गर्मियों में बारिश के बाद जब उमस बढ़ जाती है, तो आपने गौर किया होगा कि रोज़ पहनने वाली अंगूठी टाइट होने लगती है और जूते पैरों में चुभने लगते हैं। लगता है जैसे हाथ पैर रातों रात मोटे हो गए हों। यह कोई अचानक बढ़ा हुआ मोटापा नहीं है। उमस भरे चिपचिपे मौसम में शरीर अपना तापमान संतुलित करने के लिए कुछ अंदरूनी बदलाव करता है। इसका सीधा असर हमारी नसों और त्वचा पर दिखता है।
उमस में अंगूठी और जूते टाइट क्यों लगते हैं?
उमस वाले मौसम में अंगूठी और जूतों के अचानक टाइट होने का मुख्य कारण वाटर रिटेंशन यानी शरीर में पानी का जमा होना है। जब बाहर बहुत गर्मी और नमी होती है, तो शरीर खुद को ठंडा रखने के लिए खून को स्किन की ऊपरी सतह की तरफ धकेलता है। इस प्रक्रिया में रक्त खून की नसें फैल जाती हैं। नसें फैलने से खून का कुछ तरल हिस्सा रिसकर आसपास के टिश्यू में जमा होने लगता है। इसी तरल पदार्थ के जमा होने से हाथ-पैरों में हल्की सूजन आ जाती है, जिससे चीज़ें टाइट लगने लगती हैं।
गर्मी और नमी का शरीर पर क्या असर होता है?
गर्मी और नमी में पसीना जल्दी सूखता नहीं है, जिससे शरीर ठंडा नहीं हो पाता। इस चिपचिपे मौसम में हमारे शरीर का कूलिंग सिस्टम ओवरलोड हो जाता है। खुद को ठंडा रखने में, शरीर स्किन की नसों को फैला देता है ताकि गर्मी बाहर निकल सके। लेकिन नमी के कारण ऐसा ठीक से हो नहीं पाता। शरीर के निचले हिस्सों, जैसे पैरों और हाथों में तरल पदार्थ इकट्ठा होने लगता है और भारीपन आ जाता है।
एक्सपर्ट्स की राय
हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार उमस में हाथ पैरों में होने वाली इस हल्की सूजन को हीट एडिमा कहा जाता है। डॉक्टरों का मानना है कि यह कोई बड़ी बीमारी नहीं है, बल्कि गर्मी के प्रति शरीर की एक सामान्य प्रतिक्रिया है। जब हम ज़्यादा देर तक गर्मी में खड़े रहते हैं या बैठते हैं, तो गुरुत्वाकर्षण के कारण तरल पदार्थ नीचे की तरफ जमा हो जाता है। आराम करने और ठंडी जगह पर जाने से यह अपने आप ठीक हो जाता है।
जूते पहनने में परेशानी क्यों होती है?
पैरों में सूजन की वजह से ही जूते पहनने में सबसे ज़्यादा दिक्कत आती है। हमारा शरीर गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में रहता है इसलिए जब नसों से तरल पदार्थ रिसता है तो वह सबसे पहले और सबसे ज़्यादा पैरों के पंजों और टखनों के आसपास ही इकट्ठा होता है। सुबह के वक्त तो पैर ठीक लगते हैं, लेकिन जैसे जैसे दिन चढ़ता है और आप चलते फिरते या खड़े रहते हैं, यह फ्लूइड नीचे जमा होता जाता है। इसी सूजन के कारण आपके रेगुलर जूते शाम तक टाइट हो जाते हैं।
क्या नमक ज़्यादा खाने से सूजन बढ़ सकती है?
खाने में नमक की मात्रा ज्यादा होना शरीर में सूजन का एक बहुत बड़ा कारण है। नमक का काम पानी को सोखना और रोक कर रखना होता है। जब आप चिपचिपे मौसम में ज़्यादा नमकीन चीज़ें जंक फूड या पैकेट वाले स्नैक्स खाते हैं, तो शरीर में ज़रूरत से ज़्यादा सोडियम जमा हो जाता है। इसके जवाब में शरीर पानी को बाहर निकालने के बजाय अंदर ही रोक लेता है ताकि सोडियम का संतुलन बना रहे। इसी वजह से हाथ पैरों की सूजन और भी बढ़ जाती है।
ज़्यादा टाइम तक बैठने का क्या असर होता है?
लगातार एक ही जगह पर बैठे रहने से शरीर पर काफी बुरा असर पड़ता है:
- खून का बहाव रुकना: लंबे समय तक कुर्सी पर पैर लटकाकर बैठने से पैरों में ब्लड सर्कुलेशन धीमा हो जाता है।
- तरल का जमाव: मांसपेशियों की कोई हरकत न होने के कारण तरल पदार्थ ऊपर नहीं जा पाता और टखनों में जमा होने लगता है।
- सूजन का बढ़ना: डेस्क जॉब वालों में उमस के मौसम में यह समस्या दोगुनी हो जाती है, जिससे शाम तक जूते भी टाइट होने लगते हैं।
पानी कम पीने से सूजन क्यों हो सकती है?
पानी कम पीने से शरीर में पानी जमा होने लगता है जब आप उमस में कम पानी पीते हैं, तो शरीर को लगता है कि उसे सूखे का सामना करना पड़ रहा है। इस खतरे से बचने के लिए शरीर का डिफेन्स सिस्टम एक्टिव हो जाता है और वह हर एक बूंद पानी को बचाकर रखने लगता है। यही रुका हुआ पानी टिश्यू में जमा होकर सूजन पैदा करता है। इसलिए सूजन कम करने के लिए पर्याप्त पानी पीना ज़रूरी है।
उमस में वज़न थोड़ा बढ़ा हुआ क्यों लग सकता है?
चिपचिपे मौसम में मशीन पर चढ़ने पर वजन 1-2 किलो ज़्यादा दिखना आम है:
- पानी का भार: यह बढ़ा हुआ वज़न असल में फैट नहीं, बल्कि नसों और टिश्यू के बीच रुका हुआ वाटर वेट होता है।
- नमक का असर: उमस में चटपटा खाने से सोडियम बढ़ता है, जो शरीर में एक्स्ट्रा पानी रोक लेता है, जिससे मशीन पर वज़न ज़्यादा दिखता है।
- अस्थायी बदलाव: जैसे ही मौसम ठीक होता है या आप पसीना बहाते हैं, यह रुका हुआ पानी यूरिन के रास्ते निकल जाता है और वज़न वापस सही हो जाता है।
सूजन कम करने के लिए क्या करें?
हाथ पैर की इस चिपचिपी सूजन को आसानी से कम करने के लिए आप ये उपाय अपना सकते हैं:
- पैरों को ऊपर रखें: लेटते समय पैरों के नीचे एक या दो तकिए लगा लें। इससे अटका हुआ पानी वापस दिल की तरफ लौट आता है।
- सक्रिय रहें: एक ही जगह बैठे न रहें। हर एक घंटे में उठकर थोड़ा चलें ताकि ब्लड सर्कुलेशन ठीक से काम करता रहे।
- ठंडी सिकाई: ठंडे पानी या बर्फ के पैक से सिंकाई करने से फैली हुई नसें सिकुड़ जाती हैं और सूजन तुरंत कम होने लगती है।
खान-पान में किन बातों का ध्यान रखें?
सूजन से बचने के लिए अपनी रोज़मर्रा की डाइट में ये छोटे बदलाव ज़रूर करें:
- नमक कम करें: चिप्स, पापड़, अचार और पैक्ड फूड से दूर रहें। इनमें मौजूद सोडियम सूजन बढ़ाता है।
- पोटैशियम बढ़ाएँ: केला, पालक और नारियल पानी पिएं। पोटैशियम शरीर से एक्स्ट्रा नमक और पानी बाहर निकालता है।
- खूब पानी पिएं: दिन भर में कम से कम 8-10 गिलास पानी पिएं। शरीर जितना हाइड्रेटेड रहेगा, वाटर रिटेंशन उतना ही कम होगा।
डॉक्टर से कब मिलें?
- सूजन सिर्फ एक हाथ या पैर में हो।
- अंगुली या पैर दबाने पर गड्ढा बन जाए।
- सूजन के साथ दर्द, लालिमा या साँस लेने में परेशानी हो।
- सूजन आराम करने के बाद भी कम न हो।
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निष्कर्ष:
उमस भरे मौसम में अंगूठी और जूतों का अचानक टाइट हो जाना कोई घबराने वाली बात नहीं है। यह बस हमारे शरीर का गर्मी से निपटने का एक तरीका है। नमक कम खाकर खूब पानी पीकर और अपने पैरों को थोड़ा आराम देकर आप इस हीट एडिमा से आसानी से बच सकते हैं। बस अपने शरीर के इशारों को समझें और अगर कुछ भी असामान्य लगे, तो डॉक्टर से पूछने में बिल्कुल भी संकोच न करें।
References:
https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC10231239/
https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/6681754/
https://www.healthdirect.gov.au/excessive-sweating-hyperhidrosis





























