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PCOD ignore करने से periods के अलावा और क्या असर हो सकता है?

Information By Dr. Sapna Bhargava     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 24 Jul, 2026
  • category-iconUpdated on 24 Jul, 2026
  • category-iconWomen's Health
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अक्सर हम सोचते हैं कि PCOD (Polycystic Ovarian Disease) का मतलब सिर्फ पीरियड्स का समय पर ना आना है और किसी तरह बस दवा खाकर पीरियड्स ला देने से शरीर की सारी बीमारियां या परेशानियां रातों-रात खत्म हो जाएंगी। लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि पीरियड्स को नियमित करने की गोलियां खाने के बावजूद कई महिलाओं को अचानक से वज़न बढ़ना, चेहरे पर अनचाहे बाल आना, भयंकर बाल झड़ना, या बिना बात के चिड़चिड़ापन और थकान की शिकायत क्यों रहने लगती है? वहीं, कुछ महिलाओं का लाख कोशिशों के बाद भी वज़न उस तरह से कम नहीं होता, जैसी उन्हें उम्मीद थी।

सिर्फ सोशल मीडिया या इंटरनेट पर देखकर कोई भी डाइट फॉलो कर लेने या दर्द निवारक गोलियां खा लेने से समस्या खत्म नहीं होती, बल्कि शरीर के अंदर असली बदलाव का काम तो तब शुरू होता है जब हम PCOD के पीछे के हार्मोनल खेल, इंसुलिन रेजिस्टेंस और इसके पीछे के विज्ञान को समझते हैं। यह समझना बहुत ज़रूरी है कि शरीर की मशीनरी केवल ओवरीज़ (अंडाशय) तक सीमित नहीं है। PCOD सिर्फ बच्चेदानी की बीमारी नहीं है, बल्कि यह एक मेटाबोलिक और एंडोक्राइन (हार्मोनल) डिसऑर्डर है जो आपके पूरे शरीर की कार्यप्रणाली को गहराई से प्रभावित करता है।

हार्मोनल असंतुलन और शरीर का विज्ञान

जब आप सालों से अपने अनियमित पीरियड्स या हॉर्मोन्स के असंतुलन को 'सामान्य' मानकर नज़रअंदाज़ कर रहे होते हैं, तो आपके शरीर को एक गलत हार्मोनल लय की आदत पड़ जाती है। ऐसे में शरीर में पुरुष हार्मोन का स्तर बढ़ने लगता है। इसके साथ ही शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन हार्मोन को सही से इस्तेमाल नहीं कर पातीं, जिसे इंसुलिन रेजिस्टेंस कहते हैं।

इंसुलिन का काम खून से शुगर को निकालकर कोशिकाओं तक पहुंचाकर ऊर्जा देना है, लेकिन जब कोशिकाएं इंसुलिन को ब्लॉक कर देती हैं, तो आपकी पैंक्रियाज़ (अग्न्याशय) और ज़्यादा इंसुलिन बनाने लगती है। यह अतिरिक्त इंसुलिन आपके अंडाशय को और अधिक टेस्टोस्टेरोन बनाने के लिए ट्रिगर करता है। यह एक खतरनाक चक्र बन जाता है। अगर आपका शरीर इस स्थिति के प्रति संवेदनशील है, तो यह स्थिति शरीर को स्वस्थ रखने के बजाय बीमारियों से 'ओवरलोडेड' कर देती है। यही कारण है कि PCOD को लंबे समय तक इग्नोर करने से आप खुद को हल्का और ऊर्जावान महसूस करने के बजाय हर समय थकान, वज़न बढ़ने और मूड स्विंग्स की समस्या से जूझने लगती हैं।

एक्सपर्ट डॉक्टर की विशेष सलाह

PCOD शरीर में हार्मोनल असंतुलन का एक स्पष्ट संकेत है, और इसे सिर्फ 'शादी के बाद या बच्चा प्लान करते समय देखेंगे' सोचकर छोड़ देना बिल्कुल सही नहीं होता।

यदि PCOD के साथ लगातार गर्दन या अंडरआर्म्स का रंग काला पड़ना , नींद में खर्राटे आना या सांस रुकना, बहुत ज़्यादा बाल झड़ना या लगातार उदासी और डिप्रेशन महसूस हो, तो इसे नज़रअंदाज़ न करें। जिन महिलाओं के परिवार में डाइबिटीज़ , हाई ब्लड प्रेशर या दिल की बीमारियों की हिस्ट्री है, उन्हें PCOD के लक्षण दिखते ही एंडोक्राइनोलॉजिस्ट या स्त्री रोग विशेषज्ञ (Gynecologist) की सलाह ज़रूर लेनी चाहिए। जो लोग बिना डॉक्टर की सलाह के गर्भनिरोधक गोलियां (OCPs) सालों तक खाते रहते हैं, उनके शरीर में भी आगे चलकर कई गंभीर साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं।

क्या सिर्फ पीरियड्स की दवा लेना हर बीमारी का इलाज है?

जी नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है। कई बार महिलाएं सिर्फ जब पीरियड्स मिस होते हैं, तभी दवा खाकर ब्लीडिंग करवा लेती हैं और सोचती हैं कि अब वे पूरी तरह स्वस्थ हैं। सिर्फ दवा से ब्लीडिंग ला देने का मतलब यह नहीं है कि आपने अपने शरीर के अंदर पनप रहे हार्मोनल तूफान को शांत कर लिया है। यह तो वैसा ही है जैसे बुखार में सिर्फ माथे पर ठंडी पट्टी रखना, लेकिन इन्फेक्शन का इलाज न करना।

अगर आप इसे गलत तरीके से मैनेज कर रही हैं या सिर्फ इसके एक लक्षण (अनियमित पीरियड्स) का इलाज कर रही हैं, तो जो इंसुलिन और एंड्रोजन का स्तर आपके शरीर में बढ़ रहा है, वह धीमा ज़हर बनकर भविष्य में बड़ी बीमारियों का कारण बन सकता है। अगर आप यह सोचकर PCOD को इग्नोर कर रही हैं कि 'अभी तो मुझे कंसीव (प्रेग्नेंट) नहीं करना है, इसलिए इलाज की क्या ज़रूरत', तो आप अपनी सेहत को सालों पीछे धकेल रही हैं।

PCOD को इग्नोर करने से आपकी सेहत पर क्या असर पड़ता है?

जब हम बिना सोचे-समझे PCOD के लक्षणों को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा मान लेते हैं और जीवनशैली में बदलाव नहीं करते, तो शरीर के अंदर कुछ खतरनाक बदलाव हो सकते हैं:

  • टाइप 2 डाइबिटीज़ (Type 2 Diabetes): PCOD से पीड़ित आधी से ज़्यादा महिलाओं को 40 साल की उम्र से पहले टाइप 2 डाइबिटीज़ या प्री-डाइबिटीज़ होने का खतरा रहता है। शरीर का इंसुलिन रेजिस्टेंस खून में शुगर के स्तर को तेज़ी से बढ़ाता है।
  • हृदय रोग (Heart Diseases): लंबे समय तक इंसुलिन का उच्च स्तर और बढ़ा हुआ वज़न शरीर में 'खराब कोलेस्ट्रॉल' (LDL) और ट्राइग्लिसराइड्स को बढ़ाता है, जिससे कम उम्र में ही हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट अटैक का जोखिम बढ़ जाता है।
  • स्लीप एप्निया (Sleep Apnea): PCOD के कारण अगर वज़न ज़्यादा बढ़ जाए, तो सोते समय बार-बार सांस रुकने की बीमारी हो सकती है। इससे नींद पूरी नहीं होती और दिन भर भयंकर थकान बनी रहती है।
  • एंडोमेट्रियल कैंसर (Endometrial Cancer) का खतरा: जब पीरियड्स कई महीनों तक नहीं आते हैं, तो गर्भाशय की परत (Endometrium) मोटी होती जाती है। लंबे समय तक यह परत अंदर ही अंदर मोटी होने से गर्भाशय के कैंसर का खतरा काफी हद तक बढ़ जाता है।
  • मानसिक स्वास्थ्य और डिप्रेशन: हार्मोनल उतार-चढ़ाव और शारीरिक बदलावों (जैसे मोटापा और चेहरे पर बाल) के कारण PCOD से जूझ रही महिलाएं अक्सर गंभीर एंग्जायटी, स्ट्रेस और डिप्रेशन का शिकार हो जाती हैं।
  • इनफर्टिलिटी (Infertility): समय पर अंडों (Eggs) का न बनना या रिलीज़ न होना कंसीव करने में बड़ी रुकावट पैदा करता है, जिससे भविष्य में प्रेग्नेंसी में कई जटिलताएं (जैसे मिसकैरिज या जेस्टेशनल डाइबिटीज़) आ सकती हैं।

प्राचीन आयुर्वेद और PCOD

आयुर्वेद के अनुसार, महिलाओं का मासिक धर्म 'वात' (Vata) दोष और 'आर्तव धातु' द्वारा नियंत्रित होता है। जब शरीर में खराब जीवनशैली या गलत खानपान के कारण 'कफ' (Kapha) और 'वात' दोष बिगड़ जाते हैं, तो कफ शरीर के स्रौतस (Channels) को ब्लॉक कर देता है।

अंडाशय (Ovaries) में बढ़ा हुआ कफ सिस्ट (गांठों) का रूप ले लेता है, और बिगड़ा हुआ वात पीरियड्स की प्राकृतिक साइकिल को रोक देता है। आयुर्वेद मानता है कि सिर्फ हार्मोन्स की गोलियां खाने से यह ब्लॉकेज नहीं खुलता। इसके लिए 'जठराग्नि' (पाचन अग्नि) को तेज़ करना ज़रूरी है, ताकि शरीर से 'आम' (Toxins) बाहर निकल सकें। आयुर्वेद सिर्फ गर्भाशय के इलाज की सलाह नहीं देता, बल्कि यह शरीर के मेटाबॉलिज़्म को सुधारने, वात को अनुलोम (सही दिशा में) करने और कफ को पिघलाने वाली औषधियों और जीवनशैली पर ज़ोर देता है।

PCOD को मैनेज करने के सही नियम और सावधानियां

प्रकृति ने हमारे शरीर को खुद को हील करने की अद्भुत क्षमता दी है, बस हमें इसे मैनेज करने के सही नियम पता होने चाहिए:

  • डाइट का गणित (Low GI Diet): सफेद चीनी, मैदा, और पैक्ड जंक फूड इंसुलिन को तेज़ी से बढ़ाते हैं। अपनी डाइट में फाइबर, कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट्स (जैसे ओट्स, रागी, बाजरा) और प्रोटीन की मात्रा बढ़ाएं।
  • सही व्यायाम (Strength Training): सिर्फ कार्डियो या टहलने से PCOD में पूरा फायदा नहीं मिलता। मांसपेशियों को मज़बूत करने वाले व्यायाम (Strength training) और योग (जैसे सूर्य नमस्कार, बद्ध कोणासन) कोशिकाओं की इंसुलिन सेंसिटिविटी को सुधारते हैं।
  • नींद और स्ट्रेस (Circadian Rhythm): रात को देर तक जागने से शरीर का स्ट्रेस हार्मोन (Cortisol) बढ़ जाता है, जो PCOD को और बिगाड़ता है। 7-8 घंटे की गहरी नींद किसी भी दवा से ज़्यादा असरदार है।
  • वज़न में 5-10% की कमी: रिसर्च बताती है कि अगर आप अपने कुल शरीर के वज़न का सिर्फ 5 से 10 प्रतिशत हिस्सा भी कम कर लें, तो पीरियड्स की साइकिल अपने आप नियमित होने लगती है और दवाइयों की ज़रूरत काफी कम हो जाती है।

PCOD के अत्यधिक गंभीर लक्षण या EMERGENCY

जीवनशैली सुधारने के बाद भी अगर शरीर में ये लक्षण दिखें, तो आपको तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए:

  • अत्यधिक ब्लीडिंग: महीनों बाद पीरियड्स आने पर अगर ब्लीडिंग इतनी ज़्यादा हो कि हर 1-2 घंटे में पैड बदलना पड़े या बड़े-बड़े क्लॉट्स (खून के थक्के) आएं।
  • पेल्विक एरिया में भयंकर दर्द: पेट के निचले हिस्से में अचानक, असहनीय दर्द होना (यह ओवेरियन सिस्ट के फटने या ओवेरियन टॉर्शन का संकेत हो सकता है)।
  • अत्यधिक डिप्रेशन: बिना किसी कारण के गहरी उदासी या खुद को नुकसान पहुंचाने वाले विचार आना।
  • त्वचा में अचानक गहरे बदलाव: गर्दन के पीछे, अंडरआर्म्स या जांघों के बीच की त्वचा का बहुत तेज़ी से काला और मखमली  हो जाना, जो गंभीर इंसुलिन रेजिस्टेंस का संकेत है।

निष्कर्ष

हमेशा याद रखें कि PCOD कोई ऐसी बीमारी नहीं है जो कुछ दिन एंटीबायोटिक खाने से ठीक हो जाए, यह एक लाइफस्टाइल डिसऑर्डर है। प्रकृति ने हमारे शरीर को हार्मोन्स को प्रोसेस करने और विषाक्त तत्वों को बाहर निकालने का एक बेहतरीन मैकेनिज़्म दिया है। बस ज़रूरत है तो उस मैकेनिज़्म को सही ईंधन (सही डाइट और व्यायाम) देने की। आपकी इंसुलिन कैसे काम कर रही है, आपका स्ट्रेस लेवल क्या है, और आपकी नींद कैसी है, इसका सीधा असर आपके ओवरीज़ (अंडाशय) पर पड़ता है।

इसलिए, सिर्फ दर्द निवारक या पीरियड्स लाने वाली गोलियों पर निर्भर रहने की लापरवाही न करें। अपनी इस भागदौड़ भरी ज़िंदगी में अपने शरीर की आवाज़ को सुनें। उसे सही आदतों में ढालने का पूरा मौका दें, आयुर्वेद और विज्ञान के अनुसार अपनी जीवनशैली बदलें और अपनी मेडिकल स्थिति को गंभीरता से लें। जब आपका शरीर अंदर से हार्मोनल स्तर पर संतुलित रहेगा, तो यकीनन आप बिना किसी खतरे के अपनी ज़िंदगी में पहले से कहीं ज़्यादा प्रोडक्टिव, स्वस्थ और ऊर्जावान महसूस करेंगी।

References

Do PCOD and PCOS mean the same thing or are they different | UNICEF India

Selected aspects of polycystic ovarian disease - PubMed

Polycystic ovary syndrome

Understanding PCOD and PCOS: A Comparative Review of Causes, Differences, and Treatment Modalities | Journal of Neonatal Surgery

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

नहीं। PCOD एक हार्मोनल और मेटाबॉलिक समस्या है जो वजन, त्वचा, बाल, इंसुलिन और प्रजनन स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकती है।

हाँ। लंबे समय तक अनदेखा करने से टाइप-2 डायबिटीज़, हृदय रोग, बांझपन और एंडोमेट्रियल समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है।

नहीं। दवा से केवल ब्लीडिंग आ सकती है, लेकिन हार्मोनल असंतुलन और इंसुलिन रेजिस्टेंस के लिए समग्र उपचार ज़रूरी होता है।

हाँ। इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण कई महिलाओं को विशेषकर पेट की चर्बी कम करने में कठिनाई होती है।

हाँ। अनियमित ओव्यूलेशन के कारण गर्भधारण में कठिनाई हो सकती है, लेकिन सही इलाज से संभावना बेहतर हो सकती है।

हाँ। लो-जीआई, फाइबर और प्रोटीन से भरपूर संतुलित आहार हार्मोन संतुलन में मदद कर सकता है।

स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, तेज़ चलना, योग और नियमित शारीरिक गतिविधि इंसुलिन संवेदनशीलता सुधारने में सहायक हो सकती है।

हाँ। कुछ महिलाओं में तनाव, चिंता, मूड स्विंग्स और अवसाद का जोखिम बढ़ सकता है।

अत्यधिक ब्लीडिंग, तेज़ पेट दर्द, लंबे समय तक पीरियड्स न आना या गंभीर मानसिक स्वास्थ्य लक्षण होने पर तुरंत डॉक्टर से मिलें।

योग्य चिकित्सक की सलाह के साथ संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और तनाव प्रबंधन PCOD के समग्र प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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