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BP की दवा 5 साल से — क्या Reverse संभव है आयुर्वेद से?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 13 May, 2026
  • category-iconUpdated on 10 Jun, 2026
  • category-iconHeart Health
  • blog-view-icon5073

सुबह उठते ही पानी के घूंट के साथ बीपी BP की एक छोटी सी गोली निगलना क्या यह आपके भी दिन की शुरुआत का हिस्सा बन चुका है? 1 साल, 2 साल, 5 साल या शायद उससे भी ज़्यादा समय से यह गोली आपके जीवन का एक ऐसा 'अनचाहा साथी' बन गई है, जिसे आप छोड़ना तो चाहते हैं, लेकिन डरते हैं। जब डॉक्टर से पूछा जाता है कि "यह दवा कब तक खानी होगी?" तो अक्सर जवाब मिलता है "ज़िंदगी भर।"

हम मान लेते हैं कि हाई ब्लड प्रेशर Hypertension उम्र के साथ मिलने वाली एक ला-इलाज बीमारी है। हम यह सोचकर संतुष्ट हो जाते हैं कि गोली खाने से मॉनिटर पर बीपी की रीडिंग नॉर्मल आ रही है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि वह गोली आपकी बीमारी को 'ठीक' कर रही है या सिर्फ मॉनिटर के 'आंकड़ों को दबा' रही है? सच्चाई यह है कि वह गोली आपकी धमनियों Arteries की उस सिकुड़न और खून के उस गाढ़ेपन का इलाज नहीं कर रही, जो असल में बीपी बढ़ा रहा है।

अगर आप सालों से बीपी की दवा खा रहे हैं, तो यह समझ लीजिए कि आपका शरीर एक 'प्रेशर कुकर' की तरह है जिसकी सीटी को आपने गोली रूपी उंगली से दबा रखा है, लेकिन अंदर गैस मूल कारण अभी भी बन रही है। आइए समझते हैं कि आयुर्वेद की मदद से कैसे इस 5 साल पुरानी निर्भरता को खत्म करके बीपी को हमेशा के लिए 'रिवर्स' Reverse किया जा सकता है।

हाई ब्लड प्रेशर BP शरीर में क्या संकेत देता है?

ब्लड प्रेशर कोई बीमारी नहीं है, यह आपके शरीर का एक मैकेनिज़्म है। जब आपकी धमनियों Blood vessels में कचरा Cholesterol/Toxins जमा हो जाता है, या तनाव के कारण नसें सिकुड़ जाती हैं, तो आपके दिल को खून को पूरे शरीर तक पहुँचाने के लिए अतिरिक्त ज़ोर लगाना पड़ता है।

यह अतिरिक्त ज़ोर Pressure ही हाई ब्लड प्रेशर है। यह इस बात की चीख है कि आपके शरीर का ब्लड सर्कुलेशन सिस्टम भारी दबाव में है, रक्त की गुणवत्ता खराब हो चुकी है, और आपका हृदय Heart ओवरवर्क कर रहा है।

हाई ब्लड प्रेशर किन प्रकारों में सामने आता है?

हर व्यक्ति का बीपी बढ़ने का कारण अलग होता है। एक ही दवा हर व्यक्ति पर काम नहीं कर सकती। आयुर्वेद के अनुसार, शरीर के दोषों के आधार पर हाई ब्लड प्रेशर मुख्य रूप से तीन प्रकारों में देखा जा सकता है:

  • वात-प्रधान ब्लड प्रेशर: इस स्थिति में ब्लड प्रेशर लगातार ऊपर-नीचे Fluctuate होता रहता है। मरीज़ को बहुत ज़्यादा एंग्जायटी Anxiety, घबराहट, रातों को नींद न आना और त्वचा में रूखापन महसूस होता है। चिंता और तनाव इसका सबसे बड़ा ट्रिगर हैं।
  • पित्त-प्रधान ब्लड प्रेशर: इसमें व्यक्ति को बहुत जल्दी और तेज़ गुस्सा आता है। चेहरा और आंखें लाल हो जाती हैं, सिर में भयंकर दर्द रहता है, और शरीर या आंखों में जलन महसूस होती है। कई बार नाक से खून Nosebleed आने की समस्या भी देखी जाती है।
  • कफ-प्रधान ब्लड प्रेशर: यह स्थिति अक्सर मोटापे Obesity और हाई कोलेस्ट्रॉल से जुड़ी होती है। इसमें बीपी लगातार हाई बना रहता है। शरीर में भारीपन, सुस्ती Lethargy, सांस फूलना और हमेशा थकान महसूस होती है। धमनियों में ब्लॉकेज Atherosclerosis इसी दोष के कारण होती है

क्या आपके शरीर में भी ब्लड प्रेशर बढ़ने के ये शुरुआती लक्षण दिख रहे हैं?

बीपी को अक्सर "साइलेंट किलर" Silent Killer कहा जाता है क्योंकि कई बार यह बिना कोई शोर मचाए शरीर को डैमेज करता रहता है। फिर भी, शरीर कुछ अलार्म ज़रूर बजाता है:

बीपी को नज़रअंदाज़ करने में लोग क्या गलतियाँ करते हैं और उनकी जटिलताएँ?

बीपी की गोली खाने के बाद लोग अक्सर बेफिक्र हो जाते हैं, जो आगे चलकर जानलेवा साबित होता है:

  • सिर्फ गोली पर निर्भरता: लोग सोचते हैं कि सुबह दवा खा ली, अब वे कुछ भी तला-भुना खा सकते हैं और तनाव ले सकते हैं। यह धमनियों को अंदर ही अंदर डैमेज करता रहता है।
  • अचानक दवा छोड़ देना: कई लोग बीपी नॉर्मल आते ही खुद से दवा बंद कर देते हैं, जिससे 'रिबाउंड हाइपरटेंशन' Rebound Hypertension होता है, जो ब्रेन स्ट्रोक का बड़ा कारण बनता है।
  • नमक के नाम पर सेंधा नमक का भी त्याग: रिफाइंड नमक तो ज़हर है, लेकिन सोडियम-पोटैशियम बैलेंस के लिए शरीर को प्राकृतिक खनिजों जैसे सेंधा नमक की ज़रूरत होती है, जिसे लोग पूरी तरह छोड़ कर कमज़ोरी का शिकार हो जाते हैं।
  • भविष्य की गंभीर जटिलताएँ: अगर मूल कारण को ठीक न किया जाए, तो सालों तक गोली खाने के बावजूद यह समस्या हार्ट अटैक Heart Attack, ब्रेन स्ट्रोक Brain Stroke, और किडनी फेलियर Kidney Failure का भयंकर रूप ले लेती है।

आयुर्वेद हाई ब्लड प्रेशर को कैसे समझता है?

आधुनिक विज्ञान जिसे 'एसेंशियल हाइपरटेंशन' Essential Hypertension कहकर छोड़ देता है यानी जिसका कोई स्पष्ट कारण नहीं, आयुर्वेद उसे 'रक्तगत वात', बिगड़े हुए 'पित्त' और 'आम' Toxins के विज्ञान से बहुत गहराई से समझता है।

  • रक्त और धमनियों में वात का प्रकोप: जब तनाव और गलत खान-पान से वात भड़कता है, तो धमनियां अपनी प्राकृतिक लचक Elasticity खो देती हैं और सख्त Stiff हो जाती हैं। सख्त पाइप में पानी खून का प्रेशर हमेशा ज़्यादा होता है।
  • 'आम' Toxins से स्रोतस में रुकावट: जठराग्नि पाचन कमज़ोर होने से शरीर में जो विषैला 'आम' बनता है, वह कोलेस्ट्रॉल के रूप में रक्त वाहिकाओं Srotas में जम जाता है, जिससे खून के बहने का रास्ता संकरा हो जाता है।
  • मनोभावों Mental Status का प्रभाव: आयुर्वेद मानता है कि 'प्राण वात' और 'साधक पित्त' सीधे हमारे हृदय और मस्तिष्क को नियंत्रित करते हैं। सालों का दबा हुआ क्रोध, चिंता और डर बीपी का सबसे प्रमुख कारण है।

ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने वाली और धमनियों को साफ करने वाली आयुर्वेदिक डाइट

आपका खाना ही आपके खून को गाढ़ा बनाता है और यही उसे साफ भी कर सकता है। बीपी रिवर्स करने के लिए इस डाइट को अनिवार्य रूप से अपनाएं:

आहार की श्रेणी क्या खाएं फायदेमंद - धमनियों को साफ करने वाले क्या न खाएं ट्रिगर फूड्स - ब्लॉकेज और वात बढ़ाने वाले
अनाज Grains पुराना चावल, दलिया, ओट्स, जौ Barley सबसे बेहतरीन, रागी। वाइट ब्रेड, मैदा, पैकेटबंद नूडल्स, खारे और रूखे बिस्कुट।
वसा Fats देसी गाय का शुद्ध घी सीमित मात्रा में, कच्ची घानी का सरसों तेल, ऑलिव ऑयल। रिफाइंड ऑयल, डालडा, मार्जरीन, ट्रांस फैट्स बाज़ार का तला हुआ।
सब्ज़ियाँ Vegetables लौकी लौकी का जूस, लहसुन, परवल, कद्दू, सहजन Drumsticks। अचार, पापड़, डिब्बाबंद सब्ज़ियाँ, भारी मात्रा में आलू और बैंगन।
फल और मेवे Fruits & Nuts पपीता, सेब, अनार, तरबूज, रात भर भीगे हुए मुनक्का और अखरोट। डिब्बाबंद जूस, प्रिजर्वेटिव्स वाले फल, बाज़ार के ज़्यादा नमक वाले रोस्टेड नट्स।
पेय पदार्थ Beverages अर्जुन की छाल की चाय, ताज़ा मट्ठा, जीरा-धनिया का पानी, नारियल पानी। बहुत ज़्यादा कॉफी कैफीन धमनियों को सिकोड़ता है, कोल्ड ड्रिंक्स, शराब।

धमनियों को फौलादी ताक़त देने वाली चमत्कारी जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद में प्रकृति ने हमें ऐसे दिव्य रसायन दिए हैं, जो बिना साइड-इफेक्ट के ब्लड प्रेशर को जड़ से ठीक करते हैं:

  • अर्जुन Arjuna: यह हृदय के लिए आयुर्वेद की सबसे महान औषधि है। अर्जुन की छाल धमनियों की ब्लॉकेज खोलती है, हार्ट मसल्स को ताकत देती है और ब्लड प्रेशर को प्राकृतिक रूप से नियंत्रित करती है।
  • सर्पगंधा Sarpagandha: जब तनाव और चिंता के कारण बीपी बहुत हाई हो, तो सर्पगंधा नर्वस सिस्टम को शांत करके बीपी को तेज़ी से नीचे लाने में अचूक काम करती है। इसे हमेशा डॉक्टर की सलाह से लें।
  • अश्वगंधा Ashwagandha: स्ट्रेस हार्मोन Cortisol को घटाकर शरीर को रिलैक्स करने और वात दोष को शांत करने के लिए यह एक जादुई रसायन है।
  • ब्राह्मी और शंखपुष्पी Brahmi & Shankhpushpi: दिमाग की नसों को फौलादी ठंडक देने और मानसिक तनाव Mental Stress को मिटाने के लिए इनका उपयोग बहुत कारगर है।
  • लहसुन Lasuna: खून को पतला करने, कोलेस्ट्रॉल घटाने और धमनियों की सिकुड़न कम करने में खाली पेट लहसुन का सेवन अमृत समान है।

नसों और धमनियों को खोलने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरेपीज़

जब समस्या सालों पुरानी हो जैसे 5 साल से दवा खाना, तो शरीर में जमे कचरे को निकालने के लिए पंचकर्म थेरेपीज़ चमत्कारिक असर दिखाती हैं:

  • शिरोधारा Shirodhara: माथे पर औषधीय तेल या मट्ठे की लगातार धारा गिराने की यह प्रक्रिया सीधे नर्वस सिस्टम को शांत करती है। यह स्ट्रेस और वात-प्रधान बीपी के लिए सबसे शक्तिशाली और रिलैक्सिंग थेरेपी है।
  • अभ्यंग Abhyanga: गुनगुने औषधीय तेलों से संपूर्ण शरीर की मालिश वात दोष को तुरंत शांत करती है, जिससे धमनियां फैलती हैं Vasodilation और बीपी नीचे आता है।
  • हृद बस्ती Hrid Basti: हृदय के ऊपर आटे की रिंग बनाकर उसमें गर्म औषधीय तेल रखा जाता है। यह हृदय की मांसपेशियों को भारी ताकत देता है और प्राण वात को संतुलित करता है।
  • विरेचन Virechana: आंतों और लिवर में जमे पित्त और टॉक्सिन्स को औषधियों के ज़रिए मल मार्ग से बाहर निकालने की यह प्रक्रिया खून को गहराई से साफ करती है।

बीपी की दवाओं से मुक्ति और रिवर्स होने में कितना समय लगता है?

5 साल से जिस शरीर को गोली की आदत हो चुकी है, उसे दोबारा प्राकृतिक अवस्था में लाने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है यह प्रक्रिया आपकी एलोपैथिक दवाओं के साथ शुरू होती है और धीरे-धीरे उन्हें कम किया जाता है:

  • शुरुआती 1-2 महीने: औषधियों और डाइट से आपका पाचन सुधरेगा और गैस/एसिडिटी कम होगी। नींद गहरी आने लगेगी और बीपी में होने वाले अचानक स्पाइक्स Spikes कम हो जाएंगे।
  • 3-4 महीने: पंचकर्म और रसायनों के प्रभाव से धमनियों की सिकुड़न और ब्लॉकेज खत्म होने लगेगी। डॉक्टर की निगरानी में आपकी पुरानी एलोपैथिक दवाओं का डोज़ Dose धीरे-धीरे कम किया जाने लगेगा।
  • 5-6 महीने: हृदय और धमनियां पूरी तरह पोषित हो जाएंगी। आपका स्ट्रेस लेवल कंट्रोल में आ जाएगा। आप बिना किसी रोज़ाना की गोली के एक सामान्य, ऊर्जावान जीवन जी सकेंगे। कुछ गंभीर मामलों में समय थोड़ा ज़्यादा लग सकता है।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

बीपी के इलाज को लेकर आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के नज़रिए में एक बहुत बड़ा और बुनियादी अंतर है।

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा Symptomatic care आयुर्वेद Holistic care
इलाज का मुख्य लक्ष्य ब्लड वेसल्स को जबरन फैलाना Vasodilators और दिल की धड़कन धीमा करना Beta-blockers। वात और पित्त को शांत करना, 'आम' को पचाना और धमनियों का प्राकृतिक लचीलापन लौटाना।
बीमारी को देखने का नज़रिया इसे जीवन भर चलने वाला एक ला-इलाज रोग Chronic Disease मानना, जिसे सिर्फ मैनेज किया जा सकता है। इसे बिगड़े हुए दोषों, तनाव और गलत खान-पान का परिणाम मानना, जिसे रिवर्स किया जा सकता है।
डाइट और लाइफस्टाइल नमक कम करने की सलाह दी जाती है, लेकिन मानसिक शांति और जठराग्नि पर कोई खास ज़ोर नहीं दिया जाता। वात-शामक डाइट, योग, प्राणायाम, सेंधा नमक का उपयोग और मानसिक शांति को इलाज का आधार माना जाता है।
लंबा असर दवाइयाँ छोड़ने पर बीपी तुरंत वापस शूट कर जाता है, और डोज़ उम्र के साथ बढ़ती जाती है। शरीर अंदर से मज़बूत होता है, धमनियां साफ़ होती हैं और इंसान दवाओं से स्थायी रूप से मुक्त हो सकता है।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?

हालांकि आयुर्वेद बीपी को जड़ से रिवर्स करने में सक्षम है, लेकिन अगर आपको दवा के दौरान या आम दिनों में ये कुछ गंभीर लक्षण दिखें, तो तुरंत मेडिकल एमरजेंसी की मदद लेनी चाहिए:

  • छाती में तेज़ दर्द Angina: अगर छाती के बीचों-बीच भारी दबाव या दर्द महसूस हो जो बाएं हाथ या जबड़े की तरफ जा रहा हो।
  • बोलने में लड़खड़ाहट या चेहरे का टेढ़ा होना: यह ब्रेन स्ट्रोक Brain Stroke का स्पष्ट संकेत है।
  • आंखों की रौशनी का अचानक धुंधला होना: अगर अचानक सब कुछ धुंधला या डबल दिखने लगे।
  • असहनीय सिरदर्द और उल्टी: अगर सिर में बिजली कड़कने जैसा भयंकर दर्द हो और साथ में लगातार उल्टी Vomiting आए।

निष्कर्ष

5 साल से बीपी की गोली खाना आपके शरीर की नियति नहीं है; यह केवल एक अस्थायी प्रबंध है जिसे आपने स्थायी मान लिया है। जब तक आप उस गोली के भरोसे बैठे रहेंगे और अपनी जीवनशैली, तनाव और खान-पान को नहीं बदलेंगे, आपका शरीर अंदर ही अंदर एक टाइम बम की तरह टिक-टिक करता रहेगा। आयुर्वेद आपको इस डर और निर्भरता से बाहर निकलने का रास्ता दिखाता है। अपने शरीर के संकेतों को सुनें। अपनी डाइट में लौकी, अर्जुन की छाल, और सही मात्रा में शुद्ध घी शामिल करें। शिरोधारा और पंचकर्म की मदद से अपनी धमनियों को साफ़ करें और दिमाग को शांत करें। अपनी ज़िम्मेदारी एक छोटी सी गोली पर छोड़ने के बजाय, आज ही अपनी सेहत की कमान अपने हाथों में लें और बीपी को जड़ से रिवर्स करने के लिए जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

बिल्कुल नहीं। बीपी की दवा अचानक छोड़ने से रिबाउंड हाइपरटेंशन हो सकता है जो खतरनाक है। आयुर्वेद में इलाज शुरू करते समय पुरानी दवा साथ चलती है, और जैसे-जैसे शरीर खुद बीपी कंट्रोल करने लगता है, डॉक्टर की सलाह से दवा का डोज़ धीरे-धीरे कम किया जाता है।

सफेद रिफाइंड नमक शरीर के लिए ज़हर है, इसे छोड़ दें। लेकिन शरीर को प्राकृतिक खनिजों की ज़रूरत होती है, इसलिए सीमित मात्रा में शुद्ध सेंधा नमक (Rock Salt) का इस्तेमाल करें। आयुर्वेद सेंधा नमक को हृदय के लिए उत्तम मानता है।

जब बीपी बहुत हाई हो, तो भारी वेटलिफ्टिंग (Heavy Weightlifting) या बहुत तेज़ कार्डियो नहीं करना चाहिए। आयुर्वेद में अनुलोम-विलोम, भ्रामरी प्राणायाम, और सुबह की हल्की सैर (Walking) को बीपी नॉर्मल करने के लिए सबसे सुरक्षित माना गया है।

हाँ। बहुत ज़्यादा गुस्सा और तनाव शरीर में पित्त और वात को भड़काता है। यह रक्त वाहिकाओं (Blood vessels) को सिकोड़ देता है। अगर यह लगातार होता रहे, तो नसें अपनी लचक खो देती हैं और बीपी की बीमारी स्थायी बन जाती है।

हाँ, अर्जुन की छाल का काढ़ा या चाय हृदय के लिए एक बेहतरीन टॉनिक है। यह कोलेस्ट्रॉल को कम करता है और धमनियों को ताकत देता है। इसे सुबह खाली पेट लेना सबसे अधिक लाभदायक होता है।

बिल्कुल। रात की अच्छी नींद न लेने से शरीर का वात दोष असंतुलित हो जाता है और स्ट्रेस हॉर्मोन (Cortisol) बढ़ जाते हैं, जिससे अगले दिन ब्लड प्रेशर हाई रहता है।

बाज़ार का रिफाइंड तेल और डालडा बीपी बढ़ाते हैं, लेकिन शुद्ध देसी गाय का घी (सीमित मात्रा में) पित्त और वात को शांत करता है, पाचन सुधारता है और नसों को प्राकृतिक चिकनाई देता है। यह नुकसानदायक नहीं है।

ज्यादातर बीपी की समस्या मानसिक तनाव से जुड़ी होती है। शिरोधारा माथे के आज्ञा चक्र पर काम करती है। यह सीधे नर्वस सिस्टम को शांत करके शरीर को गहरी रिलैक्सेशन में ले जाती है, जिससे बीपी तुरंत प्राकृतिक रूप से नीचे आता है।

हाँ, आयुर्वेद के अनुसार लहसुन कफ और वात शामक है। यह खून को पतला करने (Natural blood thinner) और कोलेस्ट्रॉल/प्लाक को धमनियों से साफ करने में बहुत मददगार है। इसकी 1-2 कली सुबह चबाना फायदेमंद है।

डरने, दौड़ने या गुस्सा करने पर कुछ देर के लिए बीपी बढ़ना एक प्राकृतिक स्पाइक है, जो थोड़ी देर में खुद नॉर्मल हो जाता है। लेकिन जब शांत बैठे रहने पर भी मॉनिटर पर बीपी लगातार हाई आए, तब उसे हाई ब्लड प्रेशर (Hypertension) की बीमारी माना जाता है।

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