ज़्यादातर महिलाओं को सामान्य तौर पर पीरियड्स के दौरान ब्लोटिंग (पेट फूलना) होती है। आयुर्वेद के अनुसार ये पीरियड्स ब्लोटिंग हर माह एक जैसी नहीं होती और इसका कारण यह है कि यह पेट में त्रिदोषों (वात, पित्त, कफ) में असंतुलन, खान-पान , पाचन शक्ति (अग्नि) में असंतुलन व जीवनशैली पर निर्भर करती है। इन दोषों में असंतुलन के कारण महिलाओं का शरीर और संपूर्ण स्वास्थ्य प्रभावित होता हैं।
पेट फूलना पीरियड्स का एक सामान्य प्रारंभिक लक्षण है जो कईं महिलाओं को अनुभव होता है। इस दौरान ऐसा महसूस हो सकता है कि आपका वजन बढ़ गया है या आपका पेट या शरीर के अन्य हिस्से सूज गए हैं। आम तौर पर आपके पीरियड्स शुरू होने से काफी पहले ही पेट फूलना शुरू हो जाता है और कुछ दिनों में पीरियड्स आने के बाद यह पहले की तरह ठीक हो जाता है।
पीरियड्स क्या है?
आयुर्वेद के अनुसार, पीरियड्स रजस्रव नामक एक प्राकृतिक मासिक सफाई प्रक्रिया है, जिसे अर्तव के रूप में जाना जाता है, यह हर महीने महिला के शरीर को अंदर से साफ और शुद्ध करने का एक प्राकृतिक चक्र है। यह शरीर में महीने भर में जमा हुए हानिकारक तत्वों (Toxins) को बाहर निकाल कर शरीर को साफ करता है।
रस धातु (rasa dhatu) प्लाज्मा (plasma), लसीका (lymph) और श्वेत रक्त कोशिकाओं (white blood cells) से बनी होती है। यह शरीर की पोषण देने का काम करती है, जो शरीर की हर कोशिका (cells) को पोषण और ऊर्जा (energy) पहुंचाती है और अनावश्यक पदार्थों को हटाती है।
ब्लोटिंग के मूल लक्षण
अगर आपको भी ब्लोटिंग होती है, तो आपने भी कभी न कभी ये लक्षण महसूस किए होंगे-
- पेट में भारीपन: पेट में फूला हुआ और खिंचा हुआ महसूस होना।
- गैस और कब्ज: (अपान वात) के कारण गैस बनना और कब्ज होना।
- पेट में दर्द: पेट और कमर के निचले हिस्से में रुक-रुक कर तेज दर्द होना।
- चिंता और बेचैनी: वात असंतुलन के कारण मन में घबराहट या तनाव महसूस होना।
पीरियड्स में ब्लोटिंग क्यों होती है?
आयुर्वेद के अनुसार- पीरियड ब्लोटिंग (आर्तव चक्र में पेट फूलना) पेट में त्रिदोषों (वात, पित्त, कफ) में असंतुलन, पाचन शक्ति (अग्नि) मे गड़बड़, खान-पान व जीवनशैली के कारण भी हो सकती है। पेट फूलने के मुख्य कारण हैं -
त्रिदोषों में असंतुलन:
- वात: वात का गुण ठंडा होता है और जब यह वात खून से जरिए गर्भाशय (uterus) तक जाता है तब शरीर में जकड़न या सूखापन महसूस होता है। वात के प्रवाह में गड़बड़ी के कारण शरीर में दर्द और असहजता हो सकती है। वात में गड़बड़ की वजह से पीरियड्स के दौरान समस्या हो सकती है।
- पित्त: पित्त के कारण पीरियड्स के दौरान शरीर में अजीब गर्मी उत्पन्न होती है, इसी कारण खून का बहाव (bleeding) ज्यादा हो सकता है। पित्त में गड़बड़ी के कारण ही स्वभाव में गुस्सा, चिड़चिड़ापन और अशांति जैसी भावनाएँ बढ़ जाती हैं।
- कफ: यदि शरीर में कफ दोष है तो इसके कारण पीरियड्स के दौरान रक्त का प्रवाह भारी (heavy flow) हो सकता है। भारी खून निकलने के कारण खून में क्लॉट्स, यीस्ट संक्रमण, जलन और खुजली भी हो सकते हैं।
पाचन शक्ति (अग्नि) कम होना : शरीर में अगर पाचन शक्ति कम है तो इसके कारण शरीर में ‘आम’ (विषाक्त पदार्थ) जमा होने लगता है, इसके कारण भी पीरियड्स (आर्तव चक्र) में ब्लोटिंग (पेट फूलना) हो सकती है। पाचन शक्ति खान-पान पर निर्भर करती है, इसलिए ब्लोटिंग हर माह एक जैसी नहीं होती।
खान-पान में गड़बड़ : तामसिक भोजन के सेवन (unhealthy eating) से शरीर में विषाक्त पदार्थ (toxins) जमा होने लगते हैं, जिस कारण ब्लोटिंग हो सकती है।
व्यक्तिगत प्रकृति और जीवनशैली : ज्यादा तनाव और शारीरिक गतिविधि (physical activities) की वजह से भी ब्लोटिंग हो सकती है। हर महिला की शारीरिक बनावट अलग होती है, इसलिए भी पीरियड्स का असर और ब्लोटिंग कम-ज्यादा हो सकते हैं।
इन दोषों और जीवन में असंतुलन के कारण महिलाओं का पूरा स्वास्थ्य प्रभावित होता है। यह दोष हर मास अलग क्रियाओं, मानसिक स्तिथि, स्वास्थ्य और आहार के कारण बदलते रहते हैं, इसी वजह से पीरियड्स के दौरान ब्लोटिंग एक जैसी नहीं होती है।
ब्लोटिंग के दौरान आहार और जीवन शैली कैसी रखनी चाहिए?
अगर आप ब्लोटिंग से बचना चाहते हैं तो इन बिंदुओं का ध्यान रखें।
- गर्म और पौष्टिक आहार का पालन उचित स्वास्थ्य बनाए रखने में मदद करता है।
- वात दोष को और अधिक बढ़ने से रोकने के लिए हबिष्य आहार का पालन करें अर्थात सूखे और किण्वित खाद्य पदार्थ, बेकरी पदार्थ, गहरे तेल में तले हुए खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए।
- आसानी से पचने वाला खाना, जैसे सूप, स्टू, आदि का सेवन करें।
- अच्छी तरह से पका हुआ अनाज (चावल या क्विनोआ) का सेवन करें।
- गैस और सूजन को कम करने के लिए अपने भोजन में जीरा, धनिया, सौंफ, अदरक और अजवाइन जैसे पाचक मसालों को शामिल करें।
- गर्म पानी या धनिया और सौंफ के बीज से बनी हर्बल चाय का सेवन करें।
- भारी डेयरी उत्पाद, बीन्स और कार्बोनेटेड ड्रिंक्स खाने से बचें ।
- धीमी गति से चलने या आराम देने वाले योग आसन जैसी कोमल गतिविधियों का अभ्यास करें।
- नियमित दैनिक दिनचर्या (regular routine) बनाए रखें।
- पर्याप्त नींद लें और आराम करें।
क्या सामान्य है और क्या नहीं ?
आपके पीरियड्स (आर्तव चक्र) के दौरान ब्लोटिंग (पेट फूलना) सामान्य है, लेकिन इसके और भी गंभीर कारण हो सकतें हैं :
- कैंसर
- पाचन तंत्र की समस्या, जैसे IBS
- एंडोमेट्रियोसिस (Endometriosis)
- संक्रमण (Infection)
- लिवर की बीमारी
यदि आप अक्सर पेट फूला हुआ महसूस करते हैं, तो उस पर पूरा ध्यान दें कि सूजन कब होती है, और यदि आप अन्य लक्षणों (जैसे दर्द, उलटी, चक्कर) के साथ-साथ लगातार सूजन का अनुभव कर रहे हैं, तो जल्द से जल्द चिकित्सक से संपर्क करें।
डॉक्टर से कब मिलें?
ज्यादातर महिलाओं के लिए, पीरियड्स के दौरान होने वाली ब्लोटिंग सामान्य होती है और यह उनकी दिनचर्या (Routine) को प्रभावित नहीं करती । हालाँकि, यदि पीरियड्स के दौरान होने वाली ब्लोटिंग किसी महिला के दैनिक जीवन को प्रभावित करती है तो यह अधिक गंभीर स्वास्थ्य स्थिति का संकेत हो सकती है और आगे जाँच की आवश्यकता हो सकती है, तो उन्हें डॉक्टर से बात जरूर करनी चाहिए ।
निष्कर्ष
पीरियड्स के दौरान ब्लोटिंग होना बहुत सामान्य बात है। आयुर्वेद के अनुसार, वात दोष और पाचन अग्नि के कमजोर होने से पीरियड्स के दौरान ब्लोटिंग होती है। इस दौरान आपको पेट में भारीपन, दर्द, गैस और कब्ज, चिंता और बेचैनी जैसे लक्षण देखने को मिल सकते हैं। ये ब्लोटिंग आपकी दिनचर्या, खान-पान और स्वास्थ पर निर्भर करती है इसलिए हर किसी को एक जैसी ब्लोटिंग नहीं होती है। अगर आपको ब्लोटिंग सामान्य से ज्यादा होती है तो आप आज ही डॉक्टर से संपर्क करें क्योकि यही थोड़ी सी ब्लोटिंग आगे चलकर किसी बड़ी बीमारी का कारण बन सकती है।
Reference :
Fluid Retention over the Menstrual Cycle: 1-Year Data from the Prospective Ovulation Cohort - PMC
Gastrointestinal symptoms before and during menses in healthy women - PMC
Ayurveda Management of Menorrhagia (Raktapradara): Protocol for a Randomized Controlled Trial - PMC















