Diseases Search
Close Button
 
 

Recovery diet में khichdi, soup और light food का role

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

जब भी आप किसी तरह की बीमारी, ऑपरेशन या इन्फेक्शन के बाद शरीर को वापस सामान्य स्थिति में आने के लिए सही पोषण की बहुत ज़रूरत होती है। कुछ लोग बीमारी से उठते ही वही पहले जैसा खाना खाने लगते है और यह भूल जाते है की अभी भी वो अपनी रिकवरी फैज़ में है जहाँ उन्हें सिर्फ घर का बना सादा खाना खाना चाहिए। रिकवरी फैज़ में केवल पेट भरना काफी नहीं होता बल्कि ऐसा भोजन चुनना चाहिए जो आसानी से पच जाये और शरीर को सही ऊर्जा, प्रोटीन, विटामिन्स और मिनरल्स प्रदान करे। और यही कारण है की रिकवरी के समय पर खिचड़ी, सूप और हल्का खाना खाने के लिए कहा जाता है ताकि शरीर अच्छे से सही पोषण ले पाए और पहले जैसा दुरुस्त हो जाए।

रिकवरी के समय हल्का भोजन क्यों ज़रूरी होता है?

जब आप किसी भी बीमारी से उठते है तो आपका शरीर, पाचन तंत्र, इम्युनिट सिस्टम कमज़ोर हो जाता है आपके शरीर को हल्के सुपाच्य खाने की ज़रूरत होती है। हमारा शरीर रिकवरी के दौरान अधिकांश ऊर्जा बीमारी के कारण कमज़ोर हुए अंगो को ठीक करने में लगा देती है। ऐसे में भारी भोजन को पचाने के लिए शरीर में उतनी ऊर्जा नहीं होती और भारी भोजन में ऐसे तत्त्व होते है जो शरीर को और नुकसान पंहुचा सकते है। इसीलिए शरीर को रिकवरी ले दौरान हल्का खाना खाने का सुझाव दिया जाता है। क्योंकि हल्का भोजन पेट पर कम दबाव डालता है और पोषक तत्त्व को को अच्छे से अवशोषित करने में मदद करता है। 

खिचड़ी और सूप शरीर को कैसे फायदा पहुंचाते हैं?

खिचड़ी और सूप दोनों ही पेट के लिए बेहद हल्के, पोषक तत्वों से भरपूर और शरीर को तुरंत ऊर्जा देने वाले बेहतरीन आहार हैं। आइये इनके गुणों  बारे में विस्तार से समझते है:

    • खिचड़ी: यह दाल और चावल के मिश्रण से बनती है जिसमें कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन दोनों होते हैं। यह पेट के लिए काफी नरम और आसानी से पच जाती है और शरीर के लिए बहुत आरामदायक भी होती है। अगर इसमें मूंग दाल घी और सब्ज़ियों का प्रयोग किया जाए तो यह शरीर के लिए और भी ज़्यादा बेहतर हो जाती है।

  • सूप: सूप में पानी की मात्रा अधिक होती है, जो शरीर में फ्लूइड बैलेंस बनाए रखने और डिहाइड्रेशन से बचाने में मदद करती है। बीमारी या कमज़ोरी से रिकवरी के दौरान सूप शरीर को हाइड्रेशन में फ्लूइड बैलेंस बनाए रखने और डिहाइड्रेशन से बचाने में मदद करती है। सूप में आसानी से पचने वाले पोषक तत्व और सूजन को कम करने वाले तत्व होते है जो रिकवरी की प्रक्रिया को तेज़ करता है।

आयुर्वेद के अनुसार हमारे शरीर में रिकवरी के दौरान क्या होता है?

आयुर्वेद कहता है की रिकवरी के दौरान हमारे शरीर का पाचन तंत्र कमज़ोर हो जाता है हमारे पेट की अग्नि सुस्त हो जाती है क्योकि बीमारी के दौरान शरीर बहुत से कीटाणुओं से लड़ता है जिसकी कारण शरीर की ऊर्जा खर्च हो जाती है। पाचन अग्नि कमज़ोर होने के कारण पेट खाने को अच्छे से पचा नहीं पाता जिससे वह आधा पचा हुआ खाना जमने लगता है और विषैले तत्त्व में परिवर्तित हो जाता है जिसे आयुर्वेद में आम कहते है। यह आम शरीर के बाकी हिस्सों में जाके शरीर के बाकी हिस्सों में जाके जम जाता है जिससे शरीर में बाकी और बीमारियां पनपने लगती है।  इसलिए आयुर्वेद में हल्का, ताज़ा और सुपाच्य खाना खाने के लिए कहा जाता है ताकि वह ठीक से पच सके और शरीर में आम का निर्माण न हो।

बीमारी से ठीक होने के बाद क्या-क्या हल्का खाना खा सकते है?

बीमारी से रिकवर होने के बाद आप निचे दी हुई चीज़ो में अपनी पसंद और भूख अनुसार भोजन चुन सकते है:

  • मूंग दाल की खिचड़ी
  • उबले हुए चावल और दाल 
  • सब्ज़ियों या दाल का गरम सूप 
  • नमकीन या मीठा दलिया
  • दूध या पानी से बने हुए ओट्स
  • उबली हुई सब्ज़ियां 
  • एकदम मुलायम रोटी और मूंग दाल 

एक्सपर्ट डॉक्टर की विशेष सलाह 

बीमारी से उबरने के दौरान आपका पाचन तंत्र कमज़ोर हो जाता है और उसे ठीक होने के लिए आराम की ज़रूरत होती है। खिचड़ी, गर्म सूप और हल्का खाना शरीर के लिए बेहद ज़रूरी हैं क्योंकि इन्हें पचाने में पेट को मेहनत नहीं करनी पड़ती। खिचड़ी शरीर को आसानी से पचने वाला प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट देती है, जबकि सूप पानी की कमी और इलेक्ट्रोलाइट्स को पूरा करता है। किसी भी बीमारी या सर्जरी के बाद पचने में आसान और हल्का भोजन ही लें, और यदि भूख न लगना या उल्टी जैसा लगना लगातार बना रहे, तो डॉक्टर से परामर्श लें।

रिकवरी के दौरान किन चीज़ो से बिलकुल दूर रहे 

किसी भी बीमारी की रिकवरी के दौरान शरीर को ठीक होने के लिए आराम और सही पोषण की ज़रूरत होती है। इस समय कुछ चीज़ें आपकी रिकवरी को धीमा कर सकती हैं या इन्फेक्शन का खतरा बढ़ा सकती हैं।

  • ज़्यादा चीनी और मीठा न खाएँ 
  • ज़्यादा नमक और प्रोसेस्ड फूड का सेवन न करें 
  • तला-भुना और फास्ट फूड से दूरी बनाए 
  • नशीले पदार्थ जैसे धूम्रपान व शराब को बिल्कुल भी हाथ न लगाए 
  • कसरत न करे और भारी सामान न उठाए 
  • लगातार बैठे या लेटे न रहे 
  • अत्यधिक तनाव में न रहें 
  • अपनी नींद पूरी करे 

पानी और लिक्विड डाइट का कितना रोल है?

रिकवरी के दौरान पानी का बहुत अहम रोल होता है क्योकि ठोस खाने के मुकाबले शरीर को पानी के माध्यम से ऊर्जा लेने में काम मेहनत लगती है। यह शरीर को हाइड्रेटेड रखकर दवाओं के टॉक्सिन्स को बाहर निकालता है और बीमारी से लड़ने में काफी मदद करता है।

रोज वाला (नॉर्मल) खाना कब शुरू करें?

जैसे ही आपको लगे कि आपकी भूख वापस आ रही है, पेट में गैस नहीं बन रही है और हल्का खाना अच्छे से पच रहा है, तो आप धीरे-धीरे अपने नॉर्मल खाने (रोटी-सब्जी) पर लौट सकते हैं। बस ध्यान रखें कि एकदम से बहुत भारी खाना खाने की जल्दबाजी न करें।

डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए?

अगर आपको बीमारी के कई दिनों बाद तक भूख ही न लगे, उल्टियां होती रहें, पेट खराब रहे, वज़न तेजी से गिरने लगे या कमज़ोरी बढ़ती ही जाए, तो घरेलू नुस्खों के भरोसे न बैठें। तुरंत अपने डॉक्टर से मिलें।

निष्कर्ष

बीमारी से उठने के बाद खाने का मकसद सिर्फ पेट भरना नहीं, बल्कि शरीर की बैटरी को फिर से चार्ज करना होता है। खिचड़ी और सूप जैसे हल्के भोजन पेट को आराम देते हैं और आपको जल्दी ठीक होने की ताकत देते हैं। लेकिन, जल्दी रिकवरी के लिए सही समय पर पूरा और संतुलित खाना शुरू करना भी उतना ही जरूरी है!

References

Recovery after critical illness; when, how and who should be involved? - PMC 

Getting Back on Track: Meanings of Recovery After Critical Illness Caused by COVID-19 - PMC

Disability and Recovery After Hospitalization for Medical Illness Among Community-Living Older Persons: A Prospective Cohort Study - PMC 

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

शुरुआती दिनों में कच्चे सलाद की जगह उबली सब्जियाँ और हल्के पके फल ही खाएं, क्योंकि कच्चा खाना पचाने में पेट को बहुत मेहनत करनी पड़ती है।

चाय-कॉफी में मौजूद कैफीन पेट में एसिडिटी और डिहाइड्रेशन बढ़ा सकता है, इसलिए इसकी जगह हर्बल टी, नारियल पानी या सूप पीना बेहतर है।

अगर आपको सर्दी-जुकाम नहीं है, तो दोपहर के समय ताज़ा दही या छाछ पीना आंतों के गुड बैक्टीरिया को बढ़ाने में मदद करता है।

बिल्कुल, देसी घी में जीरा, हींग और हल्दी का हल्का तड़का पेट की गैस मिटाता है और पाचन को तेज़ करता है।

पैकेट वाले जूस में बहुत चीनी होती है, इसलिए हमेशा ताज़े कटे फल या घर पर बना बिना चीनी का फ्रेश जूस ही लें।

बीमारी से ठीक होने के बाद कम से कम 3 से 5 दिनों तक हल्का सुपाच्य खाना ही खाएं, फिर धीरे-धीरे नॉर्मल खाने पर आएं।

हाँ, हमेशा ताज़ा और हल्का गर्म खाना ही खाएं; बासी या बहुत ठंडा खाना आपकी कमज़ोर पाचन अग्नि को और धीमा कर देता है।

Top Ayurveda Doctors

Social Timeline

Our Happy Patients

  • Sunita Malik - Knee Pain
  • Abhishek Mal - Diabetes
  • Vidit Aggarwal - Psoriasis
  • Shanti - Sleeping Disorder
  • Ranjana - Arthritis
  • Jyoti - Migraine
  • Renu Lamba - Diabetes
  • Kamla Singh - Bulging Disc
  • Rajesh Kumar - Psoriasis
  • Dhruv Dutta - Diabetes
  • Atharva - Respiratory Disease
  • Amey - Skin Problem
  • Asha - Joint Problem
  • Sanjeeta - Joint Pain
  • A B Mukherjee - Acidity
  • Deepak Sharma - Lower Back Pain
  • Vyjayanti - Pcod
  • Sunil Singh - Thyroid
  • Sarla Gupta - Post Surgery Challenges
  • Syed Masood Ahmed - Osteoarthritis & Bp
Book Free Consultation Call Us