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Yoga digestion और stress में कैसे मदद कर सकता है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

हम रोज़ाना की भागदौड़ में इतना उलझ जाते हैं कि अपने शरीर की आवाज़ सुनना ही भूल जाते हैं। कभी गौर किया है कि जब आप बहुत ज़्यादा टेंशन में होते हैं तो पेट भारी लगने लगता है या गैस बन जाती है? यह कोई इत्तेफाक नहीं है। हमारे दिमाग और पेट का बहुत गहरा रिश्ता है। जब दिमाग में उलझन होती है तो पेट का सिस्टम भी बिगड़ जाता है। यहीं पर योग हमारे काम आता है। योग सिर्फ शरीर को मोड़ने का नाम नहीं है, यह दिमाग को शांत करने और पेट की आग को सही दिशा देने का एक बहुत पुराना और असरदार तरीका है। जब हम योग करते हैं तो हमारी साँसें और शरीर एक साथ काम करते हैं, जिससे तनाव दूर होता है और खाना भी आसानी से पचता है।

दिमाग की उलझन कैसे पेट का सिस्टम बिगाड़ती है

जब आप बहुत ज़्यादा सोचते हैं या परेशान रहते हैं, तो शरीर खतरे वाले मोड में चला जाता है। ऐसे में शरीर का सारा ज़ोर उस परेशानी से लड़ने में लग जाता है और खाना पचाने का काम धीमा पड़ जाता है। पेट में पड़ा हुआ खाना सही से पच नहीं पाता और सड़ने लगता है। इसी वजह से खट्टी डकारें आना, सीने में जलन और पेट फूलने जैसी दिक्कतें शुरू हो जाती हैं। योग इस पूरे सिस्टम को वापस शांत करने में मदद करता है। यह शरीर को बताता है कि अब कोई खतरा नहीं है और वह अपना काम आराम से कर सकता है।

क्या सिर्फ गलत खानपान ही पेट खराब करता है

ऐसा बिल्कुल नहीं है कि सिर्फ बाहर का या उल्टा-सीधा खाना खाने से ही पेट खराब होता है। कई बार आप एकदम सादा घर का खाना खाते हैं, फिर भी पेट फूल जाता है। इसकी असली वजह आपका तनाव हो सकता है। अगर आप खाते समय ऑफिस की बातें सोच रहे हैं या कल की चिंता में डूबे हैं, तो वह सादा खाना भी पेट में जाकर गैस ही बनाएगा। योग हमें आज में जीना सिखाता है। जब हम शांत मन से खाना खाते हैं, तो शरीर उसे पूरी तरह से सोख लेता है और कोई परेशानी नहीं होती।

योग करने से हमारे शरीर के अंदर क्या बदलाव आते हैं

योग करने से शरीर के अंदर कई अच्छे बदलाव होते हैं जो हमें ऊपर से नज़र नहीं आते।

  • तनाव वाला रसायन कम होता है: योग करने से शरीर में तनाव बढ़ाने वाला रसायन कम होने लगता है, जिससे पेट को अपना काम करने की आज़ादी मिलती है।
  • पेट की मालिश होती है: जब हम अलग अलग तरह के आसन करते हैं, तो पेट की मांसपेशियों  की अंदर से मालिश होती है। इससे फंसी हुई गैस आसानी से बाहर निकल जाती है।
  • खून का बहाव सुधरता है: योग करने से पेट की तरफ खून का बहाव तेज़ होता है, जिससे पाचन तंत्र मज़बूत बनता है।
  • अच्छे बैक्टीरिया बढ़ते हैं: दिमाग शांत रहने से पेट के अंदर पाए जाने वाले अच्छे बैक्टीरिया तेज़ी से बढ़ते हैं जो खाना पचाने में बहुत मदद करते हैं।

पेट और मन को शांत करने वाले असरदार योग आसन

कुछ ऐसे आसान योग हैं जिन्हें आप रोज़ाना करके अपने पेट और दिमाग दोनों को तंदुरुस्त रख सकते हैं।

  • पवनमुक्तासन: यह पेट की गैस बाहर निकालने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। पीठ के बल लेटकर घुटनों को छाती तक लाने से पेट पर हल्का दबाव पड़ता है जिससे बहुत आराम मिलता है।
  • वज्रासन: यह इकलौता ऐसा आसन है जिसे आप खाना खाने के तुरंत बाद कर सकते हैं। घुटनों के बल बैठने से पेट की तरफ खून का बहाव बढ़ता है और खाना जल्दी पचता है।
  • भुजंगासन: पेट के बल लेटकर छाती को ऊपर उठाने से पेट की मांसपेशियों  में खिंचाव आता है। यह पाचन तंत्र को मज़बूत करने के साथ साथ पीठ का दर्द भी दूर करता है।
  • शवासन: यह दिमाग की थकावट मिटाने का सबसे बेहतरीन तरीका है। सीधे लेटकर अपनी साँसों पर ध्यान देने से शरीर का सारा तनाव खत्म हो जाता है।

गलत आदतें जो हमारी परेशानी को और बढ़ा देती हैं

हम अक्सर जाने अनजाने में कुछ ऐसी गलतियाँ कर बैठते हैं जो तनाव और पेट की दिक्कत दोनों को बढ़ा देती हैं।

  • खाली पेट बहुत ज़्यादा चाय या कॉफी पीना: इससे पेट में तेज़ जलन होती है और बेचैनी भी बढ़ जाती है।
  • रात को बहुत देर से भारी खाना खाना: इससे खाना पचने में बहुत दिक्कत होती है और सोते समय खट्टा पानी गले तक आता है।
  • बहुत ज़्यादा मीठा खाना: इससे शरीर की ऊर्जा एकदम से बढ़ती और घटती है जो हमारी सेहत को खराब कर देती है।
  • मैदे से बनी चीज़ें और पैकेट वाला खाना: यह खाना पेट में जाकर चिपक जाता है जिससे भारीपन और कब्ज़ की शिकायत रहने लगती है।
  • खाने का कोई एक समय तय न होना: रोज़ अलग अलग समय पर खाने से पेट की मशीनरी उलझ जाती है और दिक्कतें शुरू हो जाती हैं।

रोज़मर्रा की ज़िंदगी में कौन से आसान बदलाव करें

योग के साथ साथ अगर आप अपनी दिनचर्या में कुछ छोटे बदलाव कर लें तो आपकी सेहत में बहुत बड़ा सुधार आ सकता है।

  • खाना हमेशा खूब चबाकर खाएं ताकि पेट को कम मेहनत करनी पड़े।
  • खाना खाते समय टीवी या मोबाइल बिल्कुल न देखें, अपना सारा ध्यान सिर्फ खाने पर रखें।
  • दिन भर में खूब सारा पानी पिएँ ताकि पेट की सफाई अंदर से होती रहे।
  • रात को सोने से पहले गहरी साँसें लेने का अभ्यास करें ताकि नींद अच्छी आए और दिमाग को आराम मिले।

योग और गोलियाँ खाने में क्या बड़ा फर्क है

हम अक्सर पेट दर्द या गैस होने पर तुरंत गोली खा लेते हैं। आइए जानते हैं कि योग और दवाइयों के तरीके में क्या बड़ा फर्क है।

पहलू दवाइयाँ योग
मुख्य लक्ष्य रोग के कारण और लक्षणों का चिकित्सकीय उपचार करना। शारीरिक लचीलापन, मानसिक संतुलन और समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देना।
तरीका डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाइयों और अन्य चिकित्सा का उपयोग। आसन, प्राणायाम, ध्यान और नियमित अभ्यास।
असर होने की गति कई दवाइयाँ अपेक्षाकृत जल्दी राहत दे सकती हैं। नियमित अभ्यास से धीरे-धीरे लाभ दिखाई देते हैं।
शरीर पर प्रभाव बीमारी और उसकी गंभीरता के अनुसार उपचार किया जाता है। तनाव कम करने, संतुलन, लचीलापन और फिटनेस में सुधार करने में सहायक।
दीर्घकालिक लाभ कई रोगों में लंबे समय तक दवा की आवश्यकता हो सकती है। नियमित अभ्यास स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा बनकर लंबे समय तक लाभ दे सकता है।

हमें डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए

अगर आप योग और घरेलू तरीके अपना रहे हैं लेकिन फिर भी आराम नहीं मिल रहा है तो डॉक्टर को दिखाना बहुत ज़रूरी है।

  • जब पेट का दर्द इतना तेज़ हो जाए कि बर्दाश्त करना मुश्किल हो जाए।
  • अगर आपका वज़न बिना कुछ किए बहुत तेज़ी से कम होने लगे और कमज़ोरी लगने लगे।
  • जब मल का रंग एकदम काला आने लगे या उल्टी में खून दिखाई दे।
  • अगर घबराहट के कारण आपकी साँस फूलने लगे और पसीने छूटने लगें।

निष्कर्ष: 

हमेशा याद रखें कि आपका पेट और दिमाग एक ही शरीर के दो अहम हिस्से हैं। आप एक को भूलकर दूसरे को ठीक नहीं रख सकते। अपनी इस भागदौड़ से भरी ज़िंदगी में खुद के लिए थोड़ा सा वक्त ज़रूर निकालें। योग को अपनी आदत बनाएँ। यह सिर्फ एक कसरत नहीं है, बल्कि खुद को अंदर से खुश रखने का एक बहुत प्यारा तरीका है। जब आपका मन शांत रहेगा, साँसें गहरी होंगी, तो आपका पेट भी बिना किसी शिकायत के अपना काम अच्छे से करेगा। खुश रहें, तनाव को खुद पर हावी न होने दें और सेहतमंद ज़िंदगी जिएँ।

References:

https://www.healthline.com/nutrition/yoga-posture-for-digestion

https://www.healthline.com/health/epi/exercises-digestion

https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/39285826/

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

हाँ, योग करने से पेट की नसों और मांसपेशियों की अच्छी मालिश होती है। इससे फंसी हुई गैस आसानी से बाहर निकल जाती है और कब्ज़ की परेशानी धीरे-धीरे खत्म हो जाती है।

वज्रासन को छोड़कर कोई भी योग खाना खाने के कम से कम तीन से चार घंटे बाद ही करना चाहिए। खाली पेट योग करना शरीर के लिए सबसे अच्छा माना जाता है।

तनाव कम करने के लिए शवासन बहुत असरदार है। इसके अलावा आप गहरी साँसें लेने का अभ्यास कर सकते हैं। यह आपके दिमाग को शांत करता है और मन को हल्का करता है।

आप रात को सोने से पहले हल्की स्ट्रेचिंग वाले योग या गहरी साँसें लेने का अभ्यास कर सकते हैं। इससे नींद बहुत अच्छी आती है। बहुत मेहनत वाले आसन रात को बिल्कुल नहीं करने चाहिए।

हाँ, रोज़ाना सही तरीके से योग करने और अच्छा खाना खाने से शरीर का फालतू मोटापा कम होने लगता है और शरीर सुडौल बनता है।

बिल्कुल। आप बहुत ही आसान और हल्के आसनों से शुरुआत कर सकते हैं। अगर आप पहली बार कर रहे हैं तो किसी जानकार से सीखकर करना और भी अच्छा रहता है।

 हाँ, बहुत ज़्यादा सोचने और चिंता करने से पेट की माँसपेशियाँ एकदम से सिकुड़ जाती हैं जिससे मरोड़ और दर्द महसूस होता है।

शुरुआत में आप पंद्रह से बीस मिनट रोज़ाना योग कर सकते हैं। धीरे-धीरे आप अपनी सहूलियत के हिसाब से इसे आधा घंटा या चालीस मिनट तक बढ़ा सकते हैं।

इस दौरान बहुत भारी या पेट पर ज़ोर डालने वाले आसन नहीं करने चाहिए। आप गहरी साँसें ले सकती हैं या बहुत हल्के आसन कर सकती हैं, जिससे दर्द में भी आराम मिलता है।

अगर आपको कोई गंभीर बीमारी या कमर में बहुत दर्द है, तो कोई भी नया योग शुरू करने से पहले एक बार अपने डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें।

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