कभी ऐसा हुआ है कि आप बिल्कुल ठीक हों और अचानक आपकी त्वचा पर लाल-लाल उभरे हुए दाने निकल आए हों? कुछ ही देर में तेज़ खुजली शुरू हो जाए और आप समझ ही न पाएँ कि यह क्या हो रहा है। न कोई नया भोजन, न कोई नई दवा, फिर भी शरीर अचानक ऐसी प्रतिक्रिया देने लगे—यह स्थिति कई लोगों को परेशान कर देती है।
ऐसे दाने अक्सर जितनी जल्दी आते हैं, उतनी ही जल्दी कभी-कभी गायब भी हो जाते हैं। लेकिन उनके जाते ही मन में कई सवाल छोड़ जाते हैं। क्या यह एलर्जी है? क्या यह कोई गंभीर त्वचा रोग है? या फिर यह शरीर के अंदर चल रही किसी गड़बड़ी का संकेत है? जब यह समस्या बार-बार होने लगे, तो चिंता होना बिल्कुल स्वाभाविक है।
इन अचानक उभरने वाले दानों को आम तौर पर पित्ती (Urticaria) कहा जाता है। यह केवल त्वचा तक सीमित नहीं होती, बल्कि आपके पाचन, जीवनशैली और मानसिक स्थिति से भी जुड़ी हो सकती है। आगे इस लेख में आप समझेंगे कि ऐसे दाने क्यों निकलते हैं, इन्हें पहचानना क्यों ज़रूरी है और आयुर्वेद इन्हें किस नज़रिए से देखता है।
Urticaria या पित्ती क्या होती है और यह दिखती कैसी है?
अगर आपकी त्वचा पर अचानक लाल रंग के उभरे हुए दाने निकल आते हैं और उनके साथ तेज़ खुजली या जलन महसूस होती है, तो इसे आम भाषा में पित्ती (Urticaria) कहा जाता है। यह समस्या अक्सर बिना किसी चेतावनी के अचानक शुरू होती है और उतनी ही जल्दी कभी-कभी अपने-आप भी ठीक हो जाती है।
पित्ती के दाने सामान्य चकत्तों से थोड़े अलग होते हैं। ये दाने:
- त्वचा की सतह से थोड़े उभरे हुए होते हैं
- लाल या त्वचा के ही रंग जैसे दिखाई दे सकते हैं
- आकार में बहुत छोटे भी हो सकते हैं और कभी-कभी आपस में मिलकर बड़े सूजे हुए धब्बे बना लेते हैं
आपने शायद ध्यान दिया होगा कि कभी-कभी दाने शरीर के एक हिस्से में होते हैं और कुछ समय बाद गायब होकर किसी दूसरे हिस्से में दिखने लगते हैं। यह पित्ती की एक खास पहचान है। कुछ लोगों में ये दाने कुछ मिनटों तक रहते हैं, तो कुछ में कई घंटों तक। ज़्यादातर मामलों में ये चौबीस घंटों के भीतर बिना कोई निशान छोड़े खत्म हो जाते हैं।
पित्ती कोई संक्रामक बीमारी नहीं होती, यानी यह छूने से फैलती नहीं है। लेकिन जब बार-बार यह समस्या होने लगे या लंबे समय तक बनी रहे, तो यह आपके लिए परेशानी का कारण बन सकती है, क्योंकि लगातार खुजली और जलन आपकी नींद, काम और मन की शांति को प्रभावित कर सकती है।
पित्ती के दाने खुजली और जलन क्यों पैदा करते हैं?
जब भी आपका शरीर किसी चीज़ को अपने लिए नुकसानदेह मानता है, जैसे कोई खास भोजन, दवा, मौसम का बदलाव या संक्रमण, तब शरीर की रक्षा प्रणाली सक्रिय हो जाती है। इस प्रक्रिया में शरीर एक रसायन छोड़ता है, जो त्वचा की छोटी-छोटी रक्त नलिकाओं को फैलाता है।
इसके कारण:
- त्वचा मे सूजन आ जाती है
- उस हिस्से में खून का बहाव बढ़ जाता है
- और आपको खुजली, जलन या चुभन महसूस होने लगती है
यही वजह है कि पित्ती के दाने देखने में तो हल्के लगते हैं, लेकिन खुजली इतनी तेज़ हो सकती है कि बार-बार खुजलाने का मन करता है। खुजलाने से थोड़ी देर राहत मिलती है, लेकिन इससे दाने और भी उभर सकते हैं या जलन बढ़ सकती है।
कुछ लोगों में खुजली के साथ-साथ:
- त्वचा में गर्मी महसूस होना
- हल्की चुभन
- या सूजन के कारण त्वचा खिंची-खिंची लगना
भी देखने को मिलता है। अगर सूजन ज़्यादा बढ़ जाए, तो होंठों, पलकों या चेहरे के आसपास भी फुलाव आ सकता है। ऐसे में आपको लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
आपके लिए यह समझना ज़रूरी है कि पित्ती सिर्फ त्वचा की समस्या नहीं होती। यह शरीर के अंदर चल रही प्रतिक्रिया का संकेत होती है। इसलिए बार-बार होने वाली पित्ती यह इशारा कर सकती है कि आपके शरीर को किसी चीज़ से बार-बार परेशानी हो रही है।
क्या हर लाल उभरा हुआ दाना एलर्जी या पित्ती ही होता है?
यह एक बहुत आम सवाल है, क्योंकि हर लाल या खुजलीदार दाने को लोग एलर्जी या पित्ती समझ लेते हैं। लेकिन हर लाल उभरा हुआ दाना पित्ती नहीं होता।
पित्ती की कुछ खास पहचान होती है:
- दाने अचानक निकलते हैं
- अक्सर खुजली ज़्यादा होती है
- दाने कुछ समय बाद बिना निशान छोड़े गायब हो जाते हैं
- एक जगह से हटकर दूसरी जगह दिख सकते हैं
इसके अलावा त्वचा पर लाल दाने कई और कारणों से भी हो सकते हैं, जैसे:
- फंगल संक्रमण, जिसमें खुजली के साथ दाने लंबे समय तक रहते हैं
- घमौरियाँ, जो ज़्यादातर पसीने और गर्मी से होती हैं
- कीड़े के काटने से हुए दाने, जो आमतौर पर एक ही जगह टिके रहते हैं
- कुछ त्वचा रोग, जिनमें दाने धीरे-धीरे बढ़ते हैं और अपने-आप नहीं जाते
अगर आपके दाने:
- कई दिनों तक एक ही जगह बने रहें
- उनमें पपड़ी या पानी भर जाए
- या खुजली के साथ दर्द भी होने लगे
तो यह ज़रूरी नहीं कि वह पित्ती ही हो। ऐसे में सही कारण जानने के लिए डॉक्टर की सलाह लेना ज़रूरी हो जाता है।
आपके लिए सबसे अहम बात यह है कि अगर त्वचा पर बार-बार ऐसे लाल उभरे हुए दाने निकल रहे हैं, तो उन्हें केवल बाहर की क्रीम या घरेलू उपायों से दबाने की बजाय, उनके अंदरूनी कारणों को समझना ज़्यादा ज़रूरी है। सही पहचान के बिना इलाज करने से समस्या बार-बार लौट सकती है।
पित्ती होने के पीछे कौन-कौन से कारण ज़िम्मेदार हो सकते हैं?
जब आपकी त्वचा पर अचानक पित्ती के दाने निकलते हैं, तो मन में सबसे पहला सवाल यही आता है कि आख़िर ऐसा क्यों हो रहा है। पित्ती का एक ही कारण सभी लोगों में नहीं होता। यह आपकी दिनचर्या, खानपान, वातावरण और शरीर की प्रतिक्रिया पर निर्भर करता है।
कुछ आम कारण जो पित्ती को उभार सकते हैं:
खानपान से जुड़े कारण
कुछ लोगों को खास चीज़ें खाने के बाद पित्ती हो जाती है। जैसे ज़्यादा मसालेदार भोजन, खट्टे पदार्थ, बासी खाना, समुद्री भोजन, या बार-बार बाहर का तला-भुना खाना। कभी-कभी दूध और गलत खाद्य संयोजन भी शरीर में ऐसी प्रतिक्रिया पैदा कर देते हैं।
मौसम और वातावरण का असर
ठंडी हवा, अचानक गर्मी, धूप में ज़्यादा देर रहना या बहुत ठंडे पानी से नहाना भी पित्ती को बढ़ा सकता है। कई बार बरसात या मौसम बदलते ही शरीर इस बदलाव को सहन नहीं कर पाता और त्वचा पर दाने उभर आते हैं।
दवाओं की प्रतिक्रिया
कुछ दर्द निवारक दवाएँ, बुखार की दवाएँ या लंबे समय तक ली जा रही दवाएँ भी पित्ती का कारण बन सकती हैं। अगर किसी दवा के बाद आपकी त्वचा पर दाने दिखने लगें, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।
संक्रमण और शरीर की कमजोरी
सर्दी, खाँसी, गले का संक्रमण या पेट से जुड़ी गड़बड़ी के दौरान भी पित्ती निकल सकती है। बच्चों में यह समस्या अक्सर किसी वायरल संक्रमण के बाद देखी जाती है।
पसीना और त्वचा की संवेदनशीलता
ज़्यादा पसीना आना, तंग या सिंथेटिक कपड़े पहनना और त्वचा का बार-बार रगड़ में आना भी पित्ती को उभार सकता है।
कई बार इन सबके बावजूद भी कारण साफ़ समझ में नहीं आता। ऐसे मामलों में शरीर की अंदरूनी गड़बड़ी की ओर ध्यान देना ज़रूरी हो जाता है।
जब पित्ती बार-बार होने लगे तो इसे नज़रअंदाज़ क्यों नहीं करना चाहिए?
अगर पित्ती कभी-कभार हो और कुछ समय में अपने-आप ठीक हो जाए, तो अक्सर लोग इसे हल्की समस्या मान लेते हैं। लेकिन जब यह बार-बार होने लगे या लंबे समय तक बनी रहे, तो यह आपके शरीर की तरफ़ से एक चेतावनी हो सकती है।
बार-बार पित्ती होने पर:
- आपकी त्वचा लगातार खुजली और जलन से परेशान रहती है
- नींद पूरी नहीं हो पाती
- चिड़चिड़ापन और बेचैनी बढ़ने लगती है
- काम और रोज़मर्रा की गतिविधियों पर असर पड़ता है
कुछ लोगों में पित्ती हफ्तों या महीनों तक बार-बार उभरती रहती है। ऐसी स्थिति यह संकेत देती है कि शरीर के अंदर कुछ ऐसा है, जो बार-बार इस प्रतिक्रिया को जन्म दे रहा है। सिर्फ बाहर से दाने दबाने से समस्या जड़ से खत्म नहीं होती।
अगर आपने गौर किया हो कि:
- पित्ती बिना किसी साफ़ कारण के बार-बार हो रही है
- दवाएँ लेने के बाद भी पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो रही
- चेहरे, होंठों या पलकों में सूजन आने लगती है
तो यह ज़रूरी है कि आप इसे नज़रअंदाज़ न करें। समय पर सही समझ और इलाज से न सिर्फ पित्ती को नियंत्रित किया जा सकता है, बल्कि आगे होने वाली परेशानियों से भी बचा जा सकता है।
आयुर्वेद में पित्ती को Sheetapitta क्यों कहा जाता है?
आयुर्वेद पित्ती को सिर्फ त्वचा की बीमारी नहीं मानता, बल्कि इसे पूरे शरीर के असंतुलन का परिणाम मानता है। आयुर्वेद में इस समस्या को शीटपित्त कहा गया है।
शीटपित्त शब्द दो भागों से मिलकर बना है।
- शीट यानी ठंड या अचानक ठंडा प्रभाव
- पित्त यानी शरीर की गर्मी और पाचन से जुड़ा तत्व
जब शरीर में पित्त का संतुलन बिगड़ जाता है और उस पर ठंड, गलत भोजन या वातावरण का असर पड़ता है, तब त्वचा पर पित्ती के रूप में प्रतिक्रिया दिखाई देती है।
आयुर्वेद के अनुसार:
- गलत खानपान से पाचन कमजोर हो जाता है
- अधपचा भोजन शरीर में जमा होने लगता है
- यह गंदगी रक्त के साथ मिलकर त्वचा तक पहुँचती है
- और फिर खुजली, जलन और उभरे हुए दानों के रूप में बाहर दिखाई देती है
यही कारण है कि आयुर्वेद में पित्ती के इलाज में केवल दानों पर ध्यान नहीं दिया जाता, बल्कि पाचन, आहार और जीवनशैली को सुधारना उतना ही ज़रूरी माना जाता है।
पित्ती में कौन-सी आयुर्वेदिक दवाएँ दी जाती हैं और क्यों?
आयुर्वेद में पित्ती के इलाज के लिए दवाएँ हर व्यक्ति को एक जैसी नहीं दी जातीं। आपकी उम्र, शरीर की प्रकृति, पाचन की स्थिति और पित्ती की तीव्रता को देखकर उपचार तय किया जाता है। उद्देश्य केवल दानों को शांत करना नहीं, बल्कि उस कारण को सुधारना होता है जिससे पित्ती बार-बार उभर रही है।
आमतौर पर पित्ती में ऐसी दवाएँ दी जाती हैं जो:
- शरीर की गर्मी को संतुलित करें
- रक्त को शुद्ध करने में मदद करें
- पाचन को मज़बूत बनाएँ
- और त्वचा की संवेदनशीलता को कम करें
कुछ दवाएँ काढ़े या चूर्ण के रूप में दी जाती हैं, ताकि शरीर में जमा गंदगी धीरे-धीरे बाहर निकल सके। वहीं कुछ घृत आधारित औषधियाँ शरीर को अंदर से पोषण देती हैं और जलन को शांत करती हैं।
इसके अलावा ऐसी औषधियाँ भी दी जाती हैं जो पाचन को सुधारकर शरीर की सहनशक्ति बढ़ाती हैं। जब पाचन ठीक होता है, तो शरीर बाहरी कारणों से होने वाली प्रतिक्रियाओं को बेहतर तरीके से संभाल पाता है। इससे पित्ती के दोबारा उभरने की संभावना कम होती है।
आपके लिए यह जानना ज़रूरी है कि आयुर्वेदिक दवाएँ तभी सही तरह से काम करती हैं, जब उनके साथ सही खानपान और जीवनशैली भी अपनाई जाए। केवल दवा लेना और बाकी आदतें वही रखना, लंबे समय में पूरा लाभ नहीं दे पाता।
निष्कर्ष
अगर आपकी त्वचा पर बार-बार अचानक लाल उभरे हुए दाने निकल आते हैं, तो यह केवल बाहर की समस्या नहीं हो सकती। पित्ती अक्सर शरीर के भीतर चल रहे असंतुलन का संकेत होती है, जिसे समय रहते समझना और संभालना ज़रूरी होता है। खुजली और जलन को कुछ देर के लिए दबा देना आसान है, लेकिन असली राहत तभी मिलती है जब कारण तक पहुँचा जाए।
आपका पाचन, खानपान, दिनचर्या और मानसिक स्थिति—ये सभी मिलकर आपकी त्वचा की सेहत को प्रभावित करते हैं। जब आप अपने शरीर के संकेतों को गंभीरता से लेते हैं, तभी स्थायी सुधार की दिशा में कदम बढ़ते हैं। आयुर्वेद इसी समझ पर आधारित है, जहाँ इलाज सिर्फ लक्षणों पर नहीं, बल्कि पूरे शरीर के संतुलन पर किया जाता है।
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FAQs
- क्या पित्ती अपने-आप ठीक हो सकती है या इलाज ज़रूरी होता है?
कुछ मामलों में पित्ती अपने-आप ठीक हो जाती है, लेकिन बार-बार होने पर कारण जानना और सही इलाज लेना ज़रूरी होता है, ताकि समस्या दोबारा न लौटे।
- पित्ती होने पर तुरंत क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
पित्ती होने पर खुजलाने से बचें, ठंडे या बहुत गर्म पानी से न नहाएँ और ऐसे भोजन से दूरी रखें, जिससे पहले समस्या बढ़ी हो।
- क्या पित्ती शरीर के किसी एक हिस्से तक सीमित रहती है?
नहीं, पित्ती के दाने शरीर के एक हिस्से से गायब होकर दूसरे हिस्से में भी दिख सकते हैं, यह इसकी सामान्य प्रकृति मानी जाती है।
- क्या पित्ती में घरेलू उपाय सुरक्षित होते हैं?
हल्के मामलों में कुछ घरेलू उपाय आराम दे सकते हैं, लेकिन बार-बार या गंभीर पित्ती में बिना सलाह केवल घरेलू उपायों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।
- क्या पित्ती बच्चों में ज़्यादा खतरनाक होती है?
बच्चों में पित्ती अक्सर संक्रमण या भोजन से जुड़ी होती है। बार-बार होने पर इसे हल्के में न लें और डॉक्टर की सलाह लेना ज़रूरी होता है।
- क्या मौसम बदलने पर पित्ती बढ़ सकती है?
हाँ, मौसम का अचानक बदलना शरीर को प्रभावित करता है, जिससे कुछ लोगों में पित्ती के दाने उभर सकते हैं, खासकर संवेदनशील त्वचा वालों में।
- क्या लंबे समय तक पित्ती रहने से त्वचा पर निशान पड़ सकते हैं?
आमतौर पर पित्ती बिना निशान छोड़े ठीक हो जाती है, लेकिन लगातार खुजलाने या गलत देखभाल से त्वचा पर दाग पड़ सकते हैं।




























































































