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तनाव में कुछ लोगों को भूख ज्यादा और कुछ को बिल्कुल कम क्यों लगती है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

चिंता और तनाव कि वजह से भूक पर बहुत ज़्यादा असर पड़ता है और कई लोगों के लिए ये ज़्यादा खाने कि वजह बनती है। क्योंकि वे भोजन को ही तनावमुक्त होने का ज़रिया मानते हैं। लेकिन कुछ लोगों के लिए इसका उल्टा होता है। चिंता और तनाव के कारण उनकी भूख कम हो जाती है।  वे काम खा सकते हैं या पूरी तरह से भोजन छोड़ सकते हैं। तनाव कैसा है या किसलिए है, इसके आधार पर भूख का संकेत बदल जाता है। 

और कुछ लोगों को रोज़मर्रा के तनाव से मुक्त होने के लिए भोजन का सहारा लेना पड़ता है।  लेकिन गंभीर स्थितियों का सामना करने के बाद उनकी भूख कम हो जाती है। यह जानना भी ज़रूरी है कि क्या तनाव और चिंता से आपकी खान-पान की आदतें प्रभावित हो रही हैं। अगर ऐसा है तो आपको अपने मानसिक तनाव को दूर करने के लिए एक्सपर्ट की सलाह लेना ज़रूरी है 

एक्सपर्ट्स की क्या राय है 

एक्सपर्ट्स के अनुसार तनाव का असर हर व्यक्ति की भूख पर अलग तरह से पड़ सकता है तनाव के दौरान शरीर में तनाव से जुड़े हार्मोन बढ़ते हैं, जिससे कुछ लोगों में खाने किम इच्छा बढ़ जाती है वहीँ कुछ लोगों में पाचन क्रिया धीमी होने पेट में बेचैनी या चिंता के कारण भूख बिलकुल कम हो जाती है नींद की कमी और लगातार मानसिक दबाव भी इस बदलाव को बढ़ा सकता है। इसलिए तनाव के टाइम भूख में बदलाव को केवल खानपान की आदत नहीं बल्कि शरीर और मन की प्रतिक्रिया  के रूप में देखना चाहिए। 

क्या तनाव या चिंता भूख में कमी का कारण बन सकती है?  

तनाव और चिंता से भूख पर असर पड़ सकता है, लेकिन इसका असर हर व्यक्ति में अलग अलग होता है कुछ लोगों को तनाव के दौरान बार बार खाने की इच्छा होने लगती है, खास कर मीठा या अच्छा खाना खाने की चाह बढ़ सकती है। वहीं कुछ लोगों की भूख बिल्कुल कम हो जाती है और खाने का मन नहीं करता 

तनाव के समय शरीर में कुछ हार्मोन और रासायनिक संकेतों में बदलाव होता है, जो भूख पाचन और भोजन की पसंद को प्रभवित कर सकते हैं। लगातार चिंता रहने पर पेट में भारीपन, मितली या बेचैनी भी महसूस हो सकती है जिससे खाना मुश्किल लग सकता है। इसके आलावा तनाव के कारण नींद खराब होने पर भी भूख और खाने के समय में बदलाव आ सकता है। इसलिए तनाव के दौरान भूख में अचानक बदलाव को समझने के लिए मानसिक स्थिति के साथ नींद और लाइफस्टाइल पर ध्यान देना ज़रूरी है। 

तनाव या चिंता में भूख कम या ज़्यादा होने के क्या कारण हैं?

तनाव या चिंता में शरीर का हॉर्मोन संतुलन बदल जाता है जिसकी वजह से से भूख कम या ज़्यादा हो जाती है। 

भूख कम होने के कारण

  • फ्लाइट या फाइट रिस्पॉन्स: शरीर खतरे से निपटने के लिए ऊर्जा और खून को मांसपेशियों की ओर भेजता है, जिससे पेट और आंतों का काम अस्थायी रूप से रुक जाता है।
  • पाचन तंत्र में असंतोष: तनाव में पेट में एसिड बढ़ना, मतली या ऐंठन होना, जिससे भोजन से अरुचि हो जाती है।
  • क्रिस्टीन हॉर्मोन : यह हॉर्मोन भूख को दबा देता है और खाने की इच्छा खत्म कर देता है।

भूख ज़्यादा होने के कारण

  • कोर्टिसोल का प्रभाव:तनाव का हॉर्मोन कोर्टिसोल भूख को बढ़ाता है।
  • हैप्पी हॉर्मोन की तलाश: तनाव में सेरोटोनिन और डोपामाइन कम होते हैं। मीठा या तला-भुना खाने से मस्तिष्क को तुरंत खुशी और शांति का अहसास होता है। 
  • भूख और तनाव : दिमाग तनाव या बेचैनी के संकेतों को कई बार शारीरिक भूख समझ लेता है।

आयुर्वेदिक दृष्टिकोण क्या है?

तनाव के समय हॉर्मोनल बदलाव से कुछ लोगों की भूख बढ़ती है तो कुछ की घटती है। आयुर्वेद में इसे त्रिदोष और अग्नि का असंतुलन माना जाता है। तनाव से वात और पित्त दोष बिगड़ते हैं। वात के बढ़ने से जठराग्नि अनियमित होती है जिससे कई बार भूख बिल्कुल खत्म हो जाती है। इसके विपरीत मानसिक अशांति या वात-कफ के प्रभाव से कुछ लोगों में कृत्रिम क्षुधा यानी इमोशनल ईटिंग बढ़ती है जिससे वे बार-बार खाते हैं। मन और पाचन तंत्र सीधे जुड़े हैं। 

तनाव में भूख को सही रखने के लिए क्या करें?

तनाव के दौरान भूख को संतुलित रखने के लिए कुछ उपाय नीचे दिए गए हैं:

  • नियमित समय पर खाएं: भूख न लगने पर भी थोड़ा सा हल्का भोजन तय समय पर लें।
  • जंक फूड से दूरी: तनाव में ज़्यादा खाने की इच्छा होने पर चिप्स या चॉकलेट की जगह फल या मेवे चुनें।
  • मन को शांत करें: खाने से पहले गहरी साँस लेने या योग करने से शरीर का तनाव कम होता है।
  • हल्का भोजन लें: पेट में भारीपन या ऐंठन होने पर आसानी से पचने वाला और गर्म खाना खाएं।

लम्बे समय का तनाव भूख को कैसे प्रभावित करता है?

लंबे समय का तनाव भूख पर अलग-अलग असर डालता है।

  • भूख का कम होना:कुछ लोगों का पेट तनाव के कारण कसा हुआ रहता है, जिससे उन्हें कुछ भी खाने की इच्छा नहीं होती।
  • भूख का बढ़ना: कोर्टिसोल हार्मोन शरीर को जल्दी ऊर्जा देने के लिए मीठा और जंक फूड खाने की इच्छा पैदा करता है।
  • हार्मोनों का असंतुलन: लम्बा तनाव भूख को नियंत्रित करने वाले संकेतों को बिगाड़ देता है, जिससे सही समय पर भूख या पेट भरने का अहसास नहीं होता।

डॉक्टर से कब मिलें?

आपको डॉक्टर या मनोचिकित्सक से तब मिलना चाहिए जब:

  • भूख के असंतुलन से वजन बहुत ज्यादा घटने या बढ़ने लगे।
  • तनाव और खानपान की आदतें आपके रोज़मर्रा के काम को प्रभावित करते हैं।
  • लगातार उदासी, अत्यधिक चिंता या घबराहट बनी रहे।
  • पेट में गंभीर दर्द, उल्टी या नींद न आने की समस्या हो।

निष्कर्ष:

तनाव और चिंता का हमारी भूख पर बहुत असर पड़ता है जो हर व्यक्ति में अलग-अलग होता है। कुछ लोग तनाव से राहत पाने के लिए ज़्यादा खाने लगते हैं वहीं कुछ में हार्मोनल बदलावों और फ्लाइट या फाइट रिस्पॉन्स के कारण भूख बिल्कुल खत्म हो जाती है। आयुर्वेद भी इसे वात और पित्त दोष के असंतुलन से जोड़ता है। तनाव के दौरान सही खानपान, योग और संतुलित जीवनशैली अपनाना बहुत ज़रूरी है। अगर भूख में यह बदलाव आपके शारीरिक या मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा रहा है तो तुरंत किसी डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

References

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Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

तनाव के दौरान कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जिससे शरीर को तुरंत ऊर्जा देने के लिए मीठे और तले-भुने खाने की इच्छा बढ़ जाती है।

चिंता के समय शरीर फाइट या फ्लाइट मोड में चला जाता है, जिससे पाचन तंत्र का काम धीमा हो जाता है और भूख मर जाती है।

तनाव उदासी या चिंता जैसी भावनाओं को शांत करने और मन को खुशी देने के लिए जब इंसान भोजन का सहारा लेता है, तो उसे इमोशनल ईटिंग कहते हैं।

हाँ, तनाव में भूख के असंतुलन के कारण इंसान का वज़न तेज़ी से घट या बढ़ सकता है।

आयुर्वेद के अनुसार तनाव से वात और पित्त दोष बिगड़ जाते हैं जिससे जठराग्नि पाचन अग्नि असंतुलित हो जाती है और भूख प्रभावित होती है।

जंक फूड की जगह ताज़े फल या मेवे खाएं और तनाव महसूस होने पर गहरी साँसें लें या पानी पीकर मन को शांत करें।

लंबे समय का तनाव भूख को नियंत्रित करने वाले हार्मोन्स को बिगाड़ देता है, जिससे सही समय पर पेट भरने या भूख लगने का अहसास खत्म हो जाता है।

भूख न होने पर भी आपको सूप, दलिया या खिचड़ी जैसा हल्का और आसानी से पचने वाला गर्म भोजन थोड़ी-थोड़ी मात्रा में खाना चाहिए।

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