आजकल के व्यस्त जीवन में हम लोग टेक्नोलॉजी से इतना घिरे हुए हैं स्पेशली हमारा फोन जो कि हमारे साथ हमेशा रहता है सुबह से लेकर शाम तक हम फोन का use करते हैं लेकिन जब हम अपने बिस्तर पर लेटते हैं तब भी हम अपने फोन में कुछ ना कुछ करते रहते हैं reels देखते रहते हैं जिसकी वजह से हम यह सोचते हैं कि हमें थोड़ा रिलैक्सेशन मिला है या हमारा थोड़ा टाइम पास हुआ है ,हमे एंटरटेनमेंट मिला है|
लेकिन असल में जब हम फोन रख देते हैं और फिर सोने का ट्राई करते हैं तो ऐसा लगता है कि अभी कुछ ना कुछ हमारे दिमाग में चल रहा है और हम सो नहीं पा रहे हैं तो इसका यह कारण नहीं है कि आपको कोई दिक्कत है इसका यह कारण है कि आपका स्क्रीन टाइम बहुत ज्यादा है और आपके दिमाग को ऐसा लगता है कि अभी कुछ ना कुछ सोचना बाकी है और आपको सोने में असहजता महसूस हो रही है इसको एक तरीके की बेचैनी कह सकते हैं जो कि हमें स्क्रीन देखने से ज्यादा होती है| चाहे आपको कितनी ही नींद आरी हो लेकिन आप फ़ोन को स्क्रॉल करने में इतने व्यस्त है की आपका दिमाग का नेचुरल स्लीप हैबिट् बिगड़ रही है यह आप जाएं ले |
रील्स बंद करने के बाद भी दिमाग क्यों एक्टिव रहता है ?
रील्स की खासियत होती है कि हर सेकंड में कुछ ना कुछ नया कंटेंट सामने आता है एक वीडियो खत्म, दूसरा वीडियो शुरू हो जाता है कभी कॉमेडी ,कभी न्यूज़, कभी रिलेशनशिप एडवाइस, कभी कोई शॉकिंग इनफॉरमेशन,इस तरह का बदलता कंटेंट देखकर हमारा दिमाग अलर्ट मोड में रहने का आदि हो जाता है और हमारा दिमाग अलर्ट मोड में रह सकता है ,जब हम अचानक फोन को रख देते हैं तो हमारा दिमाग एकदम से शांत नहीं होता Brain momentum को शांत होने में थोड़ा सा टाइम लगता है जिसकी वजह से दिमाग शांत होता है लेकिन हमारी आदत में यह है की हम देखते-देखते कुछ नया सोचने लगते है तो उसे तुरंत अपने फोन पर ढूंढने लगते हैं देखने लगते हैं जिसकी वजह से stimulation शांत नहीं होती |
रात को सोने से पहले इस आदत को कैसे बदल सकते हैं ?
आपकी इस आदत को ठीक करने से पहले आपको बता दिया जाए कि इस आदत को ठीक करने का बेड़ा आपको खुद लेना होगा क्योंकि इसको ठीक करने के लिए आपको बहुत ज्यादा सबर और कंट्रोल की आवश्यकता है जिसकी वजह से आप इस आदत को बदल सकते हो और कुछ बातें जो हम बता रहे हैं वह फॉलो करके आप अपनी स्लीप साइकिल को थोड़ा बेहतर बना सकते हैं और मानसिक स्थिति को भी सही करने में सहायता पा सकते है
- कोई किताब पढ़ सकते हैं
- कमरे की रोशनी कम कर सकते हैं
- अगले दिन के जरूरी काम लिख सकते हैं
- धीमी breathing exercise कर सकते हैं
- हल्की स्ट्रेचिंग कर सकते हैं
- शांत सा म्यूजिक सुन सकते हैं
- अपने छोटे घरेलू काम कर सकते है
उद्देश्य यह है कि आपके दिमाग को खाली नहीं करना होता ,धीरे-धीरे स्टिमुलेशन को कम करा जा सकता है
आदत ठीक न हो तो आपको और क्या हो सकता है?
जिन लोगों के लिए स्क्रीन टाइम नया है उनको यह काफी अच्छा और कोई फर्क ना पढ़ने वाला लग सकता है ,लेकिन लंबे समय तक अगर आप स्क्रीन टाइम को कम ना करें और ऐसे ही चलते रहे तो आपको यह दिक्कतें आनी तय है
- जैसे नींद आने में दिक्कत होना
- मानसिक स्तिथि में बदलाब
- Brain fog
- सोचने समझने की क्षमता में फर्क आना
- सुबह सर चढ़ा रहना
- आंखों की रौशनी में फर्क आना
- Cervical की समयसा
- Stress and anxiety
- Migrane
लेकिन अगर आपको यह सब समस्याएं आयी नहीं है इसका मतलब यह नहीं है की आपको यह दिक्कतें आएगी नहीं , इसलिए स्क्रीन टाइम को काम करने की कोशिश करे
कैसे पता चलेगा कि स्क्रीन टाइम प्राकृतिक नींद चक्र को नुकसान पहुंचा रहा है?
अगर आपको नीदं आराम से नही आरी , और आपको बेचैनी, घबराहट ,और आप अपने सोने के समय से ज्यादा जाग रहे है तो निश्चित ही आपका नींद का प्रकृतिक चक्र ठीक नहीं है और आपको निश्चित रूप से ही अब अपने दिनचर्या में स्क्रीन टाइम को काम करने की जरूरत है रोशनी या उत्तेजक सामग्री के संपर्क में आने से आपकी नींद की स्वाभाविक लय बिगड़ रही है।
चमक कम करने, शांत सामग्री चुनने या स्क्रीन का समय थोड़ा जल्दी समाप्त करने का प्रयास करें और देखें कि आपका शरीर कैसी प्रतिक्रिया देता है।
क्या मुझे डॉक्टर से मिलने की जरूरत है?
अगर आपकी समस्या का निदान दी हुई बातों को ध्यान में रख के ही होरा है तोह आपको बस वही करने की जरूरत है लेकिन अगर आपको शरीर में और भी ज्यादा लक्षण दिख रहे है या महसूस होरे है, तो आपको तुरंत ही किस doctor को दिखाना पड़ेगा जिससे आपके लक्षण देखते हुए आपका इलाज तुरंत किआ जाये हो सकता यह किसी और बीमारी के लक्षण हो |
निष्कर्ष
सोने से पहले reels देखना ,बंद करने के बाद भी दिमाग शांत नहीं होना एक आम समस्या तब तक ही है जब तक आपको इसके लक्षण कम महसूस हो, लेकिन अगर आपका मन उदास ,नींद न आये ,डिप्रेशन ,आँखों की रौशनी काम होना , brain फोग जैसे परेशानी होने पर तुरंत किसी अच्छे चिकित्सक को दिखाए , और कोशिश करे जितना हो सके स्क्रीन टाइम kam करे |
References
Screen Time Among Under-Five Children in India: A Systematic Review and Meta-Analysis - PMC
The Harms of Screen Use | HHS.gov
Ten tips for cutting down on screen time during the COVID-19 pandemic | UNICEF India
Faulty screen time measures hamper national policies: here is a way to address it - PMC















