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Periods से पहले बहुत ज्यादा bloating और गुस्सा: क्या ये normal PMS है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 20 Jul, 2026
  • category-iconUpdated on 20 Jul, 2026
  • category-iconWomen's Health
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हर महीने पीरियड्स आने से कुछ दिन पहले क्या आपको भी ऐसा लगने लगता है कि आपके शरीर में कुछ अजीब सा हो रहा है? अचानक से पेट ऐसा फूल जाता है कि पुराने कपड़े टाइट लगने लगते हैं। बिना बात के इतना तेज़ गुस्सा आता है कि किसी पर भी चिल्लाने का मन करता है, या फिर छोटी सी बात पर आंखों में आंसू आ जाते हैं।

अक्सर लड़कियां इसे "अरे, बस पीरियड्स आने वाले हैं" कहकर टाल देती हैं। लेकिन क्या सच में इतना ज़्यादा पेट फूलना और इतना तेज़ गुस्सा आना नॉर्मल बात है? या फिर शरीर हमें कोई और इशारा दे रहा है?

क्या पीरियड्स से पहले पेट फूलना और गुस्सा आना नॉर्मल है?

हां, यह नॉर्मल है। पीरियड्स शुरू होने से करीब एक या दो हफ्ते पहले ज़्यादातर लड़कियों और महिलाओं को शरीर और दिमाग में कुछ बदलाव महसूस होते हैं। इसे ही मेडिकल भाषा में PMS (प्री-मेंस्ट्रुअल सिंड्रोम) कहा जाता है।

इस दौरान हल्का सा पेट भारी लगना, ब्रेस्ट में थोड़ा भारीपन, थकान महसूस होना, अचानक मीठा खाने का मन करना और मूड का ऊपर-नीचे होना एक आम बात है।

लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि यह 'नॉर्मल' तभी तक है जब तक यह आपकी रोज़मर्रा की जिंदगी को डिस्टर्ब न करे। अगर आपको इतना गुस्सा आ रहा है कि घर वालों से रोज़ झगड़े हो रहे हैं, या आपका पेट इतना फूल गया है कि आपको काम करने में दिक्कत हो रही है, तो इसे सिर्फ 'नॉर्मल PMS' कहकर इग्नोर करना सही नहीं है।

यह PMS क्यों होता है?

महीने के जिन दिनों में पीरियड्स आने वाले होते हैं, उस समय शरीर के दो बहुत अहम हार्मोन (एस्ट्रोज़न और प्रोज़ेस्टेरोन) ऊपर-नीचे हो रहे होते हैं।

जब ये हार्मोन ऊपर-नीचे होते हैं, तो इनका सीधा असर हमारे दिमाग पर पड़ता है। दिमाग में कुछ ऐसे केमिकल होते हैं (जैसे सेरोटोनिन) जो हमें खुश और रिलैक्स रखते हैं। हार्मोन्स की गड़बड़ी की वजह से ये 'खुशी वाले केमिकल' कम हो जाते हैं। बस यही कारण है कि हमारा मूड अचानक से चिड़चिड़ा हो जाता है और हमें बिना बात के उदासी या गुस्सा आने लगता है।

पीरियड्स से पहले पेट गुब्बारे की तरह क्यों फूल जाता है?

पीरियड्स से पहले हार्मोन्स के बदलने की वजह से शरीर अपने अंदर बहुत सारा पानी और नमक रोक कर रखने लगता है (इसे Water Retention कहते हैं)। यह कोई चर्बी या फैट नहीं होता, सिर्फ जमा हुआ पानी होता है जो पेट को फुला देता है।

पेट फूलने के कुछ और कारण भी हो सकते हैं:

  • खाने में बहुत ज़्यादा नमक या तीखा खाना।
  • पैकेट वाले चिप्स या जंक फूड ज़्यादा खाना।
  • दिन भर पानी कम पीना।
  • पूरा दिन कुर्सी पर बैठे रहना (फिजिकल एक्टिविटी न करना)।
  • अक्सर लड़कियों को इन दिनों में कब्ज़ हो जाती है, जो पेट फूलने का सबसे बड़ा कारण है।

मूड स्विंग्स और इतना तेज़ गुस्सा क्यों आता हैं?

अगर आपको लगता है कि पीरियड्स से पहले आपको बिना वजह गुस्सा आता है, तो आप अकेली नहीं हैं।

जैसा कि हमने जाना, इस समय दिमाग के 'खुशी वाले केमिकल' कम हो जाते हैं। इसके अलावा, अगर आपकी नींद पूरी नहीं हो रही है, ऑफिस या घर का स्ट्रेस ज़्यादा है, तो यह गुस्सा और भी ज़्यादा हो जाता है।

कई बार यह गुस्सा इतना तेज़ होता है कि इंसान अपने आप पर से कंट्रोल खो देता है, रोने लगता है या एकदम शांत और उदास होकर बैठ जाता है।

कैसे पहचानें कि यह नॉर्मल PMS है या कोई बड़ी परेशानी?

यह फर्क समझना बहुत ज़रूरी है:

  • नॉर्मल PMS: मूड थोड़ा खराब होता है, थोड़ा पेट फूलता है, लेकिन आप अपना काम (ऑफिस, घर की सफाई, पढ़ाई) आराम से कर लेती हैं। पीरियड्स शुरू होते ही सब कुछ एकदम ठीक हो जाता है।
  • बड़ी परेशानी (PMDD): अगर गुस्सा इतना ज़्यादा है कि आप खुद को या दूसरों को नुकसान पहुंचाने की सोचने लगती हैं। बहुत गहरी उदासी छा जाती है। पेट इतना फूल जाता है और दर्द करता है कि आप बिस्तर से उठ नहीं पातीं।

अगर आपके साथ दूसरी वाली स्थिति हो रही है, तो यह सिर्फ PMS नहीं है। इसे PMDD (Premenstrual Dysphoric Disorder) कहते हैं और इसके लिए डॉक्टर से बात करना बहुत ज़रूरी है।

किन लड़कियों में PMS की दिक्कत ज़्यादा होती है?

कुछ आदतों की वजह से यह दिक्कत और बढ़ जाती है:

  • जो लड़कियां बहुत ज़्यादा टेंशन (तनाव) में रहती हैं।
  • जो रात को ठीक से सोती नहीं हैं।
  • जो दिन भर में कई-कई कप चाय या कॉफी पीती हैं।
  • जो जंक फूड ज़्यादा खाती हैं और कसरत बिल्कुल नहीं करती हैं।
  • जिनके परिवार में (मम्मी या बहन को) पहले से ही बहुत ज़्यादा PMS की शिकायत रही हो।

आयुर्वेद इस परेशानी को कैसे देखता है?

आयुर्वेद शरीर को वात (हवा), पित्त (गर्मी) और कफ (भारीपन) के जरिए समझता है। आयुर्वेद मानता है कि जब हमारा पेट साफ नहीं होता और पाचन खराब रहता है, तो शरीर में वात (गैस) बढ़ जाती है।

  • जब 'वात' बढ़ती है, तो पेट बहुत ज़्यादा फूलता है, गैस बनती है और मन बेचैन रहता है।
  • जब 'पित्त' बिगड़ता है, तो बहुत तेज़ गुस्सा आता है, सीने में जलन होती है और पिंपल्स निकलते हैं।
  • जब 'कफ' बढ़ता है, तो शरीर बहुत भारी लगता है, बहुत सुस्ती आती है और लेटे रहने का मन करता है।

इसलिए आयुर्वेद हमेशा कहता है कि पीरियड्स से पहले अपने हाजमे (पेट) को एकदम हल्का और साफ रखें।

एक्सपर्ट डॉक्टर की विशेष सलाह

पीरियड्स से पहले हल्का पेट फूलना और मूड स्विंग्स सामान्य PMS हैं, जिन्हें कम नमक, पर्याप्त पानी और हल्की कसरत से आसानी से मैनेज किया जा सकता है।

लेकिन अगर आपका गुस्सा या उदासी बेकाबू हो जाए, असहनीय दर्द हो और रोज़मर्रा के काम प्रभावित हों, तो इसे नज़रअंदाज़ न करें। यह गंभीर PMDD (Premenstrual Dysphoric Disorder) का संकेत हो सकता है, जिसके लिए तुरंत एक गायनेकोलॉजिस्ट (Gynecologist) से क्लीनिकल सलाह लेनी चाहिए।

इन दिनों में क्या खाएं और किन चीजों से बिल्कुल दूर रहें?

ये चीजें ज़रूर खाएं:

  • खूब सारा पानी पिएं (पानी ही शरीर के रुके हुए पानी को बाहर निकालता है)।
  • ताजे फल (जैसे केला और पपीता) और हरी सब्जियां।
  • घर का बना सादा और हल्का खाना।
  • अगर मन करे तो थोड़ी सी डार्क चॉकलेट (यह मूड ठीक करने में मदद करती है)।
  • पेट साफ रखने के लिए फाइबर वाली चीजें (ओट्स, दलिया)।

इन चीजों से तौबा कर लें:

  • खाने में ऊपर से कच्चा नमक डालना बिल्कुल बंद कर दें।
  • पैकेट वाले चिप्स, नमकीन और जंक फूड न खाएं (इनमें बहुत नमक होता है जो पेट फुलाता है)।
  • ज़्यादा चाय, कॉफी या कोल्ड ड्रिंक पीने से बचें, ये गैस और चिड़चिड़ापन बढ़ाती हैं।
  • बहुत ज़्यादा चीनी और मैदा वाली चीजें (बिस्कुट, पेस्ट्री) न खाएं।

लाइफस्टाइल में क्या बदलें कि पीरियड्स आसान हो जाएं?

बहुत छोटे-छोटे बदलाव आपकी बड़ी परेशानी खत्म कर सकते हैं:

  • थोड़ा पसीना बहाएं: रोज़ 30 मिनट तेज़ चलें (Brisk walk) या हल्का योग करें। कसरत करने से शरीर में 'हैप्पी हार्मोन' निकलते हैं जो गुस्सा कम करते हैं।
  •  गहरी नींद लें: रात को 7-8 घंटे की गहरी नींद लें। नींद अच्छी होगी तो चिड़चिड़ापन अपने आप आधा हो जाएगा।
  • लंबी सांसें लें: जब भी बहुत तेज़ गुस्सा आए, आंखें बंद करें और 5-10 बार गहरी सांस लें (प्राणायाम करें)।

डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए?

  • जब पेट का फूलना और दर्द पीरियड्स खत्म होने के बाद भी न जाए।
  • जब ब्लीडिंग बहुत ज़्यादा हो और 7-8 दिन तक चले।
  • जब गुस्सा या डिप्रेशन इतना ज़्यादा हो कि आपकी डेली लाइफ खराब होने लगे।
  • अगर आपको लग रहा है कि अचानक से आपके पीरियड्स बहुत ज़्यादा बिगड़ गए हैं।

कई बार यह थायरॉइड या PCOD जैसी किसी और बीमारी का इशारा भी हो सकता है, इसलिए चेकअप करवाना हमेशा समझदारी है।

निष्कर्ष

पीरियड्स से पहले थोड़ा पेट फूलना, हल्की थकान और मूड का खराब होना एक बहुत ही नॉर्मल बात है। यह आपके शरीर का तरीका है, यह बताने का कि अंदर बदलाव हो रहे हैं। लेकिन अगर यह बदलाव आपके लिए सजा बन जाए, आपका गुस्सा कंट्रोल से बाहर हो जाए और पेट का फूलना आपको परेशान कर दे, तो इसे सिर्फ "लड़कियों की नॉर्मल प्रॉब्लम" मानकर इग्नोर न करें।

अपने शरीर के इन इशारों को समझें, नमक कम खाएं, पानी ज़्यादा पिएं, रोज़ थोड़ी कसरत करें और खुश रहने की कोशिश करें। अगर फिर भी दिक्कत कम न हो, तो डॉक्टर से बात करने में बिल्कुल हिचकिचाएं नहीं। सही लाइफस्टाइल और थोड़ी सी केयर आपको इन मुश्किल दिनों में भी एकदम रिलैक्स रख सकती हैं।

References

Premenstrual Syndrome - StatPearls - NCBI Bookshelf

Premenstrual syndrome: new insights into etiology and review of treatment methods - PMC

Premenstrual Syndrome - PMS Symptoms

Premenstrual syndrome, a common but underrated entity: review of the clinical literature - PMC

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

ज़रूरी नहीं। किसी महीने लक्षण हल्के हो सकते हैं, जबकि दूसरे महीने तनाव, नींद, खानपान या हार्मोनल बदलाव की वजह से ये ज़्यादा महसूस हो सकते हैं।

हाँ। PMS के दौरान हार्मोनल बदलाव और सेरोटोनिन के स्तर में बदलाव के कारण कई महिलाओं को मीठा या कार्बोहाइड्रेट वाली चीज़ें खाने की इच्छा होती है। हालांकि, बहुत ज़्यादा मीठा खाने से ऊर्जा में उतार-चढ़ाव और बढ़ सकता है।

हाँ। कुछ महिलाओं में पीरियड्स से पहले हार्मोन में बदलाव के कारण सिरदर्द या माइग्रेन की समस्या बढ़ सकती है। अगर सिरदर्द बार-बार या बहुत तेज़ हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए।

अधिकतर मामलों में यह स्थायी वजन नहीं होता। पीरियड्स से पहले शरीर में पानी रुकने (Water Retention) के कारण 1–2 किलो तक अस्थायी वजन बढ़ सकता है, जो पीरियड्स शुरू होने के बाद सामान्य हो जाता है।

हाँ। मासिक धर्म शुरू होने के कुछ समय बाद से ही कई किशोरियों को PMS के लक्षण महसूस हो सकते हैं। सही खानपान, पर्याप्त नींद और नियमित शारीरिक गतिविधि से इन्हें काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

नहीं। हल्का PMS सामान्य हार्मोनल बदलाव का हिस्सा है। लेकिन यदि लक्षण बहुत गंभीर हों, हर महीने बढ़ते जाएँ या दैनिक जीवन को प्रभावित करें, तो हार्मोनल या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की जांच करानी चाहिए।

हाँ। धूम्रपान और अत्यधिक शराब का सेवन मूड स्विंग्स, नींद की समस्या और सूजन जैसे लक्षणों को बढ़ा सकता है। इनसे बचना PMS को बेहतर तरीके से मैनेज करने में मदद कर सकता है।

कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि कुछ महिलाओं में मैग्नीशियम और विटामिन B6 की पर्याप्त मात्रा बनाए रखने से PMS के कुछ लक्षणों में राहत मिल सकती है। हालांकि, कोई भी सप्लीमेंट डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं लेना चाहिए।

PMS की पुष्टि के लिए कोई एक विशेष ब्लड टेस्ट नहीं है। डॉक्टर आमतौर पर आपके लक्षणों का रिकॉर्ड, उनका समय और गंभीरता देखकर निदान करते हैं। यदि किसी अन्य बीमारी का संदेह हो, तो अतिरिक्त जांच कराई जा सकती है।

PMS को हमेशा पूरी तरह खत्म करना संभव नहीं होता, लेकिन संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, तनाव प्रबंधन, अच्छी नींद और ज़रूरत पड़ने पर डॉक्टर द्वारा दी गई दवाओं की मदद से इसके लक्षणों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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