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Sugar-free foods हमेशा safe नहीं होते, क्यों?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

आजकल बाज़ार में हर चीज़ शुगर-फ्री मिलने लगी है। बिस्कुट से लेकर कोल्ड ड्रिंक और मिठाइयों तक सब कुछ बिना चीनी के बिक रहा है। हम भी बड़े चाव से इन्हें यह सोचकर खाते हैं कि इसमें चीनी नहीं है तो यह हमारी सेहत के लिए एकदम सुरक्षित है। खासकर वजन कम करने वाले और शुगर के मरीज़ तो इसे वरदान मानते हैं। लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि बिना चीनी के भी ये चीज़ें इतनी मीठी कैसे होती हैं? हकीकत तो यह है कि शुगर-फ्री का टैग लगाकर बेची जाने वाली ये चीज़ें हमेशा सुरक्षित नहीं होतीं। आइए बिल्कुल आम बोलचाल की भाषा में समझते हैं कि शुगर-फ्री का यह मीठा जाल हमारी सेहत के साथ कैसे खिलवाड़ कर रहा है।

शुगर-फ्री चीज़ों में मिठास के लिए आखिर क्या मिलाया जाता है?

जब किसी खाने पीने की चीज़ में से असली चीनी निकाली जाती है तो उसके स्वाद को बनाए रखने के लिए कंपनियों को कुछ तो मिलाना पड़ता है। यहीं पर एंट्री होती है आर्टिफिशियल स्वीटनर की। ये फैक्ट्रियों में बने हुए ऐसे केमिकल होते हैं जो असली चीनी से सौ या दो सौ गुना ज़्यादा   मीठे होते हैं। एस्पार्टेम सैकरीन और सुक्रालोज़ इसके कुछ आम नाम हैं। चूँकि ये बहुत ज़्यादा   मीठे होते हैं इसलिए इनकी बहुत मामूली सी मात्रा ही खाने को मीठा कर देती है। हमें लगता है कि हम कैलोरी नहीं खा रहे हैं लेकिन असल में हम मिठास के नाम पर सीधे केमिकल अपने पेट में डाल रहे होते हैं जो शरीर के लिए बिल्कुल अजनबी होते हैं।

बिना चीनी वाले इन प्रोडक्ट्स पर डॉक्टर क्या चेतावनी देते हैं?

डॉक्टरों और हेल्थ एक्सपर्ट्स का साफ कहना है कि आर्टिफिशियल मिठास सेहत के लिए कोई जादू की छड़ी नहीं है। डॉक्टर हमेशा चेतावनी देते हैं कि अगर आप रोज़ाना और बहुत ज़्यादा   मात्रा में शुगर-फ्री चीज़ों का इस्तेमाल कर रहे हैं तो यह आपके दिल और दिमाग दोनों के लिए खतरनाक हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी साफ कर दिया है कि वजन कम करने के लिए आर्टिफिशियल स्वीटनर का इस्तेमाल करना सही नहीं है। डॉक्टरों का मानना है कि ये केमिकल हमारे शरीर के प्राकृतिक हार्मोन को कन्फ्यूज़ कर देते हैं। शरीर को मिठास तो मिलती है लेकिन उससे मिलने वाली ताकत नहीं जिससे शरीर का पूरा सिस्टम बुरी तरह बिगड़ जाता है।

शुगर-फ्री के नाम पर हम कौन सी बड़ी गलतियां कर बैठते हैं? 

शुगर-फ्री का नाम सुनते ही हम इतने लापरवाह हो जाते हैं कि कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं जो सेहत पर भारी पड़ती हैं:

  • हद से ज़्यादा   खाना: हमें लगता है कि इसमें चीनी नहीं है तो हम इसे जी भरकर खा सकते हैं और इसी चक्कर में हम डब्बे के डब्बे बिस्कुट खा जाते हैं।
  • पैकेट पर दी गई जानकारी न पढ़ना: हम सिर्फ बड़ा सा शुगर-फ्री का टैग देखते हैं और पीछे छुपे हुए केमिकल और फैट की मात्रा को पढ़ना बिल्कुल भूल जाते हैं।
  • पानी की जगह डाइट ड्रिंक पीना: प्यास लगने पर पानी पीने के बजाय डाइट कोक या शुगर-फ्री कोल्ड ड्रिंक पीना शरीर को अंदर से सुखा देता है।
  • मीठे की लत को बढ़ावा देना: हम अपनी मीठा खाने की आदत को सुधारने के बजाय उसे शुगर-फ्री से बदल देते हैं जो बिल्कुल गलत तरीका है।

शुगर-फ्री खाने वाले कितने प्रतिशत लोग मोटापे और बीमारियों का शिकार होते हैं?

सुनकर अजीब लगेगा लेकिन रिसर्च के आँकड़े बताते हैं कि शुगर-फ्री और डाइट प्रोडक्ट्स का ज़्यादा   इस्तेमाल करने वाले लगभग साठ से सत्तर प्रतिशत लोग आगे चलकर मोटापे और दिल की बीमारियों का शिकार हो जाते हैं। जो लोग चीनी छोड़कर आर्टिफिशियल स्वीटनर अपनाते हैं उनका वजन कम होने के बजाय अक्सर बढ़ जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि शुगर-फ्री चीज़ें खाने के बाद लोगों को लगता है कि उन्होंने कैलोरी बचा ली है और वे इसकी भरपाई के लिए दूसरी चीज़ें ज़्यादा खा लेते हैं। इसलिए जो लोग डाइट ड्रिंक्स या शुगर-फ्री मिठाइयां रोज़ खाते हैं उनमें शुगर की बीमारी होने का खतरा आम लोगों से कहीं ज़्यादा   देखा गया है।

पेट और पाचन तंत्र को ये शुगर-फ्री चीज़ें कैसे खोखला कर देती हैं?

हमारा पेट एक बहुत ही समझदार मशीन है जिसमें करोड़ों अच्छे बैक्टीरिया रहते हैं जो खाना पचाने का काम करते हैं। जब हम शुगर-फ्री के नाम पर आर्टिफिशियल केमिकल पेट में डालते हैं तो ये अच्छे बैक्टीरिया मरना शुरू हो जाते हैं। इन केमिकल्स को पचाना हमारे पेट के लिए बहुत मुश्किल होता है। इसी वजह से जो लोग बहुत ज़्यादा   शुगर-फ्री गोलियां या डाइट ड्रिंक लेते हैं उन्हें अक्सर भयंकर गैस पेट में सूजन और कब्ज़ की शिकायत रहने लगती है। कई शुगर-फ्री चीज़ों में माल्टिटोल और सोर्बिटोल मिलाया जाता है जो पेट में जाकर सीधा दस्त और पेट दर्द का कारण बनता है। हमारा पाचन तंत्र इस नकली मिठास को बिल्कुल पसंद नहीं करता।

किन लोगों के लिए शुगर-फ्री चीज़ें सबसे ज़्यादा   खतरनाक साबित होती हैं? 

वैसे तो आर्टिफिशियल मिठास किसी के लिए भी अच्छी नहीं है लेकिन कुछ खास लोगों के लिए यह ज़हर का काम कर सकती है:

  • गर्भवती महिलाएं: गर्भावस्था के दौरान इन केमिकल्स का इस्तेमाल होने वाले बच्चे के दिमागी विकास पर बहुत बुरा असर डाल सकता है।
  • छोटे बच्चे: बच्चों का शरीर विकास कर रहा होता है उन्हें नकली मिठास देने से उनकी इम्युनिटी और याददाश्त दोनों कमज़ोर पड़ सकती हैं।
  • माइग्रेन के मरीज़: जिन लोगों को बहुत तेज़ सिरदर्द या माइग्रेन रहता है उन्हें शुगर-फ्री चीज़ें खाते ही भयंकर दर्द शुरू हो सकता है।
  • पेट की बीमारी वाले लोग: जिन्हें पहले से ही पेट में सूजन या बार बार हाज़मा खराब होने की समस्या है उनके लिए शुगर-फ्री का सेवन परेशानी को दोगुना कर देता है।

क्या शुगर-फ्री खाने से वज़न सच में कम होता है या यह सिर्फ एक धोखा है?

दुनिया भर में करोड़ों लोग सिर्फ वजन कम करने के लिए डाइट कोल्ड ड्रिंक और शुगर-फ्री खाने का सहारा लेते हैं। लेकिन यह पूरी तरह से एक भ्रम और धोखा है। जब हमारी जीभ को मिठास महसूस होती है तो दिमाग पेट को मैसेज भेजता है कि भारी मात्रा में कैलोरी आने वाली है। लेकिन जब शुगर-फ्री खाने पर पेट को कोई कैलोरी नहीं मिलती तो दिमाग कन्फ्यूज़ हो जाता है। इससे शरीर की भूख और बढ़ जाती है और आप अनजाने में पहले से ज़्यादा   खाना खा लेते हैं। इसके अलावा शुगर-फ्री चीज़ों में चीनी तो नहीं होती लेकिन स्वाद बढ़ाने के लिए मैदा और खराब फैट भरपूर मात्रा में डाल दिया जाता है जिससे वजन घटने के बजाय तेज़ी से बढ़ता है।

ज़्यादा   शुगर-फ्री खाने से शरीर में दिखने वाले शुरुआती नुकसान कैसे पहचानें? 

अगर आप काफी समय से शुगर-फ्री चीज़ों का इस्तेमाल कर रहे हैं तो आपका शरीर कुछ ऐसे इशारे देता है जिन्हें पहचानना बहुत ज़रूरी है:

  • लगातार सिरदर्द रहना: बिना किसी कारण के हर वक्त सिर भारी रहना या चक्कर आना आर्टिफिशियल स्वीटनर का सीधा साइड इफेक्ट हो सकता है।
  • मीठे की भयंकर तलब लगना: अगर आपको दिन भर कुछ न कुछ मीठा खाने की अजीब सी बेचैनी रहती है तो समझ जाएं कि आपका दिमाग कनफ्यूज़ हो चुका है।
  • पेट का हमेशा फूला रहना: खाना खाने के बाद पेट में भारीपन महसूस होना भयंकर गैस बनना और हाज़मा खराब रहना इसका बड़ा संकेत है।
  • बिना वजह थकावट: शरीर को नकली मिठास से कोई ऊर्जा नहीं मिलती इसलिए आप अच्छी नींद के बाद भी खुद को हर वक्त थका हुआ महसूस करते हैं।

बाज़ार से शुगर-फ्री प्रोडक्ट्स खरीदते समय किन बातों पर अलर्ट रहना चाहिए? 

कंपनियों के विज्ञापनों के झांसे में आने के बजाय जब भी आप बाजार से कोई शुगर-फ्री चीज़ खरीदें तो इन बातों को लेकर एकदम चौकन्ना रहें:

  • पीछे दी गई जानकारी जरूर पढ़ें: डिब्बे के पीछे छपी सामग्री की लिस्ट पढ़ें और देखें कि उसमें एस्पार्टेम या सुक्रालोज़ जैसे नकली केमिकल तो नहीं हैं।
  • छुपी हुई चीनी को पहचानें: कई बार प्रोडक्ट पर शुगर-फ्री लिखा होता है लेकिन उसमें माल्टोडेक्सट्रिन या कॉर्न सिरप मिला होता है जो चीनी से भी ज़्यादा   खतरनाक है।
  • फैट की मात्रा चेक करें: चीनी कम करने के बाद कंपनियों को स्वाद बनाए रखने के लिए अक्सर पाम ऑयल या खराब फैट मिलाना पड़ता है।
  • सौ प्रतिशत प्राकृतिक चुनें: कोशिश करें कि नकली मिठास की जगह स्टीविया जैसे प्राकृतिक विकल्प वाली चीज़ें ही खरीदें।

खानपान में चीनी और शुगर-फ्री की जगह किन चीज़ों को शामिल करना सही है? 

आपको सफेद चीनी और इन हानिकारक केमिकल दोनों को छोड़कर मिठास के प्राकृतिक और देसी तरीके अपनाने चाहिए जो सेहत भी बनाते हैं:

  • देसी गुड़ और शक्कर: चाय या दूध में सफेद चीनी की जगह ताज़ा देसी गुड़ या शक्कर का इस्तेमाल करें यह खून बढ़ाने का भी बहुत अच्छा स्रोत है।
  • खजूर और अंजीर का पेस्ट: घर में मिठाई या हलवा बनाते समय उसमें खजूर या अंजीर का पेस्ट डालें इससे मिठास भी मिलेगी और बहुत सारी ताकत भी।
  • स्टीविया के प्राकृतिक पत्ते: अगर आपको सच में बिना कैलोरी की मिठास चाहिए तो तुलसी के पौधे जैसी दिखने वाली स्टीविया की प्राकृतिक पत्तियों का इस्तेमाल करें।
  • ताज़े रसीले फल: मीठा खाने की तलब को शांत करने के लिए सेब केला अंगूर और मौसंबी जैसे ताज़े फलों को अपनी रोज़ की डाइट का हिस्सा बनाएं।

शुगर-फ्री चीज़ें खाने से हमारी मीठे की तलब और ज़्यादा   क्यों बढ़ जाती है?

यह हमारे दिमाग का एक बहुत ही मज़ेदार लेकिन खतरनाक खेल है। जब हम असली चीनी खाते हैं तो दिमाग को एक सिग्नल मिलता है कि शरीर को ऊर्जा मिल गई है और हमें खुशी का एहसास होता है। लेकिन जब हम आर्टिफिशियल शुगर-फ्री खाते हैं तो जीभ को तो मीठा लगता है पर शरीर को ऊर्जा बिल्कुल नहीं मिलती। दिमाग इस धोखे को पकड़ लेता है और वह उस ऊर्जा को पाने के लिए आपके अंदर मीठा खाने की लालसा को और ज़्यादा भड़का देता है। यही वजह है कि डाइट ड्रिंक पीने वाला इंसान थोड़ी देर बाद ही कोई न कोई चॉकलेट या मीठी चीज़ ढूंढने लगता है। नकली मिठास आपकी भूख को शांत करने के बजाय उसे और तेज़ कर देती है।

शरीर में किन लक्षणों के दिखने पर तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए? 

अगर आप लंबे समय से शुगर-फ्री या डाइट प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल कर रहे हैं और शरीर में यह बदलाव दिखें तो डॉक्टर से मिलने में ज़रा भी देरी न करें:

  • लगातार पेट खराब रहना: अगर आपको भयंकर गैस और दस्त की शिकायत रहने लगी है और कोई भी घरेलू नुस्खा काम नहीं कर रहा है।
  • दिल की धड़कन का अजीब होना: अचानक बैठे बैठे दिल की धड़कन बहुत तेज़ हो जाना या सीने में अजीब सी बेचैनी महसूस होना।
  • त्वचा पर लाल चकत्ते पड़ना: अगर शुगर-फ्री चीज़ें खाने के बाद आपके शरीर पर भयंकर खुजली वाले दाने या लाल चकत्ते निकल आएं जो एलर्जी का संकेत है।
  • हाथ पैरों में सुन्नपन: नसों की कमज़ोरी के कारण हाथ पैरों का सुन्न हो जाना या झनझनाहट रहना जो केमिकल के ज़्यादा   इस्तेमाल का बहुत बड़ा नुकसान है।

निष्कर्ष: 

शुगर-फ्री का टैग कोई स्वास्थ्य का सर्टिफिकेट नहीं है। किसी भी फैक्ट्री में बनी नकली चीज़ हमारे शरीर के लिए कभी भी प्राकृतिक चीज़ों की जगह नहीं ले सकती। इसका मतलब यह नहीं है कि आप डरकर जीना शुरू कर दें। कभी कभार किसी दिन शुगर-फ्री मिठाई खा लेना उतना नुकसान नहीं करता लेकिन इसे अपनी रोज़मर्रा की आदत बना लेना बीमारियों को सीधा बुलावा देना है। बेहतर यही है कि आप सफेद चीनी को कम करें और मिठास के लिए गुड़, खजूर या ताज़े फलों का सहारा लें। प्रकृति ने हमें जो मिठास दी है उसमें स्वाद भी है और सेहत भी इसलिए नकली विज्ञापनों के धोखे से बचें और अपनी सेहत की डोर अपने हाथ में रखें।

References

https://www.who.int/tools/elena/interventions/free-sugars-adults-ncds

https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC9966020/

https://www.healthline.com/health/food-nutrition/no-sugar-diet

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

बिल्कुल नहीं। डाइट ड्रिंक में नकली मिठास होती है जो वजन तो कम नहीं करती उल्टा आपके पेट के अच्छे बैक्टीरिया को पूरी तरह खत्म कर देती है।

नहीं शुगर-फ्री बिस्कुट में चीनी नहीं होती लेकिन मैदा और हानिकारक तेल भरपूर होता है जो शुगर के मरीज़ों का शुगर लेवल तेज़ी से बढ़ा देता है।

हां स्टीविया एक प्राकृतिक पौधा है जिसकी पत्तियों में मिठास होती है। अगर आप बाज़ार से केमिकल वाली सफेद गोलियों के बजाय इसके प्राकृतिक रूप का इस्तेमाल करते हैं तो यह एकदम सुरक्षित है।

कुछ पुरानी रिसर्च में ऐसे शक जताए गए थे खासकर एस्पार्टेम को लेकर। इसलिए डॉक्टर हमेशा इसकी बहुत कम मात्रा इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं।

रोज़ाना इन गोलियों का इस्तेमाल आपकी आंतों को नुकसान पहुंचा सकता है। इसकी जगह आप चाय में थोड़ा सा गुड़ या स्टीविया की पत्तियां डाल सकते हैं।

हां बहुत ज़्यादा   आर्टिफिशियल स्वीटनर खाने से दिमाग की नसों पर बुरा असर पड़ता है जिससे लंबे समय में भूलने की बीमारी या याददाश्त कमज़ोर होने का भारी खतरा रहता है।

डॉक्टरों के अनुसार गर्भावस्था में इन केमिकल्स से बिल्कुल दूर रहना चाहिए क्योंकि यह होने वाले बच्चे के दिमागी विकास को बुरी तरह रोक सकते हैं।

वजन कम करने के लिए ताज़े फल सबसे अच्छे हैं क्योंकि इनमें प्राकृतिक मिठास के साथ फाइबर भी होता है जो पेट को लंबे समय तक भरा रखता है और मोटापा घटाता है।

यह दांतों में कीड़े तो नहीं लगने देता लेकिन ज़्यादा   चबाने से पेट में गैस और हाज़मा खराब होने की भारी समस्या हो जाती है।

बच्चों के विकास के लिए यह नकली मिठास ज़हर के समान है। उन्हें हमेशा प्राकृतिक मीठा जैसे गुड़ की चिक्की या फलों का ताज़ा रस ही देना चाहिए।

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