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Late-night screen time sleep cycle को कैसे बिगाड़ता है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

क्या आपको भी रात को बिस्तर पर लेटकर घंटों तक मोबाइल चलाने की आदत है? आजकल ज़्यादातर लोग सोने से पहले रील्स या वेब सीरीज़ देखना पसंद करते हैं। हमें लगता है कि इससे दिन भर की थकान मिट रही है और हम रिलैक्स हो रहे हैं। लेकिन हकीकत में यह आदत हमारी नींद की सबसे बड़ी दुश्मन है। जब हम रात के अंधेरे में स्क्रीन को घूरते हैं तो हमारे दिमाग का पूरा सिस्टम हिल जाता है। आइए बिल्कुल आम बोलचाल की भाषा में समझते हैं कि देर रात तक फोन चलाने से हमारी नींद का साइकिल कैसे बिगड़ता है और इसका शरीर पर क्या भयंकर असर होता है।

रात में मोबाइल देखने से नींद क्यों उड़ जाती है?

हमारे दिमाग के अंदर एक कुदरती घड़ी होती है जो सूरज की रोशनी के हिसाब से काम करती है। दिन के उजाले में यह घड़ी हमें जगाए रखती है और रात के अंधेरे में नींद का हार्मोन बनाती है जिसे मेलाटोनिन कहते हैं। जब हम रात को अंधेरे कमरे में मोबाइल या टीवी की नीली रोशनी देखते हैं तो दिमाग को लगता है कि अभी दिन ही है। इस वजह से नींद लाने वाला हार्मोन बनना बंद हो जाता है। यही कारण है कि घंटों फोन चलाने के बाद जब आप आंखें बंद करते हैं तो आपको तुरंत नींद नहीं आती और आप करवटें बदलते रहते हैं।

एक्सपर्ट डॉक्टर की सलाह 

नींद कोई लग्ज़री नहीं है बल्कि यह हमारे शरीर के लिए ऑक्सीजन जितनी ही ज़रूरी है। जब हम रात को फोन के चक्कर में नींद से समझौता करते हैं तो हमारा दिमाग खुद की सफाई नहीं कर पाता। डॉक्टर चेतावनी देते हैं कि जो लोग लगातार देर रात तक जागते हैं उनका दिमाग समय से पहले बूढ़ा होने लगता है। इससे न सिर्फ याददाश्त कमज़ोर होती है बल्कि इंसान बहुत जल्दी तनाव डिप्रेशन और चिड़चिड़ेपन का शिकार हो जाता है जो आगे चलकर बड़ी बीमारियों को न्योता देता है।

देर रात स्क्रीन देखने से हम कौन सी गलतियां करते हैं? 

रात के समय फोन चलाते चलाते हम अक्सर कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं जो हमारी सेहत को अंदर ही अंदर खोखला कर देती हैं:

  • गलत तरीके से लेटना: फोन देखते समय हम अक्सर अपनी गर्दन और रीढ़ की हड्डी को टेढ़ा करके लेटते हैं जिससे भयानक दर्द शुरू हो जाता है।
  • फालतू की बातें सोचना: सोशल मीडिया पर दूसरों की ज़िंदगी देखकर हम बेवजह अपनी तुलना करने लगते हैं जिससे दिमाग में तनाव पैदा होता है।
  • रात में अनहेल्दी खाना: देर तक जागने से रात को बेवजह भूख लगती है और हम चिप्स या नमकीन खा लेते हैं जो सीधा वज़न बढ़ाता है।
  • कमरे में अंधेरा न रखना: स्क्रीन की तेज़ रोशनी सीधे आंखों पर पड़ती है जिससे आंखों में सूखापन और जलन होने लगती है।

रात में फोन चलाने से कितने प्रतिशत लोगों की नींद खराब हो रही है?

आजकल की नई रिसर्च और स्लीप स्टडी के आंकड़े बहुत ही डराने वाले हैं। इन आंकड़ों के अनुसार शहरों में रहने वाले लगभग साठ से सत्तर प्रतिशत लोग नींद की कमी और स्क्रीन की लत से जूझ रहे हैं। इनमें सबसे बड़ी संख्या पंद्रह से पैंतीस साल के युवाओं की है। हैरानी की बात यह है कि ज़्यादातर लोगों को पता ही नहीं है कि उनकी नींद न आने की असली वजह उनका मोबाइल फोन है। रात को सोने से पहले हर कोई फोन चेक करता है और पांच मिनट सोचकर दो घंटे बिता देता है। यह आंकड़ा बताता है कि यह समस्या अब घर-घर की कहानी बन चुकी है।

स्क्रीन टाइम के नुकसान से अपनी नींद को कैसे बचाएं?

अगर आप सच में एक सुकून भरी नींद चाहते हैं तो आपको एक कड़ा नियम बनाना ही होगा। सोने से कम से कम एक घंटे पहले अपने फोन, लैपटॉप और टीवी को खुद से दूर कर दें। फोन को अपने बिस्तर के पास रखकर बिल्कुल न सोएं क्योंकि नोटिफिकेशन की आवाज़ आपकी नींद तोड़ सकती है। रात को सोने से पहले कोई अच्छी किताब पढ़ें या हल्का संगीत सुनें। अगर आपको रात में समय देखने की आदत है तो फोन की जगह अलार्म क्लॉक का इस्तेमाल करें। बस एक हफ्ते तक सोने से पहले स्क्रीन से दूरी बनाकर देखें आपकी नींद का साइकिल अपने आप सही हो जाएगा।

रात को देर तक जागने का सबसे ज्यादा नुकसान किसे होता है? 

देर रात तक स्क्रीन देखने का नुकसान वैसे तो हर किसी को होता है लेकिन कुछ लोगों के लिए यह आदत बहुत भारी पड़ती है:

  • स्कूल जाने वाले बच्चे: बच्चों के दिमाग के विकास के लिए गहरी नींद बहुत ज़रूरी है। स्क्रीन देखने से उनकी याददाश्त और पढ़ाई पर सीधा असर पड़ता है।
  • ऑफिस में काम करने वाले: दिन भर कंप्यूटर पर काम करने के बाद रात को भी फोन देखने से इनकी आंखें और दिमाग बुरी तरह थक जाते हैं।
  • दिल और बीपी के मरीज़: नींद पूरी न होने से ब्लड प्रेशर बढ़ता है जो दिल की बीमारियों वाले लोगों के लिए बहुत बड़ा खतरा है।
  • मानसिक तनाव झेल रहे लोग: जो लोग पहले से ही परेशान हैं स्क्रीन की लत उनके तनाव और डिप्रेशन को कई गुना बढ़ा देती है।

क्या अच्छी नींद के लिए लाइफस्टाइल बदलना ज़रूरी है?

बिल्कुल ज़रूरी है। आप सिर्फ फोन बंद करके अच्छी नींद की उम्मीद नहीं कर सकते आपकी पूरी दिनचर्या सही होनी चाहिए। अगर आप पूरा दिन बिस्तर पर पड़े रहेंगे तो रात को नींद कैसे आएगी। अच्छी नींद के लिए शरीर का थकना बहुत ज़रूरी है। दिन में कम से कम आधा घंटा पैदल चलें या व्यायाम करें। दिन के समय सूरज की रोशनी ज़रूर लें ताकि दिमाग की घड़ी को दिन और रात का फर्क समझ आए। चाय कॉफी और सिगरेट का नशा कम करें क्योंकि यह आपके दिमाग को शांत नहीं होने देते। सही लाइफस्टाइल ही आपकी अच्छी नींद की सबसे पक्की गारंटी है।

नींद की साइकिल बिगड़ने के शुरुआती इशारे क्या हैं?

जब आपके दिमाग की नींद की घड़ी खराब होने लगती है तो शरीर कई तरह के वॉर्निंग सिग्नल देता है जिन्हें समझना बहुत ज़रूरी है:

  • सुबह उठने में भारी परेशानी: आठ घंटे सोने के बाद भी ऐसा लगना जैसे शरीर में बिल्कुल जान नहीं है और बिस्तर से उठने का मन न करना।
  • दिन भर उबासी आना: ऑफिस या स्कूल में काम करते समय बार-बार आंखें बंद होना और शरीर में सुस्ती छाई रहना।
  • बिना बात के गुस्सा आना: नींद पूरी न होने से दिमाग चिड़चिड़ा हो जाता है और इंसान छोटी छोटी बातों पर भड़कने लगता है।
  • काम में मन न लगना: किसी भी एक चीज़ पर फोकस न कर पाना और बार बार गलतियां करना खराब नींद का सबसे बड़ा इशारा है।

खराब नींद से किन बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है ? 

अगर आप नींद के साइकिल को लंबे समय तक बिगड़ा हुआ छोड़ देते हैं तो यह शरीर में कई भयानक बीमारियों को जन्म देता है:

  • मोटापा और शुगर: रात में जागने से शरीर का हार्मोन सिस्टम बिगड़ता है जिससे तेज़ी से वज़न बढ़ता है और डायबिटीज़ का खतरा हो जाता है।
  • दिल की बीमारियां: नींद की कमी से दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर बढ़ता है जिससे हार्ट अटैक के मामले बहुत ज़्यादा आ रहे हैं।
  • डिप्रेशन और एंग्जायटी: दिमाग को आराम न मिलने से उदासी और हमेशा डरे डरे रहने की मानसिक बीमारियां हावी हो जाती हैं।
  • आंखों की कमज़ोरी: लगातार रात के अंधेरे में स्क्रीन देखने से आंखों की नसें सूखने लगती हैं और चश्मे का नंबर तेज़ी से बढ़ता है।

सोने से पहले स्क्रीन टाइम की जगह खानपान और रूटीन कैसा हो? 

अपनी रात की आदतों को थोड़ा सा बदलकर आप एक बहुत ही शानदार और गहरी नींद पा सकते हैं:

  • हल्का रात का खाना: रात को हमेशा दाल सूप या हल्का खाना खाएं। ज़्यादा मसालेदार और भारी खाना पेट खराब करता है जिससे नींद टूटती है।
  • गुनगुना दूध पिएं: सोने से आधा घंटा पहले एक गिलास हल्का गर्म दूध पीने से शरीर की नसें शांत होती हैं और बहुत अच्छी नींद आती है।
  • पैर धोकर सोएं: रात को सोने से पहले अपने पैरों को साफ पानी से धोएं या तलवों की हल्की मालिश करें। इससे दिन भर की थकान दूर होती है।
  • किताब पढ़ने की आदत: फोन देखने के बजाय कोई अच्छी और सकारात्मक किताब पढ़ें। यह आपके दिमाग को रिलैक्स करके नींद की वादियों में ले जाएगी।

खराब आदतों और स्क्रीन की लत से अपना दिमाग कैसे बचाएं?

आज के समय में फोन एक ज़रूरत बन गया है, लेकिन इसे अपनी कमज़ोरी न बनने दें। अपने दिमाग को इस लत से बचाने के लिए फोन में स्क्रीन टाइमर लगा लें। अपने बेडरूम को नो फोन ज़ोन बना लें, यानी वहां कोई भी गैजेट नहीं होना चाहिए। अगर आपको रात को नींद नहीं आ रही है तो फोन उठाने के बजाय बिस्तर से उठकर थोड़ा टहल लें या पानी पी लें। अपने खाली समय में डिजिटल दुनिया से बाहर निकलकर असली दुनिया के लोगों से मिलें। परिवार के साथ बैठकर बातें करें। जब दिमाग असली खुशियों में लगेगा तो नकली स्क्रीन की लत अपने आप छूट जाएगी।

नींद न आने की समस्या में डॉक्टर से कब मिलना चाहिए? 

अगर फोन छोड़ने और लाइफस्टाइल सुधारने के बाद भी आपको नींद नहीं आ रही है तो यह किसी बड़ी बीमारी का संकेत हो सकता है:

  • हफ्तों तक नींद न आना: अगर आपको लगातार कई हफ्तों से रात भर जागने की समस्या हो रही है और दवाइयों का असर नहीं हो रहा है।
  • खर्राटे और सांस रुकना: अगर सोते समय आपकी सांस बार बार अटकती है या बहुत तेज़ खर्राटे आते हैं तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।
  • नींद में चलना या बड़बड़ाना: अगर आपको रात को नींद में अजीब डरावने सपने आते हैं या आप उठकर चलने लगते हैं।
  • हर वक़्त उदासी रहना: अगर नींद न आने के साथ साथ आपके मन में बहुत बुरे और निराशाजनक ख्याल आते हैं तो मनोवैज्ञानिक की सलाह लें।

आधुनिक विज्ञान और आयुर्वेद में नींद को लेकर क्या फर्क है?

आधुनिक विज्ञान और अंग्रेज़ी दवाइयां नींद न आने पर अक्सर नींद की गोलियों का सहारा लेती हैं। ये गोलियां आपको तुरंत सुला तो देती हैं लेकिन धीरे धीरे आपका शरीर इनका आदी हो जाता है और इनके बिना नींद आना बंद हो जाती है। वहीं हमारा आयुर्वेद नींद को शरीर के तीन सबसे ज़रूरी खंभों में से एक मानता है। आयुर्वेद कहता है कि रात दस बजे तक सो जाना चाहिए क्योंकि इसके बाद शरीर में पित्त बढ़ता है जो दिमाग को जगाए रखता है। आयुर्वेद में ब्राह्मी अश्वगंधा और पैरों में तेल की हल्की मालिश से दिमाग को शांत करके प्राकृतिक नींद लाने पर ज़ोर दिया जाता है जो ज़िंदगी भर साथ निभाती है।

निष्कर्ष

अंत में बस यही समझना ज़रूरी है कि हमारा शरीर एक मशीन है और नींद इस मशीन का चार्जर है। अगर आप अपने शरीर को सही से चार्ज नहीं करेंगे तो यह बहुत जल्दी खराब हो जाएगा। रात के समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल सिर्फ आपकी आंखों को नहीं बल्कि आपके पूरे दिमाग और शरीर के साइकिल को बर्बाद कर रहा है। सोशल मीडिया और वेब सीरीज़ कहीं नहीं भाग रहे हैं वह कल भी वहीं रहेंगे लेकिन अगर आपकी सेहत और नींद एक बार उड़ गई तो उसे वापस लाना बहुत मुश्किल होगा। आज रात से ही अपने फोन को खुद से दूर रखें और एक सुकून भरी नींद का मज़ा लें।

References

https://www.ncbi.nlm.nih.gov/books/NBK526132/

https://www.sleepfoundation.org/stages-of-sleep

https://www.nhlbi.nih.gov/health/sleep/stages-of-sleep

https://www.healthline.com/health/how-much-deep-sleep-do-you-need

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

स्क्रीन की नीली रोशनी दिमाग को भ्रमित करती है जिससे नींद लाने वाला 'मेलाटोनिन' हार्मोन बनना बंद हो जाता है।

दिमाग खुद की सफाई नहीं कर पाता, जिससे वह समय से पहले बूढ़ा होने लगता है और याददाश्त कमज़ोर होती है।

गर्दन और रीढ़ टेढ़ी करके गलत तरीके से लेटना और अंधेरे कमरे में तेज़ स्क्रीन लाइट से आंखें सुखाना।

लगभग साठ से सत्तर प्रतिशत लोग स्क्रीन की लत के कारण नींद की कमी से परेशान हैं, जिनमें ज़्यादातर युवा हैं।

सोने से ठीक एक घंटे पहले फोन-लैपटॉप को खुद से दूर कर दें और बिस्तर के पास अलार्म क्लॉक रखें।

दिल और बीपी के मरीज़ों के लिए, क्योंकि नींद पूरी न होने से ब्लड प्रेशर बढ़ता है जो हार्ट अटैक का कारण है।

दिन में व्यायाम करने और धूप लेने से दिमाग की घड़ी सही चलती है, साथ ही चाय-कॉफी का नशा कम करना ज़रूरी है।

सुबह उठने में भारी परेशानी होना, दिन भर बार-बार उबासी आना और बिना बात के बहुत ज़्यादा चिड़चिड़ापन होना।

शरीर का हार्मोन सिस्टम बिगड़ने से मोटापा, डायबिटीज़ (शुगर), डिप्रेशन और आंखों की नसें सूखने का खतरा बढ़ता है।

विज्ञान नींद की गोलियों की लत लगा देता है, जबकि आयुर्वेद प्राकृतिक जड़ी-बूटियों और मालिश से दिमाग शांत करता है।

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