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Periods irregular हैं: PCOD, thyroid या stress — कारण अलग-अलग हो सकते हैं

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 18 Jul, 2026
  • category-iconUpdated on 18 Jul, 2026
  • category-iconWomen's Health
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जब भी किसी लड़की या महिला के पीरियड्स लेट हो जाते हैं, तो मन में सबसे पहला डर यही आता है कि "कहीं मुझे PCOD तो नहीं हो गया?" इंटरनेट पर थोड़ा सा सर्च करने पर भी हर जगह PCOD का ही नाम सबसे पहले दिखाई देता है। लेकिन क्या आप जानती हैं कि हर बार पीरियड्स के बिगड़ने की वजह PCOD नहीं होती?

हमारे शरीर का सिस्टम बहुत ही समझदार और संवेदनशील होता है। आपके खाने-पीने से लेकर आपके दिमाग में चल रही टेंशन तक, हर छोटी बात का असर आपके मासिक चक्र पर पड़ता है। ऐसे में सिर्फ एक बीमारी को इसका कसूरवार मान लेना सही नहीं है।

अनियमित पीरियड्स को कब सामान्य नहीं माना जाता?

हर महिला का शरीर अलग होता है और उसी तरह उसकी साइकिल भी अलग होती है। ज़रूरी नहीं कि हर किसी को ठीक 28 दिन में ही पीरियड्स आएं। किसी को 30 दिन में आते हैं, तो किसी को 32 या 35 दिन में। अगर आपकी तारीख 2-4 दिन आगे-पीछे हो रही है, तो इसमें घबराने वाली कोई बात नहीं है, यह बिल्कुल नॉर्मल है।

लेकिन आपको ध्यान तब देना चाहिए जब:

  • आपके पीरियड्स लगातार कई महीनों तक न आएं।
  • महीने में दो-दो बार ब्लीडिंग होने लगे।
  • कभी 15 दिन में पीरियड्स आ जाएं और कभी 3 महीने तक कोई अता-पता न हो।
  • ब्लीडिंग बहुत ही ज़्यादा कम हो या फिर इतनी ज़्यादा हो कि संभालना मुश्किल हो जाए।

अगर ऐसा बार-बार हो रहा है, तो यह शरीर का अलार्म है जो बता रहा है कि अंदर का बैलेंस बिगड़ चुका है और अब आपको इस पर ध्यान देने की ज़रूरत है।

हर बार कारण PCOD नहीं होता: पीरियड्स क्यों बिगड़ते हैं?

यह समझना बहुत ज़रूरी है कि आपके पीरियड्स सिर्फ आपके गर्भाशय (Uterus) का काम नहीं हैं। इसे कंट्रोल करने के लिए आपका दिमाग, आपके हार्मोन्स, आपका वज़न और आपकी लाइफस्टाइल सब मिलकर काम करते हैं। अगर इनमें से एक भी चीज पटरी से उतरती है, तो पीरियड्स लेट हो जाते हैं।

  • हार्मोनल असंतुलन: हमारे शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन नाम के खास हार्मोन होते हैं जो पीरियड्स को समय पर लाने का काम करते हैं। जब किसी भी वजह से इनका बैलेंस बिगड़ता है, तो साइकिल टूट जाती है।
  • खराब लाइफस्टाइल और खान-पान: आजकल की भागदौड़ भरी ज़िन्दगी में हम कब सोते हैं, क्या खाते हैं, इसका कोई रूटीन नहीं है। बहुत ज़्यादा बाहर का जंक फूड खाना, दिन भर कुर्सी पर बैठे रहना, और शरीर को बिल्कुल न हिलाना (कोई कसरत न करना) पीरियड्स के बिगड़ने का एक बहुत बड़ा कारण है।
  • उम्र और शरीर के बदलाव: जब किसी बच्ची को पहली बार पीरियड्स शुरू होते हैं, तो शुरुआत के एक-दो साल तक उनका ऊपर-नीचे होना नॉर्मल है। इसी तरह, जब 45-50 की उम्र में पीरियड्स हमेशा के लिए बंद होने वाले होते हैं (मेनोपॉज), तब भी साइकिल पूरी तरह से बदल जाती है।

PCOD और अनियमित पीरियड्स का क्या संबंध है?

PCOD (पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिजीज) आज के समय में बहुत ही आम समस्या बन गई है। लेकिन इसे लेकर बहुत सारा डर भी फैला हुआ है।

PCOD में शरीर के भीतर क्या होता है? 

नॉर्मल तरीके से, हर महीने ओवरी में एक अंडा बनता है और समय पर रिलीज होता है, जिससे पीरियड्स आते हैं। लेकिन PCOD में हार्मोन्स की गड़बड़ी की वजह से ये अंडे पूरी तरह बन नहीं पाते और ओवरी के अंदर ही पानी के छोटे-छोटे बुलबुलों की तरह जमा होने लगते हैं। अंडा रिलीज न होने की वजह से पीरियड्स आना रुक जाते हैं।

किन संकेतों को बिल्कुल नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए? 

अगर आपके पीरियड्स लेट हो रहे हैं और साथ में नीचे लिखी बातें भी हो रही हैं, तो यह PCOD का इशारा हो सकता है:

  • अचानक से वज़न बहुत तेज़ी से बढ़ना
  • चेहरे पर कड़े और अनचाहे बाल उगना।
  • चेहरे, कमर या सीने पर बड़े-बड़े पिंपल्स निकलना जो ठीक न हो रहे हों।
  • सिर के बालों का बहुत ज़्यादा झड़ना।

क्या Thyroid की गड़बड़ी भी पीरियड्स को रोक सकती है?

थायरॉयड हमारे गले में पाई जाने वाली एक छोटी सी ग्रंथि (ग्लैंड) है। आप इसे शरीर की 'बैटरी' या 'इंजन' कह सकते हैं, जो यह तय करती है कि शरीर कितनी एनर्जी का इस्तेमाल करेगा। जब यह बैटरी ठीक से काम नहीं करती, तो सीधा असर पीरियड्स पर पड़ता है।

Hypothyroidism: इसे आम भाषा में 'मोटापे वाला थायरॉयड' भी कहते हैं। जब यह हार्मोन कम बनता है, तो शरीर सुस्त पड़ जाता है। ऐसे में पीरियड्स बहुत लेट हो सकते हैं, और जब आते हैं तो ब्लीडिंग बहुत ज़्यादा और कई दिनों तक हो सकती है। इसके साथ ही आपको हर वक्त थकान, कब्ज और बहुत ज़्यादा ठंड लग सकती है।

Hyperthyroidism: इसे 'सूखे वाला थायरॉयड' कहते हैं। इसमें शरीर की मशीन बहुत तेज़ चलने लगती है। वज़न अचानक से गिरने लगता है। ऐसे में पीरियड्स बहुत जल्दी-जल्दी आ सकते हैं या ब्लीडिंग इतनी कम होती है कि सिर्फ दाग लगकर रह जाते हैं। घबराहट होना और दिल की धड़कन तेज़ रहना इसके आम लक्षण हैं।

क्या केवल Stress (टेंशन) से भी पीरियड्स देर से आ सकते हैं?

जब आप बहुत ज़्यादा टेंशन में होती हैं, चाहे वह ऑफिस के काम का स्ट्रेस हो, पढ़ाई का बोझ हो, या घर की कोई परेशानी हो, तो आपका शरीर 'कोर्टिसोल' नाम का स्ट्रेस हार्मोन बनाने लगता है। शरीर को लगता है कि आप किसी खतरे में हैं, इसलिए वह दिमाग से कहता है, "अभी फोकस बचने पर करो, पीरियड्स पर नहीं।" नतीजतन, दिमाग ओवरी को सिग्नल देना बंद कर देता है और आपके पीरियड्स रुक जाते हैं।

एक्सपर्ट डॉक्टर की विशेष सलाह

अनियमित पीरियड्स हमेशा PCOD की वजह से नहीं होते; अत्यधिक तनाव, थायरॉयड या वजन में बदलाव भी इसके कारण हो सकते हैं। हालांकि, यदि आपके पीरियड्स 3 महीने तक न आएं, बहुत हैवी ब्लीडिंग हो, या असहनीय दर्द हो, तो सिर्फ घरेलू नुस्खों पर निर्भर न रहें। भविष्य की जटिलताओं से बचने के लिए इंटरनेट पर लक्षण खोजने के बजाय, तुरंत एक गायनेकोलॉजिस्ट से मिलकर सही जांच करवाएं। 

किन अन्य कारणों से भी पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं?

ऊपर बताई गई बातों के अलावा भी कुछ छोटी-छोटी चीजें हैं जो साइकिल को बिगाड़ सकती हैं:

  • मोटापा या बहुत कम वज़न: बहुत ज़्यादा फैट होना या बिल्कुल ही हड्डियों का ढांचा होना, दोनों ही स्थिति में हार्मोन्स नहीं बन पाते।
  • दवाइयां: अगर आप किसी लंबी बीमारी की दवा खा रही हैं, या बार-बार गर्भनिरोधक गोलियां (iPill जैसी) ले रही हैं, तो साइकिल बिगड़ना तय है।
  • बच्चे को दूध पिलाना: डिलीवरी के बाद जब तक मां बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती है, तब तक पीरियड्स का न आना एकदम नॉर्मल है।
  • नींद की कमी: अगर आप रात-रात भर मोबाइल देखती हैं या आपकी नींद पूरी नहीं होती, तो आपके शरीर की अंदरूनी घड़ी पूरी तरह बिगड़ जाती है। अच्छी नींद न लेना पीरियड्स के लेट होने का एक बहुत बड़ा कारण है।
  • बहुत ज़्यादा एक्सरसाइज: फिट रहना अच्छी बात है, लेकिन अचानक से बहुत भारी एक्सरसाइज शुरू कर देना या क्रैश डाइट करना शरीर को शॉक दे देता है। शरीर में फैट की कमी होने से भी पीरियड्स तुरंत रुक जाते हैं।

आयुर्वेद अनियमित पीरियड्स को किस तरह देखता है?

आयुर्वेद का नज़रिया बहुत ही सीधा और कुदरती है। आयुर्वेद में माना जाता है कि महिलाओं के शरीर में मासिक धर्म (पीरियड्स) एक सफाई की प्रक्रिया है।

हमारे शरीर को तीन चीजें चलाती हैं: वात, पित्त और कफ। पीरियड्स को नीचे की तरफ लाने का काम 'अपान वात' नाम की हवा करती है। जब हम गलत खाना खाते हैं या बहुत ज़्यादा स्ट्रेस लेते हैं, तो हमारा पाचन खराब हो जाता है। इससे शरीर में एक चिपचिपा पदार्थ (आम) बनता है जो नसों को ब्लॉक कर देता है।

जब रास्ते ब्लॉक हो जाते हैं, तो वात अपना काम नहीं कर पाती और पीरियड्स रुक जाते हैं। इसलिए आयुर्वेद में इलाज सिर्फ यूट्रस का नहीं, बल्कि पूरे शरीर की सफाई और हाजमे को सुधारने से शुरू होता है।

आयुर्वेद के अनुसार जीवनशैली और आहार में क्या बदलाव करें?

अगर आप घर पर ही अपनी साइकिल को पटरी पर लाना चाहती हैं, तो इन आसान बातों को अपनी ज़िन्दगी का हिस्सा बनाएं:

  • खाना चबाकर और समय पर खाएं: ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर का एक समय तय करें। बाहर का पैकेट बंद, बहुत ज़्यादा मीठा और मैदे वाला खाना बिल्कुल बंद कर दें।
  • सीड्स का जादू: अपनी डाइट में अलसी, कद्दू के बीज और तिल शामिल करें। ये हार्मोन्स को नेचुरल तरीके से बैलेंस करते हैं।
  • हल्की कसरत और योग: रोज सुबह कम से कम 30 मिनट तेज़ पैदल चलें। बटरफ्लाई आसन और सूर्य नमस्कार पीरियड्स को रेगुलर करने में बहुत मदद करते हैं।
  • स्ट्रेस कम करें: गहरी सांसें लें, मनपसंद गाने सुनें और ओवरथिंकिंग बंद करें।
  • नींद से कोई समझौता नहीं: रात को 10-11 बजे तक बिस्तर पर चले जाएं और 7-8 घंटे की गहरी नींद लें।

कब डॉक्टर से तुरंत सलाह लेनी चाहिए?

कभी-कभार कुछ दिन पीरियड्स लेट होना ठीक है, लेकिन इन बातों को कभी भी नज़रअंदाज़ न करें:

  • जब 3 महीने या उससे भी ज़्यादा समय से पीरियड्स बिल्कुल न आए हों।
  • जब ब्लीडिंग इतनी ज़्यादा हो कि हर एक-दो घंटे में पैड बदलना पड़े।
  • जब दर्द इतना तेज़ हो कि आपको उल्टी आ जाए या चक्कर आने लगें।
  • अगर आपको लगता है कि आप प्रेग्नेंट हो सकती हैं और अचानक से स्पॉटिंग शुरू हो जाए।

ऐसी स्थिति में घरेलू नुस्खे आजमाने के बजाय तुरंत किसी अच्छी महिला डॉक्टर के पास जाएं।

निष्कर्ष

अंत में बस इतना समझ लीजिए कि आपके पीरियड्स आपके शरीर का रिपोर्ट कार्ड हैं। अगर वे बिगड़ रहे हैं, तो शरीर आपसे बात करने की कोशिश कर रहा है। इसे सिर्फ PCOD समझकर डरना या खुद से दवाइयां खाना बिल्कुल सही नहीं है।

इसके पीछे वजह आपका बढ़ता वज़न, थायरॉयड की दिक्कत, या सिर्फ आपके ऑफिस का स्ट्रेस भी हो सकता है। अपने शरीर के इशारों को प्यार से समझें, अपनी दिनचर्या (रूटीन) को सुधारें और ज़रूरत पड़े तो डॉक्टर से मदद मांगने में हिचकिचाएं नहीं। सही समय पर उठाया गया एक छोटा सा कदम आपकी इस परेशानी को हमेशा के लिए दूर कर सकता है।

References

Polycystic Ovary Syndrome: Etiology, Current Management, and Future Therapeutics - PMC

Polycystic Ovary Syndrome (PCOS) | FDA

Overview of the 2022 WHO Classification of Thyroid Neoplasms - PubMed

Stress

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

जी नहीं, बिल्कुल नहीं। बहुत सी लड़कियों के पीरियड्स सिर्फ एग्जाम के स्ट्रेस, ट्रेवल करने या वज़न थोड़ा सा बढ़ने की वजह से भी लेट हो जाते हैं। हर लेट पीरियड PCOD नहीं होता।

हां, बिल्कुल! जब आप टेंशन में होती हैं, तो शरीर में स्ट्रेस हार्मोन बढ़ जाता है जो पीरियड्स लाने वाले हार्मोन्स को ब्लॉक कर देता है। टेंशन खत्म होते ही साइकिल वापस नॉर्मल हो जाती है।

थायरॉयड धीमा होने पर वज़न बढ़ता है और पीरियड्स में भारी ब्लीडिंग होती है या वे बहुत लेट आते हैं। वहीं, थायरॉयड तेज़ होने पर पीरियड्स जल्दी-जल्दी और बहुत कम आ सकते हैं।

नहीं। अगर आपकी साइकिल हर महीने 30, 32 या 35 दिन में भी आ रही है और आपको कोई दर्द या परेशानी नहीं है, तो यह आपकी बॉडी के लिए एकदम नॉर्मल है।

हां। शरीर में फैट (चर्बी) बढ़ने से एस्ट्रोजन हार्मोन बढ़ जाता है, जिससे ओवरी अपना काम ठीक से नहीं कर पाती और पीरियड्स इरेगुलर हो जाते हैं।

जी हां। अगर आप अचानक से खाना-पीना छोड़ देंगी या बहुत कम खाएंगी, तो शरीर को ज़रूरी विटामिन्स नहीं मिलेंगे और कमजोरी की वजह से पीरियड्स आना रुक जाएंगे।

आयुर्वेद इस समस्या को जड़ से खत्म करने में बहुत मदद करता है। इसके लिए सही डाइट, योग और डॉक्टर की दी हुई आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ काम आती हैं। लेकिन खुद से कोई भी काढ़ा बनाकर न पिएं।

 हमेशा नहीं। डॉक्टर पहले आपकी बात सुनते हैं, अगर उन्हें लगता है कि ओवरी में कोई दिक्कत (सिस्ट) हो सकती है, तभी वे आपको अल्ट्रासाउंड करवाने की सलाह देते हैं।

अगर ऐसा सिर्फ एक बार हुआ है और आप 10-15 दिन लेट हैं, तो घबराएं नहीं। लेकिन अगर यह लगातार हर महीने होने लगा है, तब आपको डॉक्टर को ज़रूर दिखाना चाहिए।

अपनी लाइफस्टाइल सुधारें। पपीता और पाइनएप्पल (अनानास) खाएं। अदरक और अजवाइन का पानी पिएं। लेकिन सबसे ज़रूरी बात, अपनी टेंशन को दिमाग से बाहर निकालें और अच्छी नींद लें।

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