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Delivery के बाद weight और hair fall: hormones या nutrition gap?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

माँ बनना दुनिया का सबसे खूबसूरत अहसास है, लेकिन यह अपने साथ कई ऐसे बदलाव भी लेकर आता है, जिनके लिए बहुत सी महिलाएं मानसिक रूप से तैयार नहीं होतीं। जब शीशे में अपना बढ़ा हुआ वज़न या कंघी में गुच्छों में टूटते बाल दिखते हैं, तो मन थोड़ा उदास ज़रूर हो जाता है।

हर नई माँ के मन में यह सवाल उठता है कि, "आखिर मेरे साथ ऐसा क्यों हो रहा है? क्या यह सिर्फ हार्मोन्स का खेल है या मेरे शरीर में सच में कोई बड़ी कमज़ोरी आ गई है?"

डिलीवरी के बाद वज़न बढ़ना: क्या यह नॉर्मल है?

डिलीवरी के बाद कुछ महीनों तक वज़न का बढ़ा रहना बिल्कुल नॉर्मल बात है। नौ महीने तक आपके शरीर ने एक नई जान को पाला है, शरीर ने बहुत सारे बदलाव सहे हैं, इसलिए बच्चा होने के तुरंत बाद आप पहले जैसी नहीं दिख सकतीं।

लेकिन अगर बच्चा होने के 6 महीने या एक साल बाद भी वज़न कम नहीं हो रहा है या लगातार बढ़ रहा है, तो इसके पीछे दो बड़े कारण हो सकते हैं:

  1. हार्मोन्स का ऊपर-नीचे होना: प्रेग्नेंसी के दौरान आपके शरीर में जो हार्मोन्स बहुत ज़्यादा बढ़ गए थे, डिलीवरी के तुरंत बाद वे एकदम से नीचे गिर जाते हैं। हार्मोन्स का यह अचानक ऊपर-नीचे होना आपके मेटाबॉलिज़्म को सुस्त कर देता है। पाचन सुस्त होने की वजह से आप जो भी खाती हैं, वह शरीर में चर्बी (फैट) बनकर जमा होने लगता है, खासकर पेट और कमर के आसपास।
  2. नींद न मिलना और टेंशन: बच्चे को बार-बार फीड कराना और उसकी देखभाल करने की वजह से महिलाओं की नींद पूरी नहीं हो पाती। क्या आपको पता है कि जब हम कम सोते हैं, तो हमारे शरीर में 'टेंशन वाला हार्मोन' (कॉर्टिसोल) बढ़ जाता है? यह हार्मोन भूख को बहुत बढ़ा देता है। यही वजह है कि नई माताओं को अक्सर बहुत तेज़ भूख लगती है और वे अनजाने में बहुत सारा मीठा या फैट वाला खाना खा लेती हैं, जिससे वज़न तेज़ी से बढ़ता है।

आयुर्वेद इस बारे में क्या कहता है?

आयुर्वेद मानता है कि डिलीवरी के बाद महिला का शरीर बहुत कमज़ोर (वात प्रकृति का) हो जाता है। इसलिए आयुर्वेद डिलीवरी के बाद के 40 दिनों (जिन्हें सूतिका काल कहा जाता है) में शरीर को पूरा आराम और ताकत देने वाली चीज़ें खाने की सलाह देता है।

आयुर्वेद में घी, अजवायन, सोंठ, मेथी और गोंद के लड्डू खाने की परंपरा इसीलिए बनाई गई थी, ताकि शरीर की अंदरूनी कमज़ोरी ठीक हो सके। लेकिन ध्यान रहे, ये चीज़ें ताकत के लिए हैं, अगर आप इन्हें बहुत ज़्यादा मात्रा में खाएंगी, तो वज़न बढ़ जाएगा। संतुलन सबसे ज़रूरी है।

डिलीवरी के बाद बाल क्यों झड़ने लगते हैं?

प्रेग्नेंसी के दौरान आपने महसूस किया होगा कि आपके बाल बहुत घने और सुंदर हो गए थे और उनका टूटना लगभग बंद हो गया था। यह सब शरीर में बढ़े हुए 'एस्ट्रोज़न' हार्मोन के कारण था।

अचानक बाल क्यों टूटते हैं? 

डिलीवरी के 3 से 4 महीने बाद, शरीर में उस बढ़े हुए हार्मोन का लेवल अचानक से नॉर्मल हो जाता है। जैसे ही यह हार्मोन गिरता है, वो सारे बाल जो पिछले 9 महीनों से नहीं टूटे थे, वे सब एक साथ गिरने लगते हैं। नहाते समय या कंघी करते समय बालों के गुच्छे हाथ में आ जाते हैं।

यह स्थिति देखकर अक्सर महिलाएं बहुत डर जाती हैं, लेकिन सच यह है कि यह बालों के झड़ने का एक नेचुरल तरीका है। यह समस्या 3-4 महीने तक ज़्यादा रहती है और फिर धीरे-धीरे बच्चा एक साल का होने तक बाल वापस नॉर्मल होने लगते हैं।

असली कारण क्या है: हार्मोन्स या न्यूट्रिशन (पोषण) की कमी?

सच कहा जाए तो यह दोनों का मिला-जुला असर है।

बालों का अचानक झड़ना शुरू होना हार्मोन्स की वजह से होता है। लेकिन अगर आपके बाल 6 महीने बाद भी लगातार बहुत ज़्यादा झड़ रहे हैं और नए बाल नहीं आ रहे हैं, तो इसका मतलब है कि आपके शरीर में पोषण की भारी कमी आ गई है।

बच्चे को दूध पिलाने और डिलीवरी की थकावट के कारण शरीर की ताकत आधी हो जाती है। अगर इस समय आपको सही खाना (डाइट) न मिले, तो शरीर आपके बालों और त्वचा की परवाह करना छोड़ देता है और सारी ताकत बच्चे का दूध बनाने में लगा देता है।

किन चीज़ों की कमी से बाल झड़ते हैं और वज़न बढ़ता है?

डिलीवरी के बाद महिलाओं के शरीर में मुख्य रूप से इन 4 चीज़ो की कमी सबसे ज़्यादा होती है:

  1. प्रोटीन की कमी: हमारे बाल पूरी तरह से प्रोटीन (केराटिन) से बने होते हैं। अगर आप दाल, दूध, पनीर, सोयाबीन नहीं खा रही हैं, तो बाल झड़ेंगे ही। प्रोटीन खाने से पेट लंबे समय तक भरा रहता है, जिससे वज़न कम करने में भी मदद मिलती है।
  2. आयरन (खून) की कमी: डिलीवरी के समय शरीर से बहुत सारा खून बह जाता है। इसके कारण शरीर में आयरन कम हो जाता है। आयरन की कमी से न सिर्फ बाल टूटते हैं, बल्कि पूरा दिन थकान और चिड़चिड़ापन रहता है।
  3. कैल्शियम और विटामिन डी: बच्चा आपकी हड्डियों से अपना कैल्शियम लेता है। अगर आप दूध-दही नहीं ले रही हैं या थोड़ी देर धूप में नहीं बैठती हैं, तो कैल्शियम और विटामिन डी की कमी से शरीर में दर्द और कमज़ोरी बनी रहेगी।
  4. विटामिन B12: यह विटामिन शरीर को एनर्जी देता है। खासकर शाकाहारी महिलाओं में इसकी बहुत कमी पाई जाती है।

एक्सपर्ट डॉक्टर की विशेष सलाह: 

डिलीवरी के बाद शुरुआत में वज़न बढ़ना और बाल झड़ना हार्मोनल बदलावों के कारण होता है, लेकिन 6 महीने बाद भी यह जारी रहे तो यह पोषण (प्रोटीन, आयरन, विटामिन्स) की कमी का संकेत है। क्रैश डाइट बिल्कुल न करें; इससे बाल और झड़ेंगे। संतुलित आहार लें और आराम करें। अत्यधिक थकान या बाल लगातार झड़ने पर थायरॉयड और विटामिन्स की जांच के लिए डॉक्टर से मिलें। 

ब्रेस्टफीडिंग (बच्चे को दूध पिलाने) का वज़न और बालों पर क्या असर होता है?

कई लोगों को लगता है कि बच्चे को दूध पिलाने से बाल ज़्यादा झड़ते हैं, जो कि बिल्कुल गलत है। बालों का झड़ना सिर्फ हार्मोन्स का खेल है।

जहां तक वज़न की बात है, तो ब्रेस्टफीडिंग वज़न कम करने में मदद करती है! जी हां, जब आप बच्चे को दूध पिलाती हैं, तो आपका शरीर रोज़ एक्स्ट्रा 300-500 कैलोरी खर्च करता है। अगर आप इसके साथ-साथ पौष्टिक खाना खा रही हैं, तो आपका वज़न धीरे-धीरे खुद ही कम होने लगेगा।

शरीर की अच्छी रिकवरी के लिए रोज़ की कुछ आसान आदतें

डिलीवरी के बाद शरीर की थकान मिटाने और अंदर से दोबारा मजबूत बनने के लिए, बस अपनी रूटीन में इन छोटी-छोटी आदतों को शामिल करें: 

  • खाना न छोड़ें: वज़न कम करने के चक्कर में खाना बिल्कुल न छोड़ें। बल्कि अपनी प्लेट में प्रोटीन (दाल/पनीर) और हरी सब्जियां ज़्यादा रखें।
  • पानी खूब पिएं: दिन भर में कम से कम 10-12 गिलास पानी पिएं। यह दूध बनने और वज़न कम करने दोनों में मदद करेगा।
  • थोड़ा आराम करें: जब बच्चा सोए, तो घर के काम करने के बजाय आप भी सो जाएं। अच्छी नींद आपके हार्मोन्स को शांत करेगी।
  • मालिश करवाएं: अगर मुमकिन हो, तो शरीर की हल्की मालिश करवाएं। इससे नसों को आराम मिलता है और स्ट्रेस कम होता है।
  • हल्की वॉक (सैर): डॉक्टर से पूछकर, डिलीवरी के कुछ हफ्तों बाद रोज़ 15-20 मिनट हल्की वॉक शुरू करें।

वज़न कम करने के लिए 'क्रैश डाइट' बिल्कुल न करें

डिलीवरी के बाद तुरंत पुराने कपड़ों में फिट होने की जल्दबाजी बहुत भारी पड़ सकती है।

खाना-पीना छोड़ देना या बिना डॉक्टर से पूछे वज़न कम करने वाली दवाइयां (सप्लीमेंट्स) लेना आपके और आपके बच्चे दोनों के लिए खतरनाक है। जब आप खाना छोड़ती हैं, तो शरीर कमज़ोर हो जाता है, दूध बनना कम हो जाता है और बाल और तेज़ी से झड़ने लगते हैं।

डॉक्टर के पास जाना कब ज़रूरी हो जाता है?

थोड़ा-बहुत वज़न बढ़ना और बाल टूटना नॉर्मल है, लेकिन अगर आपको नीचे बताई गई दिक्कतें हो रही हैं, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें:

  • डिलीवरी के एक साल बाद भी बाल गुच्छों में टूट रहे हैं और रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं।
  • आपको इतनी ज़्यादा थकान रहती है कि आप बच्चे को भी ठीक से नहीं उठा पातीं।
  • आपका वज़न बिना ज़्यादा खाए बहुत तेज़ी से बढ़ रहा है या बिल्कुल गिरता जा रहा है।
  • आपको बहुत ज़्यादा पसीना आता है या अचानक बहुत ठंड लगती है (यह थायरॉयड का इशारा हो सकता है)।

निष्कर्ष 

डिलीवरी के बाद का समय एक नई मां के लिए बहुत ही नाजुक होता है। वज़न का बढ़ना और बालों का टूटना सिर्फ एक फेस (दौर) है, जो वक्त के साथ गुजर जाएगा। इस समय आपको परेशान होकर खुद को आईने में कोसने की ज़रूरत नहीं है।

यह समय हार्मोन्स के शांत होने और शरीर को खोई हुई ताकत वापस देने का है। अपनी डाइट में भरपूर पोषण रखें, थोड़ा धीरज रखें और बच्चे के साथ इस खूबसूरत समय का आनंद लें। याद रखें, आपका शरीर कोई मशीन नहीं है, इसे रिकवर होने में समय लगता है। बस अपने खाने-पीने का ध्यान रखें, बाकी चीज़ें खुद-ब-खुद अपनी जगह पर आ जाएंगी!

References

Investigation of exacerbating factors for postpartum hair loss: a questionnaire-based cross-sectional study - PMC

Postpartum Weight Retention Risk Factors and Relationship to Obesity at One Year - PMC

Weight gain trajectories patterns from pregnancy to early postpartum: identifying women at risk and timing to prevent weight regain - PMC

Losing weight after pregnancy: MedlinePlus Medical Encyclopedia

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

हां, कई महिलाओं में सी-सेक्शन के बाद रिकवरी में अधिक समय लग सकता है, जिससे शुरुआती महीनों में शारीरिक गतिविधि सीमित रहती है। हालांकि सही खानपान और डॉक्टर की सलाह के अनुसार धीरे-धीरे एक्टिव रहने से वज़न कम किया जा सकता है।

त्वचा का पहले जैसा होना कई बातों पर निर्भर करता है, जैसे उम्र, वजन में बदलाव, आनुवंशिक गुण और नियमित व्यायाम। समय के साथ त्वचा में सुधार हो सकता है, लेकिन इसमें धैर्य रखना जरूरी है।

हां। बार-बार बहुत कम कैलोरी वाली डाइट लेने से शरीर को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता, जिससे बालों की गुणवत्ता और रिकवरी दोनों प्रभावित हो सकती हैं।

जी हां। नई मां बनने के बाद मानसिक तनाव, चिंता और भावनात्मक बदलाव भी बाल झड़ने को कुछ हद तक बढ़ा सकते हैं। पर्याप्त आराम और परिवार का सहयोग इसमें मददगार हो सकता है।

अगर लगातार कमजोरी, चक्कर, बाल झड़ना या वजन से जुड़ी परेशानी बनी रहे, तो डॉक्टर आयरन, विटामिन B12, विटामिन D, थायरॉयड या अन्य जांच की सलाह दे सकते हैं। जांच की जरूरत हर महिला में अलग हो सकती है।

अधिकांश महिलाओं के लिए डॉक्टर की अनुमति मिलने के बाद हल्के योग और स्ट्रेचिंग फायदेमंद हो सकते हैं। लेकिन सी-सेक्शन या किसी जटिल डिलीवरी के बाद व्यायाम शुरू करने का समय डॉक्टर की सलाह से ही तय करें।

हां, नींद की कमी, थकान और हार्मोनल बदलाव के कारण कुछ महिलाओं में मीठा खाने की इच्छा बढ़ सकती है। ऐसे समय में मीठे की जगह फल, मेवे या पौष्टिक स्नैक्स चुनना बेहतर रहता है।

हां। जुड़वां बच्चों की गर्भावस्था में शरीर पर अधिक दबाव पड़ता है, इसलिए रिकवरी, वजन सामान्य होने और पोषण की जरूरतें सामान्य गर्भावस्था से अलग हो सकती हैं।

नहीं। आयरन, कैल्शियम, विटामिन D या अन्य सप्लीमेंट्स कितने समय तक लेने हैं, यह डॉक्टर तय करते हैं। बिना सलाह के इन्हें बंद करना उचित नहीं है।

हर महिला का शरीर अलग तरह से रिकवर करता है। कुछ महिलाओं में बदलाव जल्दी सामान्य हो जाते हैं, जबकि कुछ को अधिक समय लग सकता है। सही पोषण, नियमित फॉलो-अप और स्वस्थ जीवनशैली से रिकवरी बेहतर हो सकती है।

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