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Lifestyle diseases की screening कब शुरू करनी चाहिए?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

अक्सर हम सोचते हैं कि जब तक हम जवान हैं और शरीर में कहीं कोई दर्द नहीं है, तब तक डॉक्टर के पास जाने की क्या ज़रूरत है। लेकिन क्या आपने कभी इस बात पर ध्यान दिया है कि आजकल बैठे-बैठे काम करने से या लगातार बाहर का खाना खाने से हमारा शरीर अंदर ही अंदर कितना कमज़ोर हो रहा है? दरअसल, हमारी खराब लाइफस्टाइल और बीमारियों का बहुत गहरा रिश्ता होता है। ब्लड प्रेशर, शुगर या कोलेस्ट्रॉल जैसी बीमारियाँ अचानक से एक दिन में नहीं आतीं। ये बहुत धीरे-धीरे हमारे शरीर में अपनी जगह बनाती हैं। सिर्फ दर्द होने पर कोई पेनकिलर खा लेने से बात नहीं बनती। यह समझना बहुत ज़रूरी है कि समय रहते जाँच कराना कोई डरने वाली बात नहीं है, बल्कि यह आपके शरीर को बड़े खतरे से बचाने का एक समझदारी भरा कदम है।

खराब लाइफस्टाइल वाली बीमारियाँ शरीर में कैसे घर करती हैं

हमारे शरीर में हर अंग अपना काम चुपचाप करता रहता है। जब हम घंटों कुर्सी पर बैठे रहते हैं, अपनी नींद पूरी नहीं करते या बेवजह का तनाव लेते हैं, तो शरीर का सिस्टम धीमा पड़ने लगता है। ऐसे में खून में शुगर या कोलेस्ट्रॉल धीरे-धीरे बढ़ने लगता है। शुरुआत में हमें कोई भी तकलीफ महसूस नहीं होती और हम इसे नज़रअंदाज़ कर देते हैं। यही लापरवाही आगे चलकर दिल की बीमारियों और मोटापे का रूप ले लेती है। जब तक हमें चक्कर आना या सीने में भारीपन महसूस होता है, तब तक बीमारी काफी हद तक बढ़ चुकी होती है।

क्या कम उम्र के लोगों को टेस्ट कराने की कोई ज़रूरत नहीं है

जी नहीं, ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। पहले कहा जाता था कि चालीस की उम्र के बाद ही शरीर का चेकअप कराना चाहिए। लेकिन आज के समय में बीस और तीस साल के युवाओं को भी हार्ट अटैक और शुगर की समस्या हो रही है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हमारी थाली में पोषण कम और जंक फूड ज़्यादा हो गया है। अगर आप ऑफिस का बहुत ज़्यादा तनाव लेते हैं, या आपकी नींद पूरी नहीं होती है, तो कम उम्र में भी आपके शरीर को बीमारियों का खतरा उतना ही है जितना किसी बड़ी उम्र के इंसान को होता है।

समय पर जाँच न कराने से शरीर को क्या नुकसान होते हैं

जब हम छोटी-मोटी परेशानियों को अनदेखा करते हैं, तो शरीर के अंदर बहुत सारे नुकसान एक साथ होने लगते हैं:

  • नसों का कमज़ोर होना: लंबे समय तक खून में शुगर बढ़ने से शरीर की नसें सूखने और कमज़ोर होने लगती हैं।
  • दिल पर दबाव: बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर आपके दिल की मांसपेशियों को बहुत थका देता है जिससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।
  • मोटापा और फैटी लिवर: गलत खानपान से लिवर पर फैट जमा होने लगता है जो खाना पचाने की ताकत खत्म कर देता है।
  • हड्डियों का खोखला होना: शरीर में विटामिन डी की कमी से कम उम्र में ही जोड़ों और घुटनों में दर्द शुरू हो जाता है।

शरीर के वो इशारे जो बताते हैं कि अब टेस्ट कराना ज़रूरी है

अगर आपको अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में ये दिक्कतें हो रही हैं, तो इन्हें बिल्कुल भी नज़रअंदाज़ न करें:

  • बिना कोई भारी काम किए ही बहुत ज़्यादा थकान महसूस होना और दिन भर नींद आना।
  • अचानक से वज़न का बहुत तेज़ी से बढ़ना या फिर बिना डाइटिंग किए वज़न कम होने लगना।
  • बार-बार बहुत ज़्यादा प्यास लगना और रात में कई बार पेशाब के लिए नींद खुलना।
  • थोड़ा सा चलने या सीढ़ियाँ चढ़ने पर साँस फूल जाना और सीने में भारीपन लगना।

आयुर्वेद के नज़रिए से खराब दिनचर्या बीमारियों को कैसे बुलावा देती है

आयुर्वेद के अनुसार, हमारा शरीर वात, पित्त और कफ इन तीन तत्वों से मिलकर बना है। जब आप देर रात तक जागते हैं, बासी खाना खाते हैं या बहुत ज़्यादा तनाव लेते हैं, तो शरीर का संतुलन पूरी तरह बिगड़ जाता है। बढ़ा हुआ तनाव शरीर में वात यानी हवा को बढ़ा देता है और गलत खानपान पित्त यानी गर्मी को बढ़ा देता है। इसी बेकाबू गर्मी और हवा की वजह से खून में गंदगी जमा होने लगती है। आयुर्वेद कहता है कि जब तक आप अपनी रोज़ की आदतों को नहीं सुधारेंगे, आपका शरीर अंदर से बीमार पड़ता रहेगा।

शरीर को अंदर से मज़बूत बनाने वाली कुछ खास जड़ी बूटियाँ

प्रकृति ने हमें ऐसी कई बेहतरीन चीज़ें दी हैं जो शरीर को अंदर से साफ करती हैं और बीमारियों से बचाती हैं:

  • गिलोय: यह शरीर की बीमारियों से लड़ने की ताकत बढ़ाने और खून को एकदम साफ करने के लिए सबसे लाजवाब मानी जाती है।
  • अश्वगंधा: यह तनाव और घबराहट को जड़ से खत्म करने की बहुत अच्छी जड़ी बूटी है जो शरीर को सुकून देती है।
  • दालचीनी: यह खून में शुगर की मात्रा को कम करने और खराब कोलेस्ट्रॉल को सुधारने में बहुत असरदार होती है।
  • तुलसी: यह सीधे तौर पर हमारी साँस और दिल की नसों पर काम करती है और शरीर को नई ऊर्जा देती है।

क्या ज़्यादा तनाव लेने से भी गंभीर बीमारियाँ जन्म लेती हैं

बिलकुल! आप जितना ज़्यादा सोचते हैं या तनाव लेते हैं, आपका शरीर उतना ही ज़्यादा अंदर से थकता है। तनाव के समय शरीर में कोर्टिसोल नाम का रसायन तेज़ी से बनता है। यह रसायन खून में शुगर बढ़ा देता है और ब्लड प्रेशर को भी तेज़ कर देता है। जब आपके शरीर को शांत होने का मौका ही नहीं मिलता, तो नसें सिकुड़ने लगती हैं। इसी वजह से जो लोग बहुत ज़्यादा चिंता करते हैं, उन्हें शुगर और बीपी की बीमारी बहुत जल्दी अपनी चपेट में ले लेती है।

हमारी रोज़मर्रा की वो गलतियाँ जो हमें बीमारियों की तरफ धकेलती हैं

हम अक्सर जाने अनजाने में कुछ ऐसा कर बैठते हैं जो हमारी परेशानी को दोगुना कर देता है:

  • सुबह का नाश्ता छोड़ना: ऐसा करने से दिन भर के लिए ऊर्जा कम हो जाती है और शरीर में कमज़ोरी आती है।
  • देर रात तक मोबाइल चलाना: इससे नींद पूरी नहीं होती और अगले दिन शरीर में तनाव का स्तर बहुत बढ़ जाता है।
  • लगातार बैठे रहना: घंटों कुर्सी पर बैठे रहने से मोटापा बढ़ता है और शरीर में खून का बहाव धीमा हो जाता है।
  • पानी कम पीना: शरीर में पानी की कमी होने से गंदगी बाहर नहीं निकल पाती और लिवर पर ज़ोर पड़ता है।
  • बाहर का तला भुना खाना: यह सीधे तौर पर कोलेस्ट्रॉल बढ़ाता है और दिल की नसों को ब्लॉक करने का काम करता है।
  • वीकेंड पर बहुत ज़्यादा सोना: इससे शरीर का रूटीन पूरी तरह बिगड़ जाता है और सुस्ती हमेशा बनी रहती है।

किन दूसरी वजहों से हमें बीमारियाँ घेर लेती हैं

कई बार आप सब कुछ सही करते हैं, फिर भी कुछ दूसरी वजहों से लाइफस्टाइल की बीमारियाँ हो सकती हैं:

  • परिवार का इतिहास: अगर आपके माता पिता को शुगर या बीपी की परेशानी रही है, तो आपको भी इसका खतरा काफी ज़्यादा रहता है।
  • हवा में मौजूद प्रदूषण: बहुत ज़्यादा गंदी हवा में साँस लेने से फेफड़ों और दिल की बीमारियाँ तेज़ी से बढ़ती हैं।
  • विटामिन डी की कमी: दिन भर घर या ऑफिस में बंद रहने से ताज़ी धूप नहीं मिलती जिससे हड्डियाँ और नसें कमज़ोर हो जाती हैं।
  • मिलावटी खाना: आजकल सब्जियों और फलों में इतने रसायन डाले जाते हैं जो शरीर के हार्मोन्स को बिगाड़ देते हैं।

छोटी मोटी परेशानी में रोज़ दवा खाना कितना खतरनाक है

जब भी सिर में दर्द होता है या थकान लगती है, हम तुरंत एक दर्द निवारक गोली खा लेते हैं। ये चीज़ें तुरंत राहत तो दे देती हैं, लेकिन रोज़ाना इनका इस्तेमाल करना बहुत खतरनाक है। अगर सिर दर्द हाई बीपी की वजह से है और आप सिर्फ दर्द की गोली खा रहे हैं, तो आप अपनी असली बीमारी को और बढ़ा रहे हैं। रोज़ बिना सोचे समझे गोली खाने से किडनी और लिवर पर बहुत बुरा असर पड़ता है और शरीर धीरे-धीरे बिना दवाई के काम करना ही भूल जाता है।

बिना दवा के खुद को तंदुरुस्त रखने के कुछ बेहद आसान तरीके

आप कुछ बहुत ही आसान तरीके अपनाकर इन बीमारियों से खुद को दूर रख सकते हैं:

  • सुबह उठकर खाली पेट हल्का गुनगुना पानी पिएं, इससे पेट साफ रहता है और शरीर की सारी गन्दगी बाहर निकल जाती है।
  • सप्ताह में कम से कम पाँच दिन आधे घंटे के लिए तेज़ पैदल चलें, यह आपके दिल और फेफड़ों को बहुत मज़बूत बनाता है।
  • जब भी आपको अंदर से घबराहट लगे तो बस पाँच मिनट के लिए आराम से लंबी और गहरी साँसें लें, इससे ब्लड प्रेशर तुरंत नॉर्मल होने लगता है।
  • खाना खाने के बाद तुरंत बिस्तर पर लेटने के बजाय कम से कम दस मिनट तक टहलें, इससे खाना आसानी से पच जाता है और शुगर नहीं बढ़ता।

बीमारियों से बचने के लिए अपनी आदतों में आज ही ये बदलाव करें

अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में कुछ छोटे-छोटे बदलाव करके आप बहुत बड़ा फायदा देख सकते हैं:

  • सोने का समय तय करें: रोज़ एक ही समय पर सोने की आदत डालें ताकि शरीर रात में अंदर से खुद को रिपेयर कर सके।
  • चबा चबा कर खाएं: खाने को इतना चबाएं कि वह मुंह में ही पिस जाए। इससे आपके पेट और लिवर का आधा काम बहुत आसान हो जाएगा।
  • स्क्रीन टाइम कम करें: खाते समय और सोने से पहले मोबाइल बिल्कुल न चलाएं, यह दिमाग को बेवजह भटकाता है और नींद खराब करता है।
  • तनाव को दूर रखें: अपनी पसंद का कोई भी काम करें जैसे गाने सुनना या किताबें पढ़ना, इससे दिमाग शांत रहता है।

प्राकृतिक तरीके हमारी सेहत को जड़ से कैसे सुधारते हैं

प्राकृतिक चिकित्सा सिर्फ बीमारी के लक्षणों को नहीं दबाती, बल्कि उसके जड़ तक जाती है। यह मानती है कि आपकी बीमारी आपके गलत लाइफस्टाइल का ही नतीजा है। इसमें सबसे पहले शरीर की अंदरूनी सफाई की जाती है। इसके साथ ही आपका डाइट प्लान कुछ इस तरह सेट किया जाता है जो आपके शरीर को आराम दे और गन्दगी को बाहर निकाले। जब शरीर को सही पोषण और आराम मिलता है, तो वह खुद को ठीक करना सीख जाता है।

किस उम्र में कौन सा टेस्ट कराना सबसे ज़्यादा ज़रूरी होता है

अगर आप सोच रहे हैं कि जाँच कब शुरू करनी चाहिए, तो यहाँ कुछ बहुत ही आसान सुझाव दिए गए हैं:

  • बीस साल की उम्र के बाद हर दो साल में एक बार अपना बेसिक ब्लड टेस्ट, बीपी और वज़न ज़रूर चेक करवाएं।
  • तीस की उम्र पार करने के बाद हर साल कोलेस्ट्रॉल, थायराइड और शुगर की जाँच कराना अपना नियम बना लें।
  • अगर आपके परिवार में किसी को दिल की बीमारी रही है, तो तीस साल की उम्र से ही ईसीजी और दिल की जाँच शुरू कर देनी चाहिए।
  • चालीस के बाद हड्डियों, आँखों और पूरे शरीर की व्यापक जाँच साल में एक बार ज़रूर होनी चाहिए।

आधुनिक जाँच और पारंपरिक तरीकों में क्या फर्क है

पहलू आधुनिक चिकित्सा (एलोपैथी) पारंपरिक/समग्र दृष्टिकोण
मुख्य उद्देश्य रोग की पहचान कर वैज्ञानिक तरीके से उपचार करना। जीवनशैली और समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाने पर ध्यान।
उपचार का तरीका जाँच (Tests), दवाइयाँ और आवश्यकतानुसार अन्य चिकित्सकीय उपचार। आहार, दिनचर्या, प्राकृतिक उपाय और जीवनशैली में सुधार।
निदान का आधार लैब टेस्ट, स्कैन और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर उपचार। व्यक्ति की दिनचर्या, खानपान और समग्र स्वास्थ्य का आकलन।
असर होने की गति कई उपचार अपेक्षाकृत जल्दी राहत दे सकते हैं। जीवनशैली में बदलाव के साथ धीरे-धीरे लाभ दिखाई दे सकते हैं।
दीर्घकालिक दृष्टिकोण रोग नियंत्रण, नियमित फॉलो-अप और रोकथाम पर ज़ोर। स्वस्थ आदतों के माध्यम से लंबे समय तक स्वास्थ्य बनाए रखने पर बल।

सही समय पर उठाए गए कदम हमेशा फायदेमंद होते हैं

हमेशा याद रखें कि आपका शरीर आपकी सबसे बड़ी दौलत है। आप जिस तरह अपनी गाड़ी की सर्विसिंग समय पर कराते हैं, उसी तरह शरीर को भी समय-समय पर जाँच की ज़रूरत होती है। इसलिए लाइफस्टाइल की बीमारियों को बड़ी उम्र की बीमारी मानकर लापरवाही करने की गलती बिल्कुल न करें। अपनी इस भागदौड़ भरी ज़िंदगी में खुद के लिए थोड़ा सा समय ज़रूर निकालें। अपने खानपान को सुधारें, रोज़ थोड़ा व्यायाम करें और स्ट्रेस को खुद पर हावी न होने दें। जब आपका शरीर अंदर से फिट रहेगा, तो यकीनन आप अपनी ज़िंदगी पूरी तरह से खुलकर और खुशी से जी पाएंगे।

References

https://www.who.int/news-room/fact-sheets/detail/noncommunicable-diseases

https://www.emro.who.int/noncommunicable-diseases/diseases/diseases.html

https://www.who.int/health-topics/noncommunicable-diseases

https://www.healthline.com/health-news/unhealthy-lifestyles-premature-aging-heart

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

इसमें मुख्य रूप से हाई ब्लड प्रेशर, शुगर, मोटापा, दिल की बीमारियाँ और थायराइड जैसी दिक्कतें शामिल होती हैं जो हमारी गलत आदतों से पैदा होती हैं।

बिलकुल कराना चाहिए। कई बार शुरुआत में शरीर कोई भी इशारा नहीं देता है, लेकिन अंदर ही अंदर बीमारी बन रही होती है। समय पर चेकअप से इसका पहले ही पता चल जाता है।

अगर आपकी उम्र तीस साल से ऊपर है और आपको पहले से कोई बीमारी नहीं है, तो साल में कम से कम एक बार यह टेस्ट ज़रूर करा लेना चाहिए।

हाँ, जब आप कम सोते हैं तो शरीर को खुद को ठीक करने का समय नहीं मिलता, जिससे तनाव बढ़ता है और शुगर जैसी दिक्कतें होने लगती हैं।

अगर आपके माता पिता को शुगर रही है, तो आपको पच्चीस साल की उम्र से ही हर साल अपनी रूटीन जाँच शुरू कर देनी चाहिए क्योंकि आपको इसका खतरा ज़्यादा होता है।v

बाहर का तला भुना खाना, मैदे वाली चीज़ें और दिन भर एक ही जगह पर बैठे रहना कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का सबसे मुख्य कारण होता है।

हाँ, अगर आप घर का खाना भी बहुत ज़्यादा मात्रा में खाते हैं, बिल्कुल व्यायाम नहीं करते हैं या बहुत ज़्यादा तनाव लेते हैं, तो आपको भी ये बीमारियाँ आसानी से हो सकती हैं।

हाँ, रोज़ाना आधा घंटा तेज़ पैदल चलने से आपके दिल की अच्छी कसरत होती है जिससे खून का बहाव सही रहता है और बीपी नॉर्मल होने लगता है।

बिलकुल, जब हम तनाव में होते हैं तो शरीर में ऐसे रसायन बनते हैं जो हमारी भूख बढ़ाते हैं और फैट जमा करते हैं, जिससे तेज़ी से वज़न बढ़ता है।

रिपोर्ट नॉर्मल आना बहुत अच्छी बात है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप रोज़ बाहर का खाएं। कभी कभार खाना ठीक है, पर हमेशा एक सेहतमंद रूटीन बनाए रखना सबसे ज़्यादा ज़रूरी है।

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