Diseases Search
Close Button
 
 

ब्लड प्रेशर की गोली जीवनभर क्यों चलती है? एलोपैथी vs आयुर्वेद—मैनेजमेंट और रूट-कॉज़ का फर्क

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

हाई ब्लड प्रेशर (High Blood Pressure) एक ऐसी बीमारी है जो दबे पांव शरीर में घुसती है और बिना कोई शोर मचाए अंदर ही अंदर अपना काम करती रहती है। इसीलिए इसे "साइलेंट किलर" कहा जाता है। अक्सर लोगों को सालों तक पता ही नहीं चलता कि उनका बीपी बढ़ा हुआ है।

अंदर ही अंदर, यह बढ़ा हुआ दबाव आपकी खून की नसों को एकदम सख्त और कड़क कर देता है। धीरे-धीरे यह दिल, किडनी और दिमाग जैसे खास अंगों को खोखला करना शुरू कर देता है। ज्यादातर लोग तो तब चौंक जाते हैं जब वो किसी और काम से डॉक्टर के पास जाते हैं और मशीन में बीपी हाई निकलता है। फिर डॉक्टर कह देते हैं, अब तो आपको जिंदगी भर गोली खानी पड़ेगी। यहीं से यह समझना जरूरी हो जाता है कि आखिर ये बीमारी शुरू ही क्यों हुई और क्या रोज गोली खाना ही इसका इकलौता इलाज है?

ब्लड प्रेशर असल में है क्या?

यह वो दबाव या जोर है, जो हमारी नसों में बहने वाला खून नसों की दीवारों पर डालता है। इसका सबसे बढ़िया उदाहरण पानी का एक पाइप है, जिसमें बहता हुआ पानी लगातार पाइप की दीवारों पर दबाव बनाता रहता है। जब किसी भी वजह से खून का यह दबाव एक हद से ज्यादा बढ़ जाता है और लगातार बढ़ा ही रहता है, तो इसी को हाई ब्लड प्रेशर (हाई बीपी) कहते हैं।

हमें यह बात समझनी होगी कि बीपी मशीन पर कोई नंबर नहीं है। यह हमारे शरीर के अंदर की पूरी सेहत का एक बड़ा सबूत है, जो बताता है कि हमारा दिल और हमारी नसें अंदर से कितने फिट हैं। जब यह दबाव लंबे समय तक हाई रहता है, तो इसका सीधा मतलब है कि आपके दिल को शरीर के हर हिस्से तक खून पहुंचाने के लिए बहुत ज्यादा जोर लगाना पड़ रहा है, जिससे आपका इंजन धीरे-धीरे बैठ सकता है।

बीपी हाई होने के असली कारण क्या हैं?

बीपी हाई होने के पीछे हमारे शरीर, दिमाग और रोजमर्रा की खराब आदतों का बहुत बड़ा हाथ होता है। इसके कुछ मुख्य कारण ये हैं:

  • नमक का ज्यादा इस्तेमाल: नमक शरीर के अंदर पानी को रोक लेता है। जब शरीर में पानी ज्यादा रुकता है, तो खून की मात्रा भी बढ़ जाती है और नसों पर दबाव पड़ने लगता है।
  • नसों का सख्त हो जाना: बढ़ती उम्र या उल्टा-सीधा खाने से हमारी नसों का लचीलापन खत्म हो जाता है और वो प्लास्टिक के पाइप की तरह कड़क हो जाती हैं। फिर दिल को खून आगे धकेलने के लिए बहुत ज्यादा जोर लगाना पड़ता है।
  • हर वक्त की टेंशन और उलझन: जब आप बहुत ज्यादा टेंशन लेते हैं, तो शरीर में कुछ ऐसे केमिकल (हार्मोन) बनते हैं जो दिल की धड़कन तेज कर देते हैं और नसों को एकदम से सिकोड़ देते हैं।
  • मोटापा: शरीर का भारी वजन दिल पर बहुत बड़ा बोझ डालता है। इसके अलावा, कोई कसरत न करने से शरीर सुस्त पड़ जाता है और नसों की सेहत खराब होने लगती है।
  • किडनी की खराबी: किडनी का काम शरीर का बीपी कंट्रोल करने वाले हार्मोन बनाना भी है। अगर किडनी ही ठीक से काम नहीं कर रही, तो शरीर में पानी का बैलेंस बिगड़ जाता है और बीपी शूट कर जाता है।
  • खानदानी बीमारी: अगर आपके मम्मी-पापा को बीपी की शिकायत रही है, तो बहुत चांस है कि यह बीमारी आपको भी अपनी चपेट में ले ले।

हाई बीपी को इतना खतरनाक क्यों माना जाता है?

बढ़े हुए बीपी को हल्के में लेना बहुत भारी पड़ सकता है। इसके खतरनाक होने की ये मुख्य वजहें हैं:

दिल पर भारी बोझ: जब बीपी हाई होता है, तो दिल को शरीर में खून दौड़ाने के लिए नॉर्मल से कई गुना ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। लंबे समय तक यह बेगार करने से दिल की मांसपेशियां मोटी और सख्त हो जाती हैं, जिससे हार्ट फेल होने का डर बना रहता है।

जानलेवा बीमारियों का न्योता: हाई बीपी शरीर के सबसे नाजुक अंगों पर सीधा वार करता है:

  • स्ट्रोक (लकवा): दिमाग की नसों पर बहुत तेज दबाव से फट जाना या ब्लॉक हो जाना।
  • हार्ट अटैक: खून में ऑक्सीजन की कमी से दिल का काम करना बंद कर देना।
  • किडनी फेल होना: किडनी की छोटी-छोटी नसों का डैमेज हो जाना, जिससे शरीर से गंदगी बाहर ही नहीं निकल पाती।

बीपी की अंग्रेजी दवाइयां काम कैसे करती हैं?

बीपी की गोलियां शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर जाकर इस बढ़े हुए दबाव को कम करने का काम करती हैं:

  • नसों को चौड़ा करना: कुछ दवाइयां नसों को एकदम रिलैक्स कर देती हैं, जिससे वो फैल जाती हैं। जब रास्ता चौड़ा हो जाता है, तो खून आसानी से बहता है और दबाव घट जाता है।
  • पानी और नमक निकालना: कुछ दवाइयां पेशाब के जरिए शरीर का पानी और नमक बाहर निकाल देती हैं। जब शरीर में पानी कम होता है, तो नसों पर पड़ने वाला दबाव भी कम हो जाता है।
  • दिल की धड़कन की रफ्तार धीमी करना: कुछ दवाइयां दिल की धड़कन को थोड़ा धीमा कर देती हैं, जिससे दिल कम ताकत के साथ खून पंप करता है और नसों में बहाव नॉर्मल रहता है।

गोली छोड़ते ही बीपी एकदम से क्यों भागता है?

ये गोलियां सिर्फ एक 'सपोर्ट सिस्टम' या बैसाखी की तरह काम करती हैं। जब तक दवा शरीर में रहती है, वो नसों को जबरदस्ती फैलाकर या दिल को धीमा करके रखती है।

  • सिर्फ नतीजे पर वार, जड़ पर नहीं: दवा सिर्फ बढ़े हुए दबाव को दबाती है, लेकिन जिस वजह से बीपी बढ़ा था (जैसे नसों का कड़क होना, मोटापा या टेंशन), उसे ठीक नहीं करती।
  • पुरानी बीमारी की वापसी: जैसे ही दवा का असर खत्म होता है, शरीर अंदर से फिर उसी पुरानी गड़बड़ी पर आ जाता है और बीपी वापस उछल जाता है। इसीलिए ज्यादातर लोगों को जिंदगी भर गोली खानी पड़ती है।

तो क्या बीपी कभी जड़ से ठीक हो सकता है?

इसका जवाब इस बात पर टिका है कि आपकी बीमारी कितनी पुरानी है:

  • अगर बीमारी नई है: अगर बीपी अभी-अभी बढ़ना शुरू हुआ है और वजह सिर्फ मोटापा या ज्यादा नमक खाना है, तो सही खान-पान, रोजाना योग और वजन घटाकर इसे हमेशा के लिए नॉर्मल किया जा सकता है।
  • अगर बीमारी बहुत पुरानी है: अगर बीपी कई सालों से है और नसें पूरी तरह कड़क हो चुकी हैं, तो इसे 'जड़ से मिटाना' थोड़ा मुश्किल होता है। ऐसे में, इसे सही लेवल पर बनाए रखना और दवाइयों की पावर को कम करना ही सबसे सही टारगेट होता है।

आयुर्वेद में हाई बीपी को कैसे देखा जाता है?

आयुर्वेद हाई बीपी को सिर्फ नसों की या खून की कोई बीमारी नहीं मानता। हमारे वैद्यों के हिसाब से, यह शरीर के तीन मेन पिलर्स वात, पित्त और कफ का बैलेंस बिगड़ने की निशानी है। यह सिर्फ शरीर की दिक्कत नहीं है, बल्कि आपके खून की रफ्तार और आपके दिमाग के बीच का तालमेल टूटने का नतीजा है। भई, सीधी सी बात है, जब दिमाग में टेंशन या प्रेशर बढ़ता है, तो खून की रफ्तार भी अपने आप बेकाबू हो जाती है।

गैस-गर्मी (दोष) और आपकी नसों का कनेक्शन

खून का दौड़ना और आपकी नसों की सेहत, ये दोनों चीजें वात (गैस) और पित्त (गर्मी) पर टिकी होती हैं:

  • वात का बिगड़ना: वात का असली काम शरीर में हर चीज की 'स्पीड' तय करना है। जब शरीर में फालतू हवा या गैस बढ़ जाती है, तो खून के बहने की रफ्तार एकदम बेकाबू हो जाती है। इसके अलावा, ये भड़की हुई वात आपकी नसों को अंदर से सुखा देती है, जिससे नसें अपनी लचक खोकर एकदम प्लास्टिक के पाइप जैसी कड़क हो जाती हैं।
  • पित्त (गर्मी) का भड़कना: पित्त का मतलब ही है शरीर की भट्टी या गर्मी। जब ये गर्मी हद से ज्यादा बढ़ जाती है, तो खून एकदम उबलने लगता है। इससे दिल की धड़कन बहुत तेज हो जाती है और नसों पर दबाव पड़ने लगता है।

पेट की आग, शरीर का आम और हाई बीपी

आयुर्वेद साफ कहता है कि हर बड़ी बीमारी की जड़ आपके पेट में ही होती है, और यही बात बीपी पर भी लागू होती है:

  • आम बनना: जब आपके पाचन अग्नि ठंडी पड़ जाती है, तो आप जो भी खाते हैं वो पचता नहीं, बल्कि पेट में ही पड़े-पड़े सड़ने लगता है। यही सड़ा हुआ खाना एक चिपचिपा जहर बन जाता है, जिसे आयुर्वेद में 'आम' कहते हैं।
  • नसों का जाम होना: यह खून की पतली-पतली नसों और रास्तों में जाकर चिपक जाता है और उन्हें अंदर से ब्लॉक कर देता है।

हाई बीपी को ठीक करने के लिए आयुर्वेदिक तरीका

आयुर्वेद हाई बीपी को सिर्फ बीपी मशीन पर दिखने वाला कोई नंबर नहीं मानता। हमारे लिए यह आपके शरीर के अंदर मचे बड़े बवाल का इशारा है खासकर बेकाबू वात-पित्त, दिमाग की टेंशन, सुस्त पाचन और नसों में भरा हुआ टॉक्सिन। हमारा मकसद सिर्फ बाहर से कोई गोली देकर बीपी को कुछ घंटों के लिए नॉर्मल दिखाना नहीं है, बल्कि शरीर को अंदर से सुधारना है:

  • वात-पित्त को शांत करना: हाई बीपी में सबसे ज्यादा तबाही वात और पित्त ही मचाते हैं। वात खून की रफ्तार बिगाड़ता है और पित्त खून में गर्मी पैदा करता है। हमारे इलाज में ऐसी खास देसी दवाइयां दी जाती हैं जो इस उबलते खून और बेकाबू गैस को शांत करती हैं, जिससे कड़क हो चुकी नसों में बचपन जैसी लचक वापस आ जाती है।
  • पाचन सुधारना और अंदरूनी डिटॉक्स: सुस्त पाचन से बना वो टॉक्सिन ही तो नसों का रास्ता ब्लॉक कर रहा है। इसी रुकावट से बीपी शूट करता है। हमारे इलाज से सबसे पहले पेट की आग को तेज किया जाता है और शरीर की पूरी सर्विसिंग (अंदरूनी सफाई) की जाती है। जब नसें अंदर से साफ हो जाती हैं, तो बीपी अपने आप नॉर्मल रहने लगता है।
  • खून की सफाई और सही बहाव: गंदा खून और उसका रुक-रुककर बहना दिल पर बहुत भारी पड़ता है। आयुर्वेदिक इलाज से खून को अंदर से धोकर साफ किया जाता है ताकि उसका बहाव एकदम स्मूद हो जाए। जब साफ खून आराम से बहता है, तो दिल पर दबाव कम पड़ता है और बीपी अपने आप कंट्रोल में आ जाता है।
  • दिमाग की शांति और रिलैक्सेशन: आज की भागदौड़, हर वक्त की टेंशन और रातों की नींद उड़ जाना हाई बीपी के सबसे पक्के दोस्त हैं। इसलिए सिर्फ दवा से काम नहीं चलता। आयुर्वेद में सही दिनचर्या, हल्के-फुल्के योग और ध्यान के जरिए दिमाग को एकदम रिलैक्स किया जाता है। सीधी-सी बात है, जब दिमाग शांत रहेगा, तो बीपी भी अपने आप शांत हो जाएगा।

हाई बीपी को कंट्रोल करने वाली देसी जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद में बीपी का इलाज सिर्फ कोई गोली देकर खून का दबाव कम करना नहीं है। इसका असली मकसद आपके दिल को मज़बूती बनाना, दिमाग की टेंशन खत्म करना और खून को एकदम साफ रखना है:

  • अर्जुन (अर्जुन की छाल): यह आपके दिल के लिए किसी कुदरती टॉनिक से कम नहीं है। अर्जुन की छाल दिल और खून की नसों को इतना मजबूत बना देती है कि बीपी अपने आप नॉर्मल रहने लगता है।
  • सर्पगंधा: हाई बीपी को कंट्रोल करने के लिए हमारे पुराने वैद्यो की यह सबसे पक्की दवा है। यह धड़कते हुए दिल को शांत करती है और नसों में उबलते हुए खून को एकदम ठंडा कर देती है।
  • ब्राह्मी: आजकल की भागदौड़ और हर वक्त की टेंशन ही तो बीपी बढ़ाती है। ब्राह्मी दिमाग की इसी उलझन और टेंशन को सोख लेती है। यह आपके पूरे सिस्टम को ऐसा रिलैक्स कर देती है कि बीपी को बढ़ने का मौका ही नहीं मिलता।
  • जटामांसी: अगर टेंशन की वजह से रातों को नींद नहीं आती और दिमाग में हर वक्त कुछ न कुछ चलता रहता है, तो जटामांसी आपके लिए रामबाण है। 

हाई बीपी को को कंट्रोल करने वाली असरदार आयुर्वेदिक थेरेपी

सिर्फ खाने वाली दवाइयों से ही नहीं, शरीर की कड़क हो चुकी नसों को खोलने और दिमाग को गहरा सुकून देने के लिए आयुर्वेद में कुछ खास बाहरी तरीके (पंचकर्म) भी अपनाए जाते हैं जो बहुत गहराई में काम करते हैं:

  • अभ्यंग: जब खास देसी जड़ी-बूटियों वाले गुनगुने तेल से तसल्ली से पूरे शरीर की मालिश की जाती है, तो शरीर की सारी थकान और दिमाग का सारा बोझ उतर जाता है। इससे नसों की जकड़न खुलती है और खून का बहाव एकदम स्मूद हो जाता है।
  • शिरोधारा: बीपी के मरीजों के लिए यह किसी जादू से कम नहीं है। इसमें आपके माथे के एकदम बीचों-बीच गुनगुने तेल या काढ़े की एक पतली सी धार लगातार गिराई जाती है। यकीन मानिए, यह दिमाग को इतना गहरा सुकून देती है कि सारी उलझनें पल भर में गायब हो जाती हैं और बीपी एकदम शांत हो जाता है।
  • बस्ती: शरीर में गैस (वात) का भड़कना ही नसों को सुखाकर कड़क करता है और खून की रफ्तार बिगाड़ता है। बस्ती के जरिए पेट की इस बेकाबू गैस को जड़ से शांत किया जाता है। आपको हाई बीपी की कितनी भी पुरानी बीमारी क्यों न हो, इस तरीके से उसमें गजब का आराम मिलता है और नसें वापस मुलायम हो जाती हैं।

ब्लड प्रेशर डाइट गाइड: क्या खाएं और किन चीजों से बचें

क्या खाएं (Dos)

ये चीजें BP को संतुलित रखने में मदद करती हैं:

  • ताजा, हल्का और सुपाच्य भोजन
  • हरी सब्जियां और फल
  • साबुत अनाज
  • लहसुन, आंवला, त्रिफला
  • पर्याप्त पानी और हर्बल ड्रिंक्स

क्या न खाएं (Don’ts)

ये चीजें BP बढ़ा सकती हैं:

  • अत्यधिक नमक
  • प्रोसेस्ड और जंक फूड
  • तला-भुना भोजन
  • कैफीन और कार्बोनेटेड ड्रिंक्स
  • अनियमित खान-पान

डॉक्टर की सलाह कब लेनी चाहिए? 

  • सिरदर्द, चक्कर या धुंधला दिखना महसूस हो
  • छाती में दर्द या भारीपन महसूस हो
  • सांस लेने में तकलीफ हो
  • अचानक घबराहट या बेचैनी बढ़ जाए
  • नाक से खून आना (नोज ब्लीड)
  • दिल की धड़कन बहुत तेज या अनियमित हो
  • अत्यधिक थकान या कमजोरी महसूस हो
  • BP की दवाओं के बावजूद नियंत्रण न हो रहा हो
  • नींद प्रभावित हो रही हो या तनाव बहुत अधिक हो

निष्कर्ष

हाई ब्लड प्रेशर केवल एक संख्या नहीं है, बल्कि यह शरीर के अंदर चल रहे असंतुलन का संकेत है। आधुनिक चिकित्सा जहां BP को तुरंत नियंत्रित करके जोखिम कम करती है, वहीं आयुर्वेद शरीर, मन और रक्तवाहिनियों को संतुलित कर इस समस्या की जड़ पर काम करता है। सही आहार, संतुलित जीवनशैली और उचित उपचार के साथ BP को न केवल नियंत्रित किया जा सकता है, बल्कि लंबे समय तक हृदय स्वास्थ्य को सुरक्षित और स्थिर बनाए रखना भी संभव है।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

नहीं, हर केस में दवा जरूरी नहीं होती। शुरुआती स्टेज में लाइफस्टाइल, डाइट और एक्सरसाइज से भी BP कंट्रोल हो सकता है। लेकिन डॉक्टर की सलाह के बिना दवा बंद नहीं करनी चाहिए।

 नहीं, आजकल युवा लोगों में भी हाई BP देखने को मिल रहा है। गलत खान-पान, तनाव और कम शारीरिक गतिविधि इसके बड़े कारण हैं।

 हाँ, घर पर BP मॉनिटर करना काफी सही होता है अगर सही मशीन और सही तरीका अपनाया जाए। दिन में अलग-अलग समय पर रीडिंग लेना बेहतर रहता है।

हाँ, ज्यादा नमक शरीर में पानी रोकता है जिससे BP बढ़ सकता है। लेकिन असर धीरे-धीरे भी दिख सकता है, तुरंत जरूरी नहीं होता।

हाँ, तनाव के समय शरीर में हार्मोन बदलते हैं जिससे BP अस्थायी रूप से बढ़ सकता है। अगर तनाव लगातार रहे तो यह लंबे समय की समस्या बन सकता है।

 हाँ, नियमित हल्का व्यायाम जैसे वॉकिंग, योग या साइकलिंग बहुत मदद करता है। यह दिल और नसों को मजबूत बनाता है और BP संतुलित रखता है।

कुछ लोगों में ज्यादा कैफीन लेने से BP थोड़ी देर के लिए बढ़ सकता है। लेकिन हर व्यक्ति पर इसका असर अलग होता है।

हाँ, सही देखभाल और नियंत्रण के साथ लोग सामान्य जीवन जी सकते हैं। बस नियमित जांच और हेल्दी लाइफस्टाइल जरूरी होती है।

ऐसा जरूरी नहीं है, लेकिन कई मामलों में लंबे समय तक दवा चलती है। क्योंकि मूल कारण पूरी तरह खत्म नहीं होता।

हाँ, कम नींद या खराब नींद BP को असंतुलित कर सकती है। अच्छी नींद दिल और दिमाग दोनों के लिए बहुत जरूरी है।

Top Ayurveda Doctors

Social Timeline

Our Happy Patients

  • Sunita Malik - Knee Pain
  • Abhishek Mal - Diabetes
  • Vidit Aggarwal - Psoriasis
  • Shanti - Sleeping Disorder
  • Ranjana - Arthritis
  • Jyoti - Migraine
  • Renu Lamba - Diabetes
  • Kamla Singh - Bulging Disc
  • Rajesh Kumar - Psoriasis
  • Dhruv Dutta - Diabetes
  • Atharva - Respiratory Disease
  • Amey - Skin Problem
  • Asha - Joint Problem
  • Sanjeeta - Joint Pain
  • A B Mukherjee - Acidity
  • Deepak Sharma - Lower Back Pain
  • Vyjayanti - Pcod
  • Sunil Singh - Thyroid
  • Sarla Gupta - Post Surgery Challenges
  • Syed Masood Ahmed - Osteoarthritis & Bp
Book Free Consultation Call Us