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बच्चों का breakfast बहुत मीठा हो तो school-time hunger पर क्या असर पड़ सकता है?

Information By Dr. Sapna Bhargava     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 31 Aug, 2026
  • category-iconUpdated on 31 Aug, 2026
  • category-iconChild Health
  • blog-view-icon5003

सुबह के नाश्ते में रंग-बिरंगे snacks सिर्फ देखने में सुंदर लगते हैं। छोटे बच्चे अक्सर सुबह नाश्ता करते समय कुछ अच्छा खाने की जिद्द करते है। ज़ाहिर सी बात है आपके घरों में भी यह होता ही होगा? पर अक्सर हम अच्छे खाने को मीठे खाने से तोलकर देखते हैं। खाना खाने से पहले और खाना खाने के बाद मीठा खाने की आदत हमारे घरों में परंपरा की तरह चलती रहती है जिसका असर बच्चों पर भी पड़ता है। 

अगर आपके घर पर भी बच्चों को लगातार सिर दर्द और लंबे समय तक थकान रहती है तो यह समस्या ज्यादा मीठा खाने के कारण हो सकती है। आइये इसके बारे में ज्यादा जानते हैं…

बच्चों को मीठा खाने की तलब क्यों होती है?

आयुर्वेद की मानें तो सुबह-सुबह मीठा खाने की तलब शरीर में बढ़े हुए कफ दोष के असंतुलन और कम पाचन शक्ति की वजह से होती है। इन दोषों के कारण शरीर में अमा (toxins) बनने लगते हैं। जिसकी वजह से भूख और मीठा खाने की तलब ज्यादा होती है। 

ज़्यादा मीठा खाना शरीर में कफ दोष को बढ़ता है जिसका गुण ठंडा होता है, शरीर है कफ दोष के बढ़ने से ज़्यादा भूख लगती है। ज़्यादा मीठा ब्रेकफास्ट शरीर में जठराग्नि को कम करता है जिससे स्वस्थ खाना खाने का मन नहीं करता और हमारा शरीर ज़्यादा मीठे की माँग करता है। इस समस्या को आयुर्वेद की मदद से आसानी से हल किया जा सकता है। 

ज़्यादा मीठा खाने का दिमाग़ पर असर 

ज़्यादातर बच्चे चीनी खाने से पहले ध्यान नहीं देते। मीठा खाने के बाद ऊर्जा एकदम से बढ़ जाती है, जिससे और भूख लगती है। चीनी कहते समय यह पता नहीं चलता कि इसका हमारे दिमाग पर क्या असर पड़ता है।

हमारा दिमाग ब्लड सूगर लेवल के मामले में ज़्यादा (संवेदनशील) sensitive होता है। अगर बच्चे एक मात्रा से ज़्यादा चीनी खाएँ तो इससे दिमाग की काम करने की क्षमता पर बुरा असर पड़ता है। इस प्रकार से मीठा ब्रेकफास्ट बच्चो पर बुरा प्रभाव डालता है:

  • सीखने और याद रखने में दिक्कत: ज़्यादा मीठा मस्तिष्क के हिप्पोकैम्पस में असर डालता है जिससे याद रखने और सीखने में दिक्कत हो सकती है। आसान शब्दों में, ज्यादा मीठा खाना बच्चों की मानसिक क्षमता को कमजोर करता है। 
  • hyperactivity और impulsivity: अगर आपके बच्चों को अपनी भावनाओं और व्यवहार पर नियंत्रण रखने में दिक्कत हो रही हो, तो यह ज़्यादा मीठा खाने की वजह से हो सकता है। चीनी दिमाग में ग्लूकोज को बढ़ती है जिससे शरीर में ऊर्जा बनती है। मीठे का ज़्यादा सेवन करने से व्यवहार में आवेगता और अति सक्रियता आ सकती है जिससे बच्चों को पढाई में ध्यान लगाने में दिक्कत हो सकती है। 
  • मूड ख़राब रहना: हमारे मस्तिष्क के लिम्बिक सिस्टम में amygdala होता है जो मन में भावनाओं के लिए ज़िम्मेदार होता है। ज़्यादा मीठा amygdala को असंतुलित कर सकता है और भावनाओं को बढ़ा सकता है। जो मस्तिष्क के स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं है। 
  • चीनी की लत लगना: मीठा मस्तिष्क के लिम्बिक सिस्टम में सेरोटोनिन और डोपामाइन को बढ़ाता है जो मन को आनंद देता है और भावनाओं को तेज़ करता है, मतलब मीठा खाते ही दिमाग को अच्छा लगने लगता है। जिससे कम समय में मीठा खाने की लत लग सकती है।

ब्रेकफास्ट में मीठा खाने से school-time hunger पर क्या असर पड़ता है?   

ब्रेकफास्ट बच्चों के लिए बहुत ज़रूरी होता है, बच्चों के पूरे दिन की ऊर्जा इसी पर निर्भर करती है। 

अगर आपके घर पर भी सुबह सुबह जैम-ब्रेड, मीठे सीरियल्स, पैनकेक्स, टोस्ट, बिस्किट्स, चिप्स खाए जाते है तो यह बच्चों की सेहत के लिए बिलकुल भी अच्छा नहीं है। स्कूल के दौरान यह बच्चों की भूख और ऊर्जा के संतुलन को बिगाड़ सकता है जिससे बच्चों को शुरू में sugar-rush के चलते ज्यादा ऊर्जा महसूस हो सकती है और बाद में एकदम से कमज़ोरी और थकान मेहसूस हो सकती है। इस शुगर-रश की वजह से बच्चों की स्वाभाविक भूख कम हो जाती है। स्कूल में लंच के दौरान बच्चों को कम भूख लगती है। 

मीठे खाने का संबंध सीधा blood sugar level से होता है। मीठा खाने के बाद ब्लड शुगर लेवल तेज़ी से बढ़ता और अचानक से गिरता है। स्कूल में लंच टाइम के दौरान ब्लड शुगर के अचानक गिरने से अजीब बेचैनी होती है और unhealthy craving बढ़ जाती है, जिससे मन ज्यादा शुगर खाने की माँग करने लगता है।

ज़्यादा मीठा खाने से व्यवहार में बदलाव 

अगर बच्चे सुबह-सुबह तेज़ मीठा खाते हैं तो उसने व्यवहार में अनियमित बदलाव का सकते है। बच्चों को अपनी भावनाओं और व्यवहार पर नियंत्रण रखने में दिक्कत होती है। जो बच्चों के मस्तिष्क के स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं है। 

इन पर ध्यान न देने से आगे चलकर ये एक बड़ी बीमारी का कारण बन सकते हैं। 

सुबह ब्रेकफास्ट में इन्हे खाने से बचें

ब्रेकफास्ट के दौरान हम ऐसी बहुत सी चीज़ें खाते है जिनमे चीनी की मात्रा सामान्य से ज़्यादा होती है ऐसे में इसका सीधा असर बच्चो की सेहत पर पड़ता है। आइये उन पदार्थो के बारे में जानते है जिनमे मीठे की मात्रा अधिक होती है। 

  • कुकीज़ 
  • cereal 
  • आइसक्रीम 
  • केचप और सॉस 
  • ग्रेनोला बार 
  • पैनकेक और वैफल्स 
  • परिष्कृत (refined) अनाज
  • जूस और फ्लेवर्ड ड्रिंक्स 
  • अत्यधिक मक्खन (Butter)
  • प्रोसेस्ड मॉस 

 सुबह के दौरान इन पदार्थों को बच्चों को देने से बचें। इन्हे खाने से शरीर में शुगर स्पाइक हो सकता है। 

आयुर्वेद के अनुसार बच्चों को कितना मीठा देना चाहिए?

आयुर्वेद में मीठा शरीर के लिए उतना ही जरुरी है जितना बाकी अन्य पदार्थ। आयुर्वेद में मीठे को मधुर रस कहा जाता है और खाने में इसका होना इसकी गुणवत्ता, शुद्धता और संयम पर निर्भर करता है। बढ़ते हुए बच्चों के लिए मधुर रस धातु को पोषण देने और दिमाग को सक्रिय करने में मदद करता है। लेकिन इसका ज़्यादा सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है।  

आयुर्वेद में मीठे के लिए प्राकर्तिक स्रोतों की बात कही गयी है, जिनका उपयोग सही मात्रा में किया जा सकता है:

  • गुड़ (jaggery)
  • शक्कर (raw sugar)
  • दूध (milk)
  • ताज़े फल (fresh fruits)
  • जड़ वाली सब्ज़ियाँ (root vegetables)
  • शहद (raw honey)
  • ख़जूर (dates)

आयुर्वेद के अनुसार संतुलन क्यों जरुरी है?

जीवन संतुलन के आधार पर चलता है। आयुर्वेद के अनुसार कोई पदार्थ एक व्यक्ति के लिए अच्छा हो सकता है, तो दूसरे के लिए नुकसानदायक हो सकता है। सभी बच्चों को ब्रेकफास्ट में मीठा खाना खाने के बाद अलग-अलग प्रकार के लक्षण दिख सकते हैं, भूख भी कम-ज़्यादा लग सकती है। बच्चों का खाना बनाते समय इन बिंदुओं को ध्यान में रखना चाहिए: 

  • उम्र 
  • पाचन क्षमता 
  • शारीरिक गतिविधि 
  • प्रकृति 
  • मौसम 

इन सभी को ध्यान में रखकर बनाया गया भोजन बच्चों को असंतुलन से बचा सकता है। जिससे बच्चे स्वस्थ रह सकते हैं।  

Parents को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? 

बच्चे मीठे की तरफ आकर्षित होते हैं ऐसे में माता-पिता को ध्यान रखना चाहिए कि मीठे की मात्रा संतुलित रहे। इसके अलावा यह भी ध्यान रखना चाहिए कि खाने में मीठा किसके साथ दिया जा रहा है। 

ब्रेकफास्ट में केवल मीठा नहीं होना चाहिए: सुबह के नाश्ते में protein + fiber + healthy fruits का संतुलन होना चाहिए। 

चीनी की मात्रा को कम रखें: खाने में कम से कम चीनी का प्रयोग करें। बच्चों के खाने में चीनी, शहद और मीठे सिरप डालने की आदत न बनाएँ। 

बच्चों की पाचन क्षमता का ध्यान रखें: बच्चों को उनकी अग्नि, उम्, शारीरिक गतिविधि के अनुसार खाना देना चाहिए। 

ज़्यादा न खिलाएँ: बच्चों की भूख का ध्यान रखें, हर बच्चे की भूख अलग हो सकती है, भूख न लगने पर भी खिलाने से संतुलन बिगड़ सकता है। 

पौष्टिक विकल्प चुनें: carbohydrates, मीठे ड्रिंक्स और पैक्ड स्नैक्स के बजाय घर पर बनी दही, छाछ, फल और सब्ज़ियाँ बच्चों को खिलाएँ।  

भूख में बदलाव को नज़रअंदाज़ न करें: एकदम ज़्यादा भूख, वजन में आये बदलावो को अनदेखा न करें अगर इसके साथ बच्चे को किसी और तरह परेशानी है तो, डॉक्टर से संपर्क करे। 

निष्कर्ष 

सुबह-सुबह मीठा खाने की तलब शरीर में बढ़े हुए कफ दोष के असंतुलन और कम पाचन शक्ति की वज़ह से होती है। ज्यादा मीठा खाने के कारण  बच्चों को लगातार सिर दर्द और लंबे समय तक थकान की समस्या हो सकती है। मीठा खाने से स्कूल के दौरान बच्चों की भूख और ऊर्जा का संतुलन  बिगाड़ सकता है जिससे बच्चों को शुरू में शुगर-रश के चलते ज्यादा ऊर्जा महसूस हो सकती है और बाद में एकदम से कमज़ोरी और थकान मेहसूस हो सकती है। ज़्यादा मीठा खाना जीभ को अच्छा लगता है पर आगे चलकर यह मधुमेह का कारण बन सकता है। 

अगर आपके घर में भी बच्चे ज़्यादा मीठा खाते हैं तो, आपको आज ही इस पर ध्यान की ज़रूरत है। 

Reference: 

The effects of breakfast on behavior and academic performance in children and adolescents - PMC

Study of Hypothyroidism from the Perceptive of Agni, Kapha Dosha and Rasadi Dhatu | International Journal of Ayurveda and Pharma Research

Hyperactivity and sugar: MedlinePlus Medical Encyclopedia

The effect of sugar on behavior or cognition in children. A meta-analysis - PubMed

Does sugar make kids hyper? That's... (CNN News) - Behind the headlines - NLM

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

नहीं, आयुर्वेद के अनुसार मधुर रस बढ़ते हुए बच्चों के लिए धातु (dhatu) को पोषण देने और दिमाग को सक्रिय करने में मदद करता है। लेकिन इसका ज़्यादा सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है। इसलिए इसका सही मात्रा में प्रयोग करें।

ज़्यादा मीठा खाने से शरीर में कफ दोष और पाचन शक्ति का असंतुलन दिखता है। इन दोषों के कारण शरीर में अमा (toxins) बनने लगते हैं। जिसकी वजह से भूख जल्दी लगती है।

गुड़ (jaggery)

शक्कर (raw sugar)

दूध (milk)

ताज़े फल (fresh fruits)

जड़ वाली सब्ज़ियाँ (root vegetables)

शहद (raw honey)

ख़जूर (dates)

गुस्सा, थकान, सिरदर्द, पेट दर्द, चिड़चिड़ापन, ध्यान और एकाग्रता में कमी, सुबह और दोपहर के समय ऊर्जा (energy) कम होना, प्रेरणा की कमी, मूड बदलना और जी मिचलाना आदि। 

मीठे का सेवन बच्चों को उम्र, पाचन क्षमता, शारीरिक गतिविधि, प्रकृति और मौसम के अनुसार करना चाहिए। 

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