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Weight gain को सिर्फ calories से समझना गलत क्यों हो सकता है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

क्या आपने भी कभी ऐसा महसूस किया है कि आप दिन भर में बहुत कम खाना खा रहे हैं, अपनी मनपसंद चीज़ें छोड़ चुके हैं, फिर भी आपका वज़न लगातार बढ़ रहा है? आजकल हर जगह यही सुनने को मिलता है कि अगर पतला होना है तो बस अपनी डाइट से कैलोरी कम कर दो। लेकिन क्या सच में हमारा शरीर गणित के किसी फॉर्मूले की तरह काम करता है? जब हम कम खाते हैं और फिर भी कपड़े टाइट होने लगते हैं, तो एक अलग ही तरह की उलझन दिमाग में पैदा हो जाती है। इस ब्लॉग में हम इसी भ्रम को दूर करेंगे और समझेंगे कि शरीर के वज़न को सिर्फ कैलोरी से नापना क्यों एक बहुत बड़ी गलती हो सकता है।

वज़न बढ़ने पर विशेषज्ञों का नज़रिया

मेडिकल फील्ड के कई बड़े डायटीशियन और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि हमारे शरीर का वज़न सिर्फ हमारे खाने पर निर्भर नहीं करता है। एक्सपर्ट्स बताते हैं कि हमारा शरीर एक बहुत ही जटिल मशीन है जिसे हॉर्मोन्स चलाते हैं। डॉक्टर कहते हैं कि अगर आप सिर्फ कैलोरी गिन रहे हैं और अपनी नींद या मानसिक शांति पर ध्यान नहीं दे रहे हैं, तो वज़न कभी कम नहीं होगा। उनकी राय में, कैलोरी कम करने का मतलब सिर्फ शरीर को भूखा मारना नहीं है। खाने की क्वालिटी, आपके हॉर्मोन्स का संतुलन और मेटाबॉलिज़्म की रफ्तार, ये सभी मिलकर तय करते हैं कि शरीर में फालतू चर्बी कहाँ और कितनी जमा होगी।

कैलोरी कम करने पर भी वज़न क्यों बढ़ता है?

यह एक बहुत ही आम सवाल है कि भूखे रहने पर भी मशीन पर वज़न ज़्यादा क्यों दिखता है। इसका सबसे बड़ा कारण शरीर का 'सर्वाइवल मोड' में चले जाना है। जब आप अचानक से खाना कम कर देते हैं, तो शरीर को लगता है कि भुखमरी का समय आ गया है। ऐसे में आपका मेटाबॉलिज़्म बहुत धीमा पड़ जाता है। शरीर हर खाने को ऊर्जा में बदलने की जगह उसे फैट बनाकर जमा करने लगता है। इसके अलावा, थायरॉइड की कमज़ोरी या पीसीओडी जैसी हॉर्मोनल परेशानियाँ भी बिना ज़्यादा खाए शरीर को तेज़ी से फुलाने का काम करती हैं। इसलिए सिर्फ कैलोरी को दोष देना गलत है।

डाइटिंग के दौरान बेचैनी और कमज़ोरी क्यों होती है?

जब लोग सिर्फ कैलोरी गिनकर डाइटिंग करते हैं, तो उन्हें अक्सर बहुत ज़्यादा घबराहट और बेचैनी महसूस होती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि शरीर को सही और पूरा पोषण नहीं मिल पा रहा होता है। जब आप अचानक से कार्बोहाइड्रेट छोड़ देते हैं, तो खून में शुगर का स्तर तेज़ी से नीचे गिर जाता है। इसी शुगर की भारी कमी से दिमाग सुस्त पड़ जाता है और आपको बिना काम किए पसीना आने लगता है। शरीर में ज़रूरी विटामिन्स की कमी होने से दिल की धड़कन बढ़ जाती है और रातों की नींद उड़ जाती है। यह कमज़ोरी बताती है कि आपका शरीर अंदर से बहुत तनाव में है।

मोटापे के साथ दिखने वाले गंभीर लक्षण

सिर्फ हल्का वज़न बढ़ना कोई बहुत बड़ी बीमारी नहीं है, इसे सही डाइट से आसानी से ठीक किया जा सकता है। लेकिन जब शरीर भारी होने के साथ कुछ गंभीर इशारे दे, तो हमें तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए।

इन खतरनाक लक्षणों को कभी भी हल्के में न लें:

  • साँस बहुत ज़्यादा फूलना: अगर थोड़ा सा चलने या सीढ़ियाँ चढ़ने पर भी आपकी साँस बहुत तेज़ी से उखड़ने लगे।
  • गर्दन के पीछे कालापन: अगर गर्दन की त्वचा अचानक से बहुत मोटी और काली पड़ने लगे (यह इंसुलिन रेजिस्टेंस का संकेत है)।
  • लगातार बहुत थकान रहना: पूरी रात अच्छी नींद लेने के बाद भी सुबह उठते ही भारी कमज़ोरी और सुस्ती महसूस हो।
  • जोड़ों में दर्द: शरीर का बढ़ता भार सँभालते हुए घुटनों और कमर में लगातार एक चुभने वाला दर्द रहने लगे।

क्या आपकी दवाइयाँ वज़न बढ़ा रही हैं?

जी हाँ, कई बार हमें मालूम भी नहीं होता और हम जो दवाइयाँ किसी और बीमारी के लिए खा रहे होते हैं, वे ही हमारा वज़न तेज़ी से बढ़ा देती हैं। बहुत सी दवाइयाँ जैसे डिप्रेशन की गोलियाँ, स्टेरॉयड्स या एलर्जी की दवाइयाँ शरीर के मेटाबॉलिज़्म को बहुत धीमा कर देती हैं। इन गोलियों से आपको बार-बार बहुत ज़्यादा भूख लगती है और शरीर में पानी जमा होने लगता है, जिससे आप फूला हुआ महसूस करते हैं। अगर आपको ऐसा लगे कि किसी खास दवा को शुरू करने के बाद से ही आपका वज़न बेकाबू हो गया है, तो तुरंत अपने डॉक्टर से इस बारे में खुलकर बात करें।

बढ़ते वज़न पर आयुर्वेद क्या कहता है?

आयुर्वेद के प्राचीन ग्रंथों के अनुसार हमारा पूरा शरीर वात, पित्त और कफ दोषों पर काम करता है। आयुर्वेदिक दृष्टिकोण के मुताबिक, वज़न का बढ़ना मुख्य रूप से 'कफ दोष' के बहुत ज़्यादा असंतुलित होने का सीधा नतीजा है। जब आप बेसमय और गलत भोजन करते हैं, तो पेट में विषैले तत्व (आम) बनने लगते हैं। यही गंदगी कफ के साथ मिलकर आपकी जठराग्नि (पाचन की आग) को बिल्कुल बुझा देती है। आयुर्वेद स्पष्ट कहता है कि सिर्फ खाना छोड़ देना इसका हल नहीं है, बल्कि कफ को शांत करके और जठराग्नि को बढ़ाकर ही शरीर की अतिरिक्त चर्बी को पूरी तरह गलाया जा सकता है।

वज़न कंट्रोल करने के प्राकृतिक तरीके

जब बिना खाए भी वज़न बढ़ने लगे, तो क्रैश डाइटिंग करने के बजाय कुछ प्राकृतिक और सुरक्षित तरीके अपनाने चाहिए। घर पर रहकर ही अपनी दिनचर्या सुधारकर आप बिना कमज़ोरी के बहुत आसानी से फिट हो सकते हैं।

वज़न को प्राकृतिक रूप से घटाने के असरदार उपाय:

  • गुनगुना पानी पिएँ: सुबह उठकर सबसे पहले एक गिलास गुनगुने पानी में थोड़ा सा ताज़ा नींबू डालकर पिएँ।
  • फाइबर वाली डाइट लें: खाने में हरी सब्ज़ियाँ और सलाद की मात्रा खूब बढ़ाएँ, जिससे पाचन अच्छा रहे और पेट भरा लगे।
  • जीरा पानी का सेवन: रात को सोने से पहले हल्का जीरा पानी पिएँ, यह कफ दोष को शांत करता है।
  • पर्याप्त नींद लें: रात में सात घंटे की गहरी नींद ज़रूर लें, ताकि शरीर के हॉर्मोन्स दोबारा अपना काम सही से कर सकें।

क्या तनाव और स्ट्रेस से भी मोटापा बढ़ता है?

आजकल की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में तनाव एक ऐसी भयानक बीमारी है जो आपका वज़न सबसे ज़्यादा तेज़ी से बढ़ाती है। जब आप काम या परिवार को लेकर बहुत चिंतित रहते हैं, तो शरीर में कोर्टिसोल नाम का स्ट्रेस हार्मोन काफी ज़्यादा बनने लगता है। यह हार्मोन सीधे आपके पेट और कमर के आसपास मोटी चर्बी जमा करता है। इसके अलावा, जब आप तनाव में होते हैं, तो आपको बहुत ज़्यादा मीठा या जंक फूड खाने की बहुत भारी तलब होती है। बढ़ा हुआ मानसिक तनाव शरीर की ऊर्जा सोख लेता है और आपके मेटाबॉलिज़्म को पूरी तरह बर्बाद कर देता है।

वज़न घटाने के अचूक उपाय

अगर आप चाहते हैं कि आपको बार-बार बढ़ते वज़न और कमज़ोरी का सामना न करना पड़े, तो कुछ खास बदलाव करने होंगे। एक अच्छी अनुशासित जीवनशैली अपनाकर आप बिना भूखे रहे बहुत आसानी से पतले और फिट हो सकते हैं।

हमेशा के लिए फिट रहने के बेहतरीन उपाय:

  • खाना चबाकर खाएँ: भोजन को हमेशा बहुत धीरे-धीरे और आराम से चबाकर खाएँ, इससे फालतू फैट नहीं जमता।
  • चीनी पूरी तरह छोड़ें: मैदे और चीनी वाली चीज़ें बिल्कुल बंद कर दें, ये सबसे ज़्यादा और तेज़ी से चर्बी बढ़ाती हैं।
  • नियमित हल्का व्यायाम: रोज़ाना तीस मिनट तेज़ वॉक या हल्का योगा ज़रूर करें, जिससे शरीर फुर्तीला और मज़बूत बने।
  • तनाव से दूर रहें: खुश रहने की पूरी कोशिश करें और दिन भर की भागदौड़ में थोड़ा समय सिर्फ अपने लिए ज़रूर निकालें।

आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान में मुख्य अंतर

पहलू आधुनिक चिकित्सा (एलोपैथी) आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
बीमारी का नज़रिया वजन बढ़ने के कारणों (जैसे आहार, शारीरिक गतिविधि, हार्मोनल या अन्य चिकित्सकीय कारण) का मूल्यांकन कर उपचार किया जाता है। समग्र स्वास्थ्य, पाचन, आहार-विहार और व्यक्ति की प्रकृति के संतुलन पर ध्यान दिया जाता है।
उपचार का तरीका संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, व्यवहार में बदलाव और आवश्यकता अनुसार दवाइयाँ या अन्य चिकित्सकीय उपाय अपनाए जाते हैं। जड़ी-बूटियाँ, संतुलित आहार, योग, दिनचर्या और जीवनशैली में सुधार पर ज़ोर दिया जाता है।
सुरक्षा वजन घटाने की दवाइयाँ केवल डॉक्टर की सलाह से दी जाती हैं और उनकी नियमित निगरानी की जाती है। आयुर्वेदिक औषधियाँ भी केवल योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह और सही मात्रा में ही लेनी चाहिए।
दीर्घकालिक लक्ष्य सुरक्षित और टिकाऊ तरीके से वजन कम करना तथा उससे जुड़ी बीमारियों का जोखिम घटाना। संतुलित जीवनशैली, स्वस्थ पाचन और समग्र स्वास्थ्य बनाए रखने पर बल दिया जाता है।
जीवनशैली का महत्व संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और स्वस्थ आदतों को उपचार का आधार माना जाता है। आहार, योग, दिनचर्या और प्राकृतिक जीवनशैली को दीर्घकालिक स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

डॉक्टर से कब मिलें?

हल्का-फुल्का वज़न बढ़ना आम बात है और यह घर पर सही आहार लेने से खुद-ब-खुद कंट्रोल हो जाता है। लेकिन हमें हमेशा मालूम होना चाहिए कि कब मोटापे की स्थिति गंभीर रूप ले सकती है और हमें तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए।

तुरंत डॉक्टर की सलाह लेने वाले लक्षण:

  • अचानक भारी फैट बढ़ना: अगर एक महीने के अंदर बिना ज़्यादा खाए आपका वज़न बहुत तेज़ी से बढ़ जाए।
  • पीरियड्स का रुकना: महिलाओं में वज़न बढ़ने के साथ अगर लगातार कई महीनों तक पीरियड्स बिल्कुल न आएँ।
  • चेहरे पर अनचाहे बाल: चेहरे और ठुड्डी पर अनचाहे कड़े बालों का तेज़ी से उगना, जो हॉर्मोन खराब होने का संकेत है।
  • भारी थकान और चक्कर: थोड़ा सा हल्का काम करने पर ही साँस फूलना और आँखों के आगे पूरा अंधेरा छा जाना।

निष्कर्ष: 

वज़न बढ़ने की परेशानी को सिर्फ कैलोरी के गणित से समझना एक बहुत बड़ी भूल हो सकती है। हमारा शरीर कोई साधारण मशीन नहीं है जो सिर्फ जोड़-घटाव पर चलती हो। बेकाबू वज़न बताता है कि आपके हॉर्मोन्स, आपका मानसिक तनाव और आपकी जीवनशैली पूरी तरह से बिगड़ चुके हैं। इस मोटापे को सिर्फ भूखे रहकर या बहुत ज़्यादा जिम जाकर ठीक नहीं किया जा सकता है। शरीर को अंदर से स्वस्थ बनाने के लिए उसे पूरा प्राकृतिक पोषण देना बहुत ज़रूरी है। पौष्टिक खानपान, भरपूर नींद और तनाव-मुक्त जीवन ही आपका सच्चा साथी है। अगर परेशानी ज़्यादा तंग करे, तो हमेशा डॉक्टर से सही सलाह लें।

References

https://www.who.int/news-room/fact-sheets/detail/obesity-and-overweight

https://www.who.int/teams/nutrition-and-food-safety/development-of-global-gestational-weight-gain-standards

https://www.nhs.uk/live-well/healthy-weight/managing-your-weight/healthy-ways-to-gain-weight/

https://www.healthline.com/nutrition/weight-management

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

नहीं, अचानक खाना कम करने से शरीर का मेटाबॉलिज़्म धीमा हो जाता है, जिससे वज़न कम होने के बजाय शरीर में भारी कमज़ोरी आने लगती है और चर्बी घटने की रफ्तार रुक जाती है।

चावल और रोटी से सीधे तौर पर मोटापा नहीं बढ़ता है। अगर आप उन्हें सही मात्रा में, फाइबर और हरी सब्ज़ियों के साथ खाते हैं, तो यह पूरी तरह सुरक्षित है और नुकसान नहीं करता।

यह वह अंदरूनी स्थिति है जब आपका शरीर खून में मौजूद शुगर को आसानी से पचा नहीं पाता और उसे सीधे चर्बी में बदलने लगता है, जिससे वज़न बहुत तेज़ी से बढ़ने लगता है।

जी हाँ, थायरॉइड बीमारी में ज़रूरी हॉर्मोन्स कम बनते हैं जिससे मेटाबॉलिज़्म बिल्कुल सुस्त हो जाता है। यही कारण है कि कम खाने पर भी मशीन में वज़न लगातार बढ़ता रहता है।

रात के समय हमारा पाचन तंत्र बहुत धीमा होता है। देर से खाने पर शरीर उस खाने को ऊर्जा में बदलने की जगह उसे सीधे पेट की फैट के रूप में जमा कर लेता है।

बिल्कुल, चीनी शरीर में जाकर तुरंत फैट बनाती है। इसे छोड़ने से कुछ ही हफ्तों में आपके शरीर से फालतू चर्बी और भारीपन पूरी तरह कम होने लगता है और आप हल्का महसूस करते हैं।

पीसीओडी में रोज़ाना हल्का योगा करना, चीनी बिल्कुल छोड़ देना और प्रोटीन से भरपूर डाइट लेना ही वज़न कम करने का सबसे अचूक और पक्का तरीका माना जाता है।

हाँ, पानी कम पीने से शरीर के विषैले तत्व बाहर नहीं निकल पाते हैं और मेटाबॉलिज़्म भी धीमा पड़ जाता है, जिससे वज़न बढ़ने की रफ्तार काफी ज़्यादा तेज़ हो जाती है।

बाज़ार में मिलने वाले ज़्यादातर फैट-फ्री पैकेट्स में स्वाद बढ़ाने के लिए बहुत ज़्यादा छिपी हुई चीनी मिलाई जाती है, जो असल में आपका वज़न घटाने की बजाय कई गुना बढ़ा देती है।

आप घर पर ही रहकर सही डाइट का पालन करके, रोज़ाना तीस मिनट की तेज़ वॉक और तनाव से दूर रहकर बिना किसी भारी जिम के आसानी से अपना वज़न बिल्कुल कंट्रोल कर सकते हैं।

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