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weekend में दोपहर तक सोना बॉडी क्लॉक को reset करता है या और बिगाड़ देता है?

Information By Dr. Mukesh Sharma     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

अक्सर हम सोचते हैं,सारे हफ्ते की थकान को वीकेंड पर ज्यादा देर तक या दोपहर तक सो कर हम निकाल सकते हैं लेकिन ऐसा करना कहां तक सही है यह हम नहीं सोचते ,कुछ हद तक यह हमारे शरीर के लिए आरामदायक हो सकता है लेकिन यह हमारी बॉडी क्लॉक को बिगाड़ भी सकता है लोग इसलिए भी वीकेंड पर ज्यादा देर तक सोते हैं क्योंकि वह सोचते हैं कि ज्यादा देर तक सोने से उनका बॉडी क्लॉक रिसेट हो जाएगा जिससे उन्हें थोड़ा आराम महसूस होगा और दिमाग से चुस्ती फील करेंगे |

पूरे हफ्ते जल्दी उठने के बाद वीकेंड आते ही कई लोगों को लगता है कि अब नींद पूरी कर लेनी चाहिए इसलिए शुक्रवार या शनिवार देर रात तक जागना और अगले दिन 11,12 बजे तक सोना आम आदत बन जा रही है उस समय शरीर को आराम जरूर मिलता है लेकिन सवाल यह है कि क्या इतनी देर तक सोना बॉडी क्लॉक को रिसेट करता है या सोमवार की सुबह उठना और भी मुश्किल बना देता है ,सीधी बात यह है कि वीकेंड पर थोड़ा एक्स्ट्रा स्लिप लेना हमेशा गलत नहीं है खासकर अगर पूरे हफ्ते नींद कम हुई हो लेकिन अगर शनिवार, रविवार को सोने जागने का समय रोज मारा से कई घंटे अलग हो जाए तो शरीर की इंटरनल क्लॉक यानी कि circadian rhythm प्रभावित हो सकती है |

बॉडी क्लॉक आखिर होती क्या है? 

हमारे शरीर का प्राकृतिक 24 घंटे का एक body system होता है, जिससे हम circadian rhythm कहते हैं ,जिसमे  आपका शरीर अपने दिन की सारी गतिविधिओ को एक routine में करने का टाइम होता है

यह केवल नींद को नहीं बल्कि शरीर का तापमान, hormones, temperature, alertness, डाइजेशन और energy levels जैसे कई कामों की टाइमिंग को प्रभावित करता है

सुबह की रोशनी इस interanl clock को सही समय का संकेत देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है इसी वजह से रोज लगभग एक ही समय पर उठाना शरीर के लिए productive रूटीन बनता है|

वीकेंड पर कितनी देर सोना ठीक है?

हर व्यक्ति की सोने की जरूरत अलग हो सकती है इसलिए कोई एक fix वीकेंड पे उठने का टाइम सबके लिए नहीं चल सकता एक practical तरीका यह है कि वीकेंड पर उठने का समय week days से बहुत ज्यादा अलग न करें अगर आप सामान्य दिनों में सुबह 7:00 उठते हैं तो वीकेंड पर 7:30 या 8:00 तक सोना एक व्यक्ति के लिए आसान हो सकता है जबकि रोज 11:12 बजे तक सोना बॉडी क्लॉक को एक बड़ा बदलाव दे सकता है ,तो समय से सोना और समय से उठना जरूरी है अपना टाइम फिक्स करे|

रूटीन ठीक न करना क्या समस्या कर सकता है ?

वैसे तो रूटीन ठीक करना कोई बड़ी बात नहीं है , इसे आसानी से ठीक किया जा सकता है , लेकिन अगर आप अपने बॉडी क्लॉक को सही रखना चाहते हैं और टाइम से सारी चीज़ें करे और अगर आप ऐसा करने में समर्थ नहीं है तो आपको यह लक्षण दिख सकते है;

सब कुछ समय पर करके सोने की कोशिश करना फिर भी नींद नहीं आती 

अगर सब कुछ समय पर , ढंग से करने के बावजूद आपको समय से नींद नहीं आ रही है ,समय से भूख नहीं लग रही है तो निश्चित रूप से आप किसी बीमारी से ग्रस्त है, या आपका शरीर उतना थका हुआ नहीं है ,फिर आपके शरीर को शारीरिक गतिविधि की जरूरत है , या हो सकता है कोई पुरानी समस्या हो जिसकी वजह से आप परेशान है और सही से कुछ भी कार्य दिनचर्या का कर नहीं पाते और आपका मन बेचैन रहता है | 

ऐसे में आपको किसी अच्छे डॉक्टर से परामर्श लेने की आवश्यकता है, और अपनी शारारिक प्रवृति समझने की जरूरत है की आपका शरीर की श्रेणी में आता है पित्त ,वाता ,कफ  आदि |

बॉडी क्लॉक को स्थिर रखने के आसान तरीके

बॉडी क्लॉक को ठीक करने के लिए कुछ तरीके इस प्रकार है 

  • उठने के टाइम को प्राथमिकता दी जाये
  • सुबह के सूरज की धुप ले 
  • दिन में बहुत लम्बा न सोये
  • सिर्फ हफ्ते में एक दिन नींद पूरी करने प जोर न दे
  • व्यायाम करे
  • शरीर में पानी की ना होने दे
  • पाचन को सही रखे
  • भोजन समय पर करे
  • स्क्रीन टाइम काम करे

निष्कर्ष

वीकेंड की नींद आराम देने के लिए है लेकिन उससे पूरे सप्ताह से बिल्कुल अलग रूटिंग बनाने की जरूरत नहीं है ,कभी-कभार देर तक सोना चिंता की बात नहीं है , मगर हर शनिवार रविवार दोपहर तक सोना आपकी आदत बन गया है , और रविवार रात को नींद नहीं आती या सोमवार सुबह उठना मुश्किल होता है , तो यह संकेत है कि आपका स्लिप शेड्यूल ज्यादा बदल रहा है बॉडी क्लॉक को रिसेट करने के लिए लंबी वीकेंड स्लिप से ज्यादा नियमित वेकअप टाइम पर्याप्त नींद और सुबह की नेचुरल लाइट बहुत जरूरी है ,अगर इन सब चीजों को पर्याप्त तरीके से आप करते हैं और फिर भी आपको दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है तो हो सकता है आप किसी बीमारी से ग्रस्त हो या फिर आपके शरीर में कोई दिक्कत हो तो उसके लिए आपको किसी अच्छे चिकित्सक है या डॉक्टर से मिलने की आवश्यकता है |

References

Circadian Rhythms and Circadian Clock | NIOSH | CDC

Physiology, Circadian Rhythm - StatPearls - NCBI Bookshelf

Circadian Rhythms | National Institute of General Medical Sciences

Exploring the Role of Circadian Rhythms in Sleep and Recovery: A Review Article - PMC

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

थोड़ा अधिक सोना आरामदायक हो सकता है, खासकर अगर पूरे सप्ताह नींद कम हुई हो। लेकिन लगातार वीकेंड पर देर तक सोने से बॉडी क्लॉक (circadian rhythm) प्रभावित हो सकती है और इसका असर आपकी नींद के रूटीन पर पड़ सकता है। मतलब, इसे रिसेट करने के बजाय, उल्टा आपकी नींद का मौसम असमंजस में पड़ सकता है।

यह हमारे शरीर का 24 घंटे का नैचुरल टाइम सिस्टम है जो नींद, जागना, ऊर्जा स्तर, पाचन, हार्मोन आदि को नियंत्रित करता है। सूरज की रोशनी इस सिस्टम को सही समय पर सेट करने में मदद करती है। इसलिए रोज़ाना लगभग एक ही समय पर उठना शरीर के लिए फायदेमंद होता है।

सबकी जरूरत अलग हो सकती है, लेकिन वीकेंड पर सामान्य उठने के समय से ज्यादा 1-2 घंटे की देरी सोना ठीक रहता है। उदाहरण के लिए, अगर आप सप्ताह के दिनों में सुबह 7 बजे उठते हैं, तो वीकेंड पर 8 बजे तक सोना ज्यादा अच्छा रहेगा, न कि दोपहर 11-12 बजे तक।

नींद में खलल और अनिद्रा,पाचन और भूख में बदलाव,थकान और चिड़चिड़ापन,ब्रेन फोग यानी दिमागी धुंधलापन,बेचैनी या तनाव

अगर आपकी दिनचर्या ठीक है और फिर भी नींद या भूख में दिक्कत हो रही है, तो यह किसी बीमारी या शरीर की असामान्यता का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में किसी अच्छे डॉक्टर या चिकित्सक से सलाह लेना जरूरी है। साथ ही, अपनी जीवनशैली में व्यायाम, पानी पीना और संतुलित भोजन को शामिल करना भी मदद कर सकता है।

रोज़ एक ही समय पर उठने की कोशिश करें।,सुबह सूरज की धूप कम से कम 15-20 मिनट लें।,दिन में ज्यादा देर तक न सोएं।,हफ्ते में एक दिन ही ज्यादा सोना सीमित करें,नियमित व्यायाम करें।,जलयोजन बनाए रखें (पर्याप्त पानी पिएं),समय पर भोजन करें,स्क्रीन टाइम कम करें, खासकर सोने से पहले।

थोड़ा एक्स्ट्रा आराम जरूर देता है, लेकिन यदि आप पूरी हफ्ते नींद ठीक से नहीं ले रहे तो वीकेंड की नींद अकेले पर्याप्त नहीं होती। नियमित नींद का समय बनाए रखना और दैनिक जीवनशैली में सुधार जरूरी है।

आयुर्वेद के अनुसार 'रात्रिचर्या' का पालन करते हुए रात 10 बजे तक सो जाना चाहिए। 10 बजे से 2 बजे तक 'पित्त' का समय होता है, जिसमें शरीर अंदरूनी हीलिंग और लिवर को डिटॉक्स करता है। इस समय गहरी नींद में होना बेहद ज़रूरी है।

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