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Heavy workout के बाद muscle cramps क्यों हो सकते हैं?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

जिम में आप अपनी लाइफ का बेस्ट स्क्वाट लगाने जा रहे हैं। सब कुछ परफेक्ट चल रहा होता है। अचानक... बाम! पिंडली या पैर की मांसपेशी में ऐसा भयानक खिंचाव आता है कि आप दर्द से कराह उठते हैं। सीधे ज़मीन पर। वर्कआउट करने वाले लगभग हर इंसान ने इस अनचाहे मेहमान यानी 'मसल क्रैम्प' (Muscle Cramp) का स्वाद कभी न कभी ज़रूर चखा है।

यह मांसपेशियों की ऐंठन कभी तो कुछ सेकंड्स में गायब हो जाती है, तो कभी अगले दो दिन तक उठने-बैठने में आफत ला देती है। सवाल आना लाज़मी है कि जब हम वर्कआउट शरीर को मजबूत बनाने के लिए कर रहे हैं, तो फिर ये मसल्स इस तरह बगावत क्यों कर देती हैं? इसकी वजह सिर्फ भारी वजन उठाना नहीं है, बल्कि वर्कआउट के दौरान की जाने वाली कुछ बेहद मामूली गलतियाँ हैं।  

क्या हर Muscle Cramp चिंता की बात होती है?

जब आप अपनी क्षमता से बढ़कर कोई हैवी वर्कआउट या क्रॉसफिट सेशन करते हैं, तो मांसपेशियों में हल्की-फुल्की ऐंठन होना एक बेहद आम बात है। यह इस बात का संकेत है कि आपकी मसल्स ने आज अपनी लिमिट से ज़्यादा काम किया है। अगर यह ऐंठन कुछ ही मिनटों में स्ट्रेचिंग करने या पानी पीने से ठीक हो जाती है, तो इसमें घबराने की कोई ज़रूरत नहीं है।

लेकिन, अगर यह मसल क्रैम्प आपकी रोज़ की कहानी बन चुका है यानी हर वर्कआउट सेशन के बाद आपको असहनीय दर्द से गुज़रना पड़ता है, तो इसे हल्के में बिल्कुल न लें। बार-बार होने वाली तीव्र ऐंठन इस बात का अलार्म है कि आपके शरीर में या तो न्यूट्रिशन का बहुत बड़ा गैप है या फिर रिकवरी का सिस्टम पूरी तरह क्रैश हो चुका है।

आखिर Heavy Workout के बाद ऐसा क्यों होता है?

जब आप जिम में भारी वजन उठाते हैं, तो आपकी मांसपेशियों पर अचानक बहुत ज़्यादा प्रेशर आता है। इस एक्स्ट्रा लोड को संभालने के लिए मसल्स को लगातार सिकुड़ना और फैलना पड़ता है। जब मांसपेशियां बिना रुके यह काम करती हैं, तो वे अंदरूनी तौर पर बुरी तरह थक जाती हैं, जिससे उनका न्यूरोमस्कुलर कंट्रोल बिगड़ जाता है और वे एक ही जगह लॉक हो जाती हैं।

इसके अलावा, हैवी वर्कआउट के बाद मसल क्रैम्प्स इस बात पर भी निर्भर करते हैं कि आपके शरीर की तैयारी कैसी थी। यदि आपने पिछले कुछ दिनों से ठीक से नींद नहीं ली है, या आपकी मांसपेशियां पिछले वर्कआउट की थकान से पूरी तरह उबर नहीं पाई हैं, तो थोड़ा सा भी अतिरिक्त दबाव उन्हें क्रैम्प मोड में धकेल देता है।

कौन-सी छोटी गलतियाँ Muscle Cramps का कारण बन सकती हैं?

अक्सर हम वर्कआउट की तकनीक पर तो पूरा ध्यान देते हैं, लेकिन उन बारीक आदतों को भूल जाते हैं जो पर्दे के पीछे खेल बिगाड़ रही होती हैं:

  • पर्याप्त पानी न पीना (Dehydration): पसीने के रूप में शरीर से भारी मात्रा में पानी बाहर निकल जाता है। अगर आप बीच-बीच में पानी नहीं पी रहे हैं, तो मांसपेशियों की कोशिकाएं सिकुड़ने लगती हैं।
  • वॉर्म-अप छोड़ देना: ठंडी और अकड़ी हुई मांसपेशियों पर सीधे भारी वजन का लोड डालना सीधे चोट और ऐंठन को दावत देना है।
  • अचानक बहुत ज़्यादा वर्कआउट करना: पहले ही दिन जोश-जोश में आकर अपनी क्षमता से दोगुना हैवी डम्बल उठा लेना।
  • कूल-डाउन न करना: वर्कआउट खत्म होने के तुरंत बाद बिना स्ट्रेचिंग किए सीधे घर के लिए निकल जाना।
  • शरीर को पर्याप्त आराम न देना: हफ्ते में सातों दिन बिना किसी रेस्ट-डे के जिम में पसीना बहाना, जिससे मसल्स को हील होने का मौका ही नहीं मिलता।

क्या खानपान का भी इससे कोई संबंध है?

बिल्कुल है, और यह संबंध बहुत गहरा है। मांसपेशियों को ठीक से काम करने के लिए सिर्फ प्रोटीन की नहीं, बल्कि कुछ बेहद जरूरी मिनरल्स की भी आवश्यकता होती है जिन्हें हम 'इलेक्ट्रोलाइट्स' कहते हैं। जब आप हैवी वर्कआउट करते हैं, तो पसीने के साथ आपके शरीर से सोडियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम और कैल्शियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स भी बह जाते हैं।

अगर आपके रोज़ के खाने में इन पोषक तत्वों की कमी है, तो शरीर का इलेक्ट्रिकल सिग्नल सिस्टम गड़बड़ा जाता है। मैग्नीशियम और पोटाशियम की कमी सीधे तौर पर मांसपेशियों की अकड़न के लिए ज़िम्मेदार होती है। इसलिए, यदि आपका खानपान संतुलित नहीं है, तो इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन के कारण मसल क्रैम्प्स का होना तय है।

ऐंठन होने पर तुरंत क्या करना चाहिए?

जैसे ही वर्कआउट के बीच में या बाद में आपको तेज क्रैम्प महसूस हो, तुरंत ये कदम उठाएं:

  • प्रभावित मांसपेशी को धीरे-धीरे स्ट्रेच करें: अगर पैर में क्रैम्प है, तो सीधे बैठ जाएं और पैर के अंगूठे को अपनी तरफ धीरे से खींचें। ज़बरदस्ती या झटका बिल्कुल न दें।
  • कुछ देर आराम करें: एक्सरसाइज को उसी वक्त रोक दें और उस हिस्से पर दोबारा दबाव न डालें।
  • पर्याप्त पानी या इलेक्ट्रोलाइट्स पिएँ: शरीर में पानी और नमक के संतुलन को तुरंत बहाल करने के लिए ओआरएस (ORS) या नारियल पानी पिएँ।
  • हल्की मालिश करें: अंगूठे या हथेलियों की मदद से ऐंठन वाली जगह पर हल्के हाथों से मसाज करें ताकि ब्लड सर्कुलेशन सुधरे।
  • ज़बरदस्ती व्यायाम न करें: "नो पेन, नो गेन" के चक्कर में दर्द के बावजूद वर्कआउट जारी रखने की बेवकूफी कतई न करें।

अगली बार Muscle Cramps से कैसे बचें?

अगर आप चाहते हैं कि आपका अगला जिम सेशन बिना किसी दर्दनाक रुकावट के पूरा हो, तो इन बातों को अपने रूटीन में बांध लीजिए:

  • तीव्रता धीरे-धीरे बढ़ाएँ: वजन या दौड़ने की स्पीड को हर हफ्ते थोड़ा-थोड़ा करके ही बढ़ाएं।
  • वॉर्म-अप और कूल-डाउन को न छोड़ें: वर्कआउट से पहले 10 मिनट डायनेमिक स्ट्रेचिंग और खत्म होने के बाद 10 मिनट स्टैटिक स्ट्रेचिंग को अनिवार्य बनाएं।
  • पर्याप्त नींद लें: रात की 7-8 घंटे की गहरी नींद ही वह समय है जब आपकी मांसपेशियां खुद की मरम्मत (repair) करती हैं।
  • संतुलित आहार लें: अपनी डाइट में केला (पोटैशियम के लिए), नट्स और हरी सब्जियां (मैग्नीशियम के लिए) ज़रूर शामिल करें।

आयुर्वेद मांसपेशियों की देखभाल को कैसे देखता है?

आयुर्वेद के नज़रिए से देखें तो मांसपेशियों में होने वाली ऐंठन या खिंचाव का सीधा संबंध शरीर में 'वात दोष' के बढ़ने से है। जब हम अपनी शारीरिक क्षमता से बहुत ज़्यादा भारी काम या अत्यधिक परिश्रम करते हैं, तो शरीर में रूखापन और वायु (वात) का प्रकोप बढ़ जाता है, जो मांसपेशियों को सिकोड़ देता है।

आयुर्वेद सलाह देता है कि व्यायाम हमेशा अपनी आधी क्षमता के अनुसार ही करना चाहिए, जहां तक शरीर सहज महसूस करे। वात को शांत करने और मांसपेशियों की रिकवरी के लिए वर्कआउट के बाद महानारायण तेल या तिल के तेल से हल्की मालिश (अभ्यंग) और गर्म पानी से स्नान को सर्वोत्तम माना गया है।

कब डॉक्टर से सलाह लेना ज़रूरी हो सकता है?

ज़्यादातर मसल क्रैम्प्स घरेलू देखभाल और सही लाइफस्टाइल से ठीक हो जाते हैं। लेकिन आपको कब समझ जाना चाहिए कि अब मामला डॉक्टर के केबिन तक पहुँच चुका है? इन लक्षणों पर गौर करें:

  • जब ऐंठन की समस्या बिना किसी भारी वर्कआउट के भी लगातार और बार-बार होने लगे।
  • अगर ऐंठन के बाद होने वाला दर्द कई घंटों या दिनों तक कम न हो और असहनीय हो जाए।
  • प्रभावित मांसपेशी वाले हिस्से पर साफ तौर पर सूजन या लालपन दिखाई दे।
  • पर्याप्त आराम, पानी और स्ट्रेचिंग के बावजूद समस्या में सुधार न दिखाई दे।

निष्कर्ष

हैवी वर्कआउट के बाद मसल क्रैम्प्स होना इस बात का सबूत है कि आपकी मांसपेशियां काम कर रही हैं, लेकिन साथ ही यह इस बात की चेतावनी भी है कि आप उनकी देखभाल में कोताही बरत रहे हैं। इसे कोई गंभीर बीमारी मानकर डरने की ज़रूरत नहीं है। अपनी ट्रेनिंग में सही वॉर्म-अप शामिल करके, हाइड्रेशन का पूरा ध्यान रखकर और शरीर को पूरा आराम देकर आप इस दर्दनाक ऐंठन को आसानी से बाय-बाय कह सकते हैं।

संदर्भ

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

हाँ, कभी-कभार या बहुत हैवी ट्रेनिंग सेशन के बाद हल्की ऐंठन होना बिल्कुल नॉर्मल है। लेकिन अगर यह हर दिन होने लगे, तो इस पर ध्यान दें।

बिल्कुल। डिहाइड्रेशन क्रैम्प्स की सबसे बड़ी वजहों में से एक है। जब शरीर में पानी कम होता है, तो मसल्स के सिग्नल्स ठीक से काम नहीं कर पाते।

हाँ, बिना वॉर्म-अप के मसल्स ठंडी और टाइट होती हैं। उन पर अचानक भारी लोड डालने से वे तुरंत खिंच जाती हैं।

हाँ। पसीने के रास्ते सोडियम, पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे जरूरी मिनरल्स बाहर निकल जाते हैं। इनकी कमी होते ही मांसपेशियां लॉक होने लगती हैं।

जी हाँ, तुरंत रुक जाएं। दर्द में भी ज़बरदस्ती एक्सरसाइज करते रहने से मसल टियर (मांसपेशी फटना) हो सकता है।

हाँ, नियमित स्ट्रेचिंग से मांसपेशियों का लचीलापन बढ़ता है और उनका ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है, जिससे क्रैम्प्स आने का चांस कम हो जाता है।

नहीं। सालों से जिम जा रहे अनुभवी बॉडीबिल्डर्स और एथलीट्स को भी ओवरट्रेनिंग या थकान के कारण क्रैम्प्स आ सकते हैं।

वर्कआउट के बाद प्रोटीन के साथ-साथ अच्छे कार्बोहाइड्रेट्स और इलेक्ट्रोलाइट्स युक्त चीजें लें। केला और नारियल पानी बेहतरीन विकल्प हैं।

अगर क्रैम्प के बाद उस जगह पर भारी सूजन आ जाए या दर्द के कारण आप पैर भी न रख पा रहे हों, तो यह गंभीर हो सकता है।

वर्कआउट से पहले 10 मिनट का वॉर्म-अप करें, पूरे वर्कआउट के दौरान पानी पीते रहें और डाइट में पोटैशियम और मैग्नीशियम से भरपूर चीज़ें रखें।

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