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Lower Back Pain जो सुबह सबसे ज़्यादा होता है - क्या यह Spondylitis है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

सुबह-सुबह जब अलार्म बजता है, तो इंसान एक नई ऊर्जा के साथ बिस्तर छोड़ना चाहता है। लेकिन कल्पना कीजिए उस कसक की, जब आंख खुलते ही पैर जमीन पर रखने से पहले आपकी पीठ का निचला हिस्सा (Lower Back) लोहे की तरह जकड़ा हुआ महसूस हो। ऐसा लगे जैसे किसी ने रीढ़ की हड्डी को सीमेंट से जमा दिया हो।

आप करवट बदलने की कोशिश करते हैं, तो कमर में एक तीखी सुई जैसी चुभन होती है। अजीब बात यह है कि जैसे-जैसे आप बिस्तर से उठकर थोड़ा टहलते हैं, गर्म पानी से नहाते हैं या ऑफिस के काम के लिए थोड़ी हलचल शुरू करते हैं, यह दर्द धीरे-धीरे कम होने लगता है। शाम होते-होते आप लगभग सामान्य हो जाते हैं। लेकिन अगली सुबह... कहानी फिर वही होती है।

सुबह उठते ही कमर में दर्द क्यों होता है? 

जब आम तौर पर लोगों को कमर में दर्द होता है, तो वह दिनभर की थकान, भारी सामान उठाने या लगातार कुर्सी पर बैठने के बाद शाम को बढ़ता है। आराम करने पर वह दर्द ठीक हो जाता है। लेकिन स्पॉन्डिलाइटिस के मामले में गणित पूरी तरह उलटा बैठता है। यहाँ आराम ही आपका सबसे बड़ा दुश्मन बन जाता है।

जब आप रात को सो रहे होते हैं, तो आपकी रीढ़ की हड्डी पूरी तरह स्थिर होती है। इस स्थिरता के कारण जोड़ों के अंदर सूजन पैदा करने वाले तत्व एक जगह जमा होने लगते हैं। आयुर्वेद से समझें, तो रात की शीतलता और गतिहीनता के कारण शरीर में कफ और वात दोष नसों के भीतर जम जाते हैं। यही कारण है कि सुबह के समय जकड़न अपने चरम पर होती है।

स्पॉन्डिलाइटिस क्या है और यह रीढ़ को कैसे 'बांस' बनाता है? 

आसान शब्दों में कहें, तो स्पॉन्डिलाइटिस रीढ़ की हड्डी के जोड़ों में होने वाली एक गंभीर सूजन है। हमारी रीढ़ कई छोटी-छोटी हड्डियों से मिलकर बनी है, जो आपस में लचीले जोड़ों से जुड़ी होती हैं। जब शरीर का अपना इम्यून सिस्टम भ्रमित होकर इन जोड़ों पर ही हमला करने लगता है, तो वहाँ पुरानी सूजन पैदा हो जाती है।

यदि इस सूजन का समय रहते इलाज न किया जाए, तो शरीर उस सूजन को ठीक करने के प्रयास में जोड़ों के आस-पास अतिरिक्त नई हड्डी बनाने लगता है। धीरे-धीरे, रीढ़ की ये छोटी-छोटी कड़ियाँ आपस में जुड़ने या 'फ्यूज' होने लगती हैं। एक स्थिति ऐसी आती है जब रीढ़ का लचीलापन पूरी तरह खत्म हो जाता है और वह बांस की लकड़ी की तरह सख्त हो जाती है, जिसे मेडिकल भाषा में 'बैम्बू स्पाइन' (Bamboo Spine) कहते हैं।

किन संकेतों पर ध्यान देना चाहिए?

हर कमर दर्द चिंता की बात नहीं होता, लेकिन कुछ संकेत ऐसे हैं जिन्हें नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।

  • सुबह उठने के बाद कमर में जकड़न महसूस होना
  • दर्द का कई महीनों तक बना रहना
  • लंबे समय तक बैठने के बाद दर्द बढ़ जाना
  • हल्की गतिविधि या चलने-फिरने पर दर्द का कम होना
  • रात के दूसरे हिस्से में दर्द की वजह से नींद खुलना

अगर इनमें से कई लक्षण एक साथ दिखाई दें, तो सही सलाह लेना बेहतर हो सकता है।

स्पॉन्डिलाइटिस का खतरा किन लोगों को सबसे ज़्यादा है?

यह कोई बुजुर्गों की बीमारी नहीं है; इसका दर्द अक्सर 15 से 45 साल की कम उम्र के लोगों में ही शुरू हो जाता है। अगर आपको बिना किसी चोट के, लगातार 3 महीने या उससे ज़्यादा समय से कमर और कूल्हों में ऐसा दर्द बना हुआ है जो लेटने या आराम करने पर कम होने के बजाय और बढ़ जाता है, तो यह स्पॉन्डिलाइटिस का शुरुआती संकेत हो सकता है। सुबह उठते ही पीठ में भयंकर जकड़न महसूस होना इसका सबसे बड़ा लक्षण है।

इसका जोखिम उन लोगों में सबसे ज़्यादा देखा जाता है जिनके परिवार में पहले से ही किसी को गठिया या रीढ़ की हड्डी की समस्या रही हो। इसके अलावा, जो लोग दफ्तर में घंटों बिना ब्रेक लिए एक ही कुर्सी पर बैठे रहते हैं, उनकी रीढ़ पर इसका असर जल्दी होता है।  

रोज़मर्रा की 5 आदतें जो इस दर्द को बढ़ा रही हैं

अगर आप दवाओं के साथ इन आदतों को नहीं बदलेंगे, तो आराम मिलना मुश्किल है:

  • सुबह उठने के बाद हल्की स्ट्रेचिंग करना
  • लंबे समय तक लगातार बैठने से बचना
  • रोज़ थोड़ी शारीरिक गतिविधि बनाए रखना
  • पर्याप्त और अच्छी नींद लेना
  • वजन को संतुलित रखने की कोशिश करना
  • शरीर को ज़रूरत से ज़्यादा ठंड के संपर्क में न रखना

ये उपाय हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग स्तर पर लाभकारी हो सकते हैं।

क्या सामान्य कमर दर्द और Spondylitis के दर्द में अंतर होता है?

सामान्य कमर दर्द अक्सर अधिक मेहनत करने, गलत तरीके से वजन उठाने या लंबे समय तक एक ही स्थिति में रहने के बाद महसूस हो सकता है। ऐसे मामलों में आराम करने से दर्द कम होने लगता है।

वहीं कुछ लोगों में Spondylitis से जुड़ा दर्द सुबह अधिक महसूस हो सकता है और हल्की गतिविधि करने के बाद राहत मिलने लगती है। हालांकि केवल दर्द के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुँचना सही नहीं है। सही कारण जानने के लिए विशेषज्ञ की सलाह लेना आवश्यक हो सकता है।

आयुर्वेद इस समस्या को कैसे देखता है?

आपने भी अक्सर ध्यान दिया होगा कि कई लोगों की कमर का दर्द पूरे दिन एक जैसा नहीं रहता। सुबह आँख खुलते ही ऐसा लगता है मानो पूरी पीठ लोहे की तरह अकड़ गई हो और बिस्तर से उठना भी एक आफ़त लगे। मगर जैसे-जैसे दिन चढ़ता है, थोड़ा बहुत उठना-बैठना और चलना-फिरना शुरू होता है, तो शरीर धीरे-धीरे खुलने लगता है और दर्द में थोड़ी राहत मिल जाती है। आयुर्वेद के नज़रिए से देखें तो इस तरह की कंडीशन का सीधा कनेक्शन हमारे शरीर के भीतर भड़के हुए 'वात दोष' से होता है।

जब शरीर में वात की मात्रा ज़रूरत से ज़्यादा बढ़ जाती है, तो वह अंदरूनी हिस्सों में एक अजीब सा रूखापन और जकड़न पैदा करने लगता है। इसका सबसे पहला और सीधा असर हमारी कमर के निचले हिस्से, रीढ़ की हड्डी और जोड़ों पर दिखाई देता है। यही वजह है कि आयुर्वेद कभी भी सिर्फ ऊपर-ऊपर से दर्द को दबाने की बात नहीं करता। यहाँ उन तमाम छोटी-छोटी आदतों को टटोला जाता है जो अंदर ही अंदर इस वात को हवा दे रही होती हैं।

खान-पान और दिनचर्या में क्या बदलाव मदद कर सकते हैं?

सुबह सोकर उठते ही जब कमर एकदम लोहे जैसी अकड़ी हुई मिलती है या पीठ का दर्द दिन की शुरुआत ही खराब कर देता है, तो बहुत गुस्सा आता है। मगर आयुर्वेद में इस सुबह की जकड़न और कमर दर्द को काबू करने का एक बहुत ही सीधा और आसान रास्ता बताया गया है आपकी थाली और आपकी रोज़ की आदतें। 

  • घर की रसोई का ही खाना खाएं: जितना हो सके बाज़ार के तामझाम को छोड़ें और अपनी थाली में हमेशा बिल्कुल ताज़ा, गर्म और घर का बना साफ-सुथरा भोजन ही परोसें।
  • हड्डियों को अंदर से पोषण दें: अपने रोज़ के खाने में दूध, उससे बनी चीज़ें और हरी पत्तेदार सब्ज़ियों की मात्रा बढ़ाएं ताकि आपकी पीठ की मांसपेशियों और रीढ़ की हड्डी को पूरा पोषण मिल सके।
  • पानी से यारी रखें पर फ्रिज से दूरी: दिनभर में अच्छा-खासा पानी पिएं ताकि शरीर के जोड़ों में नमी बनी रहे। मगर हाँ, फ्रिज के एकदम चिल्ड पानी और बहुत ठंडी चीज़ों से थोड़ा परहेज़ ही करें तो बेहतर होगा।
  • भारी और बासी खाने को कहें बाय-बाय: बहुत ज़्यादा तला-भुना, पैकेट बंद जंक फूड और रात का बचा हुआ बासी खाना खाने से पेट में गैस और शरीर में भारीपन बढ़ता है, जो सीधे आपकी कमर के दर्द को हवा देता है।
  • कुर्सी से थोड़ा सा ब्रेक लें: अगर आपका काम ऐसा है जिसमें घंटों बैठना पड़ता है, तो लगातार मशीन की तरह जमे रहने के बजाय हर आधे-एक घंटे में अपनी सीट से उठें, थोड़ा सा खिंचाव करें और एकाध चक्कर लगाकर आएं।

आयुर्वेदिक औषधियां और थेरेपी कैसे मदद कर सकती हैं?

जब दर्द पुराना होने लगता है, तो सिर्फ खान-पान बदलना काफी नहीं होता। ऐसे में आयुर्वेद आपकी बॉडी टाइप और आपके लक्षणों को बारीकी से समझकर कुछ बेहद असरदार जड़ी-बूटियों और थेरेपियों की मदद लेता है।  

  • अश्वगंधा: यह कमज़ोरी को दूर करने वाली एक कमाल की बूटी है। यह आपकी पीठ की थकी हुई मांसपेशियों को अंदर से रिपेयर करती है, शरीर की रिकवरी स्पीड को बढ़ाती है और खोई हुई ताकत वापस लाती है।
  • योगराज गुग्गुल और शल्लकी: जब भी जोड़ों में घिसावट, सूजन या कमर में असहनीय दर्द की बात आती है, तो आयुर्वेद के डॉक्टर इन दोनों औषधियों पर सबसे ज़्यादा भरोसा करते हैं। ये जोड़ों के बीच के मूवमेंट को आसान और दर्द रहित बनाती हैं।
  • कटि बस्ती: इस प्रोसेस में आपकी कमर के निचले हिस्से पर उड़द के आटे का एक घेरा या बाउंड्री बनाई जाती है और फिर उसके भीतर औषधीय गुणों से भरपूर गुनगुना तेल भरकर कुछ देर के लिए छोड़ दिया जाता है। यह तेल सीधे रीढ़ की हड्डी की गहराई तक जाकर वहाँ की भयंकर जकड़न और सूजन को पल भर में सोख लेता है।

खतरे की घंटी: डॉक्टर के पास कब भागना है?

अगर कमर दर्द के साथ नीचे दिए गए लक्षण दिखें, तो इसे सामान्य समझकर टालने की भूल बिल्कुल न करें:

  • पैरों में झुनझुनी, सूनापन या अचानक कमज़ोरी महसूस होना।
  • दर्द के कारण रात के दूसरे हिस्से (सुबह 3-4 बजे) में नींद खुल जाना।
  • दर्द के साथ लगातार हल्का बुखार रहना।
  • पेशाब या मल के नियंत्रण में बदलाव आना।

निष्कर्ष

कमर का निचला हिस्सा हमारे पूरे शरीर का केंद्र बिंदु है। जब सुबह का दर्द आपको बेबस करने लगे, तो समझ जाइए कि शरीर आपसे संवाद करने की कोशिश कर रहा है। वह चिल्लाकर कह रहा है कि अंदर का वात और सूजन अब सीमा पार कर रहे हैं।

दवाइयों से दर्द को सुलाने की शुतुरमुर्गी नीति छोड़िए। स्पॉन्डिलाइटिस कोई साधारण मर्ज़ नहीं है जिसे आप कल पर टाल सकें। यह एक धीमी गति का आक्रमण है जो हर गुज़रते दिन के साथ आपकी रीढ़ की गति को छीन रहा है।

REFERENCES - 

https://spondylitis.org/about-spondylitis/could-i-have-spondyloarthritis/

https://www.niams.nih.gov/health-topics/ankylosing-spondylitis

https://www.medicalnewstoday.com/articles/spondylitis

https://theconversation.com/unexplained-lower-back-pain-it-could-be-ankylosing-spondylitis-56809

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

नहीं। सुबह का कमर दर्द कई कारणों से हो सकता है, जैसे मांसपेशियों में खिंचाव, गलत सोने की मुद्रा या लंबे समय तक बैठे रहना। लेकिन अगर दर्द और जकड़न लंबे समय से बनी हुई है, तो इसकी जांच करवाना बेहतर होता है।

सामान्य कमर दर्द अक्सर आराम करने से कम हो जाता है। वहीं Spondylitis से जुड़े दर्द में सुबह की जकड़न अधिक महसूस हो सकती है और कई लोगों को चलने-फिरने के बाद राहत मिलती है।

रातभर शरीर एक ही स्थिति में रहता है, जिससे कुछ लोगों में जोड़ों और मांसपेशियों में अकड़न बढ़ सकती है। अगर यह जकड़न रोज़ाना होने लगे, तो इसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।

हाँ। यह केवल बुज़ुर्गों की समस्या नहीं है। कई लोगों में इसके शुरुआती लक्षण 15 से 45 वर्ष की उम्र के बीच दिखाई दे सकते हैं।

हाँ। लगातार बैठे रहने से कमर और रीढ़ पर दबाव बढ़ सकता है। समय के साथ यह जकड़न, दर्द और चलने-फिरने में असहजता का कारण बन सकता है।

हल्की स्ट्रेचिंग और नियमित शारीरिक गतिविधि कई लोगों में जकड़न कम करने में मदद कर सकती है। हालांकि किसी भी व्यायाम को शुरू करने से पहले अपनी स्थिति के अनुसार सलाह लेना उचित रहता है।

लगातार तनाव रहने पर शरीर की मांसपेशियाँ तनी हुई महसूस हो सकती हैं। इससे कमर और पीठ में दर्द या भारीपन की शिकायत बढ़ सकती है।

आयुर्वेद के अनुसार कमर दर्द और जकड़न को अक्सर बढ़े हुए वात और असंतुलित जीवनशैली से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए उपचार में खान-पान, दिनचर्या और शरीर के संतुलन पर भी ध्यान दिया जाता है।

लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहना, शारीरिक गतिविधि की कमी, देर रात तक जागना और अत्यधिक तली-भुनी चीज़ों का सेवन कुछ लोगों में परेशानी बढ़ा सकता है।

अगर कमर दर्द कई हफ्तों या महीनों से बना हुआ है, सुबह की जकड़न बढ़ती जा रही है या रोज़मर्रा के काम प्रभावित होने लगे हैं, तो विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित होता है।

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