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कम पानी पीने से kidney पर दबाव क्यों बढ़ सकता है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

क्या आप भी उन लोगों में से हैं जिन्हें पानी की याद तभी आती है जब गला पूरी तरह सूख जाता है? या फिर दिन भर काम की भागदौड़ में आप चाय-कॉफी तो तीन-चार कप पी जाते हैं, लेकिन पानी का एक गिलास भी मुश्किल से गले के नीचे उतरता है?

आजकल ज़्यादातर लोग एसी (AC) कमरों में बैठकर काम करते हैं। पसीना आता नहीं है, इसलिए प्यास भी नहीं लगती। हमें लगता है कि शरीर को पानी की ज़रूरत ही नहीं है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कम पानी पीना सिर्फ आपकी प्यास या सूखे गले का मामला नहीं है? यह आपकी किडनी (गुर्दे) के साथ हो रहा एक ऐसा खिलवाड़ है, जो अंदर ही अंदर एक बड़ी बीमारी की नींव रख रहा है।

अक्सर पानी की कमी शरीर में रातों-रात नहीं होती। यह बहुत धीरे-धीरे होती है और जब तक हमें इसका पता चलता है, तब तक हमारी किडनी पर इतना भारी दबाव पड़ चुका होता है कि वह थकने लगती है। आइए, बिल्कुल आम और आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर कम पानी पीने से शरीर के अंदर क्या उथल-पुथल मचती है और हमारी किडनी पर इसका इतना भयानक असर क्यों होता है।

आखिर किडनी हमारे शरीर में काम क्या करती है?

किडनी को आप अपने शरीर की सबसे स्मार्ट और मेहनती 'सफाई मशीन' (Water Filter) समझ सकते हैं। यह मशीन 24 घंटे, सातों दिन बिना रुके काम करती है। इसके मुख्य काम ये हैं:

  • खून की डीप-क्लीनिंग (सफाई): हम दिन भर में जो कुछ भी खाते-पीते हैं, उसमें से बहुत सारा केमिकल और ज़हरीले तत्व (जैसे यूरिया और क्रिएटिनिन) हमारे खून में मिल जाते हैं। किडनी का काम इस खून को छानना और सारी गंदगी को पेशाब (Urine) के रास्ते शरीर से बाहर फेंकना है।
  • नमक और पानी का बैलेंस: किडनी सिर्फ गंदगी बाहर नहीं निकालती, बल्कि यह एक बहुत ही समझदार मैनेजर की तरह काम करती है। शरीर में कितना सोडियम (नमक), पोटैशियम और कैल्शियम रहना चाहिए, यह किडनी ही तय करती है। अगर यह बैलेंस थोड़ा सा भी बिगड़े, तो ब्लड प्रेशर हाई हो जाता है और पूरा नर्वस सिस्टम हिल जाता है।
  • हड्डियों को ताक़त और नया खून बनाना: आपको शायद जानकर हैरानी हो, लेकिन हमारी किडनी कुछ ऐसे खास हॉर्मोन भी बनाती है जो शरीर में नया खून (Red Blood Cells) बनाने का सिग्नल देते हैं और हड्डियों को मज़बूत रखने के लिए विटामिन डी को एक्टिव करते हैं।

जब आप पानी कम पीते हैं, तो शरीर के अंदर क्या होता है?

शरीर एक बहुत ही होशियार सिस्टम है। जब आप इसे ज़रूरत के हिसाब से पानी नहीं देते, तो यह समझ जाता है कि 'सूखा' पड़ गया है और यह तुरंत 'इमरजेंसी मोड' में चला जाता है।

  • पानी की बचत (Water Conservation): शरीर का दिमाग (Brain) किडनी को एक मेसेज भेजता है कि "ऊपर से पानी नहीं आ रहा है, जितना पानी शरीर में है उसे बचाकर रखो।" इसके बाद किडनी यूरिन बनाना बहुत कम कर देती है।
  • पेशाब के रंग में बदलाव: क्योंकि किडनी पानी बचा रही होती है, इसलिए जो थोड़ा-बहुत यूरिन बनता है, वह बहुत गाढ़ा होता है। इसी वजह से कम पानी पीने वालों के पेशाब का रंग डार्क पीला या सरसों के तेल जैसा हो जाता है और उसमें से तेज़ बदबू आने लगती है। यह कोई आम बात नहीं है; यह शरीर का सीधा अलार्म है कि वह अंदर से सूख रहा है।
  • खून का गाढ़ा होना: पानी की कमी से आपका खून भी थोड़ा गाढ़ा होने लगता है। अब गाढ़े खून को पूरे शरीर में पंप करने के लिए आपके दिल को भी ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे थकावट और ब्लड प्रेशर की दिक्कतें शुरू होती हैं।

कम पानी पीने से किडनी पर भारी दबाव क्यों पड़ता है?

मान लीजिए आपको एक चाय की छलनी से एक गिलास साफ पानी छानना है। पानी बहुत आसानी से और जल्दी छन जाएगा। अब सोचिए कि उसी पानी में दो मुट्ठी रेत मिली हुई है और पानी सिर्फ आधा कप है। अब उसे छानने में छलनी का क्या हाल होगा? वह चोक (Block) हो जाएगी।

किडनी के साथ भी ठीक ऐसा ही होता है: जब आप खूब सारा पानी पीते हैं, तो शरीर के टोक्सिन पानी में आसानी से घुलकर किडनी की नलियों से बहकर बाहर निकल जाता है। किडनी को कोई एक्स्ट्रा ज़ोर नहीं लगाना पड़ता। लेकिन जब आप पानी कम पीते हैं, तो शरीर की सारी गंदगी बहुत ज़्यादा गाढ़ी (Concentrated) हो जाती है। इस टोक्सिन को छानकर बाहर धकेलने में किडनी की छोटी-छोटी नलियों (नेफ्रॉन्स) पर दबाव पड़ता है।

पथरी (Kidney Stone) का बनना: जब यह टोक्सिन किडनी में ज़्यादा देर तक रुका रहता है, तो यह आपस में चिपकने लगता है। धीरे-धीरे ये छोटे-छोटे क्रिस्टल एक पत्थर का रूप ले लेते हैं, जिसे हम गुर्दे की पथरी कहते हैं। पथरी का सबसे बड़ा और पहला कारण ही कम पानी पीना है।

आपका शरीर कैसे पानी मांगता है? (चेतावनी के संकेत)

शरीर अचानक से किडनी खराब नहीं करता। वह बहुत पहले से आपको इशारे देने लगता है। अगर आपके अंदर ये लक्षण दिख रहे हैं, तो समझ जाइए कि शरीर अंदर से सूख रहा है:

  • डार्क यूरिन: पेशाब का रंग गहरे पीले सेब के सिरके जैसा होना और मात्रा बहुत कम होना।
  • गले और होंठ का सूखना: बार-बार होंठों पर जीभ फेरने की नौबत आना और मुंह में थूक का गाढ़ा होना।
  • थकावट: बिना किसी भारी काम किए हर वक्त ऐसा लगना जैसे शरीर की बैटरी डाउन हो गई है। (क्योंकि शरीर के सेल्स सूख रहे होते हैं)।
  • चक्कर और सिरदर्द: हमारा दिमाग 70% पानी से बना है। पानी की थोड़ी सी कमी भी सीधा सिरदर्द (Dehydration Headache) पैदा करती है।
  • स्किन का रूखा होना: क्रीम लगाने के बाद भी स्किन का सफेद, सूखा और बेजान रहना।
  • कब्ज़ (Constipation): आंतों को मल बाहर धकेलने के लिए बहुत सारे पानी की ज़रूरत होती है। पानी कम होगा, तो मल आंतों में पत्थर की तरह सूख जाएगा।

आयुर्वेद इस समस्या को किस तरह समझता है?

आयुर्वेद हमारे शरीर को पांच तत्वों (मिट्टी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) से बना हुआ मानता है। इसमें 'जल तत्व' (पानी) का एक बहुत बड़ा और अहम रोल है।

  • वात और पित्त का भड़कना: आयुर्वेद साफ कहता है कि जब शरीर में जल तत्व कम होता है, तो 'वात' (हवा) और 'पित्त' (गर्मी) भड़क जाते हैं। वात बढ़ने से शरीर में रूखापन (Dryness) आता है और पित्त बढ़ने से शरीर में गर्मी पैदा होती है। इसी गर्मी की वजह से पेशाब में जलन होती है।
  • सफाई के रास्तों (स्रोतस) का ब्लॉक होना: आयुर्वेद में शरीर के अंदर मौजूद बारीक नलियों और रास्तों को 'स्रोतस' कहा जाता है। पानी शरीर में एक लुब्रिकेंट (ग्रीस) की तरह काम करता है। जब पानी कम होता है, तो ये रास्ते सूखने लगते हैं। शरीर के टोक्सिन (जिसे आयुर्वेद में 'मल' कहा जाता है) बाहर निकलने के बजाय अंदर ही चिपकने और सड़ने लगता है।
  • अग्नि का बिगड़ना: पानी की कमी से पेट की 'पाचन अग्नि' भी डिस्टर्ब हो जाती है, जिससे गैस, कब्ज़ और पाचन की दिक्कत शुरू हो जाती हैं।

किडनी को मज़बूत रखने और पानी की कमी पूरी करने के देसी और आयुर्वेदिक तरीके

अपनी किडनी को लंबी उम्र देने के लिए आपको कोई महंगी दवा नहीं खानी है, बस अपने रोज़मर्रा के रूटीन में ये छोटे-छोटे जादुई बदलाव करने हैं:

  • प्यास का इंतज़ार करना छोड़ दें: प्यास लगने का मतलब है कि शरीर पहले ही डिहाइड्रेट हो चुका है। हर घंटे या डेढ़ घंटे में आधा-एक गिलास पानी पीने की आदत डालें। अपनी टेबल पर हमेशा एक पानी की बोतल रखें।
  • पानी बैठकर और घूंट-घूंट पिएं: आयुर्वेद कहता है कि खड़े होकर गट-गट पानी पीने से वह सीधे किडनी पर प्रेशर मारता है और जोड़ों में दर्द पैदा करता है। पानी हमेशा आराम से बैठकर, चाय की तरह घूंट-घूंट करके (Sip-by-Sip) पिएं ताकि मुंह की लार पानी के साथ पेट में जाए।
  • खाने में नमक कम करें: बहुत ज़्यादा नमक (सोडियम), पैकेट वाले चिप्स, नमकीन और जंक फूड किडनी की मेहनत को दोगुना कर देते हैं। नमक को शरीर से बाहर निकालने के लिए किडनी को बहुत सारा पानी खर्च करना पड़ता है।
  • पानी वाले फल खाएं: अगर आपको सादा पानी पीना अच्छा नहीं लगता, तो अपनी डाइट में तरबूज़, खरबूजा, खीरा, ककड़ी, संतरा और नारियल पानी जैसी चीज़ें बढ़ा दें। इनमें नेचुरल पानी होता है जो शरीर को तुरंत ताक़त देता है।
  • सुबह उठते ही पानी पिएं (उषापान): सुबह उठकर बिना कुल्ला किए एक से दो गिलास हल्का गुनगुना पानी पीना किडनी की सबसे अच्छी सफाई (Detox) है। यह रात भर जमा हुए कचरे को फ्लश आउट कर देता है।

डॉक्टर के पास कब भागना चाहिए?

खूब सारा पानी पीने के बाद भी अगर आपके शरीर में नीचे लिखी कोई भी परेशानी लगातार बनी हुई है, तो घर पर इंतज़ार न करें, तुरंत किसी अच्छे डॉक्टर से मिलें:

  • यूरिन में जलन: पानी पीने के बाद भी अगर पेशाब करते समय आग जैसी जलन हो रही है (यह यूरिन इन्फेक्शन का पक्का लक्षण है)।
  • पेशाब में खून आना: यूरिन का रंग लाल या कोका-कोला जैसा डार्क ब्राउन हो जाना।
  • सूजन (Edema): जब किडनी खराब होने लगती है, तो वह शरीर का पानी बाहर नहीं निकाल पाती। इससे पैरों, टखनों और सुबह उठने पर आंखों के नीचे भारी सूजन आ जाती है।
  • कमर में पीछे की तरफ दर्द: कमर के निचले हिस्से में (जहां पसलियां खत्म होती हैं) लगातार मीठा-मीठा या चुभने वाला दर्द रहना।
  • यूरिन पास करने में ज़ोर लगाना: पेशाब का रुक-रुक कर आना या महसूस होना कि ब्लैडर पूरी तरह खाली नहीं हुआ है।

निष्कर्ष

कम पानी पीना कोई छोटी-मोटी लापरवाही नहीं है; यह आपकी उस मशीन (किडनी) को सुखाने की बात है जो आपको अंदर से साफ रखकर ज़िंदा रखे हुए है। पानी आपकी किडनी के लिए गाड़ी के 'इंजन ऑयल' या 'ग्रीस' की तरह काम करता है।

जब आप शरीर को भरपूर पानी देते हैं, तो किडनी खुश होकर अपना काम करती है, आपका खून साफ रहता है, चेहरे पर चमक आती है और आप दिन भर फुर्तीले रहते हैं।

References

Kidney disease

Kidney Disease - NIDDK

Dehydration: MedlinePlus

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

नहीं। दिनभर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पानी पीना अधिक उचित माना जाता है। एक बार में बहुत अधिक पानी पीने के बजाय नियमित अंतराल पर पानी लेना शरीर के लिए बेहतर होता है।

भोजन के साथ बहुत अधिक पानी पीने के बजाय आवश्यकता अनुसार थोड़ी मात्रा लेना और भोजन के कुछ समय बाद पानी पीना अधिक उपयुक्त माना जाता है।

ज़रूरी नहीं। कई बार शरीर को पानी की आवश्यकता होने पर भी तेज़ प्यास महसूस नहीं होती। इसलिए केवल प्यास पर निर्भर रहने के बजाय नियमित रूप से पानी पीने की आदत लाभकारी मानी जाती है।

नहीं। पानी की आवश्यकता उम्र, मौसम, शारीरिक गतिविधि, भोजन की प्रकृति और स्वास्थ्य की स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

हाँ। अधिक नमक वाला भोजन शरीर में द्रव संतुलन को प्रभावित कर सकता है, जिससे पानी की आवश्यकता सामान्य से अधिक हो सकती है।

आयुर्वेद में सुबह उठकर उचित मात्रा में पानी पीने की परंपरा का उल्लेख मिलता है। यह शरीर की सामान्य क्रियाओं को सुचारु रखने में सहायक माना जाता है।

हाँ। लंबे समय तक पर्याप्त पानी न मिलने पर कुछ लोगों में त्वचा अधिक रूखी दिखाई दे सकती है और बालों की प्राकृतिक चमक भी प्रभावित हो सकती है।

नहीं। केवल इस कारण से पानी कम करना सही नहीं माना जाता। यदि बिना अधिक पानी पिए भी बार-बार मूत्र त्याग की आवश्यकता महसूस हो, तो चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।

नहीं। संतुलित भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त विश्राम, नियंत्रित नमक का सेवन और स्वस्थ जीवनशैली भी किडनी के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं।

हाँ। गर्मी, अधिक परिश्रम या अधिक पसीना आने की स्थिति में शरीर को सामान्य दिनों की तुलना में अधिक पानी की आवश्यकता हो सकती है, जबकि ठंड के मौसम में भी पर्याप्त पानी पीना उतना ही आवश्यक रहता है।

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