Diseases Search
Close Button
 
 

उमस में त्वचा चिपचिपी लेकिन अंदर से dry क्यों महसूस हो सकती है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

अगर बारिश के बाद हवा में नमी आ जाए तो हमारी त्वचा चिपचिपी हो जाती है हमारे चेहरे बाहर से बहुत नमी से चिपचिपे हो जाते हैं लेकिन अंदर से हमारी त्वचा सूखी और खिंची हुई महसूस होती है हमें नहीं पता कि हमें अपनी त्वचा के लिए किसी मॉइस्चराइज़र या क्लीनर की ज़रुरत है । हवा में नमी ज़्यादा होने से चेहरे का पसीना आसानी से नहीं सूखता और त्वचा पर एक चिपचिपी परत बन जाती है। वहीं अंदर से त्वचा में पानी की कमी होने लगती है। 

उमस में त्वचा चिपचिपी क्यों लगती है?

उमस भरे मौसम में हवा में पहले से ही बहुत ज़्यादा नमी होती है। इस वजह से जब हमारे शरीर से पसीना निकलता है, तो वह आसानी से हवा में उड़ या सूख नहीं पाता। हमारी त्वचा लगातार पसीना और नेचुरल तेल निकालती रहती है। जब ये दोनों चीज़ें चेहरे पर जमा होने लगती हैं और सूखती नहीं हैं तो एक चिपचिपी और भारी परत बन जाती है। हवा की नमी और त्वचा का तेल मिलकर चेहरे को ग्रीसी बना देते हैं। यही वजह है कि थोड़ी सी भी गर्मी में चेहरा हमेशा चिपचिपा लगता है और उसे बार-बार पोंछने या धोने का मन करता रहता है।

उमस और त्वचा की नमी का क्या कनेक्शन है?

हवा में नमी ज़्यादा होने पर त्वचा बाहर से तो गीली लगती है, लेकिन अंदर की स्थिति अलग होती है। चिपचिपाहट मिटाने के लिए हम बार-बार अपना मुँह धोते हैं या पसीना पोंछते हैं। ऐसा करने से त्वचा की ऊपरी परत में मौजूद ज़रूरी पानी उड़ जाता है। इसके अलावा पसीने के साथ भी शरीर का पानी बाहर निकल जाता है। इससे त्वचा को लगता है कि उसे नमी बचाने के लिए और तेल बनाना चाहिए। स्किन बाहर से तेल से चिपचिपी रहती है लेकिन अंदर से उसे पानी न मिलने से वह रूखी महसूस होती है।

उमस में त्वचा का Oil Balance क्यों बिगड़ता है?

हवा में बढ़ती उमस हमारे चेहरे के प्राकृतिक तेल के संतुलन को पूरी तरह से बिगाड़ देती है जिसके ये मुख्य कारण हैं:

    • पानी की कमी: पसीने से त्वचा का पानी कम हो जाता है जिससे तेल की ग्रंथियां नमी बनाए रखने के लिए ज़्यादा तेल बनाती हैं।
    • बंद पोर्स: पसीना और धूल मिलकर रोम छिद्रों को बंद कर देते हैं जिससे तेल सही से बाहर नहीं आ पाता।
    • कठोर साबुन: हम चिपचिपाहट हटाने के लिए तेज़ फेस वाश लगाते हैं, जो ज़रूरी तेल काम कर देता है।
    • तापमान में बदलाव: बार-बार एसी से बाहर उमस में जाने पर भी त्वचा  ज़्यादा तेल छोड़ती है।

उमस में पानी की कमी का त्वचा पर असर

उमस भरे मौसम में जब बहुत ज़्यादा पसीना बहता है, तो शरीर के अंदर पानी की कमी हो जाती है। इस डिहाइड्रेशन का सीधा असर हमारे चेहरे पर दिखता है। त्वचा की प्राकृतिक चमक एकदम गायब हो जाती है और वह थकी हुई सी लगती है। पानी कम होने से त्वचा का लचीलापन घट जाता है जिससे हल्की झुर्रियाँ या खिंचाव साफ महसूस होता है। सबसे बड़ी परेशानी यह है कि नमी की इस कमी को पूरा करने के लिए स्किन और भी ज़्यादा तेल निकालती है। इसी वजह से गर्मी में दाने और मुहाँसे ज़्यादा निकलते हैं। इसलिए ज़्यादा पानी पीना त्वचा के लिए बहुत ज़रूरी है।

उमस में Skin Barrier कैसे बचाएं?

अपनी स्किन की ऊपरी र परत यानी स्किन बैरियर को उमस से बचाने के लिए आपको कुछ खास बातों का ध्यान रखना चाहिए:

  • हल्का क्लींज़र चुनें: ऐसा फेस वाश इस्तेमाल करें जो झाग तो कम दे, लेकिन त्वचा को बिना रूखा किए साफ कर दे।
  • मॉइस्चराइज़र न छोड़ें: चिपचिपाहट के डर से क्रीम लगाना न छोड़ें, बल्कि जेल वाला हल्का मॉइस्चराइज़र ज़रूर लगाएँ।
  • गर्म पानी से बचें: चेहरा धोने के लिए हमेशा सादे या ठंडे पानी का ही इस्तेमाल करें, ज़्यादा गर्म पानी त्वचा को छील देता है।
  • सनस्क्रीन: धूप और उमस से बचने के लिए एक मैट फिनिश वाला सनस्क्रीन रोज़ाना लगाएँ।

उमस में कौन-सी Skincare गलतियां भारी पड़ती हैं?

हम अनजाने में चिपचिपाहट दूर करने के चक्कर में त्वचा के साथ कई ऐसी गलतियाँ करते हैं जो नुकसान पहुँचाती हैं:

  • स्क्रब ज़्यादा करना: चेहरे की सफाई के नाम पर रोज़ स्क्रब करने से त्वचा छिल जाती है और अंदर से और सूख जाती है।
  • मॉइस्चराइज़र न लगाना: गर्मी में मॉइस्चराइज़र को पूरी तरह से छोड़ देना त्वचा को अंदर से रूखा बना देता है।
  • चेहरे को बार-बार छूना: गंदे हाथों से बार-बार चेहरा पोंछने या छूने से कीटाणु फैलते हैं और दाने निकल आते हैं।
  • मेकअप की मोटी परत: भारी फाउंडेशन लगाने से रोम छिद्र बंद हो जाते हैं और पसीना अंदर ही फँसकर मुहाँसे करता है।

उमस में त्वचा को कब ज़्यादा देखभाल चाहिए?

कुछ खास स्थितियों में हमारी त्वचा बहुत नाज़ुक हो जाती है और उसे तुरंत ज़्यादा देखभाल की ज़रूरत पड़ती है:

  • कसरत के तुरंत बाद: जिम या भारी काम के बाद जमा पसीना रोम छिद्रों को बंद कर देता है इसलिए तुरंत मुँह धोना चाहिए।
  • बारिश में भीगने के बाद: बारिश के पानी में मौजूद गंदगी नुकसान पहुँचाती है, इसलिए घर आते ही चेहरा ज़रूर साफ करें।
  • एसी से बाहर जाने पर: ठंडे कमरे से अचानक उमस भरी गर्मी में जाने से त्वचा पर असर पड़ सकता है ऐसे में उसे हाइड्रेट रखना ज़रूरी है।
  • सोने से पहले: दिन भर की धूल-मिट्टी को हटाकर ही सोएँ, ताकि त्वचा रात भर सही रह सके और खुद को ठीक कर सके।

उमस में त्वचा को Healthy रखने के आसान तरीके

चिपचिपे मौसम में अपनी त्वचा को स्वस्थ रखने के लिए इन आसान तरीकों को अपनाएँ:

  • खूब पानी पिएँ: दिन भर में कम से कम 8-10 गिलास पानी पिएँ ताकि शरीर अंदर से हाइड्रेटेड रहे।
  • हल्का खान-पान: ज़्यादा मसालेदार खाने से बचें और तरबूज, खीरा या ताज़े फलों का रस अपनी डाइट में शामिल करें।
  • मुँह न पोंछें: पसीना आने पर तौलिए से चेहरे को रगड़ने की बजाय, उसे हल्के हाथों से थपथपा कर सुखाएँ।
  • मेकअप कम करें: भारी मेकअप से बचें ताकि रोमछिद्र खुले रह सकें और पसीना अंदर न फँसे।

क्या ज़्यादा Face Wash त्वचा को Dry कर सकता है?

उमस में हमें लगता है कि बार-बार मुँह धोने से चिपचिपाहट दूर रहेगी, लेकिन यह एक बड़ी भूल है। जब हम दिन में कई बार तेज़ फेस वाश लगाते हैं, तो वह पसीने और गंदगी के साथ-साथ त्वचा का ज़रूरी प्राकृतिक तेल भी धो देता है। यह प्राकृतिक तेल हमारी त्वचा की रक्षा करता है और नमी को अंदर रोककर रखता है। इसके खत्म होने से स्किन बैरियर टूट जाता है। नतीजा यह होता है कि चेहरा धोने के तुरंत बाद साफ तो लगता है लेकिन अंदर से रूखा और खिंचा-खिंचा हो जाता है। इसलिए दिन में बस दो बार ही मुँह धोना चाहिए।

डॉक्टर से कब मिलें?

उमस की परेशानियाँ आमतौर पर खुद ठीक हो जाती हैं लेकिन इन लक्षणों के दिखने पर त्वचा के डॉक्टर को दिखाना ज़रूरी है:

  • लगातार मुहाँसे: अगर चेहरे पर अचानक बड़े और दर्द वाले मुहाँसे निकलने लगें जो ठीक न हो रहे हों।
  • तेज़ खुजली: पसीने के कारण चकत्ते पड़ जाएँ या त्वचा पर बहुत तेज़ खुजली और लालपन आ जाए।
  • अजीब सी जलन: जब कुछ भी लगाने पर चेहरे में बहुत तेज़ जलन चुभन या खिंचाव महसूस होने लगे।

निष्कर्ष:

उमस के मौसम में त्वचा का बाहर से चिपचिपा और अंदर से रूखा लगना एक बहुत ही आम बात है। यह त्वचा का मौसम के बदलाव से निपटने का अपना तरीका है। हमें बस यह समझना है कि ज़्यादा पसीना आने का मतलब यह नहीं है कि अंदर पानी की कमी नहीं है। त्वचा को अंदर से नमी देने के लिए भरपूर पानी पिएँ और बाहर से चिपचिपाहट रोकने के लिए क्रीम की जगह हल्के जेल का इस्तेमाल करें। अगर आप समझदारी से ये छोटे बदलाव अपनाते हैं, तो इस उमस में भी आपकी त्वचा बिल्कुल मुलायम, बेदाग और स्वस्थ बनी रह सकती है

References:

https://www.who.int/news/item/15-11-2022-who-advises-immediate-skin-to-skin-care-for-survival-of-small-and-preterm-babies

https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC12399108/

https://www.sciencedirect.com/topics/medicine-and-dentistry/skin-care

https://www.healthline.com/skincare

https://www.healthline.com/health/beauty-skin-care/skin-types-care

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

उमस में भी त्वचा को नमी की ज़रूरत होती है इसलिए इसे कभी न छोड़ें। ज़्यादा क्रीम की जगह बस एक हल्का जेल वाला मॉइस्चराइज़र लगाएँ जो चिपचिपा न हो।

दिन भर में केवल दो बार चेहरा धोना सबसे सही माना जाता है। इससे ज़्यादा धोने पर त्वचा का प्राकृतिक तेल छिन सकता है और वह रूखी हो जाएगी।

हवा में पहले से नमी होने के कारण शरीर की गर्मी बाहर नहीं निकल पाती, जिससे खूब पसीना आता है। यह पसीना हवा में आसानी से सूख नहीं पाता, इसलिए चेहरा गीला रहता है।

मौसम चाहे कोई भी हो धूप से बचने के लिए सनस्क्रीन लगाना बहुत ज़रूरी है। आप उमस में किसी अच्छे जेल-बेस्ड या मैट फिनिश वाले सनस्क्रीन का इस्तेमाल कर सकते हैं।

बर्फ रगड़ने से रोमछिद्र कुछ देर के लिए सिकुड़ जाते हैं और त्वचा को तुरंत ठंडक मिलती है। लेकिन इसे सीधे चेहरे पर न लगाएँ हमेशा एक साफ सूती कपड़े में लपेट कर ही इस्तेमाल करें।

त्वचा में पानी की कमी पूरी करने के लिए खीरा तरबूज़ और टमाटर जैसी चीज़ें खानी चाहिए। इसके अलावा नारियल पानी और नींबू पानी पीने से भी अंदर से अच्छी नमी बनी रहती है।

पसीना, फालतू तेल और धूल मिलकर चेहरे के रोम छिद्रों को बंद कर देते हैं  जिससे बैक्टीरिया पनपते हैं। यही गंदगी और बैक्टीरिया गर्मी के मौसम में मुहाँसों का सबसे बड़ा कारण बनते हैं।

गुलाब जल एक बहुत ही बेहतरीन टोनर है जो त्वचा को ताज़गी देता है और चिपचिपाहट को कम करता है। इसे आप दिन में कई बार स्प्रे की तरह अपने चेहरे पर इस्तेमाल कर सकते हैं।

Top Ayurveda Doctors

Social Timeline

Our Happy Patients

  • Sunita Malik - Knee Pain
  • Abhishek Mal - Diabetes
  • Vidit Aggarwal - Psoriasis
  • Shanti - Sleeping Disorder
  • Ranjana - Arthritis
  • Jyoti - Migraine
  • Renu Lamba - Diabetes
  • Kamla Singh - Bulging Disc
  • Rajesh Kumar - Psoriasis
  • Dhruv Dutta - Diabetes
  • Atharva - Respiratory Disease
  • Amey - Skin Problem
  • Asha - Joint Problem
  • Sanjeeta - Joint Pain
  • A B Mukherjee - Acidity
  • Deepak Sharma - Lower Back Pain
  • Vyjayanti - Pcod
  • Sunil Singh - Thyroid
  • Sarla Gupta - Post Surgery Challenges
  • Syed Masood Ahmed - Osteoarthritis & Bp
Book Free Consultation Call Us