Diseases Search
Close Button
 
 

Cold Tolerance बहुत कम हो गई — गर्मी में भी ठंड लगती है

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

कुछ लोगों को चिलचिलाती गर्मी में भी अंदर से कंपकंपी या ठंडक महसूस होती है। हमेशा हाथ-पैर ठंडे रहना, पंखे की हल्की हवा भी बर्दाश्त न होना या AC चलते ही ज़्यादा ठंड लगना यह धीरे-धीरे रोज़़मर्रा की आफत बन जाता है। शुरुआत में लोग इसे मामूली कमज़ोरी या मौसम के प्रति संवेदनशीलता मानकर छोड़ देते हैं, लेकिन कई बार यह शरीर के अंदर गड़बड़ा रहे सिस्टम का बड़ा इशारा हो सकता है। 

दिनभर सुस्ती, थकान, धीमा पाचन और खून के दौरे (ब्लड सर्कुलेशन) में कमी जैसी दिक्कतें भी इसी से जुड़ी होती हैं। आयुर्वेद के मुताबिक, जब शरीर की अंदरूनी गर्मी और ऊर्जा का बैलेंस बिगड़ता है, तब ऐसी स्थिति बनती है। इसे सिर्फ मौसम का मिजाज न समझें, यह शरीर के भीतर फैले इम्बैलेंस की बड़ी चेतावनी है।

Cold Tolerance कम होने का मतलब क्या होता है?

सीधे शब्दों में कहें तो 'कोल्ड टॉलरेंस' का मतलब है ठंड बर्दाश्त करने की ताकत। जब शरीर में यह पावर कम होने लगती है, तो नॉर्मल तापमान भी हमें ज़रूर त से ज़्यादा ठंडा लगने लगता है।

ऐसी स्थिति में हल्की सी हवा, AC या सामान्य मौसम में भी हाथ-पांव सुन्न या ठंडे होने लगते हैं। कई बार तो इंसान को धूप या गर्म माहौल में भी राहत नहीं मिलती और शरीर बहुत जल्दी ठंड की चपेट में आ जाता है। यह साफ इशारा है कि शरीर का अंदरूनी हीटर, एनर्जी बैलेंस और टेम्परेचर कंट्रोल करने वाला सिस्टम ठीक से काम नहीं कर पा रहा है।

शरीर अपना तापमान कैसे संतुलित रखता है?

हमारा शरीर चौबीसों घंटे अंदर की गर्मी को मेंटेन रखने का काम करता है ताकि बाहर का मौसम चाहे जो हो, हमारे अंग ठीक से काम करते रहें। इस पूरे हीटिंग सिस्टम को चलाने में हमारे डाइजेशन से मिलने वाली एनर्जी, ब्लड सर्कुलेशन, हार्मोंस और नर्वस सिस्टम मिलकर काम करते हैं।

जब शरीर सही तरीके से कैलोरी बर्न करके एनर्जी बनाता है, तो बॉडी टेम्परेचर एकदम परफेक्ट रहता है। लेकिन अगर इस पूरे नेटवर्क में कहीं भी कोई गड़बड़ आ जाए, तो शरीर अपनी गर्माहट खोने लगता है। यही वजह है कि कुछ लोगों को नॉर्मल मौसम में भी ज़रूर त से ज़्यादा ठंड सताने लगती है।

लगातार ठंड लगना किन समस्याओं का संकेत हो सकता है?

अगर आपको हर वक्त ठंड लगती है, तो यह केवल मौसम की वजह से नहीं है। शरीर अंदर चल रही किसी बड़ी परेशानी का सिग्नल दे रहा हो सकता है, जैसे:

  • मेटाबॉलिज्म का स्लो होना: जब शरीर का इंजन ही सुस्त हो जाए और वो पूरी एनर्जी न बना पाए, तो गर्माहट पैदा होना मुश्किल हो जाता है।
  • खून की कमी (Anemia): बॉडी में पोषण, हीमोग्लोबिन और ऑक्सीजन की कमी होने से सबसे पहले हाथ और पैर ठंडे पड़ने लगते हैं।
  • थायराइड की गड़बड़ी: जब थायराइड ग्रंथि सुस्त हो जाती है, तो शरीर का हीटिंग सिस्टम और मेटाबॉलिज्म दोनों पूरी तरह डाउन हो जाते हैं।
  • कमज़ोर ब्लड सर्कुलेशन: अगर खून का बहाव शरीर के आखिरी हिस्सों यानी हाथ-पैरों की उंगलियों तक ठीक से नहीं पहुँच रहा, तो वहाँ हर वक्त ठंडक लगेगी।
  • पुरानी थकावट और कमज़ोरी: जब शरीर की बैटरी ही डिस्चार्ज रहेगी, तो ठंड झेलने की ताकत अपने आप घट जाएगी।
  • पोषण की कमी: शरीर में ज़रूरी  विटामिन्स और मिनरल्स न होने से भी इंटरनल बैलेंस बिगड़ जाता है।

हमारा शरीर अक्सर इन्हीं छोटे-छोटे इशारों से हमें समझाता है कि अंदर सब कुछ ठीक नहीं है।

गर्मी में भी ठंड लगने के मुख्य कारण क्या हो सकते हैं?

भीषण गर्मी में भी बार-बार स्वेटर ढूंढना या पंखा बंद करने की नौबत आना सीधे तौर पर इन वजहों से जुड़ा हो सकता है:

  • कमज़ोर डाइजेशन और कम एनर्जी: अगर आपका पेट खाना ठीक से नहीं पचा पा रहा, तो शरीर में न तो कैलोरी बर्न होगी और न ही पर्याप्त गर्माहट बनेगी।
  • खून की कमी: हीमोग्लोबिन कम होने के कारण नस-नस तक ऑक्सीजन नहीं पहुँच पाती, जिससे हाथ-पांव बर्फ की तरह ठंडे हो जाते हैं।
  • थायराइड: थायराइड हार्मोन का लेवल कम होने से शरीर की रफ्तार और तापमान दोनों गिर जाते हैं।
  • ब्लॉक ब्लड सर्कुलेशन: खून का बहाव धीमा होने से शरीर के बाहरी हिस्सों में ठंड ज़्यादा महसूस होती है।
  • हद से ज़्यादा स्ट्रेस और थकान: दिन-रात का तनाव और मानसिक थकान शरीर की पूरी एनर्जी को सोख लेती हैं।
  • खराब खानपान: पोषक तत्वों से खाली डाइट आपके शरीर के इंटरनल हीटर को कमज़ोर कर देती है।

आयुर्वेद के अनुसार बार बार ठंड लगने का कारण

आयुर्वेद में हमारे शरीर की गर्मी, ताकत और पूरे बैलेंस का आधार "अग्नि" (पाचन की आग) को माना गया है। जब यह अग्नि मंद या कमज़ोर पड़ जाती है, तो खाया-पीया ठीक से नहीं पचता। नतीजा यह होता है कि शरीर में पर्याप्त ऊर्जा और गर्माहट बन ही नहीं पाती।

ऐसी हालत में इंसान को अंदरूनी ठंडापन, भारीपन और कमज़ोरी घेर लेती है। शरीर का पूरा सिस्टम सुस्त हो जाता है और नॉर्मल मौसम भी बहुत ज़्यादा ठंडा लगने लगता है। आयुर्वेद इसे सिर्फ बाहरी मौसम का असर नहीं मानता, बल्कि शरीर के दोषों में आई गड़बड़ी बताता है, जिसमें वात और कफ दोष का हाथ होता है:

  • बढ़ा हुआ वात: यह शरीर में रूखापन, कंपकंपी, ठंडापन और बेचैनी को बढ़ा देता है।
  • बिगड़ा हुआ कफ: इसकी वजह से शरीर भारी होने लगता है, दिनभर आलस और सुस्ती छाई रहती है।
  • कमज़ोर पड़ी अग्नि: खाना सही से न टूटने के कारण शरीर का पावर हाउस (ऊर्जा निर्माण) ठप हो जाता है।
  • ऊर्जा संतुलन में कमी: शरीर की अपनी नेचुरल गर्माहट बनाए रखने की ताकत खत्म हो जाती है।

आयुर्वेद कहता है कि जब तक शरीर की अग्नि और तीनों दोष अपनी सही जगह पर बैलेंस नहीं होंगे, तब तक शरीर मौसम के थपेड़ों को बेहतर तरीके से सहन नहीं कर पाएगा।

आयुर्वेद का उपचार दृष्टिकोण

आयुर्वेद में बार-बार ठंड लगने की इस परेशानी को सिर्फ एक सतही लक्षण नहीं माना जाता। असली मकसद सिर्फ आपकी ठंड के प्रति संवेदनशीलता को दबाना नहीं है, बल्कि शरीर के अंदर के हीटर को दोबारा चालू करना है:

  • आपकी बॉडी टाइप (प्रकृति) को समझना: हर इंसान का शरीर अलग है। इसलिए आपकी प्रकृति, पाचन और एनर्जी लेवल को बारीकी से जांचकर ही कस्टमाइज़्ड ट्रीटमेंट प्लान तैयार किया जाता है।
  • पाचन की 'अग्नि' को मज़बूत करना: सुस्त पड़ी पाचन शक्ति को दोबारा एक्टिव किया जाता है, ताकि जो भी आप खाएं, उससे भरपूर ऊर्जा और गर्माहट बने।
  • वात और कफ दोष को शांत करना: शरीर का ठंडापन, रूखापन और भारीपन दूर करने के लिए इन दोनों दोषों को वापस लाइन पर लाया जाता है।
  • ब्लड सर्कुलेशन और एनर्जी को बूस्ट करना: ऐसे तरीके और जड़ी-बूटियाँ इस्तेमाल की जाती हैं जो नसों में खून के बहाव को तेज़ करें और शरीर में नेचुरल गर्माहट पैदा करें।
  • रोज़़मर्रा की रूटीन में सुधार: आपकी नींद का पैटर्न, भोजन का सही समय, फिजिकल एक्टिविटी और माइंड स्ट्रेस को मैनेज करने पर खास ध्यान दिया जाता है।

इलाज में उपयोग होने वाली आयुर्वेदिक औषधियाँ

इलाज के दौरान ऐसी जड़ी-बूटियों और दवाओं की मदद ली जाती है जो पेट की आग को बढ़ाएं, नस-नस में खून दौड़ाएं और अंदरूनी हीटिंग को चालू करें। डॉक्टर इन्हें आपकी बॉडी टाइप देखकर ही प्रिसक्राइब करते हैं:

  • अश्वगंधा: यह शरीर की बैटरी को रीचार्ज करती है, पुरानी कमज़ोरी को मिटाती है और अंदरूनी ताकत व स्टेमिना बनाए रखती है।
  • सोंठ (सूखी अदरक): यह पेट की अग्नि को तेज़ करने और पूरे शरीर में तुरंत गर्माहट पैदा करने के लिए बेहतरीन मानी जाती है।
  • दालचीनी: यह सुस्त पड़ी नसों को जगाती है, ब्लड सर्कुलेशन को फास्ट करती है और मेटाबॉलिज्म को रफ्तार देती है।
  • त्रिकटु: यह कॉम्बिनेशन मंद पड़े पाचन तंत्र को एक्टिव करता है और शरीर की ब्लॉक एनर्जी को खोलकर अग्नि को सक्रिय रखता है।
  • गिलोय: यह शरीर के तीनों दोषों को बैलेंस करके आपकी इम्यूनिटी और अंदरूनी ताकत को रीबूट करती है।

इन सभी औषधियों का काम सिर्फ ऊपरी तौर पर ठंड से बचाना नहीं है, बल्कि शरीर के पूरे सिस्टम को अंदर से हील करके एक परमानेंट बैलेंस देना है।

इलाज में उपयोग होने वाली आयुर्वेदिक विधियाँ (Therapies)

आयुर्वेद में ऐसी कई बेहतरीन थैरेपीज और तरीके हैं जो आपके शरीर के इंटरनल हीटिंग सिस्टम को दुरुस्त करते हैं, नसों में खून का दौरा बढ़ाते हैं और अंदरूनी गर्माहट को बैलेंस करते हैं। ये सारे इलाज आपकी बॉडी टाइप और ज़रूरत के हिसाब से चुने जाते हैं:

  • अभ्यंग: हल्के गरम औषधीय तेलों से जब पूरे शरीर की मालिश की जाती है, तो यह बंद नसों को खोलती है। इससे खून का बहाव सुधरता है और पूरे शरीर में तुरंत एक गर्माहट और गज़ब का आराम महसूस होता है।
  • स्वेदन (भाप चिकित्सा): तेल मालिश के तुरंत बाद जड़ी-बूटियों वाली हल्की भाप (स्टीम) दी जाती है। यह मांसपेशियों की पुरानी से पुरानी जकड़न को खत्म करके अंदर बैठे ठंडेपन को बाहर निकाल फेंकती है।
  • पंचकर्म आधारित संतुलन: इसके ज़रिए शरीर के कोने-कोने में जमे पुराने इम्बैलेंस और कचरे (टॉक्सिन्स) को बाहर निकाला जाता है, जिससे आपके तीनों दोष वापस अपनी सही जगह पर आ जाते हैं।
  • योग और प्राणायाम: रोज़़ाना थोड़ा योगासन करना और गहरी साँसें लेने की आदत (प्राणायाम) फेफड़ों की ताकत बढ़ाती है, ब्लड सर्कुलेशन को तेज़ करती है और दिमाग को शांत रखती है।
  • हल्की नियमित फिजिकल एक्टिविटी: दिनभर बस एक जगह बैठे रहने के बजाय शरीर को थोड़ा एक्टिव रखें। सुबह-शाम की थोड़ी सी चहलकदमी भी शरीर का तापमान बनाए रखने में बहुत मदद करती है।

इन सभी आयुर्वेदिक इलाजों का बस एक ही लक्ष्य है आपके शरीर को अंदर से इतना मज़बूत बनाना कि वह खुद-ब-खुद नेचुरल तरीके से गर्माहट पैदा कर सके।

गर्मी में भी ठंड लगने की समस्या में आहार की भूमिका

जब शरीर अंदर से ठंडा पड़ने लगे, तो आपकी रसोई और आपकी थाली ही आपकी सबसे बड़ी दवा बनती है। गलत खानपान आपके मेटाबॉलिज्म को सुस्त करके शरीर को और ज़्यादा ठंडा बना देता है।

  • गर्म और ताजा भोजन: हमेशा फ्रेश और हल्का गरम खाना ही खाएं। ऐसा भोजन पेट की मंद पड़ी आग को दोबारा जगाता है और इसे पचाने में पेट को ज़्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ती।
  • अदरक, दालचीनी और हल्के मसाले: अपने खाने में अदरक, काली मिर्च और दालचीनी जैसी चीज़ों को ज़रूर  शामिल करें। ये मसाले शरीर के लिए एक नेचुरल हीटर की तरह काम करते हैं और अंदरूनी गर्माहट लाते हैं।
  • बहुत ज़्यादा ठंडी चीजें कम करें: फ्रिज का एकदम चिल्ड पानी, कोल्ड ड्रिंक्स, आइसक्रीम और बहुत दिनों से फ्रोज़न फूड से सख्त दूरी बना लें, क्योंकि ये पेट की पाचक अग्नि को पूरी तरह बुझा देते हैं।
  • संतुलित और पौष्टिक आहार: अपनी डाइट में हरी सब्जियां, दालें और नट्स शामिल करें ताकि भरपूर पोषण मिले। जब शरीर को सही न्यूट्रिशन मिलेगा, तो आपकी खोई हुई ताकत और एनर्जी वापस लौट आएगी।
  • नियमित भोजन समय: रोज़़ाना एक ही तय समय पर खाना खाने की आदत डालें। इससे आपके शरीर का पूरा सिस्टम बिना किसी रुकावट के एकदम ट्रैक पर रहता है।

कब डॉक्टर से सलाह लें?

चिलचिलाती धूप और गर्मी के बीच भी अगर आपको लगातार रजाई या स्वेटर की ज़रूरत महसूस हो, तो इसे मामूली संवेदनशीलता समझकर टालने की भूल बिल्कुल न करें। इन स्थितियों में किसी एक्सपर्ट को ज़रूर  दिखाएं:

  • लगातार हाथ-पैर ठंडे रहना: जब बहुत कोशिशों और गर्म माहौल के बाद भी आपके हाथ-पांव हमेशा बर्फ की तरह ठंडे और सुन्न बने रहें।
  • बहुत ज़्यादा थकान और कमज़ोरी: जब दिनभर शरीर की बैटरी बिल्कुल लो लगे और आप भरपूर सोने के बाद भी बुरी तरह थके-थके रहें।
  • अचानक वजन या शरीर में बदलाव: जब बिना किसी डाइटिंग या हैवी वर्कआउट के अचानक से आपका वजन तेज़ी से बढ़ने या घटने लगे।
  • चक्कर या कमज़ोरी महसूस होना: उठते-बैठते समय अचानक आंखों के आगे अंधेरा छाना या चक्कर आना, जो कमज़ोर सर्कुलेशन या खून की कमी का इशारा हो सकता है।
  • दैनिक काम प्रभावित होना: जब नॉर्मल एसी, पंखे की हल्की हवा या सामान्य तापमान में भी बैठना आपके लिए आफत बन जाए और आप अपने रोज़़ के काम न कर पाएं।

निष्कर्ष

गर्मी में भी अगर आपको ठंड सता रही है, तो यह सिर्फ मौसम के प्रति संवेदनशीलता नहीं है। यह आपके शरीर का एक लाउड अलार्म है कि अंदर कुछ न कुछ गड़बड़ चल रहा है। आज का मेडिकल साइंस जहाँ इसे धीमे मेटाबॉलिज्म, खराब ब्लड सर्कुलेशन या थायराइड हार्मोन के इम्बैलेंस से जोड़कर देखता है, वहीं आयुर्वेद इसे मंद पड़ी 'अग्नि' और बढ़े हुए वात दोष का सीधा नतीजा मानता है।

जब आपका शरीर खुद के लिए ज़रूरी  गरमाहट और एनर्जी नहीं बना पाता, तभी आपको हर वक्त कंपकंपी लगती है। सही और गरम खानपान, एक्टिव लाइफस्टाइल, पूरा आराम और सही आयुर्वेदिक तरीकों को अपनाकर आप इस समस्या को जड़ से ठीक कर सकते हैं। समय रहते शरीर के इन छोटे-छोटे सिग्नल्स को पहचानना बेहद ज़रूरी है, क्योंकि आज की ये मामूली सी लगने वाली ठंड कल को किसी बड़ी अंदरूनी बीमारी का शुरुआती चेहरा हो सकती है।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

हाँ, उम्र बढ़ने के साथ शरीर की ऊर्जा और गर्मी बनाए रखने की क्षमता धीरे धीरे बदल सकती है। कई लोगों में blood circulation और metabolism पहले की तुलना में धीमा होने लगते हैं। इसके कारण सामान्य तापमान भी ज्यादा ठंडा महसूस हो सकता है। अगर इसके साथ कमजोरी या थकान भी महसूस हो रही हो, तो शरीर के संतुलन पर ध्यान देना जरूरी हो सकता है। नियमित दिनचर्या इस स्थिति में मदद कर सकती है।

हाँ, शरीर को पर्याप्त पोषण और ऊर्जा न मिलने पर अंदरूनी गर्मी कम हो सकती है। बहुत लंबे समय तक dieting या कम भोजन लेने से शरीर कमजोर महसूस कर सकता है। इससे हाथ पैर ठंडे रहना और low energy जैसी स्थिति बन सकती है। शरीर को संतुलित मात्रा में पोषण मिलना जरूरी माना जाता है। लंबे समय तक भोजन की अनियमितता शरीर के संतुलन को प्रभावित कर सकती है।

कुछ लोगों में hormonal changes के कारण ठंड के प्रति संवेदनशीलता अधिक महसूस हो सकती है। खासकर शरीर में कमजोरी, खून की कमी या ऊर्जा की कमी होने पर यह स्थिति ज्यादा दिखाई दे सकती है। कई बार महिलाएं हाथ पैर ठंडे रहने की शिकायत ज्यादा करती हैं। यदि यह समस्या लंबे समय तक बनी रहे, तो शरीर के अंदरूनी संतुलन को समझना जरूरी हो सकता है।

हाँ, लगातार बैठे रहने और शरीर को कम active रखने से blood circulation प्रभावित हो सकता है। इससे शरीर के कुछ हिस्सों में गर्मी कम महसूस हो सकती है। नियमित movement शरीर को active रखने और circulation बेहतर बनाए रखने में मदद करता है। लंबे समय तक inactivity रहने पर शरीर अधिक sluggish महसूस कर सकता है। हल्की daily activity भी शरीर के संतुलन में सहायक हो सकती है।

हाँ, लगातार मानसिक तनाव शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकता है। Stress के दौरान शरीर की energy balance और nervous system पर असर पड़ सकता है। कई लोगों में anxiety के साथ हाथ पैर ठंडे महसूस होने लगते हैं। यदि तनाव लंबे समय तक बना रहे, तो शरीर की गर्मी और ऊर्जा दोनों प्रभावित हो सकती हैं। मानसिक संतुलन बनाए रखना इसलिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

हाँ, शरीर में पानी कम होने पर सामान्य circulation और ऊर्जा स्तर प्रभावित हो सकते हैं। कई बार dehydration के कारण कमजोरी और ठंडापन महसूस हो सकता है। पर्याप्त पानी न मिलने से शरीर की कार्यप्रणाली धीमी महसूस हो सकती है। गर्मी के मौसम में भी शरीर अंदर से कमजोर महसूस कर सकता है। इसलिए संतुलित hydration जरूरी माना जाता है।

हाँ, लंबे समय तक बहुत ठंडे वातावरण में रहने से शरीर धीरे धीरे ठंड के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकता है। लगातार AC exposure शरीर की प्राकृतिक गर्मी संतुलन प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। कई लोगों को बाहर सामान्य तापमान में भी ठंड महसूस होने लगती है। इसलिए शरीर को हमेशा अत्यधिक ठंडे वातावरण में रखना सही नहीं माना जाता। संतुलन बनाए रखना जरूरी होता है।

हाँ, जब शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, तब शरीर जल्दी थक सकता है और कमजोर महसूस कर सकता है। ऐसे में शरीर की गर्मी बनाए रखने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है। कई लोगों को बार बार ठंड लगना और low stamina जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं। संतुलित आहार और पर्याप्त आराम immunity को सहारा देने में मदद कर सकते हैं।

हाँ, लगातार कम नींद लेने से शरीर की recovery और energy balance प्रभावित हो सकता है। इससे शरीर में थकान, कमजोरी और low body warmth महसूस हो सकती है। नींद शरीर की अंदरूनी कार्यप्रणाली को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अगर शरीर को पर्याप्त आराम नहीं मिलता, तो वह मौसम के बदलाव को सही तरह संभाल नहीं पाता। नियमित नींद जरूरी मानी जाती है।

हाँ, सही आहार शरीर की ऊर्जा और अंदरूनी गर्मी को संतुलित रखने में मदद कर सकता है। बहुत ज्यादा ठंडी चीजें और अनियमित भोजन शरीर को और कमजोर महसूस करा सकते हैं। गर्म और ताजा भोजन शरीर को बेहतर support दे सकता है। संतुलित पोषण मिलने पर शरीर की कार्यप्रणाली धीरे धीरे मजबूत महसूस हो सकती है। नियमित और संतुलित खानपान लंबे समय में लाभकारी माना जाता है।

Top Ayurveda Doctors

Social Timeline

Our Happy Patients

  • Sunita Malik - Knee Pain
  • Abhishek Mal - Diabetes
  • Vidit Aggarwal - Psoriasis
  • Shanti - Sleeping Disorder
  • Ranjana - Arthritis
  • Jyoti - Migraine
  • Renu Lamba - Diabetes
  • Kamla Singh - Bulging Disc
  • Rajesh Kumar - Psoriasis
  • Dhruv Dutta - Diabetes
  • Atharva - Respiratory Disease
  • Amey - Skin Problem
  • Asha - Joint Problem
  • Sanjeeta - Joint Pain
  • A B Mukherjee - Acidity
  • Deepak Sharma - Lower Back Pain
  • Vyjayanti - Pcod
  • Sunil Singh - Thyroid
  • Sarla Gupta - Post Surgery Challenges
  • Syed Masood Ahmed - Osteoarthritis & Bp
Book Free Consultation Call Us