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स्मोकिंग नहीं करते फिर भी खतरा! दिनभर बैठे रहने से हार्ट पर क्या असर पड़ता है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 22 Jun, 2026
  • category-iconUpdated on 22 Jun, 2026
  • category-iconHeart Health
  • blog-view-icon5007

आजकल अक्सर लोगों को यह कहते सुना जाता है कि "मैं तो न सिगरेट पीता हूं, न शराब, फिर भी मुझे हार्ट की समस्या कैसे हो सकती है?" अगर आप भी ऐसा ही सोचते हैं, तो यह खबर आपको ज़रूर पढ़नी चाहिए। आजकल की कॉर्पोरेट लाइफ और वर्क-फ्रॉम-होम कल्चर ने हमें कुर्सी से चिपका दिया है। हम 8 से 10 घंटे बस स्क्रीन के सामने बैठे रहते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि आपका यह लगातार बैठे रहना आपके दिल के लिए एक मीठे जहर की तरह काम कर रहा है। आइए, आसान बोलचाल की भाषा में समझते हैं कि अगर आप स्मोकिंग नहीं भी करते हैं, तो भी दिनभर बैठे रहना आपके हार्ट (दिल) को कैसे खोखला कर रहा है।

क्या सिर्फ स्मोकिंग से ही हार्ट की बीमारी होती है?

यह सबसे बड़ा मिथक (भ्रम) है कि हार्ट अटैक या दिल की बीमारियां सिर्फ उन लोगों को होती हैं जो सिगरेट या बीड़ी पीते हैं। बेशक, धूम्रपान दिल की नसों को तुरंत सिकोड़ देता है और यह बहुत खतरनाक है। लेकिन, बिना हिले-डुले घंटों तक एक ही पोस्चर में बैठे रहना भी आपके दिल को धीरे-धीरे बीमार कर रहा है। इसे मेडिकल भाषा में 'सेडेंटरी लाइफस्टाइल' (Sedentary Lifestyle) या गतिहीन जीवनशैली कहते हैं, जो आज के समय में हार्ट से जुड़ी बीमारियों का सबसे बड़ा साइलेंट किलर बन चुका है।

कितने प्रतिशत भारतीय दिल की बीमारियों से जूझ रहे है?

हमारे देश में दिल की बीमारियों के मामले बहुत तेज़ी से बढ़ रहे हैं। रिपोर्ट्स बताती हैं कि हमारी आबादी का करीब 10 से 12 प्रतिशत हिस्सा किसी न किसी हार्ट प्रॉब्लम से जूझ रहा है और शहरों में तो हालात सच में बहुत खराब हैं।सबसे ज़्यादा डराने वाली बात तो यह है कि पूरी दुनिया के कुल हार्ट मरीज़ों में से 60 प्रतिशत सिर्फ हम भारतीय हैं। देश में होने वाली मौतों में से 27 प्रतिशत से ज़्यादा केवल दिल की बीमारियों की वजह से होती हैं। पहले लगता था कि हार्ट अटैक सिर्फ बुज़ुर्गों को आता है लेकिन आजकल 50 साल से कम उम्र के युवाओं में भी इसके मामले बहुत तेज़ी से बढ़ रहे हैं। हमारा उल्टा-सीधा खानपान, दिनभर कुर्सी पर बैठे रहना, हद से ज्यादा स्ट्रेस और फिज़िकल एक्टिविटी का बिल्कुल ना होना ही इन सबके पीछे की सबसे बड़ी वजह है।

दिनभर बैठे रहने से आपके हार्ट पर क्या असर पड़ता है?

जब आप घंटों तक एक ही जगह बैठे रहते हैं, तो आपके शरीर का ब्लड सर्कुलेशन (रक्त संचार) बहुत धीमा हो जाता है। हार्ट का काम पूरे शरीर में खून पंप करना है, लेकिन जब आप शारीरिक रूप से एक्टिव नहीं होते हैं, तो हार्ट को खून पंप करने में ज्यादा जोर लगाना पड़ता है। लंबे समय तक ऐसा होने से धमनियों (Arteries) का लचीलापन कम होने लगता है और वे सख्त होने लगती हैं, जिससे भविष्य में हार्ट फेलियर या हार्ट अटैक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

सिटिंग इज द न्यू स्मोकिंग' - क्या ये बात सच है?

हाल ही में कई विदेशी रिसर्च और हेल्थ एक्सपर्ट्स ने Sitting is the new smoking  (बैठना नई स्मोकिंग है) नाम का टर्म इस्तेमाल किया है। इसका सीधा सा मतलब है कि जो नुकसान सिगरेट पीने से शरीर को होता है, लगभग वैसा ही नुकसान दिनभर बैठे रहने से भी हो रहा है। सिगरेट सीधे तौर पर आपके खून में जहर घोलती है, जबकि लगातार बैठना आपके शरीर के मेटाबॉलिज्म को सुस्त कर देता है, जिससे दिल की काम करने की क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है।

कोलेस्ट्रॉल, ब्लड प्रेशर और मोटापे का सीधा कनेक्शन

कुर्सी पर लगातार बैठे रहने का सीधा असर आपके वजन पर पड़ता है। जब आप चलते-फिरते नहीं हैं, तो शरीर फैट बर्न करना बंद कर देता है। इसकी वजह से:

  • शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल (LDL) बढ़ने लगता है और गुड कोलेस्ट्रॉल (HDL) कम हो जाता है।
  • नसों में फैट जमने लगता है जिससे ब्लड प्रेशर हाई रहने लगता है।
  • टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है।

ये तीनों ही चीज़ें (मोटापा, हाई बीपी और शुगर) हार्ट अटैक को दावत देने के लिए काफी हैं।

दिनभर बैठे रहने पर क्या कहता है आयुर्वेद?

आयुर्वेद के अनुसार, दिनभर एक ही जगह बैठे रहने से शरीर में 'कफ' दोष (Kapha Dosha) तेज़ी से बढ़ने लगता है और हमारी जठराग्नि (पाचन तंत्र) मंद पड़ जाती है। शारीरिक मेहनत न करने से शरीर में 'आम' (टॉक्सिन्स या जहरीले तत्व) बनने लगते हैं। यही टॉक्सिन्स जब हमारी रक्त वाहिकाओं (धमनियों) में जमा होते हैं, तो नसों में रुकावट (Blockage) पैदा करते हैं, जो सीधे तौर पर हमारे हृदय की कार्यप्रणाली को नुकसान पहुँचाकर दिल की बीमारियों को जन्म देते हैं।

डेस्क जॉब वाले कुर्सी पर बैठे-बैठे हार्ट को कैसे बचाएं?

अगर आपकी मजबूरी है कि आपको दिनभर लैपटॉप के सामने बैठना ही है, तो घबराएं नहीं। अपनी आदतों में ये छोटे-छोटे बदलाव करके आप अपने हार्ट को बचा सकते हैं:

  • हर 40 मिनट का नियम: हर 40 से 45 मिनट के बाद कुर्सी से उठें और 2 मिनट के लिए ही सही, लेकिन थोड़ा टहल लें।
  • स्ट्रेचिंग करें: बैठे-बैठे अपने पैरों, कंधों और गर्दन को स्ट्रेच करते रहें ताकि ब्लड सर्कुलेशन बना रहे।
  • फोन पर चलते हुए बात करें: जब भी फोन आए, तो कुर्सी पर बैठकर बात करने के बजाय वॉक करते हुए बात करें।
  • लिफ्ट की जगह सीढ़ियाँ: ऑफिस में लिफ्ट का इस्तेमाल कम करें और सीढ़ियाँ चढ़ने की आदत डालें। यह हार्ट के लिए सबसे अच्छी एक्सरसाइज है।

निष्कर्ष

सीधी सी बात यह है कि इंसानी शरीर दिनभर एक जगह बैठे रहने के लिए नहीं बना है, इसे चलते-फिरते रहने के लिए डिजाइन किया गया है। आप स्मोकिंग नहीं करते, यह आपके हार्ट के लिए एक बहुत अच्छी बात है, लेकिन अगर आप दिनभर कुर्सी से चिपके रहते हैं, तो आप अनजाने में ही अपने दिल को खतरे में डाल रहे हैं। आपको अपनी नौकरी छोड़ने की ज़रूरत नहीं है, बस अपनी कुर्सी से थोड़ी-थोड़ी देर में ब्रेक लेने की आदत डालिए। सक्रिय रहिए, मस्त रहिए और अपने दिल का ख्याल रखिए!

References

https://www.who.int/publications/i/item/9789240001367

https://www.who.int/publications/i/item/WHO-NMH-NVI-19-8

https://www.paho.org/en/hearts-americas

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

नहीं। हालांकि खड़े होना बैठने से बेहतर है, लेकिन लंबे समय तक एक ही जगह खड़े रहना भी पैरों की नसों (Varicose veins) और ब्लड सर्कुलेशन के लिए अच्छा नहीं है। शरीर के लिए गति (Movement) सबसे महत्वपूर्ण है, न कि केवल खड़े रहना।

इसे एक्टिव काउच पोटैटो (Active Couch Potato) सिंड्रोम कहते हैं। रिसर्च बताती है कि दिन में 1 घंटा जिम करना, बाकी के 23 घंटों की शारीरिक निष्क्रियता के मेटाबॉलिक नुकसान को पूरी तरह से नहीं मिटा पाता। नियमित रूप से बीच-बीच में मूवमेंट करना अधिक प्रभावी है।

कुर्सी पर बैठते समय कमर को सीधा रखें (Lumbar support), पैरों को जमीन पर सपाट रखें और घुटनों को कूल्हों के समानांतर रखें। गलत पोस्चर से शरीर के अंगों पर दबाव बढ़ता है, जिससे तनाव पैदा होता है और अप्रत्यक्ष रूप से हार्ट रेट प्रभावित हो सकता है।

जी हाँ, जो लोग दिनभर बैठे रहते हैं और रात में नींद पूरी नहीं करते, उनमें कोर्टिसोल (स्ट्रेस हार्मोन) का स्तर बहुत बढ़ जाता है, जो धमनियों में सूजन और हार्ट की समस्याओं का कारण बनता है।

काफ पंप्स (Calf Pumps): बैठे-बैठे अपने पैरों की एड़ियों को ऊपर-नीचे करें। यह पैरों में जमा खून को वापस दिल की ओर पंप करने में मदद करता है, जिससे डीप वेन थ्रोम्बोसिस (DVT) का खतरा कम होता है।

हां, यदि आप बैठे रहते हैं और बहुत ज्यादा कैफीन लेते हैं, तो यह ब्लड प्रेशर में अस्थायी उछाल ला सकता है, जो आलस के कारण पहले से ही कमजोर हो रही धमनियों पर अतिरिक्त दबाव डालता है।

अगर बैठे-बैठे पैरों में सूजन (Edema), अचानक थकान, चक्कर आना या सांस फूलने जैसी समस्या हो रही है, तो यह संकेत है कि आपका ब्लड सर्कुलेशन ठीक नहीं है। यह हार्ट के लिए चेतावनी हो सकती है।

बिल्कुल। कम पानी पीने से खून थोड़ा गाढ़ा हो जाता है। जब आप बैठे होते हैं, तो वैसे ही रक्त संचार धीमा होता है। ऐसे में गाढ़ा खून धमनियों में क्लॉट (थक्का) बनाने का खतरा बढ़ा देता है।

जी हाँ! इन्हें NEAT (Non-Exercise Activity Thermogenesis) कहा जाता है। ये छोटी-छोटी गतिविधियां दिनभर कैलोरी बर्न करने और मेटाबॉलिज्म को एक्टिव रखने में बहुत बड़ी भूमिका निभाती हैं।

सिर्फ लिपिड प्रोफाइल (कोलेस्ट्रॉल) ही काफी नहीं है। 30-35 की उम्र के बाद समय-समय पर HbA1c (शुगर चेक करने के लिए), ब्लड प्रेशर मॉनिटरिंग और जरूरत पड़ने पर कार्डियोलॉजिस्ट की सलाह से TMT (ट्रेडमिल टेस्ट) करवाना चाहिए ताकि यह पता चल सके कि एक्सरसाइज या भाग-दौड़ के समय हार्ट कैसे रिएक्ट करता है।

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