौसमी फल: सेब, अनार और पपीता खाएं, लेकिन बाहर के कटे फल बिल्कुल न खाएं।
  • उबला पानी: संक्रमण से बचने के लिए पानी उबालकर ही पिएं।
  • पत्तेदार सब्ज़ियों से बचें: बारिश में इनमें कीड़े और बैक्टीरिया पनपते हैं, इनसे परहेज़ करें।

सुबह भूख बढ़ाने के आसान तरीके क्या हैं?

सुबह की भूख बढ़ाने और सुस्त पाचन तंत्र को सक्रिय करने के लिए आप ये आसान तरीके अपना सकते हैं:

  • रात का हल्का खाना: रात का भोजन सोने से कम से कम 2 घंटे पहले लें और बिल्कुल हल्का खाएं।
  • गुनगुना पानी: सुबह उठते ही एक गिलास गुनगुने पानी में नींबू या थोड़ा अदरक का रस मिलाकर पिएं। इससे पाचन तंत्र सक्रिय होता है।
  • शारीरिक व्यायाम: सुबह थोड़ी स्ट्रेचिंग, योग या हल्की सैर करें। यह मेटाबॉलिज्म तेज़ करके भूखबढ़ता है।
  • देर रात स्नैकिंग: रात में कुछ भी भारी खाने से बचें ताकि सुबह पेट अच्छे से साफ हो।

शाम की craving को कैसे  कंट्रोल करें?

शाम की क्रेविंग को आसानी से कंट्रोल करने के लिए आप ये तरीके अपना सकते हैं:

  • हेल्दी स्नैक्स: तली-भुनी चीज़ों की जगह भुने हुए मखाने, चना, या मुरमुरा खाएं। ये टेस्टी भी होते हैं और सेहत को नुकसान भी नहीं पहुंचाते।
  • हाइड्रेटेड रहें: कई बार शरीर प्यास को भूख समझ लेता है। क्रेविंग होने पर सबसे पहले एक गिलास पानी, ग्रीन टी या हर्बल चाय पिएं।
  • अच्छा लंच: दोपहर का भोजन प्रोटीन और फाइबर से भरपूर रखें, ताकि शाम को अचानक तेज़ भूख न लगे।
  • ध्यान भटकाएं: लालसा होने पर थोड़ा टहल लें या खुद को किसी दूसरे काम में व्यस्त कर लें।

डॉक्टर से कब मिलें?

बारिश के मौसम में हल्की थकान या भूख कम लगना आम है, लेकिन कुछ लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें:

  • उल्टी और दस्त: लगातार उल्टी या दस्त होना, जिससे शरीर में पानी की कमी  का खतरा हो।
  • तेज़ दर्द: पेट में बहुत ज़्यादा दर्द, मरोड़ या भारी सूजन का लगातार बना रहना।
  • बुखार: पेट खराब होने के साथ तेज़ बुखार आना, जो किसी संक्रमण का संकेत हो सकता है।
  • कमज़ोरी: कई दिनों तक भूख बिल्कुल न लगे और चक्कर या अत्यधिक कमज़ोरी महसूस हो।

निष्कर्ष:

बारिश का मौसम अच्छा ज़रूर होता है, लेकिन यह हमारी पाचन शक्ति को slow कर देता है। सुबह भूख न लगना और शाम को चटपटा खाने का मन करना, शरीर की प्राकृतिक और हार्मोनल प्रतिक्रिया है। मॉनसून का आनंद लेने के लिए इस शारीरिक बदलाव को समझना ज़रूरी है। सुबह हल्का और गर्म भोजन करें, शाम को हेल्दी स्नैक्स से शांत करें और शारीरिक रूप से सक्रिय रहें। 

References:

https://www.healthline.com/nutrition/craving-spicy-food

https://www.healthians.com/blog/healthy-foods-for-rain/

https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC10078540/

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

हवा में नमी के कारण मेटाबॉलिज्म सुस्त हो जाता है, जिससे शरीर तुरंत भारी भोजन पचाने के लिए तैयार नहीं रहता।

हां, नमी और शारीरिक सुस्ती के कारण हमारी पाचन अग्नि कमजोर हो जाती है, जिससे खाना देर से पचता है।

शाम को मौसम ठंडा होने पर शरीर गर्माहट चाहता है और थकान मिटाने के लिए हमारा दिमाग चटपटे स्वाद की मांग करता है।

नमी के कारण पत्तों में कीड़े और बैक्टीरिया बहुत तेज़ी से पनपते हैं, जिनसे पेट में इन्फेक्शन का खतरा अधिक रहता है।

समोसे पकोड़े की जगह भुने हुए मखाने, चने या रोस्टेड पीनट्स खाएं, जो सेहतमंद भी हैं और क्रेविंग को शांत करते हैं।

हाँ, खुले खाने और कटे हुए फलों में बैक्टीरिया जल्दी पनपते हैं, इसलिए घर का बना ताज़ा और गर्म भोजन ही सबसे सेफ है।

रात का खाना सोने से दो घंटे पहले और एकदम हल्का लें, ताकि वह रात में ही पच जाए और सुबह खुलकर भूख लगे।

एक गिलास गुनगुने पानी में थोड़ी अजवाइन या काला नमक मिलाकर पिएं और हल्का वॉक करें, जिससे तुरंत आराम मिलेगा।

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