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Periods delay होते ही medicine लेना सही है या पहले cause समझना जरूरी है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 23 Jul, 2026
  • category-iconUpdated on 23 Jul, 2026
  • category-iconWomen's Health
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महीने की वह तारीख जब पास आती है, तो हर महिला के दिमाग में एक कैलेंडर चलने लगता है। पीरियड्स महिलाओं के शरीर का एक बेहद ज़रूरी हिस्सा हैं। यह सिर्फ एक मंथली साइकिल नहीं है, बल्कि यह बताता है कि शरीर के अंदर सब कुछ सही से काम कर रहा है या नहीं। लेकिन कई बार ऐसा होता है कि पीरियड्स की तारीख निकल जाती है और पीरियड्स नहीं आते।

ऐसे में सबसे पहला खयाल यही आता है कि "कहीं कुछ गड़बड़ तो नहीं?" और बहुत सी लड़कियां या महिलाएं बिना ज़्यादा सोचे-समझे पीरियड्स जल्दी लाने वाली कोई दवा खा लेती हैं। लेकिन क्या पीरियड्स लेट होते ही दवा खा लेना सही है? या फिर शरीर के इस बदलाव के पीछे छिपे असली कारण को समझना ज़्यादा ज़रूरी है? 

पीरियड्स लेट होना कितना सामान्य है?

हर महिला का शरीर अलग होता है और उसी तरह उसकी साइकिल भी अलग होती है। ज़रूरी नहीं कि हर किसी को ठीक 28 दिन में ही पीरियड्स आएं। कुछ महिलाओं का साइकिल 30 दिन का होता है, तो कुछ का 35 दिन तक भी जा सकता है।

अगर आपके पीरियड्स 2-4 दिन ऊपर-नीचे हो रहे हैं, तो इसमें घबराने वाली कोई बात नहीं है। यह बिल्कुल नॉर्मल है। हमारा शरीर कोई घड़ी या मशीन नहीं है जो हर बार एकदम फिक्स टाइम पर चले। कभी-कभी मौसम बदलने, थोड़ी थकान होने या रूटीन में बदलाव आने से भी कुछ दिनों की देरी हो जाती है। हर बार देरी का मतलब यह नहीं होता कि आपको कोई बीमारी है।

पीरियड्स लेट होने के सामान्य कारण क्या हो सकते हैं?

पीरियड्स लेट होने के पीछे हमेशा कोई बड़ी वजह नहीं होती। हमारी रोज़मर्रा की ज़िन्दगी की कुछ छोटी-छोटी चीजें भी इसका कारण बन सकती हैं:

  • तनाव और इमोशनल बदलाव: आज की भागदौड़ भरी ज़िन्दगी में टेंशन बहुत आम बात है। ऑफिस का काम, पढ़ाई का प्रेशर या घर की कोई चिंता, ये सब आपके पीरियड्स को लेट कर सकते हैं।
  • लाइफस्टाइल और नींद: अगर आप रात-रात भर जाग रहे हैं, आपका सोने का कोई फिक्स टाइम नहीं है, या आप लगातार सफर कर रहे हैं, तो शरीर का रूटीन बिगड़ जाता है।
  • डाइट और वज़न: अचानक से डाइटिंग शुरू कर देना, बहुत ज़्यादा जंक फूड खाना, या वज़न का अचानक से बढ़ना/घटना भी इसका एक बड़ा कारण है।
  • हार्मोनल इंबैलेंस: शरीर के अंदर केमिकल्स (हार्मोन) का थोड़ा सा भी ऊपर-नीचे होना पीरियड्स की साइकिल को डिस्टर्ब कर देता है।

क्या पीरियड्स लेट होते ही दवा लेना सही है?

बिल्कुल नहीं। पीरियड्स लेट होने पर खुद से दवा लेकर उन्हें ज़बरदस्ती लाना एक बहुत बड़ी गलती हो सकती है।

इसे ऐसे समझिए कि आपके घर में आग लगने पर अलार्म बज रहा है, और आप आग बुझाने के बजाय सिर्फ अलार्म को बंद कर देते हैं। शरीर जब पीरियड्स लेट करता है, तो वह आपको एक मैसेज दे रहा होता है कि "अंदर कुछ ठीक नहीं है, ध्यान दो।"

अगर आप बिना कारण जाने सिर्फ दवा खा लेंगी, तो आपको एक बार तो पीरियड्स आ जाएंगे, लेकिन जो असली समस्या (जैसे स्ट्रेस, थायरॉयड या कोई और कमी) है, वह अंदर ही अंदर बढ़ती रहेगी। इसलिए सिर्फ लक्षणों को दबाना सही नहीं है, बीमारी की जड़ को पकड़ना ज़रूरी है।

हार्मोनड् का पीरियड्स साइकिल में क्या रोल होता है?

हमारे शरीर में पीरियड्स को कंट्रोल करने के लिए मुख्य रूप से दो हार्मोन काम करते हैं, एस्ट्रोज़न (Estrogen) और प्रोज़ेस्टेरोन (Progesterone)। आप इन्हें शरीर के 'मैसेंजर' या संदेशवाहक मान सकते हैं।

जब ये दोनों मैसेंजर अपना काम सही समय पर करते हैं, तो ओवरी (अंडाशय) से अंडा समय पर निकलता है (जिसे Ovulation कहते हैं) और पीरियड्स एकदम टाइम पर आते हैं। लेकिन अगर आपकी लाइफस्टाइल की वजह से ये मैसेंजर कंफ्यूज हो जाएं और अपना काम ठीक से न करें, तो पूरी साइकिल हिल जाती है और पीरियड्स लेट हो जाते हैं।

प्रेग्नेंसी के अलावा कौन-कौन से कारण  पीरियड्स लेट कर सकते हैं?

अक्सर पीरियड्स लेट होने पर लोग सबसे पहले प्रेग्नेंसी के बारे में सोचते हैं। लेकिन अगर प्रेग्नेंसी नहीं है, तो ये कारण हो सकते हैं:

  • PCOS या PCOD: आजकल लड़कियों में यह समस्या बहुत आम हो गई है। इसमें हार्मोन्स बिगड़ जाते हैं, जिससे अंडे ठीक से नहीं बन पाते और पीरियड्स महीनों तक नहीं आते। चेहरे पर पिंपल्स आना या बाल उगना भी इसके लक्षण हैं।
  • थायरॉयड: गले में मौजूद थायरॉयड ग्रंथि शरीर के वज़न और एनर्जी को कंट्रोल करती है। इसके सुस्त या तेज होने से पीरियड्स की साइकिल तुरंत बिगड़ जाती है।
  • बहुत ज़्यादा एक्सरसाइज: अगर आप अचानक से जिम में बहुत हैवी वर्कआउट करने लगी हैं या शरीर का फैट बहुत कम हो गया है, तो भी शरीर पीरियड्स को रोक देता है।

एक्सपर्ट डॉक्टर की विशेष सलाह

पीरियड्स लेट होते ही बिना डॉक्टरी जांच के दवाएं लेना नुकसानदेह हो सकता है। पीरियड्स में 2-4 दिनों की देरी तनाव, नींद की कमी या डाइट में बदलाव से होना सामान्य है, लेकिन लगातार देरी के पीछे PCOS, थायरॉयड या गंभीर हार्मोनल असंतुलन जैसे कारण हो सकते हैं।

बिना वजह जाने दवा खाकर लक्षणों को दबाने के बजाय, अपनी लाइफस्टाइल सुधारें, तनाव कम करें और पौष्टिक आहार लें। यदि आपके पीरियड्स लगातार 2-3 महीने तक न आएं, बहुत अधिक असहनीय दर्द हो, या अचानक वजन में बड़ा बदलाव दिखे, तो बिना घबराए तुरंत किसी स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लें।

स्ट्रेस और मेन्टल हेल्थ का पीरियड्स पर असर

हमारा मन और हमारा शरीर एक ही तार से जुड़े हैं। जब आप बहुत ज़्यादा टेंशन लेती हैं, तो शरीर 'कॉर्टिसोल' (Cortisol) नाम का एक स्ट्रेस हार्मोन बनाता है।

जब कॉर्टिसोल बढ़ता है, तो वह आपके शरीर को सिग्नल देता है कि "अभी कोई खतरा है, इसलिए अभी बाकी गैर-ज़रूरी काम (जैसे पीरियड्स) को प्रभावित कर सकता है।" इसी वजह से जब आप एग्जाम, जॉब या किसी रिश्ते को लेकर बहुत परेशान होती हैं, तो आपके पीरियड्स लेट हो जाते हैं। इसलिए दिमाग का शांत रहना बहुत ज़रूरी है।

जीवनशैली की आदते जो पीरियड्स को प्रभावित करती हैं

आप सुबह उठने से लेकर रात सोने तक क्या करती हैं, उसका सीधा असर आपके पीरियड्स पर पड़ता है।

  • अगर आप बाहर का पैकेट बंद या मैदे वाला खाना ज़्यादा खाती हैं, तो शरीर को ज़रूरी पोषण नहीं मिलता।
  • पूरा दिन कुर्सी या बिस्तर पर बैठे रहना और कोई फिजिकल एक्टिविटी न करना।
  • रात को मोबाइल देखते हुए लेट सोना और सुबह लेट उठना।

ये छोटी-छोटी आदतें धीरे-धीरे आपके पूरे हार्मोनल सिस्टम को खराब कर देती हैं।

पीरियड्स लेट होने पर किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

अगर इस महीने आपके पीरियड्स लेट हो गए हैं, तो पैनिक (घबराहट) न करें।

  • सबसे पहले शांत रहें और अपनी साइकिल को ट्रैक करें (नोट करें कि पिछली बार कब आए थे)।
  • यह सोचें कि क्या पिछले कुछ दिनों में आपने बहुत ज़्यादा टेंशन ली है?
  • क्या आपकी नींद पूरी हो रही है?
  • अपने शरीर के बाकी इशारों को समझें। क्या वज़न अचानक बढ़ रहा है? या बाल ज़्यादा झड़ रहे हैं? इन बातों पर ध्यान देना सबसे पहला और ज़रूरी कदम है।

आयुर्वेद इसे कसे समझता है?

आयुर्वेद हमारे शरीर को बहुत ही नेचुरल तरीके से देखता है। आयुर्वेद के अनुसार, महिलाओं के पीरियड्स उनके शरीर की सफाई की एक प्राकृतिक प्रक्रिया है।

जब हमारे शरीर में 'वात, पित्त और कफ' (दोष) का बैलेंस बिगड़ता है, या हमारा पाचन खराब होता है, तो यह सफाई की प्रक्रिया रुक जाती है। आयुर्वेद मानता है कि सही समय पर सोना, सही और सादा खाना खाना और शरीर को अंदर से खुश रखना ही पीरियड्स को रेगुलर रखने का सबसे अच्छा तरीका है।

पीरियड्स की साइकिल को ठीक रखने क लिए जीवनशैली में कुछ आसान बदलाव 

अगर आप चाहती हैं कि आपके पीरियड्स हमेशा सही समय पर आएं, तो बस अपनी रूटीन में ये आसान बदलाव करें:

  • अच्छा खाना: अपनी डाइट में हरी सब्जियां, ताजे फल, दालें और ड्राई फ्रूट्स शामिल करें। शरीर को अंदर से ताकत मिलेगी तो वो सही से काम करेगा।
  • टेंशन को कम करें: ज़्यादा सोचना बंद करें। दिन में 10 मिनट गहरी सांसें लें, कोई अच्छी किताब पढ़ें या अपना पसंदीदा म्यूजिक सुनें।
  • नींद का रूटीन: रात को 7-8 घंटे की गहरी नींद लें। कोशिश करें कि रोज़ एक ही समय पर सोएं और जागें।
  • थोड़ी सी एक्सरसाइज: दिन में कम से कम 30 मिनट तेज पैदल चलें या हल्का योग करें।

कब डॉक्टर से सलाह लेना ज़रूरी हो जाता है?

कुछ दिन की देरी नॉर्मल है, लेकिन आपको डॉक्टर के पास तब ज़रूर जाना चाहिए जब:

  • आपके पीरियड्स लगातार 2-3 महीने तक न आएं।
  • जब भी पीरियड्स आएं, तो दर्द इतना हो कि बर्दाश्त के बाहर हो जाए।
  • महीने में दो-तीन बार ब्लीडिंग होने लगे।
  • अचानक से वज़न बहुत तेजी से बढ़ने या घटने लगे।

निष्कर्ष

पूरी बात का निचोड़ यह है कि पीरियड्स का लेट होना कोई अलार्म है जो शरीर आपको दे रहा है। इसे चुप कराने के लिए तुरंत दवाइयों का सहारा लेना बिल्कुल भी सही नहीं है।

सबसे पहले यह समझने की कोशिश करें कि आखिर आपके शरीर का रूटीन क्यों बिगड़ा है। अपनी लाइफस्टाइल को सुधारें, टेंशन कम लें, और अच्छा खाना खाएं। जब आप शरीर की बात सुनकर अंदरूनी कमी को दूर करेंगी, तो पीरियड्स अपने आप नॉर्मल हो जाएंगे। शरीर को बीमारियों का घर बनाने से अच्छा है कि हम उसकी भाषा को समझें और उसे प्राकृतिक तरीके से हील (ठीक) होने दें।

References

Physiology, Menstrual Cycle - StatPearls - NCBI Bookshelf 

The Normal Menstrual Cycle and the Control of Ovulation - Endotext - NCBI Bookshelf

The normal menstrual cycle in women - PubMed

Your menstrual cycle | Office on Women's Health

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

हाँ। कुछ दिनों का आगे-पीछे होना सामान्य माना जाता है। यदि यह बदलाव बार-बार बहुत अधिक होने लगे, तो कारण जानने के लिए चिकित्सक से सलाह लेना उचित है।

हाँ। यात्रा, थकान, दिनचर्या और नींद में बदलाव के कारण कुछ महिलाओं में मासिक धर्म कुछ दिनों के लिए आगे-पीछे हो सकता है।

हाँ। बच्चे को स्तनपान कराने के दौरान कई महिलाओं में कुछ समय तक मासिक धर्म अनियमित या बंद रह सकता है। यह कई मामलों में सामान्य होता है।

हाँ। शरीर में आवश्यक पोषक तत्वों की कमी होने पर हार्मोनों का संतुलन प्रभावित हो सकता है, जिससे मासिक धर्म की नियमितता पर असर पड़ सकता है।

शुरुआती कुछ वर्षों तक मासिक धर्म का अनियमित होना सामान्य हो सकता है। यदि यह लंबे समय तक बना रहे, तो चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर होता है।

नहीं। गर्भधारण इसके कई कारणों में से केवल एक है। तनाव, दिनचर्या में बदलाव, पोषण की कमी और अन्य कारण भी इसकी वजह हो सकते हैं।

हर बार ऐसा नहीं होता। लेकिन यदि लंबे समय तक मासिक धर्म अनियमित रहे, तो उसके कारण की समय पर जांच और उपचार कराना आवश्यक है।

हाँ। इससे अपने मासिक चक्र को समझना आसान होता है और किसी भी असामान्य बदलाव का पता समय रहते चल सकता है।

हाँ। यदि बाकी समय आपका मासिक चक्र नियमित रहता है, तो कभी-कभार कुछ दिनों की देरी सामान्य हो सकती है।

नहीं। बार-बार ऐसी दवाओं का सेवन करने से मूल कारण छिप सकता है। इसलिए पहले कारण जानना और फिर उचित उपचार कराना ही सही तरीका है।

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