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लंबे समय तक बैठना pelvic comfort और lower-body stiffness को कैसे प्रभावित कर सकता है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 20 Aug, 2026
  • category-iconUpdated on 20 Aug, 2026
  • category-iconJoint Health
  • blog-view-icon5007

आज के आधुनिक दौर में ऐसा हो गया है कि लंबे समय तक बैठना और काम करना एक आम बात सी बन गई है लोगों के लिए ,लेकिन क्या आप जानते हैं इससे आपके शरीर को कितनी बड़ी समस्या का सामना करना पड़ सकता है ,लोग काफी समय तक कई घंटे तक ऐसे ही अपनी कुर्सी पर बैठे रहते हैं और बैठे-बैठे उनको दर्द भी होने लगता है जिसे वह आम समझ के इग्नोर कर देते हैं लेकिन आपको बता दिया जाए कि लंबे समय तक बैठना आपके पेल्विक muscle लिए ठीक नहीं है और इसी के साथ-साथ यह आपकी lower बॉडी को सुन कर सकता है या स्टीफनेस पैदा कर सकता है जिसकी वजह से शुरू में आपको सब सामान्य लगेगा लेकिन धीरे-धीरे आपको पता लगेगा कि आपका शरीर और आपका निचला हिस्सा वह खराब हो रहा है 

लंबे समय तक बैठने से शरीर में क्या होता है 

हमारे शरीर लंबे समय तक बिल्कुल सीधा रहने के लिए नहीं बना है ,बैठते समय hips और knees मुड़े रहते हैं और शरीर का वजन हमारे pelvic तथा आसपास के हिस्सों पर आता है अगर कई घंटे तक posture नहीं बदल जाए तो कुछ muscles लगातार same पोजीशन में रहती है इससे मसल में सक्रियता कम होती है ,समय के साथ उठने या चलने पर शरीर को दोबारा मूवमेंट आने में कुछ समय लग सकता है ,यही वजह है कि लंबे समय तक बैठने के बाद पहले कुछ कदमों में लोअर बॉडी stifness महसूस हो सकती है 

लोगों को और क्या-क्या महसूस हो सकता है

साथ ही इन symptoms की intensity व्यक्ति का posture , chair level, शरीर की मोबिलिटी और पहले से मौजूद समस्याओं पर भी निर्भर करता है|

इस समस्या से पीड़ित कौन जल्दी हो सकते हैं 

  • डिलीवरी बाद महिलाये
  • जो लोग सारे दिन अपने डेस्क पर बैठकर काम करते हैं
  • जिन लोगों को कमर में दर्द की शिकायत रहती है
  • जिन लोगों का बैठने का posture सही नहीं रहता
  • जो लोग लंबे समय तक मांसपेशियों में खिंचाव महसूस कर रहे हैं

Lower body stifness सिर्फ पैरों की समस्या नहीं है 

कुछ लोग जकड़न को केवल हमारी टांगों से जोड़ते हैं लेकिन Hips, Pelvis और Lower back एक दूसरे से जुड़े हुए तरीके से काम करते हैं, उदाहरण के लिए यदि Hips पर्याप्त रूप से मूव नहीं कर रहे हैं तो शरीर के दूसरे जॉइंट या muscles से भी मूवमेंट compensate कर सकते हैं इसका लोअर बैक या pelvis में खिंचाव जैसा महसूस हो सकता है इसी कारण लंबे समय तक बैठे रहने के बाद केवल टांगों को स्ट्रेट करने के बजाय पूरी लोअर बॉडी को धीरे-धीरे मूव करना अधिक उपयोगी है , जिससे आपका खराब posture को सही करने में थोड़ी बहुत मदद मिल सकती है 

कौन-सी आदतें हम सुधार सकते हैं 

अच्छी बात यह है ,अगर आपको कोई symptom ज्यादा परेशान नहीं कर रहा है और आप कोशिश कर रहे हैं कि आपके साथ क्या हो रहा है यह पता लगाने की तो अभी ज्यादा देर हुई नहीं है हो सकता है आप कुछ ऐसी आदत है जो ठीक करके अपने posture को अपने शरीर को थोड़ा ठीक महसूस करा सकते हैं

  • बैठने की आदत में सुधार ले,अपनी कमर को सीधा करके बैठे
  • हर 30 से 45 मिनट में ब्रेक लेऔर अपनी बॉडी को सीधा करेंया थोड़ा टहल के आए
  • अपने बैठने की कुर्सी और बॉडी के पोस्टरको सही रखें
  • अपने तनाव को कंट्रोल में रखने की कोशिश करें जिससे आपकी मांसपेशियों पर खिंचाव कम पड़ेगा, आप यह कर सकते हैं कि अपने शरीर में जहां भी आपको खिंचाव महसूस हो रहा है वहां पर तेल से मालिश करें
  • अपनी जॉब या काम के दौरान दिन में एक या दो बार बॉडी स्ट्रैचिंग जरूर करें 

जोड़ों में अकड़न के लिए जीवनशैली और योग

आयुर्वेद के अनुसार, हमारी जीवनशैली का हमारे जोड़ों की सेहत और तंदुरुस्ती पर गहरा असर पड़ता है। जीवनशैली में कुछ बदलाव करने के साथ-साथ योग और सांस लेने की कुछ तकनीकें अपनाना फायदेमंद हो सकता है।

कैट-काऊ स्ट्रेच: यह आसन रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाने और जोड़ों को ढीला करने में मददगार हो सकता है।

चाइल्ड्स पोज़ (बालासन): यह आसन जोड़ों में अकड़न की समस्या से राहत दिलाने में मदद कर सकता है।

भुजंगासन (कोबरा पोज़): यह आसन पीठ को मज़बूत बनाने और रक्त संचार को बेहतर करने में मददगार हो सकता है।

ताड़ासन (माउंटेन पोज़): यह आसन शरीर की मुद्रा (पोस्चर) को सही बनाए रखने में मददगार हो सकता है।

सीटेड फॉरवर्ड बेंड: यह आसन मांसपेशियों को स्ट्रेच करने में मददगार हो सकता है।

निष्कर्ष

लंबे समय तक बैठे रहना तथा पेल्विक फ्लोर या मसल्स को अपने हिसाब से लंबे समय तक बैठे रहना अपने आप में हर व्यक्ति के लिए बीमारी का कारण नहीं है ,लेकिन लगातार inactivity और एक ही पोजीशन में रहना pelvic comfort, hip mobility और lower body stiffness को प्रभावित कर सकता है, समाधान केवल महंगी chair, लंबे Stretching सेशन में नहीं है, दिन भर में छोटे-छोटे मूवमेंट ब्रेक लेना, सिटिंग पोजिशन बदलना नियमित वॉकिंग करना और physical activity बनाए रखना ज्यादा सही तरीका है शरीर को हर समय परफेक्ट posture की जरूरत नहीं होती उसे नियमित रूप से मूवमेंट की जरूरत होती है

References

Evidence of Health Risks Associated with Prolonged Standing at Work and Intervention Effectiveness - PMC

Spinal and Pelvic Alignment of Sitting Posture Associated with Smartphone Use in Adolescents with Low Back Pain - PMC

Muscle Stiffness: Causes, Diagnosis, Treatment, and More

Lower Limb Stiffness During a Loaded Walk and Run Over Different Surfaces - PMC

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

क्योंकि hips, pelvis और lower back एक-दूसरे से जुड़ी चेन की तरह हैं; लगातार एक ही पोज़ में रहने से pelvic region पर दबाव बढ़ता है और मसल्स की stiffness बढ़ती है।

नहीं,hips, pelvis और lower back भी प्रभावित होते हैं; इन सभी का एक साथ movement pattern प्रभावित हो सकता है।

डिलीवरी के बाद महिलाएं, जो लोग लंबे समय तक डेस्क पर बैठते हैं, कमर दर्द की शिकायत, गलत बैठने की आदत, और मांसपेशियों में खिंचाव वाले लोग।

नहीं; आधुनिक sedentary lifestyle में हर उम्र के लोग प्रभावित हो सकते हैं, खासकर अगर sitting habit खराब हो।

नियमित movement, छोटे-छोटे ब्रेक, और पूरे शरीर को धीरे-धीरे मूव रखने से बेहतर होता है; जरूरी नहीं कि महंगे stretches ही करें।

सही बैठना; हर 30,45 मिनट पर ब्रेक लेना; सीटिंग पोस्टर ठीक रखना; थोड़ा-थोड़ा टहलना; बीच-बीच में बॉडी-स्ट्रेचिंग करना।

पूरे lower body को गहरे-धीरे स्ट्रेच करने वाले अभ्यास बेहतर हैं, hips, hamstrings, glutes, lower back को समय दें।

कैट-काऊ, चाइल्ड्स पोज़, भुजंगासन, ताड़ासन, सीटेड फॉरवर्ड बेंड जैसे आसन और उचित breathing से joint mobility और pelvic comfort बढ़ती है।

Chair बदलाव मदद कर सकते हैं, पर दीर्घकालीन सुधार के लिए movement-ही-मेथड जरूरी है: छोटे breaks, walking, और daily activity

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