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Acidity बार-बार होना किस बात का संकेत हो सकता है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि खाना खाने के बाद सीने में भारीपन लगने लगता है? या फिर गले में अजीब सी जलन और खट्टी डकारें आने लगती हैं? 

आजकल की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में ज़्यादातर लोग इसे एक आम बात समझकर इनो (Eno) पी लेते हैं या कोई एंटासिड गोली खाकर काम पर लग जाते हैं। कभी-कभार ऐसा होना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन अगर हफ्ते में तीन-चार दिन आपको इसी जलन और खट्टेपन के साथ गुज़ारने पड़ रहे हैं, तो इसे सिर्फ एक 'छोटी सी परेशानी' मानकर नज़रअंदाज़ करना आपके शरीर के साथ गलत है।

हमारा शरीर एक बहुत ही समझदार मशीन है। जब भी इसके अंदर कुछ गड़बड़ होती है, तो यह हमें अलार्म देकर आगाह करता है। बार-बार होने वाली एसिडिटी भी शरीर का एक ऐसा ही अलार्म है। यह सिर्फ पेट की खराबी नहीं है, बल्कि यह इस बात का सबूत है कि आपके खाने-पीने का समय, आपकी नींद, आपका स्ट्रेस लेवल और आपकी पूरी लाइफस्टाइल कहीं न कहीं पटरी से उतर चुकी है।

एसिडिटी असल में क्या है और क्यों होती है?

जब भी हम कुछ खाते हैं, तो हमारा पेट उस खाने को पचाने के लिए एक खास तरह का एसिड (Stomach Acid या हाइड्रोक्लोरिक एसिड) बनाता है। यह एसिड बहुत ज़रूरी है, क्योंकि यह न सिर्फ खाने को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ता है, बल्कि खाने के साथ पेट में गए नुकसानदायक बैक्टीरिया को भी मार देता है।

समस्या कब शुरू होती है? 

दिक्कत तब शुरू होती है जब पेट में यह एसिड ज़रूरत से ज़्यादा बनने लगता है। हमारे पेट और खाने की नली (Esophagus) के बीच एक छोटा सा वाल्व होता है। जब यह वाल्व कमज़ोर पड़ जाता है या पेट में गैस का दबाव बहुत बढ़ जाता है, तो पेट का यह एसिड उल्टी दिशा में यानी ऊपर की तरफ गले की ओर चढ़ने लगता है। खाने की नली इस तेज़ एसिड को बर्दाश्त नहीं कर पाती और इसी वजह से हमें सीने में तेज़ जलन, गले में खट्टापन और भारीपन महसूस होता है।

कभी-कभार होने वाली एसिडिटी और रोज़-रोज़ की एसिडिटी में क्या फर्क है?

अगर आपने कभी दोस्तों के साथ पार्टी की, बहुत ज़्यादा मसालेदार खाना खा लिया, या रात को बहुत देर से हैवी डिनर किया, और अगले दिन आपको जलन हो रही है तो यह बिल्कुल नॉर्मल है। पेट को अपनी क्षमता से ज़्यादा काम करना पड़ा, इसलिए उसने ज़्यादा एसिड बनाया।

लेकिन, अगर आप सादा खाना खा रहे हैं, फिर भी आपको रोज़ खट्टी डकारें आ रही हैं, पेट फूला-फूला लग रहा है और सीने में आग जैसी लग रही है, तो इसका मतलब है कि समस्या खाने में नहीं, बल्कि आपके शरीर के अंदरूनी सिस्टम में है।

आखिर शरीर में बार-बार एसिडिटी क्यों होती है?

हम अक्सर सोचते हैं कि सिर्फ समोसे या पिज़्ज़ा खाने से एसिडिटी होती है। लेकिन असल में इसके पीछे हमारी रोज़मर्रा की कई ऐसी आदतें हैं, जिन पर हम ध्यान ही नहीं देते:

  • खाने का कोई फिक्स टाइम न होना: आजकल लोगों के पास हर चीज़ का समय है, बस शांति से बैठकर खाने का समय नहीं है। सुबह काम की जल्दी में नाश्ता छोड़ देना, दिन भर खाली पेट चाय या कॉफी पीते रहना और फिर रात को 10 बजे एक साथ बहुत सारा खाना खा लेना यह पाचन का सबसे बड़ा दुश्मन है। जब पेट लंबे समय तक खाली रहता है, तो अंदर जमा एसिड पेट की दीवारों को नुकसान पहुँचाने लगता है।
  • टेंशन और स्ट्रेस का सीधा असर: आपको शायद जानकर हैरानी हो, लेकिन हमारे दिमाग और हमारे पेट का बहुत गहरा कनेक्शन होता है। जब आप ऑफिस या घर की किसी बात को लेकर लगातार स्ट्रेस में रहते हैं, तो शरीर में 'कॉर्टिसोल' (स्ट्रेस हार्मोन) का लेवल बढ़ जाता है। इसका सीधा असर पाचन तंत्र पर पड़ता है और खाना पचाने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है, जिससे गैस और एसिडिटी भड़क उठती है।
  • रातों की नींद खराब करना: शरीर की अपनी एक घड़ी (Biological Clock) होती है। रात का समय शरीर के अंगों को आराम देने और खुद को रिपेयर करने के लिए होता है। लेकिन अगर आप रात को 1 या 2 बजे तक मोबाइल या लैपटॉप की स्क्रीन देखते रहते हैं, तो पेट का सिस्टम भी कन्फ्यूज़ हो जाता है। नींद की कमी से पाचन सुस्त पड़ जाता है।
  • चाय, कॉफी और सिगरेट का ज़रूरत से ज़्यादा शौक: दिन भर में 5-6 कप कड़क चाय या कॉफी पीना या स्ट्रेस कम करने के नाम पर स्मोकिंग करना, खाने की नली के वाल्व को ढीला कर देता है। कैफीन और निकोटीन पेट में एसिड के बनने को कई गुना बढ़ा देते हैं।

शरीर के वो अलार्म जिन्हें बिल्कुल इग्नोर न करें

अगर आपको एसिडिटी के साथ ये परेशानियां भी लगातार हो रही हैं, तो समझ लीजिए की अंदर कुछ गड़बड़ है:

  • लगातार खट्टी डकारें आना: गले तक खाने का खट्टा पानी वापस आना।
  • पेट का भारी रहना: थोड़ा सा खाने पर ही ऐसा लगना जैसे पेट फटने वाला है (Bloating)।
  • मुँह में हमेशा कड़वाहट रहना: सुबह उठते ही मुँह का स्वाद खराब लगना।
  • गले में चुभन और सूखी खांसी: कई बार एसिड गले तक आकर वहां सूजन कर देता है, जिससे बिना किसी जुकाम के लगातार सूखी खांसी आती है।
  • भूख का एकदम मर जाना: पेट में हर वक्त गैस भरे होने की वजह से कुछ भी खाने का मन न करना।
  • रात को बेचैनी: लेटते ही सीने में जलन का तेज़ हो जाना और नींद टूट जाना।

हमारी वो गलतियां जो एसिडिटी को बढाती है 

हम अनजाने में दिन भर में कई ऐसे काम करते हैं जो हमारे पाचन को खराब कर देती है:

  • खाना पानी की तरह निगलना: टीवी या मोबाइल देखते हुए 5 मिनट में खाना खत्म कर लेना। अगर दांतों का काम आंतों को करना पड़ेगा, तो एसिडिटी होना तय है।
  • खाने के तुरंत बाद ढेर सारा पानी पीना: यह पेट की आग (जठराग्नि) को तुरंत बुझा देता है, जिससे खाना पचता नहीं, सड़ता है।
  • खाते ही बिस्तर पर लेट जाना: खाने के तुरंत बाद लेटने से ग्रेविटी का फायदा नहीं मिलता और एसिड आसानी से गले की तरफ वापस आ जाता है।
  • लगातार एक ही कुर्सी पर जमे रहना: कोई फिजिकल एक्टिविटी न होने से आंतों की मूवमेंट सुस्त हो जाती है।

आयुर्वेद इस समस्या को किस तरह समझता है?

आयुर्वेद का नज़रिया मॉडर्न साइंस से थोड़ा अलग और बहुत गहरा है। आयुर्वेद में किसी भी बीमारी का इलाज सिर्फ उसके लक्षणों को दबाना नहीं होता, बल्कि उसकी जड़ तक जाना होता है।

पित्त दोष का बिगड़ जाना: आयुर्वेद के अनुसार, हमारा शरीर तीन दोषों (वात, पित्त और कफ) से मिलकर बना है। एसिडिटी का सीधा कनेक्शन 'पित्त' दोष से है। पित्त का मतलब है शरीर के अंदर की गर्मी या अग्नि। जब हम लगातार तीखा, मसालेदार, खट्टा, या बहुत गर्म तासीर वाला खाना खाते हैं, या बहुत ज़्यादा गुस्सा और तनाव लेते हैं, तो शरीर का पित्त भड़क जाता है। यही बढ़ा हुआ पित्त सीने में जलन और एसिडिटी के रूप में बाहर आता है।

पाचन अग्नि (जठराग्नि) का सुस्त पड़ना आयुर्वेद कहता है कि हमारे पेट में एक आग जलती है जिसे 'जठराग्नि' कहते हैं, जो हमारे खाने को पचाती है। जब हम बेवक्त खाना खाते हैं या बिना भूख के खाते हैं, तो यह आग कमज़ोर पड़ जाती है।

'आम' (टॉक्सिन) का बनना: जब पेट की आग कमज़ोर होती है, तो खाना ठीक से पचता नहीं है, बल्कि पेट में पड़ा-पड़ा सड़ने लगता है। इस सड़े हुए अधपचे खाने को आयुर्वेद में 'आम' (ज़हरीला तत्व) कहा जाता है। यही 'आम' जब शरीर में बढ़ता है, तो गैस, खट्टी डकारें, सीने में जलन और आलस पैदा करता है।

पाचन को दोबारा कैसे ठीक करे?

अगर आप रोज़-रोज़ की इस जलन से छुटकारा पाना चाहते हैं, तो गोलियों का सहारा छोड़िए और अपनी रूटीन में ये छोटे-छोटे लेकिन जादुई बदलाव कीजिए:

खाने का एक फिक्स रूटीन बनाएं: कोशिश करें कि आपका ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर रोज़ लगभग एक ही समय पर हो। इससे आपके पेट को पता रहता है कि उसे एसिड कब रिलीज़ करना है।

चबाने का नियम: खाने को इतना चबाएं कि वह मुंह में ही लिक्विड बन जाए। आपका पाचन पेट में नहीं, बल्कि आपके मुंह से ही शुरू हो जाता है। जो खाना मुंह में अच्छे से पिस जाता है, उसे पेट बहुत आसानी से पचा लेता है।

रात का खाना (डिनर) जल्दी और हल्का करें: रात का खाना सोने से कम से कम 2 से 3 घंटे पहले खा लें। और रात को गरिष्ठ (भारी) खाना जैसे राजमा, छोले, पनीर या डीप-फ्राइड चीज़ें खाने से बचें। रात के समय पेट की अग्नि कमज़ोर होती है।

पानी पीने का सही तरीका सीखें: सुबह उठते ही एक से दो गिलास हल्का गुनगुना पानी पिएं। खाने से आधे घंटे पहले पानी पिएं और खाने के कम से कम 45 मिनट बाद ही पानी पिएं। खाने के बीच में अगर ज़रूरत लगे, तो सिर्फ एक-दो घूंट पानी पी सकते हैं।

पेट को ठंडा रखने वाली चीज़ें डाइट में शामिल करें:

जब पित्त भड़का हो, तो उसे शांत करने के लिए ठंडी तासीर वाली चीज़ें खाएं।

  • सौंफ और मिश्री: खाने के बाद एक चम्मच सौंफ चबाने से एसिडिटी तुरंत कंट्रोल होती है।
  • नारियल पानी: यह पेट की लाइनिंग को शांत करता है और एसिड को न्यूट्रलाइज़ करता है।
  • छाछ (मट्ठा): दोपहर के खाने के बाद एक गिलास छाछ में भुना जीरा और काला नमक डालकर पीने से पाचन रॉकेट की तरह काम करता है।

थोड़ी सैर और थोड़ा योग रात को खाने के बाद तुरंत लेटने के बजाय कम से कम 15-20 मिनट की हल्की सैर (वॉक) ज़रूर करें। स्ट्रेस कम करने के लिए सुबह के समय 10 मिनट 'अनुलोम-विलोम' और 'भ्रामरी' प्राणायाम करने से दिमाग भी शांत रहेगा और पेट भी।

डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए?

घरेलू उपाय और लाइफस्टाइल में बदलाव ज़्यादातर मामलों में एसिडिटी को पूरी तरह खत्म कर देते हैं। लेकिन, अगर आपको नीचे लिखी कोई भी परेशानी हो रही है, तो बिना देर किए किसी अच्छे डॉक्टर से मिलना ज़रूरी है:

  • अगर हफ्तों तक सारे उपाय करने के बाद भी सीने की जलन कम न हो रही हो।
  • अगर खाना निगलने में दर्द या बहुत परेशानी महसूस होने लगे।
  • बिना किसी डाइटिंग के आपका वज़न अचानक से तेज़ी से गिरने लगा।
  • अगर आपको लगातार उल्टियां हो रही हों या उल्टी में खून (या कॉफी कलर जैसा कुछ) नज़र आए।

निष्कर्ष

आपके शरीर का डिज़ाइन बहुत ही बेहतरीन तरीके से किया गया है। बार-बार होने वाली एसिडिटी कोई सज़ा नहीं है, बल्कि यह आपके शरीर का आपसे बात करने का एक तरीका है। वह आपको बता रहा है कि "मुझे वो मत खिलाओ जो मुझे पसंद नहीं है, मुझे उस वक्त आराम दो जब मुझे चाहिए, और बेवजह की टेंशन लेना बंद करो।"

गोलियों पर ज़िंदा रहने की बजाय, अगर आप अपनी लाइफस्टाइल और खाने-पीने की आदतों में थोड़े से अनुशासन के साथ बदलाव लाएंगे, तो न सिर्फ एसिडिटी हमेशा के लिए दूर भाग जाएगी, बल्कि आप पूरे दिन खुद को बहुत हल्का, एनर्जेटिक और खुश महसूस करेंगे। शरीर की सुनिए, शरीर आपकी सुनेगा!

References

Acid Reflux (GER & GERD) in Adults - NIDDK

Heartburn and acid reflux - NHS

Symptoms & Causes of GER & GERD - NIDDK

Definition of acidity - NCI Dictionary of Cancer Terms

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

हाँ, लंबे समय तक खाली पेट रहने पर पेट में बनने वाला अम्ल असहजता बढ़ा सकता है। इसलिए समय पर भोजन करना बेहतर माना जाता है।

कुछ लोगों में मौसम बदलने के दौरान खान-पान और दिनचर्या में परिवर्तन होने से पाचन प्रभावित हो सकता है, जिससे पेट में जलन महसूस हो सकती है।

पर्याप्त पानी न पीने से पाचन प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। हालांकि पेट में जलन के कई कारण हो सकते हैं, इसलिए केवल पानी की कमी को इसका एकमात्र कारण नहीं माना जा सकता।

हाँ, कुछ लोगों को रात में लेटने पर सीने में जलन या खट्टापन बढ़ने के कारण आरामदायक नींद लेने में कठिनाई हो सकती है।

नहीं। दोनों का संबंध पाचन से है, लेकिन पेट में जलन मुख्य रूप से अम्ल से जुड़ी असहजता है, जबकि अपच में पेट भारी लगना, जल्दी पेट भरना या भोजन ठीक से न पचना जैसे लक्षण अधिक सामान्य हो सकते हैं।

बार-बार बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाओं का उपयोग करने के बजाय इसके कारण का पता लगाना अधिक महत्वपूर्ण होता है। लगातार लक्षण बने रहने पर वैद्य या चिकित्सक से सलाह लेना उचित है।

हाँ, यात्रा के दौरान भोजन का समय बदलना, बाहर का खाना खाना, पर्याप्त आराम न मिलना या पानी की मात्रा कम होना कुछ लोगों में पेट में जलन की संभावना बढ़ा सकता है।

कुछ लोगों में बढ़ती उम्र के साथ पाचन तंत्र में होने वाले बदलावों के कारण पेट में जलन की समस्या अधिक बार महसूस हो सकती है, हालांकि यह हर व्यक्ति में समान नहीं होती।

कुछ स्थितियों में यदि अम्ल बार-बार भोजन नली या मुंह तक पहुंचता है, तो इससे मुंह में खट्टापन या दुर्गंध महसूस हो सकती है। इसके अन्य कारण भी हो सकते हैं।

ज़रूरी नहीं। कई मामलों में यह जीवनशैली और खान-पान से जुड़ी हो सकती है। फिर भी यदि समस्या लगातार बनी रहे, बार-बार लौटे या अन्य गंभीर लक्षणों के साथ हो, तो चिकित्सकीय जांच कराना आवश्यक है।

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