Diseases Search
Close Button
 
 

एक ही तेल को बार-बार गर्म करना kitchen shortcut है, लेकिन कब risk बन सकता है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

पकौड़े या समोसे तलने के बाद कड़ाही में बचा हुआ तेल रख लिया जाता है। इसे अगली बार सब्ज़ी छौंकने या फिर से कुछ तलने के लिए इस्तेमाल करना एक आम बात है। यह किचन का एक ऐसा तरीका है जो समय और पैसे दोनों बचाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह आदत आपकी सेहत के लिए कितनी भारी पड़ सकती है? बार-बार गर्म होने पर तेल के अंदर ऐसे रासायनिक बदलाव होते हैं जो इसे धीमे ज़हर में बदल देते हैं। आइए समझते हैं कि कब यह बचत एक बड़ा जोखिम बन जाती है।

क्या एक ही तेल को बार-बार गर्म करना सही है?

​बचे हुए तेल को फेंकना हमें खराब लगता है इसलिए हम उसे दोबारा काम में ले लेते हैं। कभी-कभार ऐसा करना शायद तुरंत नुकसान न पहुँचाए, लेकिन इसे आदत बना लेना बिल्कुल सही नहीं है। जब हम तेल को तेज़ आँच पर गर्म करते हैं तो उसकी संरचना टूटने लगती है। हर बार गर्म होने पर तेल की गुणवत्ता गिरती जाती है और उसमें ज़हरीले तत्व पैदा होने लगते हैं। अगर आप रोज़ाना उसी तेल को कड़ाही में डालकर खाना पका रहे हैं तो आप अनजाने में ही अपनी और अपने परिवार की सेहत के साथ बहुत बड़ा खिलवाड़ कर रहे हैं।

​तेल को बार-बार गर्म करने से क्या होता है?

​जब तेल को बार-बार तेज़ आँच पर गर्म किया जाता है तो उसमें मौजूद अच्छे फैट्स खत्म होने लगते हैं और वह ट्रांस फैट में बदलने लगता है। इसके साथ ही तेल में फ्री रेडिकल्स बनते हैं जो शरीर की कोशिकाओं को नुकसान पहुँचाते हैं। बार-बार गर्म होने से तेल का स्मोक पॉइंट कम हो जाता है जिसका मतलब है कि अगली बार वह और भी जल्दी जलने लगेगा और धुआँ छोड़ेगा। इस प्रक्रिया में एक्रिलामाइड जैसे हानिकारक रसायन पैदा होते हैं। यही रसायन तेल को गाढ़ा चिपचिपा और गहरे रंग का बना देते हैं, जो शरीर के लिए बेहद नुकसानदायक होते हैं।

​तेल में झाग क्यों बनने लगता है?

जब कड़ाही में पुराना तेल दोबारा डाला जाता है तो उसमें बहुत सारा झाग उठने लगता है। ऐसा तब होता है जब तेल अपनी शुद्धता पूरी तरह खो चुका होता है। बार-बार गर्म होने से तेल के अणु टूटकर हवा और नमी के साथ प्रतिक्रिया करते हैं। इसके अलावा, पहले तले गए खाने के छोटे-छोटे कण तेल में रह जाते हैं जो जलकर झाग बनाते हैं। यह झाग इस बात का सीधा संकेत है कि तेल अब खाने लायक नहीं बचा है और पूरी तरह से खराब हो चुका है। ऐसे तेल का इस्तेमाल तुरंत बंद कर देना चाहिए।

तेल को दोबारा गर्म करने की आम गलतियाँ

हम तेल बचाते समय कुछ ऐसी गलतियाँ कर बैठते हैं जो उसे और भी ज़्यादा ज़हरीला बना देती हैं।

  • ​तले हुए खाने के छोटे टुकड़ों को तेल में ही छोड़ देना जो अगली बार जलकर कार्बन बन जाते हैं।
  • ​गर्म तेल को सीधे किसी प्लास्टिक के डिब्बे में उड़ेल देना, जिससे प्लास्टिक के रसायन तेल में मिल जाते हैं।
  • ​पुराने बचे हुए तेल में बिल्कुल नया तेल मिलाकर इस्तेमाल करना यह नए तेल को भी खराब कर देता है।
  • ​तेल को खुली जगह या धूप में रखने जिससे वह हवा के संपर्क में आकर जल्दी खराब हो जाता है।

​एक ही तेल को कितनी बार इस्तेमाल करें?

​विशेषज्ञों की मानें तो किसी भी तेल को एक बार से ज़्यादा तलने के लिए इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। फिर भी अगर आप इसे इस्तेमाल करना ही चाहते हैं तो ज़्यादा से ज़्यादा एक या दो बार ही इसे काम में लें। वह भी तब जब आपने पहली बार तेल को बहुत ज़्यादा देर तक न उबाला हो। अगर पहली ही बार में तेल में से बहुत धुआँ निकल चुका है तो उसे दोबारा बिल्कुल इस्तेमाल न करें। सबसे सही तरीका यह है कि एक बार तलने के बाद बचे हुए तेल को सिर्फ हल्की सब्ज़ी छौंकने के लिए इस्तेमाल करके खत्म कर दें।

​कौन-से तेल को बार-बार गर्म करने से बचें?

जिन तेलों का स्मोक पॉइंट बहुत कम होता है उन्हें दोबारा गर्म नहीं करना चाहिए। सरसों का तेल मूंगफली का तेल या सोयाबीन का तेल भारतीय घरों में ज़्यादा इस्तेमाल होता है लेकिन जब इन्हें एक बार तेज़ आँच पर गर्म कर लिया जाए, तो ये जल्दी खराब होने लगते हैं। इसके अलावा ऑलिव ऑयल जैसे महंगे तेल को तो कभी भी डीप फ्राई करने या बार-बार गर्म करने के लिए इस्तेमाल नहीं करना चाहिए क्योंकि इसके सारे पोषक तत्व तुरंत नष्ट हो जाते हैं।

बार-बार गर्म तेल खाने से क्या नुकसान हो सकते हैं?

​खराब तेल का लगातार इस्तेमाल शरीर में अंदरूनी सूजन बढ़ाता है और कई बड़ी बिमारियों का खतरा बढ़ जाता है। 

  • ​खराब तेल में मौजूद ट्रांस फैट शरीर में बुरे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है, जिससे दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
  • ​यह एसिडिटी सीने में जलन और पेट की गैस जैसी पुरानी पाचन संबंधी परेशानियाँ पैदा करता है।
  • ​लगातार ऐसा तेल खाने से लिवर पर भारी दबाव पड़ता है और फैटी लिवर की समस्या हो सकती है।
  • ​इसमें मौजूद फ्री रेडिकल्स और कैंसरकारी तत्व शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बहुत कमज़ोर कर देते हैं।

​तेल खराब होने के संकेत कैसे पहचानें?

​आपको कैसे पता चलेगा कि कड़ाही में रखा तेल खराब हो चुका है? 

  • ​तेल का रंग पहले से बहुत ज़्यादा गहरा काला या भूरा हो जाना।
  • ​तेल में चिपचिपाहट बढ़ जाना और उसका गाढ़ापन शहद जैसा लगने लगना।
  • ​गर्म करते ही तेल से बहुत तीखी और अजीब सी गंध आने लगना।
  • ​कड़ाही में डालते ही तेल का बहुत जल्दी धुआँ छोड़ने लगना।
  • ​सतह पर बहुत ज़्यादा झाग या बुलबुले उठना जो कम होने का नाम न लें।

​निष्कर्ष:

एक ही तेल को बार-बार कड़ाही में खौलाना अपने ही हाथों बीमारियों को बुलावा देना है। आज की छोटी-सी बचत कल को अस्पताल का बड़ा बिल बन सकती है। इसलिए हमेशा कोशिश करें कि कड़ाही में तलने के लिए उतना ही तेल लें जितनी ज़रूरत हो, ताकि कम से कम तेल बचे। अगर बच भी जाए, तो उसे सही तरीके से छानकर जल्द से जल्द इस्तेमाल कर लें। स्वस्थ शरीर से बढ़कर कोई और खज़ाना नहीं है।

References:

https://www.who.int/news/item/19-05-2025-who-recognizes-four-countries-with-life-saving-trans-fat-elimination-policies

https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC3551118/

https://www.fda.gov/food/food-additives-petitions/trans-fat

https://www.sciencedirect.com/science/article/pii/S0735109724075715

https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/28925728/

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

अगर तेल सिर्फ एक बार इस्तेमाल हुआ है और जला नहीं है तो आप उससे पराठे बना सकते हैं।

अगर पहली बार तेल बहुत ज़्यादा पकाया नहीं गया था तो उसे छानकर दूसरी बार इस्तेमाल किया जा सकता है।

छानने से खाने के जले हुए छोटे टुकड़े बाहर निकल जाते हैं, जिससे तेल जल्दी खराब नहीं होता और ज़हरीला धुआँ नहीं छोड़ता।

छने हुए ठंडे तेल को हवा बंद बर्तन में डालकर फ्रिज में रखने से उसकी उम्र थोड़ी बढ़ जाती है।

ऐसा कभी नहीं करना चाहिए क्योंकि पुराना तेल नए तेल को भी बहुत जल्दी खराब और चिपचिपा कर देता है।

यह वह तापमान है जिस पर गर्म होने के बाद तेल से धुआँ निकलने लगता है और वह जलना शुरू हो जाता है।

बदबू आना तेल के पूरी तरह से सड़ जाने का संकेत है ऐसे तेल को बिना सोचे तुरंत बाहर फेंक देना चाहिए।

एक स्वस्थ व्यक्ति को पूरे दिन में तीन से चार चम्मच से ज़्यादा तेल का सेवन नहीं करना चाहिए।

Top Ayurveda Doctors

Social Timeline

Our Happy Patients

  • Sunita Malik - Knee Pain
  • Abhishek Mal - Diabetes
  • Vidit Aggarwal - Psoriasis
  • Shanti - Sleeping Disorder
  • Ranjana - Arthritis
  • Jyoti - Migraine
  • Renu Lamba - Diabetes
  • Kamla Singh - Bulging Disc
  • Rajesh Kumar - Psoriasis
  • Dhruv Dutta - Diabetes
  • Atharva - Respiratory Disease
  • Amey - Skin Problem
  • Asha - Joint Problem
  • Sanjeeta - Joint Pain
  • A B Mukherjee - Acidity
  • Deepak Sharma - Lower Back Pain
  • Vyjayanti - Pcod
  • Sunil Singh - Thyroid
  • Sarla Gupta - Post Surgery Challenges
  • Syed Masood Ahmed - Osteoarthritis & Bp
Book Free Consultation Call Us