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Sugar-Free बिस्कुट सच में बेहतर हैं या सिर्फ ‘healthy’ label का खेल है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

वज़न कम करने वाले हों या डायबिटीज़ के मरीज़, हर कोई चाय के साथ शुगर-फ्री बिस्कुट को एक अच्छा और हेल्दी ऑप्शन मानकर खाता है। पैकेट पर छपे बड़े-बड़े हेल्दी लेबल्स हमें यह विश्वास दिलाते हैं कि हम कुछ बहुत पौष्टिक खा रहे हैं। लेकिन क्या सच में ऐसा है? या फिर यह सिर्फ एक मार्केटिंग है जो हमारी सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहा है? इस लेख में हम इसी बात समझेंगे कि शुगर-फ्री बिस्कुट सेहतमंद हैं या यह सिर्फ कंपनियों का अपना प्रोडक्ट बेचने का एक तरीका है।

Sugar-Free बिस्कुट क्या सच में बेहतर हैं?

शुगर-फ्री बिस्कुट आम मीठे बिस्कुटों से थोड़े ही अलग होते हैं। यह सोचना कि इनमें चीनी नहीं है तो ये पूरी तरह से सेहतमंद हो गए एक बहुत बड़ी गलतफहमी है। चीनी हटाने के बावजूद  बिस्कुट को कुरकुरा और स्वादिष्ट बनाने के लिए इनमें मैदा भारी मात्रा में सैचुरेटेड फैट  प्रिजर्वेटिव्स और आर्टिफिशियल स्वीटनर का इस्तेमाल किया जाता है। ये सारी चीजें मिलकर इन्हें आम बिस्कुट जितना ही अनहेल्दी बना देती हैं। इसलिए, अगर आप इन्हें रेगुलर बिस्कुट से बेहतर समझकर बिना किसी लिमिट के खा रहे हैं, तो आप अनजाने में अपने शरीर को नुकसान ही पहुंचा रहे हैं।

 क्या Sugar-Free का मतलब Healthy होता है?

शुगर-फ्री का मतलब हमेशा हेल्दी नहीं होता। कंपनियों का मुख्य उद्देश्य अपने प्रोडक्ट को बेचना होता है, इसलिए वे ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करती हैं जो ग्राहकों को आकर्षित करें। एक बिस्कुट से सिर्फ सफेद चीनी हटा देने से उसके बाकी नुकसानदायक तत्व खत्म नहीं हो जाते। उसमें मौजूद ट्रांस फैट सोडियम और खाली कैलोरी आपके दिल और मेटाबॉलिज्म के लिए उतने ही हानिकारक हैं। असली मायनों में 'हेल्दी' वो है जिसमें फाइबर विटामिन अच्छे फैट्स और प्रोटीन हो। इसलिए शुगर-फ्री का लेबल देखकर आँख बंद करके भरोसा न करें बल्कि न्यूट्रिशनल वैल्यू को ध्यान से समझें।

Sugar-Free बिस्कुट में चीनी की जगह क्या होता है?

मिठास और स्वाद को सही रखने के लिए शुगर-फ्री बिस्कुट में चीनी की जगह कई अन्य चीजों का इस्तेमाल किया जाता है:

  • आर्टिफिशियल स्वीटनर्स: सुक्रालोज़, एस्पार्टेम या सैक्रीन जैसे कृत्रिम मिठास का उपयोग होता है, जो सेहत के लिए बहुत अच्छे नहीं माने जाते।
  • शुगर अल्कोहल: माल्टिटोल, सोर्बिटोल या एरिथ्रिटोल का इस्तेमाल किया जाता है।ज़्यादा मात्रा में ये पेट में गैस और ब्लोटिंग कर सकते हैं।
  • छुपी हुई चीनी: कई बार माल्टोडेक्सट्रिन या कॉर्न सिरप जैसे नामों से ऐसी चीजें डाली जाती हैं, जो चीनी का ही रूप हैं।
  • एक्स्ट्रा फैट: चीनी न होने पर बिस्कुट का स्वाद फीका न लगे, इसके लिए अनहेल्दी फैट की मात्रा बढ़ा दी जाती है।

क्या Sugar-Free बिस्कुट Blood Sugar बढ़ा सकते हैं?

शुगर-फ्री बिस्कुट भी आपका ब्लड शुगर लेवल तेज़ी से बढ़ा सकते हैं। इसका मुख्य कारण इनमें मौजूद मैदा है। जब आप ये बिस्कुट खाते हैं तो शरीर मैदे को बहुत जल्दी ग्लूकोज में बदल देता है जिससे खून में शुगर का स्तर एकदम से जंप कर जाता है। इसके अलावा इनमें इस्तेमाल होने वाले शुगर एल्कोहल का भी अपना ग्लाइसेमिक इंडेक्स होता है जो इंसुलिन पर असर डालता है। इसलिए सिर्फ शुगर-फ्री टैग देखकर धोखा नहीं खाना चाहिए।

Sugar-Free बिस्कुट में छिपी कैलोरी का सच

वज़न कम करने के लिए लोग शुगर-फ्री बिस्कुट खाना शुरू कर देते हैं यह सोचकर कि इसमें कैलोरी कम होगी। मगर सच तो यह है कि शुगर-फ्री बिस्कुट और नॉर्मल बिस्कुट की कैलोरी में बहुत मामूली सा ही अंतर होता है। चीनी निकालकर जो जगह खाली होती है उसे भरने के लिए कंपनियां उसमें ज़्यादा बटर तेल या पाम ऑयल मिला देती हैं। फैट में चीनी से बहुत ज़्यादा कैलोरी होती है। नतीजा यह होता है कि आप अनजाने में उतनी ही या उससे ज़्यादा कैलोरी का सेवन कर लेते हैं।

Sugar-Free बिस्कुट रोज़ खाना कितना सही?

रोज़ाना शुगर-फ्री बिस्कुट खाना आपकी सेहत के लिए सही नहीं है। इसके लगातार खाने से शरीर को कई नुकसान हो सकते हैं:

  • पाचन तंत्र की खराबी: इनमें मौजूद शुगर एल्कोहल पेट में ऐंठन, गैस, और डायरिया जैसी पेट से जुड़ी समस्याएं पैदा कर सकते हैं।
  • वज़न बढ़ना: एक्स्ट्रा फैट और मैदे की वजह से ये बिस्कुट चुपचाप आपके शरीर में ज़िद्दी चर्बी बढ़ाते रहते हैं।
  • क्रेविंग बढ़ना: आर्टिफिशियल स्वीटनर आपके दिमाग को कन्फ्यूज़ करते हैं, जिससे आपका कुछ मीठा खाने का मन पहले से ज़्यादा करने लगता है।
  • पोषक तत्वों की कमी: रोज़ इन्हें खाने से आप असली पोषण जैसे फल या नट्स वाली डाइट से दूर हो जाते हैं।

डायबिटीज़ में Sugar-Free बिस्कुट खा सकते हैं?

डायबिटीज़ के मरीज़ों को शुगर-फ्री बिस्कुट खाते समय बहुत सावधान रहना चाहिए। विज्ञापन भले ही इन्हें डायबिटिक फ्रेंडली बताएं, लेकिन इनमें मौजूद कार्बोहाइड्रेट और मैदा शरीर में जाकर तुरंत शुगर में टूट जाते हैं। इससे आपका ग्लूकोज लेवल रुक जाता है। अगर आपका शुगर लेवल कंट्रोल में है तो कभी-कभार सिर्फ एक बिस्कुट खाना ठीक हो सकता है लेकिन इसे अपनी रोज़ाना की डाइट या नाश्ते का हिस्सा बनाना खतरनाक है। बेहतर होगा कि आप फाइबर युक्त चीज़ें चुनें।

बिस्कुट खरीदते समय किन चीज़ों को देखें?

बाज़ार से बिस्कुट खरीदते समय सिर्फ सामने के आकर्षक लेबल्स ना देखें, बल्कि पैकेट के पीछे दी गई न्यूट्रिशन जानकारी ज़ रूर पढ़ें:

  • पहला इंग्रेडिएंट: देखें कि सबसे ज़्यादा मात्रा मैदे की है या साबुत अनाज की।
  • फाइबर की मात्रा: 100 ग्राम बिस्कुट में कम से कम 5 से 6 ग्राम फाइबर होना चाहिए तभी वह सेहत के लिए अच्छा है।
  • छिपी हुई चीनी: पैकेट पर माल्टोडेक्सट्रिन इनवर्ट सिरप या फ्रुक्टोज जैसे नामों से बचें।

Sugar-Free बिस्कुट कब खाना बेहतर है?

अगर आपको बिस्कुट खाने का बहुत ज़्यादा पसंद है और आप इसे पूरी तरह छोड़ नहीं पा रहे हैं तो इसका सेवन काम मात्रा में ही करें। इसे कभी भी सुबह खाली पेट चाय के साथ न खाएं क्योंकि तब शरीर को अच्छे पोषण की ज़रूरत होती है। इसे दोपहर या शाम के समय, जब आपको हल्की भूख लगे और पास में कोई और हेल्दी विकल्प न हो तब एक या दो बिस्कुट खाए जा सकते हैं। इसके साथ हमेशा कुछ हेल्दी खाने की कोशिश करें, जैसे कुछ बादाम या अखरोट, ताकि मैदे का बुरा असर कम हो सके।

निष्कर्ष

शुगर-फ्री का लेबल हमेशा स्वास्थ्य की गारंटी नहीं होता। यह ज़्यादातर फूड कंपनियों का एक बड़ा मार्केटिंग स्टंट है ताकि हेल्थ के प्रति जागरूक लोगों को आकर्षित किया जा सके। चीनी की कमी को मैदा अनहेल्दी फैट और कृत्रिम मिठास से पूरा किया जाता है जो लंबे समय में नुकसानदेह ही साबित होते हैं। इसलिए बिस्कुट को एक हेल्दी स्नैक मानना बंद करें। चाहे वह नॉर्मल हो या शुगर-फ्री बिस्कुट एक प्रोसेस्ड फूड ही है जिसे कभी-कभार स्वाद के लिए ही खाया जाना चाहिए। सेहतमंद स्नैकिंग के लिए हमेशा प्राकृतिक विकल्पों को ही चुनें।

References:

https://www.healthline.com/nutrition/best-snacks-for-diabetes

https://www.healthline.com/health/food-nutrition/no-sugar-diet

https://www.healthline.com/nutrition/healthy-high-protein-snacks

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

नहीं क्योंकि इनमें चीनी की जगह ज़्यादा फैट और मैदा होता है, जिससे कैलोरी कम नहीं होती और वज़न नहीं घटता।

इनमें मिठास के लिए सुक्रालोज़ सैक्रीन या माल्टिटोल जैसे स्वीटनर्स का इस्तेमाल किया जाता है।

बिल्कुल नहीं आर्टिफिशियल स्वीटनर बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं।

यह एक तरह का कार्बोहाइड्रेट है जिसे चीनी के विकल्प के रूप में डालते हैं, लेकिन ज़्यादा खाने पर यह पेट खराब कर सकता है।

अगर उनमें ओट्स की मात्रा सच में ज़्यादा  है और मैदा बिल्कुल नहीं है, तो वे बेहतर हैं लेकिन पैकेट ज़रूर चेक करें।

इसे रोज़ बिल्कुल न खाएं, डॉक्टर की सलाह पर हफ्ते में एक या दो बार सिर्फ एक बिस्कुट स्वाद के लिए खा सकते हैं।

आप चाय के साथ भुने हुए मखाने रोस्टेड चने  मेवे  या घर के बने रागी के क्रैकर्स खा सकते हैं।

इनमें फाइबर की कमी होती है इसलिए ये पेट नहीं भरते बल्कि एम्प्टी कैलोरी देते हैं जिससे आपको जल्दी भूख लग जाती है।

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