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खाना खाते समय लगातार पानी पीना—आदत है या digestion पर असर डालने वाला pattern?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

खाना खाते समय बीच-बीच में पानी पीने की आदत बहुत से लोगों में देखी जाती है। कुछ लोग तो एक निवाला खाते हैं और साथ में एक घूँट पानी पी लेते हैं। यह बस एक आदत है या सच में हमारे पाचन पर असर डालने वाला कोई पैटर्न है सच तो यह है कि भोजन के साथ बहुत ज़्यादा पानी पीना हमारे हाजमे को सीधा प्रभावित करता है। जब हम लगातार पानी पीते हैं तो पेट के अंदर की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। 

बार-बार पानी पीने से पेट पर क्या असर पड़ता है?

जब हम खाना खाते समय बार-बार पानी पीते हैं तो पेट के पाचक रस पतले हो जाते हैं। हमारे पेट में खाना पचाने के लिए एक खास तरह का एसिड बनता है। जब आप भोजन के साथ बहुत सारा पानी मिला देते हैं तो उस एसिड की ताकत कम हो जाती है। इससे खाना सही से पचने के बजाय पेट में ही रहता है और सड़ने लगता है। इसी वजह से गैस, एसिडिटी और सीने में जलन जैसी समस्याएँ पैदा होती हैं। पेट का काम धीमा होने से शरीर को भोजन का पूरा पोषण भी नहीं मिल पाता है।

खाने के बीच में कितना पानी पी सकते हैं?

अगर आपको खाते समय प्यास लग रही है तो आप थोड़ा सा पानी पी सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि खाने के बीच में गला तर करने के लिए बस एक या दो घूँट पानी पीना ही काफी है। इससे ज़्यादा पानी पीने से बचना चाहिए। अगर खाना बहुत सूखा है या तीखा लग रहा है, तो हल्का सा पानी लिया जा सकता है। लेकिन इसे गिलास भर कर पीने की आदत न बनाएँ। थोड़ा सा पानी भोजन को मुलायम बनाने में मदद करता है, जबकि ज़्यादा पानी पाचन की पूरी प्रक्रिया को ही बिगाड़ देता है।

खाना खाते समय प्यास ज्यादा क्यों लगती है?

भोजन करते समय बार-बार प्यास लगने के कई कारण हो सकते हैं। अगर आप अपने भोजन में बहुत अधिक नमक या तीखे मसालों का इस्तेमाल करते हैं तो गला जल्दी सूखने लगता है। इसके अलावा, बहुत रूखा और सूखा खाना खाने से भी शरीर ज़्यादा पानी माँगता है। कई बार हम दिन भर में पर्याप्त पानी नहीं पीते हैं, और जब खाने बैठते हैं, तब अचानक से ज़ोरों की प्यास लगने लगती है। जल्दी-जल्दी खाना खाना और भोजन को ठीक से न चबाना भी एक बड़ी वजह है, जिससे खाना निगलने के लिए पानी की ज़रूरत पड़ने लगती है।

Ayurveda में भोजन के साथ पानी का नियम

आयुर्वेद में खाने के साथ पानी पीने के बहुत सरे नियम बताए गए हैं:

  • पाचन अग्नि: आयुर्वेद मानता है कि पेट में जठराग्नि होती है जो खाना पचाती है। ज़्यादा पानी इसे बुझा देता है।
  • खाने से पहले: भोजन से तुरंत पहले पानी पीने से शरीर कमज़ोर होता है और पाचन बहुत धीमा पड़ जाता है।
  • खाने के बीच में: भोजन के दौरान थोड़ा-थोड़ा पानी घूँट-घूँट करके पीना अच्छा माना गया है, यह खाने को आसानी से नीचे ले जाता है।
  • खाने के बाद: भोजन के तुरंत बाद ज़्यादा पानी पीना ज़हर के समान माना जाता है इससे मोटापा और सुस्ती बढ़ती है।

कब ज़्यादा पानी पीना परेशानी बढ़ा सकता है?

भोजन के दौरान कुछ खास स्थितियों में बहुत पानी पीना भारी पड़ सकता है:

  • कब्ज़ और गैस: अगर आपको पहले से ही गैस या एसिडिटी की शिकायत है तो खाने के बीच में पानी पीने से यह परेशानी और बढ़ जाएगी।
  • भारी भोजन: जब आप बहुत ज़्यादा या तला-भुना खाना खा रहे हों तब पानी पीने से उसे पचने में और भी ज़्यादा समय लगता है।
  • वज़न बढ़ना: खाने के तुरंत बाद ज़्यादा पानी पीने से पेट फूलता है और वज़न बढ़ने की संभावना ज़्यादा हो जाती है।
  • पोषक तत्वों की कमी: पानी पाचक रसों को धो देता है जिससे शरीर विटामिन्स को सही से सोख नहीं पाता।

पानी कब पीना Digestion के लिए बेहतर है?

हाज़मे को सही रखने के लिए पानी पीने का सही समय जानना ज़रूरी है:

  • सुबह खाली पेट: उठते ही हल्का गुनगुना पानी पीना हाजमे के लिए सबसे बेहतरीन होता है। यह पेट को पूरी तरह साफ करता है।
  • खाने से आधा घंटा पहले: भोजन से करीब तीस मिनट पहले एक गिलास पानी पीना चाहिए इससे पाचन तंत्र तैयार हो जाता है।
  • भोजन के एक घंटे बाद: खाना खाने के कम से कम पैंतालीस मिनट या एक घंटे बाद ही पेट भर कर पानी पिएँ। तब तक खाना पचने की प्रक्रिया ठीक से शुरू हो चुकी होती है।

Digestion के लिए पानी पीने का सही तरीका 

अगर आप अपना पाचन तंत्र मज़बूत रखना चाहते हैं तो पानी पीने का एक सही तरीका अपनाना बहुत ज़रूरी है। यह तरीका न केवल आपको गैस और एसिडिटी से बचाएगा बल्कि भोजन का पूरा पोषण भी शरीर को पहुँचाएगा:

  • जागने के तुरंत बाद: सुबह उठते ही सबसे पहले दो गिलास गुनगुना पानी पिएँ। यह रात भर के जमा हुए टॉक्सिन्स को बाहर निकालता है और पाचन को तेज़ करता है।
  • सिप-सिप करके पिएँ: पानी को हमेशा घूँट-घूँट करके पीना चाहिए। एक साथ गट-गट करके पानी पीने से पेट में हवा चली जाती है और पेट फूलने लगता है।
  • खाने से पहले की दूरी: लंच या डिनर करने से कम से कम आधे घंटे पहले पानी का सेवन पूरी तरह बंद कर दें।
  • भोजन के समय की रणनीति: अगर खाना खाते समय प्यास लगे, तो सिर्फ गला गीला करने भर का पानी लें। अगर मुमकिन हो तो पानी की जगह मट्ठा, छाछ या सूप जैसी चीज़ें लें, जो पाचन में मदद करती हैं।
  • खाने के बाद का इंतज़ार: भोजन समाप्त होने के एक से डेढ़ घंटे बाद ही जी भर के पानी पिएँ।
  • रात के समय: सोने से ठीक पहले बहुत सारा पानी न पिएँ, इससे नींद और हाजमा दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

भोजन के समय पानी पीने की आदत कैसे सुधारें?

अगर आपको खाने के साथ पानी पीने की आदत है, तो उसे इन तरीकों से सुधारें:

  • नमक कम करें: खाने में नमक और तेज़ मसालों का इस्तेमाल कम करें, इससे आपको प्यास बहुत कम लगेगी।
  • खूब चबाकर खाएँ: खाने को धीरे-धीरे और बत्तीस बार चबाकर खाएँ। इससे मुँह में ज़्यादा लार बनेगी और पानी की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।
  • दिन में पानी पूरा करें: दिन भर अच्छी मात्रा में पानी पिएँ ताकि खाने बैठते समय शरीर में पानी की कमी न हो।
  • छोटा गिलास रखें: खाने के साथ अगर पानी रखना ही हो तो बहुत छोटा गिलास या कटोरी रखें ताकि आप ज़्यादा पानी न पी सकें।

क्या ज़्यादा पानी पीने से भारीपन बढ़ता है?

खाना खाते समय बहुत ज़्यादा पानी पीने से पेट में भारीपन महसूस होता है। जब आप खाने के साथ पानी पी लेते हैं, तो पेट ज़रूरत से ज़्यादा भर जाता है। खाना पचने की गति धीमी हो जाती है और पेट फूलने लगता है। जो पाचक रस खाने को तोड़कर पचाने वाले थे, वो पानी में घुलकर बेअसर हो जाते हैं। ऐसे में भोजन पेट में लंबे समय तक रुका रहता है और यही रुका हुआ भोजन भारीपन आलस और सुस्ती का सबसे बड़ा कारण बनता है। इसलिए भारीपन से बचने के लिए पानी पीने के सही समय का पालन करना चाहिए।

निष्कर्ष

भोजन के साथ लगातार पानी पीना सिर्फ एक खराब आदत है जो धीरे-धीरे हमारे हाजमे को बिगाड़ देती है। पानी जीवन के लिए बहुत ज़रूरी है, लेकिन इसे पीने का सही समय और तरीका जानना भी उतना ही आवश्यक है। आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों यही मानते हैं कि खाने के बीच में बहुत ज़्यादा पानी नहीं पीना चाहिए। अपनी दिनचर्या में थोड़ा सा बदलाव लाएँ खाने को अच्छी तरह चबाकर खाएँ और पानी को भोजन के एक घंटे बाद ही पिएँ। यह छोटा सा बदलाव आपकी सेहत को हमेशा तंदुरुस्त रखेगा।

References:

https://www.healthline.com/nutrition/drinking-with-meals

https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/8287852/

https://www.healthline.com/nutrition/best-time-to-drink-water

https://www.healthline.com/nutrition/drinking-water-helps-with-weight-loss

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

खाने के तुरंत बाद पानी पीने से पाचन अग्नि धीमी हो जाती है। पानी हमेशा खाना खाने के कम से कम पैंतालीस मिनट या एक घंटे बाद ही पीना चाहिए।

अगर खाते समय फंदा लग जाए या बहुत तीखा लगे तो आप बस एक या दो घूँट पानी पी सकते हैं। इससे ज़्यादा पानी पीने से बचें।

खाने के साथ बहुत ज़्यादा मीठा जूस पीना भी सही नहीं है। इसकी जगह आप हल्का मट्ठा या छाछ ले सकते हैं, जो हाजमा दुरुस्त रखता है।

सूखे खाने के साथ आप दाल, रसेदार सब्ज़ी या सूप का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे खाना आसानी से निगला जा सकता है और पानी की ज़रूरत कम पड़ेगी।

फ्रिज का ठंडा पानी पाचन तंत्र की नसों को सिकोड़ देता है। इसलिए हमेशा गुनगुना या मटके का सामान्य पानी ही पीना चाहिए ताकि पाचन सही रहे।

हाँ, पानी हमेशा बैठकर और घूँट-घूँट करके ही पीना चाहिए। इससे लार पानी के साथ मिलकर पेट में जाती है और एसिडिटी से बचाती है।

भोजन करने से लगभग तीस से चालीस मिनट पहले पानी पी लेना चाहिए। इससे पाचन तंत्र खाना पचाने के लिए पूरी तरह से तैयार हो जाता है।

खाने के तुरंत बाद ज़्यादा पानी पीने से पेट फूलता है और मेटाबॉलिज़्म धीमा हो जाता है। लंबे समय में यह आदत आपका मोटापा बढ़ा सकती है।

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