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ऑस्टियोपोरोसिस: हड्डियों की कमज़ोर और घनत्व कम होने की समस्या

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 16 Apr, 2026
  • category-iconUpdated on 18 Jun, 2026
  • category-iconJoint Health
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कैल्शियम की गोलियों, दर्द निवारक दवाओं और स्टेरॉयड वाले मलहमों का इस्तेमाल हड्डियों के दर्द, जोड़ों की जकड़न और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारियों में काफी आम है। ये दवाएँ और क्रीम शरीर में कुछ समय के लिए कैल्शियम की पूर्ति कर देती हैं या दर्द के दर्दनाक संकेतों को मस्तिष्क तक पहुँचने से रोक देती हैं, जिससे मरीज़ को लगता है कि वह पूरी तरह ठीक हो गया है और उसकी परेशानी खत्म हो गई है। लेकिन कई बार ऐसा होता है कि मरीज़ को क्रीम या दवा छोड़ने के तुरंत बाद फिर से भयंकर दर्द होने लगता है और हड्डियों का खोखलापन पहले से भी बड़े रूप में वापस आ जाता है। इसके कारण कई हो सकते हैं जैसे लगातार दर्द निवारक खाने से शरीर का कमज़ोर होना, बीमारी कितनी गंभीर है, दवाओं पर शरीर की निर्भरता, या सबसे महत्वपूर्ण अस्थि धातु में पोषण की कमी और शरीर के अंदर जमा टॉक्सिन्स जिसे आयुर्वेद में आम कहते हैं। इस बात को समझना ज़रूरी है, ताकि वक्त रहते डॉक्टर से सलाह ली जा सके और हड्डियों की सेहत बनी रहे।

ऑस्टियोपोरोसिस क्या है?

ऑस्टियोपोरोसिस एक ऐसी स्थिति है, जहाँ हमारी हड्डियाँ अंदर से खोखली, कमज़ोर और भुरभुरी होने लगती हैं और उनका घनत्व Bone Density तेज़ी से कम होने लगता है। आमतौर पर लोग इसका शिकार बढ़ती उम्र, कैल्शियम की कमी, गलत खान-पान, शारीरिक गतिशीलता की कमी या मेनोपॉज़ के कारण होते हैं। जब यह बीमारी शरीर में अपनी जगह बना लेती है, तो हल्का सा झुकने, खाँसने या मामूली चोट लगने पर भी हड्डियों में फ्रैक्चर होने जैसी दिक्कतें होने लगती हैं। कैल्शियम की गोलियाँ खाने पर कुछ समय के लिए आराम मिल जाता है, लेकिन ये दवाएँ सिर्फ ऊपरी स्तर पर काम करती हैं, शरीर के अंदर मौजूद उस कमज़ोर पाचन अग्नि को ठीक नहीं करतीं जिसके कारण शरीर कैल्शियम को सोख नहीं पाता। दवा को बिना डॉक्टर की सलाह के लगातार इस्तेमाल करना गुर्दे Kidney और पाचन तंत्र पर बहुत खराब असर डालता है।

ऑस्टियोपोरोसिस की बीमारियाँ कितने प्रकार की होती हैं?

हड्डियों की तकलीफ से जुड़ी आधुनिक चिकित्सा में मुख्य रूप से ये बीमारियाँ देखी जाती हैं

  • प्राइमरी ऑस्टियोपोरोसिस यह सबसे आम है। यह बढ़ती उम्र के साथ या महिलाओं में मेनोपॉज़ के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन की कमी के कारण तेज़ी से उभरता है।
  • सेकेंडरी ऑस्टियोपोरोसिस यह किसी अन्य बीमारी जैसे थायरॉइड या लंबे समय तक स्टेरॉयड और भारी दवाओं के इस्तेमाल के कारण होता है।
  • ऑस्टियोपेनिया यह ऑस्टियोपोरोसिस से पहले की स्थिति है। इसमें हड्डियों का घनत्व सामान्य से कम होता है, लेकिन इतना कम नहीं कि उसे ऑस्टियोपोरोसिस कहा जाए।
  • जुवेनाइल ऑस्टियोपोरोसिस यह बच्चों में होने वाली एक दुर्लभ स्थिति है, जिसमें बिना किसी स्पष्ट कारण के हड्डियाँ कमज़ोर हो जाती हैं।

ऑस्टियोपोरोसिस के लक्षण और संकेत

बार-बार जोड़ों में दर्द होना या मुद्रा Posture का बिगड़ना कई स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत हो सकता है। इसके मुख्य लक्षण और संकेत इस प्रकार हैं

  • कमर और पीठ में तेज़ दर्द रीढ़ की हड्डी के कमज़ोर होने या मनकों के दबने के कारण असहनीय दर्द मचना।
  • लम्बाई का कम होना समय के साथ शरीर की लम्बाई Height का धीरे-धीरे कम हो जाना।
  • झुकी हुई मुद्रा Stooped Posture रीढ़ की हड्डी के कमज़ोर होने से कंधों और पीठ का आगे की तरफ झुक जाना।
  • आसानी से फ्रैक्चर होना बहुत ही मामूली चोट, खाँसने या फिसलने पर भी हड्डियों का टूट जाना।
  • दवा का असर खत्म होते ही वापसी दर्द की दवा बंद करते ही कुछ ही दिनों के भीतर दर्द का फिर से उभर आना।

ये संकेत अगर लगातार दिखें तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।

बार-बार ऑस्टियोपोरोसिस के मुख्य कारण क्या हैं?

हड्डियों के कमज़ोर होने के पीछे सिर्फ बढ़ती उम्र नहीं, बल्कि कई अंदरूनी कारण हो सकते हैं। मुख्य कारण इस प्रकार हैं

  • कमज़ोर पाचन अग्नि जब पेट की अग्नि कमज़ोर होती है, तो शरीर भोजन से कैल्शियम और अन्य पोषक तत्वों को सही से सोख नहीं पाता, जिससे 'आम' टॉक्सिन्स बनते हैं और हड्डियाँ कमज़ोर होती हैं।
  • वात दोष का बढ़ना आयुर्वेद के अनुसार, शरीर में वात वायु दोष बढ़ने से हड्डियों के अंदर खोखलापन और रूखापन आ जाता है।
  • हार्मोनल असंतुलन महिलाओं में मेनोपॉज़ के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन और पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन की कमी हड्डियों को कमज़ोर करती है।
  • गलत खान-पान और जीवनशैली बहुत ज़्यादा कैफीन, जंक फूड खाना और व्यायाम बिल्कुल न करना।
  • विटामिन डी और कैल्शियम की कमी धूप न लेना और आहार में ज़रूरी पोषक तत्वों का अभाव।

ऑस्टियोपोरोसिस के जोखिम और जटिलताएँ क्या हैं?

ऑस्टियोपोरोसिस को अगर अनदेखा किया जाए या सही समय पर इलाज न मिले, तो यह कई जटिलताओं का कारण बन सकता है। मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं

  • गंभीर फ्रैक्चर का खतरा कूल्हे Hip और रीढ़ Spine की हड्डी टूटने का सबसे ज़्यादा जोखिम रहता है, जो बहुत दर्दनाक होता है।
  • स्थायी विकलांगता कूल्हे के फ्रैक्चर के बाद कई लोग जीवन भर के लिए बिस्तर पर आ जाते हैं और चलने-फिरने में असमर्थ हो जाते हैं।
  • लंबे समय तक दर्द रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर से जीवन भर के लिए पुराना पीठ दर्द बन सकता है।
  • मानसिक तनाव और चिंता फ्रैक्चर के डर से अकेले बाहर जाने में घबराहट, डिप्रेशन और नींद की समस्या हो सकती है।
  • परिवार वालों पर निर्भरता रोज़मर्रा के सामान्य कामों के लिए भी दूसरों पर निर्भर होना पड़ता है।
  • समय पर डॉक्टर से परामर्श और उचित इलाज लेने से इन जोखिमों को कम किया जा सकता है।

आयुर्वेदिक दृष्टिकोण क्या है?

आयुर्वेद के हिसाब से बार-बार हड्डियों का कमज़ोर होना सिर्फ उम्र की दिक्कत नहीं है। यहाँ यह माना जाता है कि जब शरीर में 'अस्थि धातु' का क्षय होता है और वात दोष बिगड़ जाता है, तब ऐसी परेशानी आती है। डॉक्टर नाड़ी, जीभ और दर्द की जगह देखकर मर्ज़ को पकड़ते हैं। वे ढूँढते हैं कि कहीं शरीर में टॉक्सिन्स तो नहीं जमा हो गए हैं, जिसने पाचन तंत्र को पूरी तरह दूषित कर दिया है। जब तक यह दूषित अग्नि शरीर में रहेगी, बाहर से खाया हुआ कैल्शियम शरीर में लगेगा ही नहीं। आयुर्वेद में बस दर्द मिटाना और कैल्शियम की गोली देना मकसद नहीं है, वो चाहते हैं कि बीमारी जड़ से ठीक हो, शरीर का पाचन सुधरे और हड्डियाँ प्राकृतिक रूप से घनत्व प्राप्त कर स्वस्थ बनें।

ऑस्टियोपोरोसिस के लिए महत्वपूर्ण जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद में हड्डियों को मज़बूत करने और वात को संतुलित करने के लिए ये जड़ी-बूटियाँ बेहद असरदार हैं

  • अस्थिशृंखला हड़जोड़ यह प्रकृति का सबसे बेहतरीन विकल्प है जो हड्डियों के जुड़ने और उनके घनत्व को बढ़ाने में जादुई असर दिखाता है।
  • अश्वगंधा आयुर्वेद में इसे बहुत शक्तिशाली माना गया है। यह हड्डियों और माँसपेशियों को अंदरूनी ताकत देती है और दर्द कम करती है।
  • लाक्षा हड्डियों के रोगों के लिए लाक्षा बहुत ताकतवर है। यह कैल्शियम के अवशोषण को बढ़ाती है और फ्रैक्चर को तेज़ी से भरती है।
  • गुग्गुल शुद्ध किया हुआ गुग्गुल जोड़ों की सूजन कम करने और सालों पुराने दर्द को मिटाने का एक बहुत ही लाभकारी उपाय है।

आयुर्वेदिक पंचकर्म शरीर की अंदरूनी सफाई

प्राकृतिक तरीके से शरीर को अंदर से शुद्ध कर, दूषित वात और दोषों को बाहर निकालकर संपूर्ण स्वास्थ्य और मज़बूत हड्डियाँ पाने की आयुर्वेदिक प्रक्रिया

  • गहरी सफाई और वात शमन जब दर्द सालों पुराना हो और किसी दवा से ठीक न हो रहा हो, तो जीवा आयुर्वेद में बस्ती कर्म और अभ्यंग जैसी पंचकर्म चिकित्सा की जाती है।
  • इलाज का समय यह 7 से 15 दिनों तक चलने वाली शरीर की गहरी सफाई और पोषण की प्राकृतिक प्रक्रिया है।
  • बस्ती कर्म वात दोष को जड़ से खत्म करने के लिए बस्ती औषधीय एनीमा सबसे श्रेष्ठ है। इससे औषधीय तेल सीधे आँतों के ज़रिए हड्डियों तक पोषण पहुँचाते हैं।
  • बाहरी राहत के लिए अभ्यंग अंदरूनी सफाई के साथ दर्द वाली जगह पर औषधीय तेलों जैसे महानारायण तेल की मालिश अभ्यंग की जाती है। इससे सालों पुराने भयंकर दर्द में राहत मिलती है और हड्डियाँ मज़बूत होने लगती हैं।

ऑस्टियोपोरोसिस के रोगी के लिए शुद्ध आहार

जीवा आयुर्वेद और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण के अनुसार, ऑस्टियोपोरोसिस को दूर करने के लिए कैल्शियम युक्त, पचने में आसान और शरीर के वात दोष को संतुलित करने वाला आहार चुनना महत्वपूर्ण है

क्या खाएँ?

  • दूध, घी और तिल अपनी डाइट में गाय का दूध, शुद्ध घी और सफेद तिल शामिल करें, ये प्राकृतिक कैल्शियम का बेहतरीन स्रोत हैं।
  • रागी और पुराना अनाज पचने में हल्के अनाज और रागी का सेवन करें, यह हड्डियों को बहुत ताकत देता है।
  • हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ और बादाम रोज़ाना बादाम और ताज़ी सब्ज़ियाँ खाएँ, यह हड्डियों को पोषण देती हैं।

क्या न खाएँ?

  • ज़्यादा नमक और कैफीन बहुत ज़्यादा नमक और कॉफी/चाय बिल्कुल बंद कर दें, ये शरीर से कैल्शियम को पेशाब के रास्ते बाहर निकाल देते हैं।
  • कोल्ड ड्रिंक्स और जंक फूड पैकेटबंद जूस, कार्बोनेटेड ड्रिंक्स और मैदे से बनी चीज़ों का सेवन बिल्कुल बंद कर दें, क्योंकि ये हड्डियों को खोखला करते हैं।
  • वात बढ़ाने वाला आहार बहुत ज़्यादा रुखा, बासी और ठंडा खाना कभी न खाएँ, यह वात को बढ़ाकर हड्डियों का दर्द भड़काता है।

ठीक होने में कितना समय लगता है?

जीवा आयुर्वेद में हड्डियों के रोगों का इलाज पूरी तरह से हर मरीज़ के हिसाब से किया जाता है, इसलिए ठीक होने का समय मुख्य रूप से इन बातों पर निर्भर करता है

  • बीमारी और शरीर की स्थिति ठीक होने का वक्त कई बातों से तय होता है जैसे हड्डियाँ कितनी कमज़ोर हैं, घनत्व कितना कम है, और मरीज़ का पाचन कैसा है।
  • हल्की समस्या में सुधार अगर समस्या नई है, तो आमतौर पर 3 से 6 हफ्तों में ही दर्द कम होने लगता है और शरीर में ताकत महसूस होती है।
  • पुरानी बीमारी का समय अगर बीमारी बहुत पुरानी है और हड्डियाँ बहुत भुरभुरी हो चुकी हैं, तो अस्थि धातु को पूरी तरह पोषण मिलने में 3 से 6 महीने या उससे ज़्यादा समय भी लग सकता है।
  • उपचार का तरीका इस प्राकृतिक इलाज में मुख्य रूप से वात शामक जड़ी-बूटियाँ, सही खानपान और हल्का व्यायाम करना शामिल होता है।
  • स्थायी परिणाम मरीज़ अगर अपनी डाइट का कड़ाई से पालन करता है, तो वात शांत हो जाता है और भविष्य में हड्डियों के कमज़ोर होने की संभावना खत्म हो जाती है।

मरीज़ों का भरोसा उनके जीवन बदलने वाले अनुभव

नमस्कार, मैं कुसुमलता हूँ, मेरी आयु 74 वर्ष है और मैं दिल्ली से हूँ। पेशे से मैं एक टीचर हूँ। मैं काफी समय से ऑस्टियोपोरोसिस के कारण अपने शरीर के दर्दों से बहुत परेशान थी। मैंने बहुत एलोपैथिक इलाज कराया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। फिर टीवी पर डॉक्टर प्रताप चौहान जी को सुनने के बाद मैं आयुर्वेदिक उपचार के लिए जीवाग्राम Jivagram आई।यहाँ के प्राकृतिक और शांत वातावरण ने मुझे बहुत प्रभावित किया। डॉक्टरों ने मेरी समस्या को बहुत ध्यान से सुना और पंचकर्म Panchakarma उपचार शुरू किया। शरीर के दर्दों के लिए पंचकर्म से मुझे बहुत राहत मिली। मुझे अनिद्रा नींद न आना की भी समस्या थी, जिसके लिए शिरोधारा Shirodhara उपचार दिया गया। अब मेरी नींद की गोलियाँ पूरी तरह छूट गई हैं।मेरे घुटनों के दर्द के लिए जानु वस्ती, कमर दर्द के लिए कटी वस्ती और गर्दन के दर्द के लिए ग्रीवा वस्ती का उपचार किया गया। इससे मुझे 100% लाभ मिला है और अब मैं दर्दों से मुक्त हूँ। मेरा शरीर अब बहुत सामान्य और एक्टिव महसूस करता है।यहाँ का खाना बहुत ही लजीज और स्वास्थ्यवर्धक है। यहाँ के थेरेपिस्ट बहुत ही प्रशिक्षित और प्रेमपूर्ण स्वभाव के हैं, जो बहुत धैर्य से उपचार देते हैं। साथ ही, यहाँ का आध्यात्मिक वातावरण, सुबह का हवन और मंदिर मन को बहुत प्रसन्नता देते हैं। मेरा आप सबसे निवेदन है कि यदि आप किसी भी शारीरिक बीमारी से ग्रस्त हैं, तो एक बार जीवाग्राम आकर अपना उपचार अवश्य कराएं।

आधुनिक उपचार और आयुर्वेदिक उपचार में अंतर

हड्डियों की बीमारी में आधुनिक और आयुर्वेदिक इलाज का नज़रिया बिल्कुल अलग है

आधुनिक चिकित्सा यह लक्षणों को बाहर से दबाने पर काम करती है। कैल्शियम सप्लीमेंट और दर्द की गोलियाँ तुरंत राहत देती हैं जो कुछ समय के लिए अच्छा लगता है। लेकिन यह बीमारी की जड़ यानी कमज़ोर पाचन को खत्म नहीं करता। दवा छोड़ने पर दर्द फिर से वापस आता है और लंबे समय तक भारी गोलियाँ खाने से गुर्दे में पथरी या लिवर पर बुरा असर पड़ता है।

आयुर्वेदिक चिकित्सा आयुर्वेद बीमारी की असली वजह यानी वात का असंतुलन और कमज़ोर अग्नि को खत्म करता है। इसमें जड़ी-बूटियों और सही डाइट के ज़रिए पाचन को सुधारा जाता है ताकि शरीर अपने आप कैल्शियम सोख सके। इसमें थोड़ा समय लगता है, लेकिन शरीर का वातावरण प्राकृतिक रूप से ऐसा बन जाता है कि हड्डियाँ अंदर से मज़बूत होती हैं और स्थायी आराम मिलता है।

डॉक्टर की सलाह कब लेनी चाहिए?

ऑस्टियोपोरोसिस होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए यदि

  • हल्का सा झुकने या खाँसने पर भी पसलियों या कमर में तेज़ दर्द हो।
  • शरीर की लम्बाई पहले से कम लगने लगे और मुद्रा आगे की तरफ झुक जाए।
  • मामूली चोट लगने या फिसलने पर भी हड्डी में फ्रैक्चर हो जाए।
  • मेनोपॉज़ के बाद जोड़ों और हड्डियों में लगातार दर्द बना रहे।
  • घरेलू उपचार या सामान्य कैल्शियम खाने के बाद भी दर्द बढ़ता ही जा रहा हो।

समय पर सलाह लेने से रोग का सही निदान होता है और हड्डियों को स्थायी रूप से खराब होने से बचाया जा सकता है।

निष्कर्ष

आयुर्वेद के हिसाब से ऑस्टियोपोरोसिस और हड्डियों का कमज़ोर होना मुख्य रूप से वात दोष के बिगड़ने तथा अस्थि धातु के क्षय से जुड़ा होता है। गलत खान-पान, कैफीन का ज़्यादा सेवन और कमज़ोर पाचन से शरीर भोजन से कैल्शियम नहीं ले पाता। सिर्फ कैल्शियम की बाहरी गोली खाने से कमी कुछ समय के लिए छिप जाती है लेकिन शरीर की सोखने की क्षमता नहीं बढ़ती। इलाज में पाचन अग्नि को सुधारना सबसे ज़्यादा आवश्यक है। इसमें वात को संतुलित करना, पोषक आहार खाना, हड़जोड़-अश्वगंधा जैसी जड़ी-बूटियाँ इस्तेमाल करना और सही व्यायाम वाली दिनचर्या अपनाना शामिल है जिससे बीमारी को जड़ से खत्म किया जा सके।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

हाँ, अगर सही पाचन और वात शमन के लिए आयुर्वेदिक औषधियाँ खाई जाएँ और डाइट का पालन किया जाए, तो हड्डियों के घनत्व को सुधारा जा सकता है।

नहीं, अगर पेट की अग्नि कमज़ोर है तो शरीर कैल्शियम को सोख नहीं पाता, जिससे यह गुर्दे की पथरी का कारण भी बन सकता है।

हाँ, नमक का ज़्यादा सेवन शरीर से कैल्शियम को पेशाब के ज़रिए बाहर निकाल देता है जिससे हड्डियाँ खोखली होती हैं।

हाँ, अश्वगंधा प्राकृतिक रूप से वात को शांत करता है और माँसपेशियों व हड्डियों को गहरी ताकत देता है।

हाँ, कार्बोनेटेड ड्रिंक्स हड्डियों से कैल्शियम को सोख लेते हैं और ऑस्टियोपोरोसिस के खतरे को बहुत तेज़ी से बढ़ाते हैं।

हाँ, आयुर्वेद में गाय का दूध और शुद्ध घी अस्थि धातु को पोषण देने और वात को शांत करने के लिए बहुत बेहतरीन माने गए हैं।

हाँ, धूप से शरीर को प्राकृतिक विटामिन डी मिलता है, जो कैल्शियम को सोखने के लिए बहुत आवश्यक है।

हाँ, औषधीय तेलों से रोज़ाना मालिश करने से वात दोष शांत होता है और दर्द में बहुत अच्छी राहत मिलती है।

नहीं, शारीरिक गतिशीलता बहुत ज़रूरी है। हल्का व्यायाम और टहलना हड्डियों को मज़बूत रखने में मदद करते हैं।

हाँ, मेनोपॉज़ के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन की कमी के कारण हड्डियों का घनत्व तेज़ी से कम होने लगता है।

हाँ, मेनोपॉज़ के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन की कमी के कारण हड्डियों का घनत्व तेज़ी से कम होने लगता है।

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