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PCOD और थायरॉइड साथ-साथ क्यों? क्या दोनों का मूल कारण एक ही है? आयुर्वेद से स्थायी उपचार

Information By Dr. Keshav Chauhan
  • category-iconPublished on 21 Mar, 2026
  • category-iconUpdated on 21 Mar, 2026
  • category-iconWomen's Health
  • blog-view-icon5008

क्या आपके साथ भी ऐसा हुआ है कि आप अपने बढ़ते हुए वजन, भयंकर थकान और कई महीनों से रुकी हुई माहवारी की शिकायत लेकर डॉक्टर के पास गईं? डॉक्टर ने आपका अल्ट्रासाउंड और ब्लड टेस्ट कराया, और जब रिपोर्ट आई तो आपको एक नहीं, बल्कि दो झटके लगे—आपको PCOD (पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिजीज) भी है और आपका थायरॉइड (Hypothyroidism) भी बढ़ा हुआ है। आपको लगता है कि आपको दो अलग-अलग बीमारियाँ हो गई हैं, लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है। इस स्थिति को केवल दो अलग बीमारियों का दुर्भाग्य मानकर जीवन भर दो अलग-अलग रसायनों (दवाओं) के सहारे बैठे रहना आपके शरीर के साथ किया गया एक बहुत बड़ा धोखा है। 

PCOD और थायरॉइड का साथ-साथ होना क्या है?

जब कोई महिला यह शिकायत करती है कि उसे PCOD और थायरॉइड दोनों एक साथ हो गए हैं, तो इसका सीधा चिकित्सीय अर्थ यह है कि उसके शरीर में ऊर्जा (Energy) बनाने की प्रक्रिया और प्रजनन की प्रक्रिया दोनों ही एक गहरे 'मेटाबॉलिक सिंड्रोम' का शिकार हो चुकी हैं।

हमारे शरीर में थायरॉइड ग्रंथि मेटाबॉलिज्म (चयापचय) की मास्टर है। जब तनाव या खराब जीवनशैली के कारण थायरॉइड सुस्त पड़ जाता है, तो शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है। धीमे मेटाबॉलिज्म के कारण शरीर इंसुलिन का सही से उपयोग नहीं कर पाता, जिससे 'इंसुलिन रेजिस्टेंस' पैदा होता है। बढ़ा हुआ इंसुलिन सीधे ओवरी (अंडाशय) पर हमला करता है और उसे पुरुष हार्मोन (टेस्टोस्टेरोन) बनाने के लिए मजबूर करता है, जिससे PCOD जन्म लेता है।

इसके प्रकार

PCOD और थायरॉइड के इस खतरनाक 'डबल अटैक' को शारीरिक कारणों के आधार पर मुख्य रूप से तीन प्रकारों में बांटा जा सकता है:

  • इंसुलिन रेजिस्टेंस और सुस्त थायरॉइड
  • सूजन जनित PCOD और हाशिमोटो थायरॉइड
  • एड्रेनल (तनाव जनित) PCOD और थायरॉइड

लक्षण और संकेत

जब मेटाबॉलिज्म और प्रजनन तंत्र दोनों एक साथ काम करना बंद कर देते हैं, तो मरीजों को निम्नलिखित कष्टकारी लक्षणों का एक साथ सामना करना पड़ता है:

  • वजन का अनियंत्रित रूप से बढ़ना, विशेषकर पेट और जांघों के आसपास, जो डाइटिंग या जिम जाने से भी कम नहीं होता।
  • माहवारी का 2 से 4 महीने तक न आना, और आने पर भयंकर दर्द व बहुत कम (या अत्यधिक भारी) रक्तस्राव होना।
  • सुबह सोकर उठने पर भी शरीर में भयंकर भारीपन, थकान और दिनभर सुस्ती महसूस होना।
  • चेहरे (ठोड़ी और होंठों के ऊपर) पर अनचाहे बालों का तेजी से उगना, लेकिन सिर के बालों का गुच्छों में झड़ना।
  • गले और अंडरआर्म्स की त्वचा का काला और मोटा (Acanthosis Nigricans) पड़ जाना।
  • मूड में भयंकर उतार-चढ़ाव, छोटी-छोटी बातों पर रोने का मन करना, और दिमाग पर धुंध (Brain Fog) छा जाना।

मुख्य कारण

इस दोहरे और भयंकर हार्मोनल तूफान के पीछे हमारी रोजमर्रा की कुछ बड़ी गलतियां जिम्मेदार होती हैं:

  • खराब पाचन और 'आम' का संचय: आयुर्वेद के अनुसार जब जठराग्नि कमजोर होती है, तो भोजन पचता नहीं बल्कि सड़कर विषैला रस ('आम') बनाता है, जो थायरॉइड और ओवरी दोनों के काम को ब्लॉक कर देता है।
  • उच्च ग्लाइसेमिक (High GI) आहार: चीनी, मैदा, बेकरी उत्पाद और जंक फूड का लगातार सेवन शरीर में इंसुलिन के स्पाइक को जन्म देता है, जो थायरॉइड को सुस्त करता है और PCOD को भड़काता है।
  • लगातार मानसिक तनाव: लंबे समय तक चिंता, करियर का दबाव या नींद की कमी सीधा एड्रेनल ग्लैंड्स को थका देती है, जिससे पूरा एंडोक्राइन सिस्टम ताश के पत्तों की तरह ढह जाता है।
  • शारीरिक निष्क्रियता: दिन भर बैठे रहने से पेल्विक हिस्से (ओवरी) और गर्दन (थायरॉइड) दोनों जगह खून का प्रवाह और ऑक्सीजन की कमी हो जाती है, जिससे ग्रंथियां सुन्न पड़ जाती हैं।

जोखिम और जटिलताएं

अगर इस समस्या को केवल थायरॉइड की गोली और गर्भनिरोधक गोलियों (OCPs) के भरोसे छोड़ दिया जाए, तो शरीर में कई खतरनाक और हमेशा के लिए रहने वाले बदलाव आ सकते हैं:

  • स्थायी बांझपन (Infertility): ओवरी में अंडे बनना पूरी तरह से बंद हो जाते हैं और गर्भाशय का वातावरण इतना खराब हो जाता है कि प्राकृतिक रूप से गर्भधारण लगभग असंभव हो जाता है।
  • टाइप 2 डायबिटीज: इंसुलिन रेजिस्टेंस का लगातार बने रहना और वजन बढ़ना अंततः आपको कम उम्र में ही गंभीर मधुमेह (Diabetes) का मरीज बना देता है।
  • हृदय रोग और हाई कोलेस्ट्रॉल: थायरॉइड धीमा होने से कोलेस्ट्रॉल तेजी से बढ़ता है और PCOD से रक्तचाप (Blood Pressure) बढ़ता है, जिससे हार्ट अटैक का जोखिम कई गुना हो जाता है।
  • गंभीर मानसिक अवसाद (Clinical Depression): शरीर के बेडौल होने, अनचाहे बाल आने और भयंकर थकान से महिला गहरे मानसिक अवसाद और हीन भावना का शिकार हो जाती है।

प्राकृतिक रूप से बीमारी और लक्षणों की पहचान कैसे करें?

प्राकृतिक स्वास्थ्य विज्ञान में केवल ब्लड रिपोर्ट के बजाय शरीर के अपने संकेतों को गहराई से समझा जाता है:

  • बेसल बॉडी टेम्परेचर (BBT) टेस्ट: सुबह उठते ही अपना तापमान मापें। यदि यह 97.8°F से कम है, तो थायरॉइड सुस्त है। साथ ही यदि पूरे महीने तापमान में कोई उतार-चढ़ाव नहीं होता (Biphasic shift नहीं है), तो इसका अर्थ है कि PCOD के कारण अंडे (Ovulation) नहीं बन रहे हैं।
  • गर्दन की त्वचा और बाल: यदि गर्दन के पीछे की त्वचा काली और मखमली (Velvety) हो गई है, तो यह भयंकर इंसुलिन रेजिस्टेंस का सीधा प्राकृतिक प्रमाण है, जो PCOD और थायरॉइड दोनों को जन्म दे रहा है।
  • पाचन और ऊर्जा का विश्लेषण: खाना खाने के बाद यदि आपको भयंकर नींद आती है और पेट फूल जाता है, तो यह जठराग्नि के बुझने का सीधा संकेत है, जो इन दोनों बीमारियों की असली जड़ है।

आयुर्वेद का दृष्टिकोण

आयुर्वेद PCOD और थायरॉइड को अलग-अलग बीमारियाँ नहीं मानता। आयुर्वेद के अनुसार, ये दोनों बीमारियां 'अग्निमांद्य' (पाचन अग्नि का बुझ जाना), 'आम' (Toxins) के निर्माण, और वात-कफ दोषों के भयंकर असंतुलन का एक ही संयुक्त परिणाम हैं।

जब हमारी पाचन अग्नि कमजोर होती है, तो शरीर में 'आम' (कच्चा और विषैला रस) बनता है। यह चिपचिपा आम रस धातु (Plasma) के साथ मिलकर शरीर के सूक्ष्म मार्गों (Srotas) को ब्लॉक कर देता है। जब यह आम 'रसवाह स्रोतस' और गले के हिस्से में बैठता है, तो थायरॉइड ग्रंथि (अवटु ग्रंथि) का काम धीमा कर देता है (कफ के भारीपन के कारण)। वही आम जब नीचे की ओर 'आर्तववाह स्रोतस' (प्रजनन चैनलों) में जाता है, तो वहां कफ और वात के साथ मिलकर ओवरी में ग्रंथियां (Cysts) बना देता है और आर्तव (माहवारी) को रोक देता है।

जीवा आयुर्वेद का उपचार दृष्टिकोण

जीवा आयुर्वेद में, हर मरीज की बहुत गहराई से जांच की जाती है क्योंकि हर इंसान के शरीर की बनावट और स्वास्थ्य की स्थिति बिल्कुल अलग होती है। इलाज शुरू करने से पहले, हमारे आयुर्वेद विशेषज्ञ कई जरूरी बातों पर ध्यान देते हैं, जैसे:

  • शरीर की प्रकृति की जांच: बीमारी की असली वजह जानने के लिए वात, पित्त और कफ दोषों के आधार पर मरीज के शरीर की सामान्य बनावट को समझना और परखना।
  • लक्षणों की जांच: मरीज को हो रही परेशानी और बीमारी के मुख्य लक्षणों की बारीकी से जांच करना और उनकी गंभीरता को समझना।
  • पुराने स्वास्थ्य इतिहास की जांच: मरीज की पुरानी बीमारियों, पिछले इलाज और स्वास्थ्य से जुड़ी पुरानी समस्याओं के इतिहास को देखना और समझना।
  • जीवनशैली का मूल्यांकन: मरीज के रोजमर्रा के जीवन को समझना, जैसे उनका खान-पान, सोने का तरीका, दिन भर की शारीरिक मेहनत और मानसिक तनाव का स्तर।
  • आसपास के माहौल की जांच: बीमारी को बढ़ाने वाले बाहरी कारणों की जांच करना, जैसे हवा में प्रदूषण, धूम्रपान की आदत या काम करने की जगह पर धूल और रसायनों के संपर्क में आना।
  • दोषों के असंतुलन की जांच: शरीर में कफ, वात या पित्त दोषों के बिगड़ने की गहराई से जांच करना, जो इंसान के शरीर के सामान्य काम-काज और स्वास्थ्य में रुकावट डालते हैं।

इस रोग के लिए महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां

  • कचनार (कचनार गुग्गुल): यह PCOD और थायरॉइड दोनों के लिए सबसे महान औषधि है। यह गले (थायरॉइड ग्रंथि) की सूजन को कम करती है और ओवरी में बनी सिस्ट्स (Cysts) को पिघलाकर बाहर निकालती है। यह जमे हुए कफ को खुरचती है।
  • अश्वगंधा: यह तनाव हार्मोन (कोर्टिसोल) को कम करती है, थायरॉइड हार्मोन (T4 से T3) के रूपांतरण में मदद करती है, और PCOD से होने वाली भयंकर थकान को जड़ से मिटाती है।
  • शतावरी: यह महिला प्रजनन तंत्र के लिए बेहतरीन टॉनिक है। यह एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के संतुलन को वापस लाती है और ओवरी को पोषण देकर प्राकृतिक माहवारी शुरू कराती है।
  • वरुण (Varun): यह शरीर के मेटाबॉलिज्म को तेज करने और लिम्फेटिक सिस्टम से कचरा बाहर निकालने के लिए एक अत्यंत शक्तिशाली जड़ी-बूटी है, जो दोनों ग्रंथियों को साफ करती है।
  • गिलोय (Guduchi): यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को सुधारती है, इंसुलिन रेजिस्टेंस को कम करती है और शरीर से 'आम' (Toxins) को जलाकर भस्म कर देती है।

आयुर्वेदिक पंचकर्म थेरेपी

जब PCOD और थायरॉइड दोनों एक साथ हावी हों, शरीर का वजन कम न हो रहा हो और हार्मोन की गोलियां खाकर शरीर खोखला हो चुका हो, तो जीवा आयुर्वेद में विशेष पंचकर्म चिकित्सा की जाती है:

  • उद्वर्तन (Dry Powder Massage): इसमें विशेष गर्म जड़ी-बूटियों के चूर्ण से पूरे शरीर की मालिश की जाती है। यह शरीर में जमे हुए जिद्दी कफ और चर्बी को पिघलाता है, इंसुलिन रेजिस्टेंस को कम करता है और सुस्त मेटाबॉलिज्म को तुरंत तेज करता है।
  • विरेचन (Virechana): यह शरीर की गहरी डिटॉक्सिफिकेशन प्रक्रिया है। इसके माध्यम से लिवर और आंतों में जमा हुए भारी सिंथेटिक हार्मोन्स, विषैले पित्त और 'आम' को दस्त के रास्ते हमेशा के लिए बाहर निकाल दिया जाता है।
  • बस्ति (Basti) और नस्य (Nasya): पेल्विक हिस्से (ओवरी) से वात की रुकावट को हटाने के लिए बस्ति (एनीमा) और दिमाग व थायरॉइड को एक्टिवेट करने के लिए नस्य (नाक में औषधि डालना) अत्यंत जादुई असर करते हैं।

रोग के लिए सही आहार

आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां तभी लाभ पहुंचाएंगी जब आप सही आहार का पालन करेंगे।

  • क्या खाएं: शरीर की अग्नि को बढ़ाने के लिए हमेशा गर्म, हल्का और सुपाच्य भोजन करें। पुरानी मूंग दाल, जौ, बाजरा और लौकी-तोरई का प्रयोग करें। भोजन में धनिया, जीरा, अदरक, हल्दी और दालचीनी का भरपूर उपयोग करें जो मेटाबॉलिज्म तेज करते हैं और इंसुलिन सुधारते हैं।
  • क्या न खाएं: ठंडा पानी, कोल्ड ड्रिंक, कच्चा सलाद, मैदा और चीनी। तुरंत बंद कर दें। भारी डेयरी उत्पाद (विशेषकर पनीर और पैकेट का दूध) और सोयाबीन (Soy) के उत्पादों से सख्त परहेज करें क्योंकि ये PCOD में सिस्ट बढ़ाते हैं और थायरॉइड के काम को धीमा करते हैं (Goitrogens)।

जीवा आयुर्वेद में हम मरीजों की जांच कैसे करते हैं?

हम मानते हैं कि हर इंसान का शरीर बिल्कुल अलग होता है, इसलिए इन दोनों बीमारियों का एक साथ पनपना हर किसी में एक जैसा नहीं हो सकता। हमारे विशेषज्ञ आयुर्वेदिक डॉक्टर इलाज शुरू करने से पहले मरीज की बहुत गहराई से जांच करते हैं।

डॉक्टर द्वारा जांच के मुख्य कदम:

  • प्रकृति और दोषों की जांच: सबसे पहले बातचीत और नाड़ी परीक्षा के आधार पर यह समझना कि मरीज के शरीर में कफ और वात का स्तर कितना बिगड़ा हुआ है और अग्नि पूरी तरह से बुझ चुकी है या नहीं।
  • लक्षणों की बारीकी से पहचान: यह समझना कि माहवारी कितने दिन रुकती है, वजन किस तेजी से बढ़ रहा है, और क्या अत्यधिक ठंड लगना या बाल झड़ना जैसी समस्याएं भी साथ चल रही हैं।
  • खान-पान और मानसिक तनाव का मूल्यांकन: मरीज के रोजमर्रा के जीवन को समझना। यह पता लगाना कि क्या वह अत्यधिक तनाव में है या गलत समय पर भोजन कर रही है, जिससे 'आम' का संचय हो रहा है।
  • बीमारी की असली जड़ पकड़ना: सारी बातों को समझकर यह तय करना कि क्या थायरॉइड ने PCOD को जन्म दिया है, या PCOD के इंसुलिन रेजिस्टेंस ने थायरॉइड को धीमा किया है, ताकि उसी जड़ पर सीधा वार किया जा सके।

हमारे यहाँ आपके इलाज का सफर

जीवा आयुर्वेद में, इलाज की हर प्रक्रिया को एक बहुत ही व्यवस्थित और सुचारू तरीके से किया जाता है ताकि आपको आयुर्वेदिक इलाज का पूरी तरह से व्यक्तिगत और प्रभावी अनुभव मिल सके।

संपर्क की जानकारी दें: अपनी जानकारी देने के बाद, आप बातचीत की प्रक्रिया शुरू करने के लिए सीधे 0129 4264323 पर भी हमसे जुड़ सकते हैं।

मिलने का समय पक्का करना: जीवा आयुर्वेद में, हमारे अनुभवी और प्रशिक्षित आयुर्वेदिक डॉक्टरों के साथ आपके मिलने का समय तय किया जाता है। आप अपनी सुविधा के अनुसार बातचीत का माध्यम भी चुन सकते हैं:

क्लिनिक: जीवा आयुर्वेद के कई शहरों में 88 से ज्यादा क्लिनिक हैं, जिससे आप हमारे सबसे पास वाले क्लिनिक में जाकर आमने-सामने बातचीत कर सकते हैं और इलाज पा सकते हैं।

वीडियो के जरिए बातचीत, केवल 49 रुपये में: अगर आपके शहर में जीवा आयुर्वेद का क्लिनिक नहीं है, तो भी आप डॉक्टर के साथ ऑनलाइन बातचीत कर सकते हैं। यह सुविधा भारी छूट के साथ सिर्फ 49 रुपये में उपलब्ध है, जबकि इसकी सामान्य कीमत 299 रुपये है। बस हमें 0129 4264323 पर कॉल करें और अपने घर बैठे आराम से हमारे अनुभवी और कुशल आयुर्वेदिक डॉक्टरों से जुड़ें।

गहराई से बीमारी की पहचान: हमारे अनुभवी और कुशल डॉक्टर आपसे बात करते हैं और परेशानी की मुख्य वजह का पता लगाने के लिए आपकी समस्या और उसके लक्षणों को समझने की पूरी कोशिश करते हैं।

जड़ से इलाज की योजना: बीमारी की पहचान के अनुसार, इलाज की एक योजना तैयार की जाती है, और प्राकृतिक जड़ी-बूटियों वाली दवाओं का उपयोग करके आपके लिए पूरी तरह से एक विशेष इलाज दिया जाता है।

सुधार पर नजर रखना: नियमित रूप से संपर्क में रहने से आपके स्वास्थ्य में हो रहे सुधार को देखने में मदद मिलती है और जरूरत पड़ने पर इलाज में बदलाव भी किया जा सकता है।

ठीक होने में लगने वाला समय

प्राकृतिक चिकित्सा में शरीर को भीतर से ठीक होने, 'आम' को जड़ से समाप्त करने और दो-दो ग्रंथियों (थायरॉइड और ओवरी) को दोबारा काम पर लगाने के लिए थोड़ा समय चाहिए होता है। आमतौर पर, दीपन-पाचन औषधियों और कचनार गुग्गुल के सेवन से 3 से 4 हफ्तों के भीतर ही सुबह की भयंकर सुस्ती, गैस और चेहरे की सूजन में कमी दिखने लगती है। हालांकि, शरीर को पूरी तरह 'आम' मुक्त करने, माहवारी को प्राकृतिक रूप से नियमित करने और बिना कारण बढ़ते वजन को थामने में 3 से 6 महीने का सख्त अनुशासित समय लग सकता है।

आप किन परिणामों की उम्मीद कर सकते हैं?

जीवा आयुर्वेद के अनुशासित उपचार और शोधन के बाद आप अपने शरीर में एक अद्भुत हल्कापन और ऊर्जा महसूस करेंगी। रोज सुबह खाई जाने वाली थायरॉइड की गोली और रात को खाई जाने वाली माहवारी की कृत्रिम गोलियों से धीरे-धीरे हमेशा के लिए छुटकारा मिल जाएगा। आपका वजन प्राकृतिक रूप से कम होने लगेगा, सिर के बाल झड़ने बंद होंगे, और सबसे महत्वपूर्ण बात—आपका मासिक चक्र बिना किसी दर्द या दवा के प्राकृतिक रूप से नियमित हो जाएगा, जिससे आपके गर्भधारण (Fertility) की संभावनाएं पूरी तरह से स्वस्थ हो जाएंगी।

मरीजों के अनुभव

“मैं पीसीओडी से पीड़ित थी, जिसके लक्षणों में चेहरे पर अनचाहे बाल आना, अनियमित मासिक धर्म और वजन बढ़ना शामिल थे। मैंने एलोपैथिक और होम्योपैथिक डॉक्टरों से परामर्श लिया और हिर्सुटिज़्म के लिए लेज़र थेरेपी भी करवाई, लेकिन सब व्यर्थ रहा। मैंने यूट्यूब पर जिवा के कुछ वीडियो देखे और डॉक्टर से परामर्श लिया। उन्होंने धैर्यपूर्वक मेरी समस्या सुनी और पूरे उपचार के दौरान मेरा पूरा सहयोग किया। मैंने अपनी जीवनशैली में भी कुछ बदलाव किए, जिससे मेरी स्वास्थ्य स्थिति में सुधार हुआ। धन्यवाद जिवा आयुर्वेद!”

डॉ. खुशबू गुप्ता

फरीदाबाद

मरीज जीवा आयुर्वेद पर भरोसा क्यों करते हैं?

कुछ प्रमुख कारण जिनकी वजह से लोग Jiva Ayurveda पर भरोसा करते हैं:

  • मूल कारण पर आधारित उपचार: आयुर्वेद में PCOD और थायरॉइड को अलग-अलग रसायनों से दबाने के बजाय उस एक मूल कारण (बुझी हुई पाचन अग्नि और 'आम' का संचय) को समझने पर जोर दिया जाता है।
  • अनुभवी आयुर्वेदिक चिकित्सकों की टीम: Jiva Ayurveda के पास अनुभवी आयुर्वेदिक डॉक्टरों की एक बड़ी टीम है जो प्रत्येक मरीज की स्थिति का विस्तृत मूल्यांकन करने के बाद ही उपचार की सलाह देती है।
  • व्यक्तिगत “Ayunique” उपचार दृष्टिकोण: हर व्यक्ति की प्रकृति और स्वास्थ्य स्थिति अलग होती है। इसलिए उपचार योजना भी व्यक्तिगत रूप से तैयार की जाती है।
  • समग्र उपचार दृष्टिकोण: आयुर्वेदिक देखभाल केवल औषधियों तक सीमित नहीं होती। इसमें आहार सुधार और तनाव प्रबंधन जैसी तकनीकों को भी शामिल किया जाता है।
  • लगातार सुधार: नियमित रूप से दवाओं और सुझाए गए जीवनशैली बदलावों का पालन करने वाले मरीजों ने अपने स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण सुधार महसूस किया है और धीरे-धीरे उनकी रसायनों पर निर्भरता खत्म हो जाती है।

जीवा आयुर्वेद में इलाज का अनुमानित खर्च

आपके स्वास्थ्य के लिए आवश्यक आर्थिक निवेश को समझना महत्वपूर्ण है। जीवा आयुर्वेद में, हम अपनी सेवाओं के खर्च में पूरी पारदर्शिता रखते हैं, जिससे आप अपनी चिकित्सीय जरूरतों के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प चुन सकें।

इलाज का खर्च

जो मरीज मानक और निरंतर देखभाल चाहते हैं, उनके लिए दवा और परामर्श का मासिक खर्च आमतौर पर ₹3,000 से ₹3,500 के बीच होता है। कृपया ध्यान दें कि यह एक अनुमानित आधार है। अंतिम खर्च मरीज की स्थिति की सटीक प्रकृति और गंभीरता पर निर्भर करता है।

प्रोटोकॉल

अधिक व्यापक और व्यवस्थित दृष्टिकोण के लिए, हम विशेष पैकेज प्रोटोकॉल प्रदान करते हैं। ये योजनाएं शारीरिक लक्षणों और समग्र जीवनशैली सुधार दोनों को संबोधित करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं। पैकेज में शामिल हैं:

इस प्रोटोकॉल के खर्च में ₹15,000 से ₹40,000 तक का एकमुश्त भुगतान शामिल है, जो इलाज की पूरी 3 से 4 महीने की अवधि को कवर करता है।

जीवाग्राम

गहन और पूरी तरह से समर्पित देखभाल की आवश्यकता वाले मरीजों के लिए, हमारे जीवाग्राम केंद्र उपचार का बेहतरीन अनुभव प्रदान करते हैं। जीवाग्राम एक शांत, पर्यावरण के अनुकूल माहौल में स्थित एक समग्र स्वास्थ्य केंद्र है, और यह प्रदान करता है:

  • प्रामाणिक पंचकर्म चिकित्सा
  • सात्विक भोजन
  • आधुनिक उपचार सेवाएं
  • आरामदायक आवास
  • जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने वाली कई अन्य सुविधाएं

जीवाग्राम में 7-दिनों के स्वास्थ्य प्रवास का खर्च लगभग ₹1 लाख है, जो आपके शरीर और दिमाग को फिर से तरोताजा करने में मदद करने के लिए निरंतर व्यक्तिगत देखभाल सुनिश्चित करता है।

आधुनिक उपचार और आयुर्वेदिक उपचार में अंतर

आधुनिक चिकित्सा PCOD और थायरॉइड को दो अलग-अलग बीमारियों के रूप में देखती है। इसके लिए वे थायरॉइड को सिंथेटिक हार्मोन (थायरोक्सिन) से और PCOD को गर्भनिरोधक गोलियों (OCPs) या मेटफॉर्मिन से कंट्रोल करने की कोशिश करते हैं। ये दवाएं केवल आपके खून में हार्मोन का स्तर ऊपर-नीचे करती हैं, लेकिन उस सुस्त पड़े मेटाबॉलिज्म और इंसुलिन रेजिस्टेंस को ठीक नहीं करतीं जो असल में इन बीमारियों का जनक है। दवा छोड़ते ही बीमारियां दुगनी तेजी से लौटती हैं।

इसके विपरीत, आयुर्वेदिक उपचार इन दोनों बीमारियों को एक ही 'मेटाबॉलिक सिंड्रोम' (अग्निमांद्य) का हिस्सा मानता है। आयुर्वेद प्राकृतिक जड़ी-बूटियों (जैसे कचनार और अश्वगंधा) से पाचन अग्नि को बढ़ाता है, इंसुलिन रेजिस्टेंस को जड़ से खत्म करता है, और शरीर में जमे 'आम' को बाहर निकालता है। इससे थायरॉइड ग्रंथि और ओवरी दोनों प्राकृतिक रूप से अपना काम दोबारा शुरू कर देती हैं। यह रोग का सतही प्रबंधन नहीं, बल्कि पूर्ण रूप से जड़ से उपचार है।

डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

PCOD और थायरॉइड के लक्षण आम शारीरिक बदलाव लग सकते हैं, लेकिन अगर आपको निम्नलिखित चेतावनी संकेत दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना आवश्यक है:

  • डाइटिंग और एक्सरसाइज करने के बावजूद वजन का हर हफ्ते बढ़ना और पेट पर भयंकर चर्बी जमा होना।
  • माहवारी का 3 महीने से ज्यादा रुक जाना या माहवारी आने पर बहुत भयंकर ब्लीडिंग होना।
  • गर्दन और अंडरआर्म्स की त्वचा का बहुत ज्यादा काला, मोटा और खुरदुरा हो जाना (Acanthosis Nigricans)।
  • दिन भर ऐसी भयंकर थकान रहना कि बिस्तर से उठने या कोई काम करने की हिम्मत ही न जुटना।
  • चेहरे पर पुरुषों की तरह कड़े बाल आ जाना और सिर से मांग चौड़ी हो जाना।

निष्कर्ष

PCOD और थायरॉइड का एक साथ होना कोई प्राकृतिक दुर्भाग्य नहीं है। यह आपके शरीर की एक अत्यंत गंभीर पुकार है जो यह बता रही है कि आपके भीतर पाचन अग्नि पूरी तरह से बुझ चुकी है, इंसुलिन रेजिस्टेंस चरम पर है और 'आम' (विषैले कचरे) ने आपके पूरे एंडोक्राइन सिस्टम को जाम कर दिया है। रोजाना बाजार के सिंथेटिक हार्मोन्स (बर्थ कंट्रोल और थायरॉइड पिल्स) खाकर इन बीमारियों को दबाना शरीर के साथ बहुत बड़ा अन्याय है। आयुर्वेद की प्राकृतिक और शोधन चिकित्सा की शरण में जाकर ही आप इस भयंकर हार्मोनल असंतुलन को जड़ से शांत कर सकते हैं।

FAQs

ये दोनों एक-दूसरे को भड़काते हैं। थायरॉइड के सुस्त होने से मेटाबॉलिज्म धीमा होता है, जिससे इंसुलिन बढ़ता है और PCOD हो जाता है। वहीं, PCOD की सूजन और हार्मोनल असंतुलन थायरॉइड ग्रंथि पर बुरा असर डालते हैं। दोनों की जड़ खराब मेटाबॉलिज्म ही है।

जी हां, बिल्कुल संभव है। आयुर्वेद इन दोनों को अलग-अलग बीमारी नहीं मानता। आयुर्वेद जठराग्नि (पाचन अग्नि) को बढ़ाकर 'आम' (कचरे) को खत्म करता है, जिससे ओवरी और थायरॉइड ग्रंथि दोनों स्वतः ही ठीक होने लगती हैं।

कचनार गुग्गुल शरीर से 'कफ' और सूजन को काटने की बेहतरीन दवा है। यह ओवरी में बनी सिस्ट्स (Cysts) को पिघलाता है और थायरॉइड ग्रंथि की सूजन (Goiter/Hypothyroidism) को दूर कर उसे सक्रिय करता है।

थायरॉइड सुस्त होने से आपका बेसल मेटाबॉलिक रेट (BMR) गिर चुका है, और PCOD के कारण आपके शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस है, जो शरीर को 'फैट स्टोरेज' (चर्बी जमा करने के) मोड में रखता है। जब तक इंसुलिन और मेटाबॉलिज्म ठीक नहीं होंगे, केवल डाइटिंग से वजन कम नहीं होगा।

नहीं। व्यावसायिक डेयरी उत्पादों में मौजूद कृत्रिम हार्मोन्स PCOD को भड़काते हैं, और दूध पचने में भारी होने के कारण कफ और 'आम' बढ़ाता है जो थायरॉइड को सुस्त करता है। डेयरी उत्पादों से बचना ही बेहतर है।

गले का कालापन मैल नहीं है, यह भयंकर इंसुलिन रेजिस्टेंस का संकेत है। जब आप अपनी डाइट से चीनी/मैदा हटाएंगी और आयुर्वेद के माध्यम से इंसुलिन को संतुलित करेंगी, तो यह कालापन अपने आप खत्म हो जाएगा।

बिल्कुल। अत्यधिक तनाव से 'कोर्टिसोल' हार्मोन बढ़ता है। यह कोर्टिसोल थायरॉइड हार्मोन को कोशिकाओं में जाने से ब्लॉक कर देता है और साथ ही ओवरी को एण्ड्रोजन (पुरुष हार्मोन) बनाने के लिए मजबूर करता है।

उद्वर्तन एक आयुर्वेदिक प्रक्रिया है जिसमें सूखी और गर्म जड़ी-बूटियों के चूर्ण से मालिश की जाती है। यह त्वचा के नीचे जमे हुए कफ और चर्बी को पिघलाकर निकालती है, खून का प्रवाह तेज करती है और वजन घटाने में जादुई असर करती है।

शरीर में 'आम' (Toxins) और इंसुलिन स्पाइक को रोकने के लिए मैदा, बेकरी की चीजें, जंक फूड, कोल्ड ड्रिंक्स, सोयाबीन (Soy), कच्ची पत्तागोभी और चीनी से सख्त परहेज करना चाहिए।

पाचन अग्नि को ठीक करने और जड़ी-बूटियों के प्रभाव से 3-4 हफ्तों में ही ऊर्जा का स्तर बढ़ जाता है और सूजन कम होती है, लेकिन हार्मोन को पूरी तरह संतुलित करने और माहवारी को नियमित करने में 3 से 6 महीने का समय लग सकता है।

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