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Dengue में papaya leaf juice को लेकर क्या सावधानी रखनी चाहिए?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

अक्सर जब किसी को डेंगू होता है या प्लेटलेट्स अचानक से गिरने लगते हैं, तो सबसे पहले लोगों को पपीते के पत्तों का रस याद आता है। हम सोचते हैं कि यह कोई जादुई अमृत है और इसे जितना ज़्यादा पिएँगे, मरीज़ उतनी ही जल्दी ठीक हो जाएगा। लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि एक गिलास कड़वा रस पीने के बाद मरीज़ को उल्टियाँ क्यों शुरू हो जाती हैं या उसके पेट में भयंकर जलन क्यों होने लगती है? दरअसल, किसी भी जड़ी-बूटी का हमारी सेहत पर तभी अच्छा असर होता है जब उसे सही तरीके और सही मात्रा में लिया जाए। पपीते के पत्तों का रस कोई गन्ने का जूस या नारियल पानी नहीं है जिसे आप गिलास भर-भर के पी सकें। यह एक बहुत ही कड़क और तेज़ औषधि है। जब आप बिना सोचे-समझे इसे शरीर में डालते हैं, तो यह फायदे की जगह आपके पेट और लिवर को बुरी तरह से डैमेज कर सकता है। यह समझना बहुत ज़रूरी है कि प्रकृति ने हमें दवाइयाँ दी हैं, लेकिन उन्हें इस्तेमाल करने का एक सलीका होता है।

पपीते के पत्तों का अर्क शरीर में जाकर काम कैसे करता है? 

पपीते की पत्तियों में पैपेन (Papain) और काइमोपैपेन (Chymopapain) नाम के बहुत ही तेज़ एंजाइम पाए जाते हैं। जब आप इसका रस पीते हैं, तो ये तत्व सीधे आपके खून में जाकर बोन मैरो (Bone Marrow) को उत्तेजित करते हैं ताकि वह तेज़ी से नए प्लेटलेट्स बना सके। लेकिन इसी के साथ यह आपके खून को भी पतला करने का काम करता है। शरीर का सारा ज़ोर खून बनाने में लग जाता है और इस कड़वाहट की वजह से पेट के अंदर का माहौल एकदम से बदल जाता है। अगर आपका पेट पहले से ही कमज़ोर है, तो यह रस अंदर जाकर एक तरह का तूफान ले आता है, जिससे पेट में गैस, मरोड़ और तेज़ दर्द शुरू हो सकता है।

क्या इसका इस्तेमाल सिर्फ डेंगू के बुखार में ही सही है? 

जी नहीं, कई लोग यह सोच लेते हैं कि पपीते का पत्ता सिर्फ डेंगू की ही दवा है। सच्चाई तो यह है कि इसका इस्तेमाल स्किन की चमक बढ़ाने, बालों का झड़ना रोकने और सामान्य इम्युनिटी बढ़ाने के लिए भी किया जाता है। लेकिन समस्या तब खड़ी होती है जब लोग बिना किसी बीमारी के भी इसे रोज़ाना पीने लगते हैं। अगर आपके प्लेटलेट्स बिल्कुल नॉर्मल हैं और फिर भी आप इस तेज़ रस को पी रहे हैं, तो यह आपके खून को ज़रूरत से ज़्यादा पतला कर सकता है। यह कोई रोज़मर्रा का टॉनिक नहीं है। जब शरीर में कोई बड़ी परेशानी हो, तभी इस तरह के कड़वे और तेज़ रस का इस्तेमाल करना चाहिए।

क्या बिना सोचे-समझे इसे पीने से कोई गंभीर बीमारी हो सकती है?

अगर आप डॉक्टर की सलाह के बिना हफ्तों तक इस रस को पी रहे हैं, तो आपको तुरंत सावधान हो जाना चाहिए। यह आपके शरीर को अंदर ही अंदर खोखला कर सकता है:

  • गैस्ट्रिक अल्सर: लगातार खाली पेट पपीते का तेज़ रस पीने से पेट और आंतों में बड़े-बड़े छाले या अल्सर हो सकते हैं।
  • लिवर डैमेज (Hepatotoxicity): ज़रूरत से ज़्यादा डोज़ लेने पर लिवर के सेल्स मरने लगते हैं, जो आगे चलकर पीलिया या लिवर फेलियर का रूप ले सकता है।
  • इंटरनल ब्लीडिंग: खून बहुत ज़्यादा पतला हो जाने की वजह से शरीर के अंदर ही नसों से खून रिसने (Bleeding) का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
  • किडनी पर असर: रस में मौजूद कुछ कड़े तत्व आपकी किडनी के फिल्टर करने की क्षमता को कमज़ोर कर सकते हैं।

पपीते के पत्ते और शरीर की गर्मी को लेकर आयुर्वेद का क्या नज़रिया है? 

आयुर्वेद के अनुसार, पपीते के पत्ते की तासीर बहुत ज़्यादा 'उष्ण' (गर्म) और 'तीक्ष्ण' (तेज़) होती है। जब आप इसे पीते हैं, तो शरीर में 'पित्त' (गर्मी) बहुत तेज़ी से बढ़ जाता है। अगर आपका शरीर पहले से ही पित्त प्रकृति का है (यानी आपको जल्दी गर्मी लगती है या एसिडिटी रहती है), तो यह रस आपके खून में गर्मी पैदा कर देगा। आयुर्वेद में साफ कहा गया है कि किसी भी गर्म औषधि को हमेशा किसी ठंडी चीज़ या अनुपान (जैसे शहद या पानी) के साथ मिलाकर लेना चाहिए। जब तक आप इस रस की गर्मी को शांत करने का तरीका नहीं अपनाएँगे, यह आपके शरीर में फायदे से ज़्यादा पित्त के बिगड़ने वाली बीमारियाँ पैदा कर देगा।

पपीते के पत्तों के अलावा वो कौन सी प्राकृतिक चीज़ें हैं जो असरदार हैं? 

अगर आपको पपीते का रस सूट नहीं कर रहा है, तो प्रकृति ने कई और ठंडी और सुरक्षित चीज़ें भी दी हैं:

  • गिलोय: यह बुखार उतारने और इम्युनिटी बढ़ाने का सबसे सुरक्षित और बेहतरीन तरीका है, जो पेट को बिल्कुल भी नुकसान नहीं पहुँचाता।
  • कीवी और ड्रैगन फ्रूट: ये फल बहुत ही सौम्य होते हैं और प्लेटलेट्स बढ़ाने के साथ-साथ शरीर को तुरंत एनर्जी भी देते हैं।
  • व्हीटग्रास (गेहूँ के जवारे): यह खून की कमी को तेज़ी से पूरा करता है और इसकी तासीर बहुत ठंडी होने के कारण यह पेट को भी शांत रखता है।
  • एलोवेरा जूस: यह पेट की गर्मी को मारता है और कमज़ोर हो चुकी आंतों को रिपेयर करके पाचन को दोबारा मज़बूत बनाता है।

किन लोगों को भूलकर भी पपीते के पत्तों का रस नहीं पीना चाहिए? 

हर चीज़ हर किसी के लिए नहीं बनी होती। कुछ खास हालात में इस रस की एक बूँद भी आफत ला सकती है:

  • गर्भवती महिलाएँ: यह रस गर्भाशय में सिकुड़न पैदा कर सकता है, जिससे मिसकैरिज (गर्भपात) होने का बहुत बड़ा खतरा रहता है।
  • खून पतले करने की दवा खाने वाले मरीज़: जो लोग पहले से ही हार्ट की दवाइयाँ ले रहे हैं, उनका खून इस रस से और पतला होकर खतरनाक स्थिति में पहुँच सकता है।
  • पेट के अल्सर के मरीज़: जिन्हें पेट में पहले से ही छाले हैं, उनके लिए यह रस छालों पर सीधा नमक और मिर्च रगड़ने जैसा काम करता है।
  • छोटे बच्चे: 5 साल से छोटे बच्चों का लिवर इस कड़वे रस को पचाने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं होता।

क्या इसे रोज़मर्रा के सामान्य जूस की तरह पीना सुरक्षित है? 

कई बार लोग बीमारी से उठने के बाद भी इसे रोज़ाना का नियम बना लेते हैं। वे सोचते हैं कि रोज़ एक घूँट पीने से बीमारियाँ दूर रहेंगी। यह सबसे बड़ी बेवकूफी है। पपीते के पत्ते का रस कोई संतरे या मौसमी का जूस नहीं है। यह एक 'इमरजेंसी मेडिसिन' है। जब आपका शरीर ठीक हो जाए और प्लेटलेट्स की गिनती 1.5 लाख के ऊपर आ जाए, तो इसे तुरंत बंद कर देना चाहिए। रोज़ाना इसे पीने से शरीर अपनी प्राकृतिक इम्युनिटी भूल जाता है और आपके पेट का पाचन तंत्र हमेशा के लिए कमज़ोर पड़ सकता है।

कड़वे रस को सुरक्षित तरीके से पीने के आसान और सही नियम क्या हैं? 

अगर आपको इसे पीना ही है, तो कुछ बहुत ही आसान और सुरक्षित तरीके अपनाकर आप इसके नुकसान से बच सकते हैं:

  • पत्तियों को हमेशा अच्छी तरह धोकर हल्का सा उबाल लें, इससे उनकी कड़वाहट आधी हो जाती है और कीटाणु मर जाते हैं।
  • सिर्फ 2 से 3 चम्मच रस लें और उसमें बराबर मात्रा में साफ पानी मिला लें ताकि वह पेट में जाकर एकदम से गर्मी न करे।
  • इसे पीने के तुरंत बाद एक चम्मच शुद्ध शहद चाट लें, इससे उल्टियाँ नहीं होंगी और गले की कड़वाहट भी चली जाएगी।
  • कभी भी सुबह एकदम खाली पेट इसे न पिएँ। कुछ हल्का खा लें, जैसे थोड़ा सा दलिया या बिस्कुट, उसके आधे घंटे बाद ही यह रस लें।

इम्युनिटी और प्लेटलेट्स को सही रखने के लिए रोज़मर्रा के बदलाव 

सिर्फ एक रस के भरोसे बैठने की बजाय अपनी रोज़ की ज़िंदगी में कुछ अच्छे बदलाव करें:

  • खुद को हाइड्रेटेड रखें: दिन भर में कम से कम 3 लीटर पानी पिएँ। जब शरीर में पानी की कमी नहीं होगी, तो कोई भी बुखार ज़्यादा देर तक टिक नहीं पाएगा।
  • मौसम के फल खाएँ: जो फल जिस मौसम में आते हैं, उन्हें अपनी डाइट का हिस्सा बनाएँ। ताज़े फलों का रस शरीर को अंदर से ताज़गी देता है।
  • भरपूर नींद लें: जब आप सोते हैं, तभी आपका बोन मैरो नए सेल्स बनाता है। अगर आप सोएँगे नहीं, तो प्लेटलेट्स कभी तेज़ी से नहीं बढ़ेंगे।
  • तनाव से दूर रहें: घबराहट और डर शरीर की हीलिंग पावर को धीमा कर देते हैं। खुद पर और अपनी दवाइयों पर भरोसा रखें।

एलोपैथी और आयुर्वेद इस रस के बारे में क्या अलग राय रखते हैं?

  • मान्यता और नज़रिया: आधुनिक विज्ञान (एलोपैथी) इसे एक ऐसा घरेलू नुस्खा मानता है जिस पर अभी और रिसर्च की ज़रूरत है, जबकि आयुर्वेद इसे एक स्थापित और बहुत ही तेज़ असर करने वाली औषधि (जड़ी-बूटी) मानता है।
  • इस्तेमाल का तरीका: एलोपैथिक डॉक्टर्स अक्सर इसे पीने से मना करते हैं क्योंकि इसकी डोज़ तय नहीं होती और उल्टियों का डर रहता है। वहीं, आयुर्वेदिक वैद्य इसे हमेशा किसी ठंडी चीज़ (जैसे शहद) के साथ निश्चित मात्रा में लेने की सलाह देते हैं।
  • साइड इफेक्ट्स पर राय: आधुनिक विज्ञान का मानना है कि यह सीधा लिवर पर टॉक्सिक असर डाल सकता है। आयुर्वेद कहता है कि बिना इंसान की तासीर (वात, पित्त, कफ) जाने इसे पीने से शरीर की पूरी गर्मी बेकाबू हो जाती है।
  • उपचार में प्राथमिकता: अस्पताल में प्लेटलेट्स बहुत कम होने पर आईवी ड्रिप या सीधा प्लेटलेट ट्रांसफ्यूजन (खून चढ़ाने) पर ज़ोर दिया जाता है, जबकि घरेलू और आयुर्वेदिक उपचार में सबसे पहला भरोसा इसी पत्तियों के रस पर किया जाता है।

हमेशा याद रखें कि आपकी सेहत किसी भी नुस्खे से कहीं बढ़कर है। पपीते के पत्तों का रस बेशक प्लेटलेट्स बढ़ाने में मदद करता है, लेकिन इसे कोई चमत्कारिक जादू समझने की भूल न करें। जब इंसान बीमार होता है, तो वह जल्दी ठीक होने के लिए घबराहट में कुछ भी पीने को तैयार हो जाता है। आपको इसी जल्दबाज़ी से बचना है। अपने शरीर की आवाज़ को सुनें। अगर कुछ पीने से आपको उल्टियाँ या दर्द हो रहा है, तो आपका शरीर चीख-चीख कर कह रहा है कि उसे वह चीज़ नहीं चाहिए। अपनी इस भागदौड़ भरी ज़िंदगी में किसी भी घरेलू नुस्खे को आज़माने से पहले अपने डॉक्टर से एक बार बात ज़रूर करें। जब आप समझदारी से काम लेंगे और सही मात्रा का ध्यान रखेंगे, तो यकीनन आप हर बीमारी से जल्दी और सुरक्षित तरीके से बाहर आ जाएँगे।

References:

https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC4071726/

https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC3614241/

https://www.indianpediatrics.net/apr2014/apr-324-325.htm

https://www.sciencedirect.com/science/article/abs/pii/S3050475925006098

https://www.japsonline.com/admin/php/uploads/1821_pdf.pdf

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

जी नहीं, पत्तियों को पीसने के बाद रस को तुरंत पी लेना चाहिए। इसे फ्रिज में रखने से इसके ज़रूरी एंजाइम्स कुछ ही घंटों में खत्म हो जाते हैं और वह सिर्फ कड़वा पानी रह जाता है।

कुछ शुरुआती रिसर्च में इसके पत्तों में कैंसर सेल्स को रोकने वाले गुण पाए गए हैं, लेकिन यह कैंसर का कोई पक्का या प्रामाणिक इलाज नहीं है। इसे डॉक्टर की कीमोथेरेपी का विकल्प बिल्कुल नहीं मानना चाहिए।

हाँ, बाज़ार में मिलने वाले कैप्सूल और सिरप सुरक्षित होते हैं क्योंकि उनमें डोज़ तय होती है। अगर आपको ताज़ा रस पीने से उल्टियाँ होती हैं, तो डॉक्टर की सलाह से ये कैप्सूल एक बेहतरीन और सेफ विकल्प हैं।

हमेशा पेड़ के ऊपर की तरफ लगने वाली हल्की हरी और कोमल (नई) पत्तियों का इस्तेमाल करना चाहिए। इनमें औषधीय गुण सबसे ज़्यादा होते हैं और ये पुरानी पत्तियों के मुकाबले कम कड़वी होती हैं।

हाँ, इसकी तासीर बहुत गर्म होती है जिसके कारण पीरियड्स जल्दी आ सकते हैं या ब्लीडिंग सामान्य से ज़्यादा हो सकती है। इसलिए माहवारी के दौरान इसे बिना डॉक्टर से पूछे नहीं पीना चाहिए।

इसे दूध में बिल्कुल नहीं मिलाना चाहिए क्योंकि दोनों की तासीर एकदम अलग होती है। आप कड़वाहट कम करने के लिए इसमें थोड़ा सा अनार का जूस या सेब का रस ज़रूर मिला सकते हैं।

यह रस मुख्य रूप से प्लेटलेट्स बढ़ाने के लिए जाना जाता है (जो अक्सर डेंगू में गिरते हैं)। मलेरिया या टाइफाइड में यह बुखार तो नहीं उतारता, लेकिन कमज़ोरी दूर करने में थोड़ी मदद कर सकता है।

हाँ, अगर आप इसे बहुत ज़्यादा मात्रा में पी लेते हैं या पत्तियों को ठीक से धोते नहीं हैं, तो यह सीधा आंतों पर हमला करता है जिससे भयंकर दस्त लग सकते हैं।

पत्तियों को सीधा चबाकर खाना बहुत मुश्किल और खतरनाक है क्योंकि ये गले को छील सकती हैं और इन्हें पचने में बहुत समय लगता है। इसका रस निकालकर ही इस्तेमाल करना सबसे सही तरीका है।

दोनों को एक साथ नहीं लेना चाहिए। एलोपैथिक दवा और इस आयुर्वेदिक रस के बीच कम से कम 2 से 3 घंटे का गैप ज़रूर रखें, ताकि लिवर को दोनों चीज़ें एक साथ प्रोसेस करने में दिक्कत न हो।

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