आप सबने ये कहावत तो सुनी ही होगी कि "नज़र हटी दुर्घटना घटी", यदि नज़र चलते वक्त फोन की तरफ होगी तो दुर्घटना तो घटेगी ही पर क्या ये केवल दुर्घटना का ही कारण बन सकता है? ये केवल दुर्घटना का कारण ही नहीं बनता, बल्कि शरीर को भी गंभीर रूप से नुकसान पहुँचाता है ।
यह हमारे शरीर के posture और breathing को भी गंभीर रूप से नुकसान पहुँचाता है।
ऐसा करने से हमारी आँखों, posture और breathing पर प्रभाव पड़ता है। फोन चलाने के लिए गर्दन नीचे झुका कर रखनी पड़ती है जिससे posture प्रभावित होता है और posture बिगड़ने की वजह से हमारे फेफड़े सिकुड़ने लगते है जिससे हमारी breathing पर असर पड़ता है।
Posture पर क्या असर पड़ता है?
झुककर फोन देखने से हमारे रीढ़ की हड्डी और मांसपेशियों पर बुरा असर पड़ता है जिस वजह से हमारा posture बिगड़ता है। फोन देखते हुए चलने से हमारे posture पर कई बुरे प्रभाव पड़ते हैं। जैसे:
सिर झुका कर फोन देखने से हमारी गर्दन की मांसपेशियों पर और रीढ़ की हड्डी पर कई ज़्यादा वजन पड़ता है जिस वजह से हमारा posture बिगड़ता है, और इससे सर्वाइकल जैसी बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है।
इससे हमारे कंधे और पीठ पर भी ज़ोर पड़ता है, जिससे हमारे कंधे आगे की और झुक जाते है ओर पीठ में भी दर्द शुरू होने लगता है।
सिर झुका कर चलने की वजह से हमारा posture बिगड़ता है जिससे हमारे फेफड़ो को उसकी ज़रूरत के अनुसार फैलने की जगह नहीं मिलती जिस वजह से हमारी सांस लेनी की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
गलत posture की वजह से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन भी धीमा हो जाता है।
Breathing पर क्या असर पड़ता है?
फोन देखते हुए चलने से हमारा ध्यान सिर्फ फोन में रहता है अन्य चीज़ो की ओर कम ध्यान रहता है और फोन में दिमाग ज़्यादा सक्रिय रहता है जिस वजह से श्वास संबंधी समस्या हो सकती हैं। जैसे:
फोन में देखते हुए चलने से व्यक्ति रील्स, मैसेज या काम करने में इतना व्यस्त हो जाता है कि उसका श्वास की ओर ध्यान ही नहीं जाता और श्वास की प्रक्रिया धीमी हो जाती है।
गलत पोस्चर में बैठने की वजह से गर्दन की मांसपेशियों और रीढ़ की हड्डी पर दबाव पड़ता है जिस वजह से फेफड़ो को पर्याप्त जगह नहीं मिल पाती और सांस लेने में दिक्क्त होती है।
जब शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलता, तो शरीर में तनाव और थकान बढ़ने लगते हैं।
ज्यादा फोन चलाने से नींद का चक्र और श्वास की लय बिगड़ सकते हैं।
ज्यादा फोन चलाने से शरीर पर और क्या असर पड़ता है?
ज्यादा फोन चलाने से शरीर पर कई दुष्प्रभाव पड़ते है। यह posture और breathing पर तो बुरा प्रभाव डालता ही है, इसके साथ-साथ शरीर पर अन्य दुष्प्रभाव भी डालता है। जैसे,
आँखों पर असर: आँखों में दर्द, सूखापन और जलन होना।
दिमाग पर असर: ज्यादा फोन चलाने से दिमाग पर असर पड़ता है, जैसे मानसिक तनाव, स्ट्रेस, डिप्रेशन आदि।
नींद पर असर: ज्यादा फोन के इस्तेमाल से नींद की प्रक्रिया धीमी हो जाती है जिससे सोने में दिक्क्त हो सकती है और नींद पूरी न होने की समस्या हो सकती है।
शारीरिक प्रभाव: ज्यादा फोन के इस्तेमाल से गर्दन की मांसपेशियों और रीढ़ की हड्डी पर दबाव पड़ता है, जिससे गर्दन, कमर, कंधे आदि में दर्द और अकड़न होती है।
आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
फोन इस्तेमाल करते समय, हमारी गर्दन नीचे की ओर ही झुकी रहती है, जिससे हमारे शरीर की मांसपेशियों और रीढ़ की हड्डी पर दबाव पड़ता है। जिस वजह से हमारे posture और breathing पर बुरा असर पड़ता है।
आयुर्वेद के अनुसार इसका सीधा संबंध हमारे शरीर के दोष और प्राण ऊर्जा से होता है।
आयुर्वेद के अनुसार रीढ़ की हड्डी वात दोष का मुख्य स्थान है। लगातार एक ही position में रहने से हमारा वात दोष असंतुलित हो जाता है। इसके असंतुलन के कारण शरीर में दर्द, अकड़न और खराब posture जैसी समस्याएं होती हैं।
खराब posture के वजह से हमारे फेफड़ो को उसकी आवश्यकता अनुसार स्थान नहीं मिल पाता है जिस वजह से हमे सांस लेने में दिक्कत होती है, आयुर्वेद के अनुसार posture खराब होने की वजह से प्राण ऊर्जा के स्त्रोत में रूकावट आजाती है जिस वजह से श्वास संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
इन आसान तरीकों से वात को शांत कर सकते हैं:
- सूक्ष्म व्यायाम का अभ्यास करें।
- रोज़ 5-10 मिनट प्राणायाम करें।
- गर्दन और प्रभावित क्षेत्रों की तेल मालिश करें।
- आँखों को आराम दें, हर 20 मिनट बाद ब्रेक लें।
इन आसान तरीकों से आप अपने शरीर में हुए असंतुलन को संतुलित कर सकते हैं, जिससे आपके posture में सुधार आएगा और श्वास संबंधी परेशानी भी ठीक हो जाएगी।
Posture और Breathing को ठीक कैसे करें?
झुक कर फोन देखने की वजह से हमारी गर्दन पर सामान्य से 4-5 गुना ज़्यादा दबाव पड़ता है जिस वजह से हमारी मांसपेशियों और रीढ़ की हड्डी में दबाव और खिंचाव पड़ता है जिस वजह से हमारा posture बिगड़ता है और posture बिगड़ने की वजह से हमारे फेफड़ो को पर्याप्त स्थान नहीं मिल पाता है जिस वजह से हमे breathing में भी परेशानी होती है।
इसे ठीक करने के कुछ उपाय हैं:
- फोन को अपने eye-level के बराबर रखें जिससे गर्दन नीचे न करनी पड़े।
- हर 20-30 मिनट को ब्रेक लें और खड़े होकर चलें फिरे।
- प्राणायाम आदि करें जिससे breathing एक लय में होगी।
- Exercise करें, इससे रीढ़ की हड्डी को सपोर्ट मिलेगा और सीधी होगी और फेफड़ों को भी खुलने में मदद मिलेगी।
- Neck movement करें इससे गर्दन की मांसपेशियों में हो रहे तनाव में राहत मिलेगी।
- 20-20-20 रूल की सहायता लें, हर 20 मिनट बाद, खुद से 20 फ़ीट दूर रखी चीज़ को 20 सेकंड तक देखें।
निष्कर्ष
अब तक कही गई सभी बातों का सार यह है कि फोन चलाने से केवल accident ही नहीं होते बल्कि ये हमारे शरीर पर भी बराबर दुष्प्रभाव डालती हैं। जैसे posture बिगड़ना और breathing प्रॉब्लम्स आदि। लगातार गर्दन को नीचे की ओर रखने से हमारी गर्दन ओर रीढ़ की हड्डी पर दबाव पड़ता है जिस वजह से हमारे फेफड़ो को फैलने के लिए पर्याप्त स्थान नहीं मिल पाता है जिस वजह से हमे breathing प्रॉब्लम होती है। आयुर्वेद इसके पीछे वात दोष को असंतुलन मानता हैं। इसे ठीक करने के लिए हमें हमारे posture को सुधारना चाहिए। पर्याप्त आराम, exercise, प्राणायाम और मालिश आदि से इसको संतुलित किया जा सकता है।
References
Effect of sitting posture on respiratory function while using a smartphone - PMC













