बढ़ती उम्र के साथ हमारे शरीर में कई तरह के बड़े बदलाव आने लगते हैं। अक्सर लोग शिकायत करते हैं कि चालीस की उम्र पार करते ही शरीर में पहले जैसी फुर्ती और ताकत बिल्कुल नहीं बची है। 40 के बाद शरीर पहले जैसा मजबूत क्यों नहीं रहता? यह सवाल हर किसी के मन में आता है। दरअसल इस उम्र के बाद शरीर के काम करने की गति थोड़ी धीमी पड़ने लगती है। नई कोशिकाओं का बनना काफी कम हो जाता है। अगर आप सही समय पर इन बदलावों पर ध्यान नहीं देते हैं, तो आपको बुढ़ापे से पहले ही बहुत ज़्यादा थकावट और कमज़ोरी का सामना करना पड़ता है।
मांसपेशियों का सिकुड़ना है कमज़ोरी की सबसे बड़ी वजह
चालीस की उम्र के बाद शरीर में सबसे बड़ा बदलाव हमारी मांसपेशियों में आता है। उम्र बढ़ने के साथ शरीर की मांसपेशियाँ धीरे-धीरे सिकुड़ने लगती हैं और उनका आकार छोटा होने लगता है। इसे सार्कोपेनिया कहा जाता है। यही वह समय है जब आपको असली वजह पर ध्यान देना चाहिए। जब मांसपेशियाँ कमज़ोर पड़ती हैं, तो थोड़ा सा काम करते ही बहुत ज़्यादा थकावट महसूस होती है। सीढ़ियाँ चढ़ने या सामान उठाने में भारी परेशानी होने लगती है। सही प्रोटीन न खाना और बिल्कुल भी कसरत न करने की खराब आदत इस पूरी परेशानी को कई गुना ज़्यादा तेज़ कर देती है, जिससे शरीर कमज़ोर हो जाता है।
हड्डियों का खोखला होना छीन लेता है शरीर की भारी ताकत
चालीस साल के बाद हमारी हड्डियाँ अपनी पुरानी मज़बूती तेज़ी से खोने लगती हैं। शरीर में कैल्शियम और विटामिन डी की भारी कमी के कारण हड्डियाँ अंदर से पूरी तरह खोखली और बहुत कमज़ोर हो जाती हैं। महिलाओं में यह परेशानी ज़्यादा देखने को मिलती है। हड्डियों का घनत्व कम होने की वजह से हल्का सा गिरने पर भी बड़ा फ्रैक्चर होने का खतरा बना रहता है। कमर, घुटनों और जोड़ों में लगातार दर्द रहना इसी कमज़ोरी का बड़ा संकेत है। अगर आप इस उम्र में ताज़ा दूध और हरी सब्ज़ियाँ नहीं खाते हैं, तो शरीर का ढाँचा कमज़ोर पड़ जाएगा और आपकी ताकत एकदम खत्म हो जाएगी।
ज़रूरी हार्मोन्स में होने वाले बदलाव से शरीर पड़ने लगता है सुस्त
चालीस की उम्र पार करते ही महिलाओं और पुरुषों दोनों के शरीर में हार्मोन्स का स्तर तेज़ी से बदलने लगता है। पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन कम होने लगता है, जिससे उनकी शारीरिक ताकत और ऊर्जा बहुत ज़्यादा घट जाती है। वहीं महिलाओं में एस्ट्रोजन हार्मोन कम होने से भारी थकावट और शरीर में लगातार दर्द रहने की शिकायत होती है। इन ज़रूरी हार्मोन्स की कमी के कारण शरीर हमेशा सुस्त महसूस करता है और किसी काम में मन नहीं लगता। यह एक प्राकृतिक बदलाव है, लेकिन सही जीवनशैली और ताज़ा खानपान से इसके असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है और शरीर को चुस्त रखा जा सकता है।
पाचन बहुत धीमा होने से पेट पर तेज़ी से बढ़ता है भारी वज़न
चालीस की उम्र के बाद हमारा पाचन बहुत ज़्यादा धीमा पड़ जाता है। हम पहले जितना ही खाना खाते हैं, लेकिन शरीर उसे ऊर्जा में नहीं बदल पाता। इस वजह से फालतू चर्बी सीधा पेट और कमर के आस-पास तेज़ी से जमा होने लगती है। बढ़ता हुआ वज़न शरीर को अंदर से बहुत कमज़ोर और सुस्त बना देता है। इस भारी वज़न के कारण घुटनों पर भी ज़्यादा दबाव पड़ता है। अगर आप रोज़ाना बाहर का खराब खाना खाते हैं और मेहनत नहीं करते हैं, तो मोटापे के साथ ब्लड प्रेशर और शुगर जैसी गंभीर बीमारियाँ आपके शरीर को पूरी तरह से अपना घर बना लेंगी।
नींद पूरी न होने से शरीर अंदर से नहीं कर पाता है खुद को रिपेयर
शरीर को अंदर से तंदुरुस्त रखने के लिए गहरी नींद बहुत ही ज़रूरी होती है। लेकिन चालीस के बाद लोगों की नींद अक्सर कच्ची हो जाती है। भारी तनाव और काम के दबाव के कारण लोग रात में सही से नहीं सो पाते हैं। जब आप गहरी नींद में सोते हैं, तभी आपका शरीर दिन भर की थकावट मिटाता है और नई कोशिकाएँ बनाता है। अगर आप रोज़ाना सात घंटे की अच्छी नींद नहीं ले रहे हैं, तो शरीर खुद को रिपेयर नहीं कर पाएगा। नींद की इस भारी कमी के कारण बहुत ज़्यादा थकावट महसूस होती है और शरीर अंदर से एकदम कमज़ोर पड़ जाता है।

सही डाइट और हल्के व्यायाम से बढ़ती उम्र में भी खुद को रखें जवान
इस उम्र में खुद को मज़बूत बनाए रखने के लिए आपको अपनी पुरानी खराब आदतें तुरंत छोड़नी होंगी। अपनी रोज़ाना की डाइट में प्रोटीन की मात्रा ज़्यादा बढ़ा दें। इसके लिए ताज़ा दूध, घर का दही, पनीर और हरी सब्ज़ियाँ भरपूर मात्रा में खाएँ। शरीर की कमज़ोर हड्डियों को मज़बूत करने के लिए सुबह की धूप में ज़रूर बैठें ताकि शरीर को ताज़ी ऊर्जा मिले। रोज़ाना कम से कम चालीस मिनट तेज़ पैदल चलना या थोड़ा व्यायाम करना आपकी मांसपेशियों को नई ताकत देगा। खुद को तनाव से एकदम दूर रखें और समय पर अपना चेकअप करवाएँ ताकि कोई बीमारी बड़ा रूप न ले सके।
आयुर्वेद के इन खास उपायों से बढ़ती उम्र में भी रहें जवान
आयुर्वेद के अनुसार चालीस की उम्र के बाद शरीर में वात दोष बढ़ने लगता है, जिससे हड्डियों और मांसपेशियों में भारी कमज़ोरी आती है। आयुर्वेद में ताकत बढ़ाने के लिए अश्वगंधा और शतावरी का इस्तेमाल बहुत फायदेमंद बताया गया है। रोज़ रात को गुनगुने दूध में आधा चम्मच अश्वगंधा मिलाकर पिएँ। इसके अलावा रोज़ाना तिल के तेल से शरीर की मालिश करने से सारा दर्द एकदम दूर हो जाता है और शरीर चुस्त रहता है।
निष्कर्ष
उम्र का बढ़ना एक ऐसा प्राकृतिक नियम है जिसे कोई नहीं रोक सकता, लेकिन बढ़ती उम्र के साथ अपने शरीर को कमज़ोर होने से ज़रूर रोका जा सकता है। अगर आप सोच रहे हैं कि 40 के बाद शरीर पहले जैसा मजबूत क्यों नहीं रहता? तो अपने घटते हार्मोन्स और सिकुड़ती मांसपेशियों की कमज़ोरी को समझें और जानें असली वजह पर ध्यान दें। अपनी जीवनशैली में आज ही बड़े बदलाव करें। ताज़ा प्रोटीन वाला खाना खाएँ, रोज़ाना थोड़ा व्यायाम करें और अच्छी नींद लें। आयुर्वेद के प्राकृतिक उपाय अपनाकर आप चालीस की उम्र के बाद भी अपने शरीर को एकदम जवान, मज़बूत और ऊर्जावान बनाए रख सकते हैं।
References
https://www.healthline.com/health/weakness
https://www.healthline.com/health-news/how-to-finally-get-in-shape-after-40





























