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ज्यादा पसीना आना कब चिंता की बात हो सकता है?

पसीना आना और बीमारी के बीच क्या नाता हो सकता है? गर्मियों में या कसरत करने पर पसीना आना एकदम आम बात है। हम सब जानते हैं कि पसीना हमारे शरीर को ठंडा रखने का कुदरती तरीका है। लेकिन क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि जब आप बिना किसी मेहनत के या एसी वाले कमरे में बैठे होते हैं और तब भी आपके माथे से पसीने की बूँदें टपकने लगती हैं? यह कोई मामूली बात नहीं है। जब शरीर बिना किसी कारण के पानी छोड़ने लगे, तो यह इस बात का सीधा इशारा है कि अंदर कुछ उथल-पुथल चल रही है। पसीने को सिर्फ गर्मी से जोड़कर देखना सही नहीं है, कई बार यह शरीर का एक खास अलार्म होता है जिसे हमें समझना बहुत ज़रूरी है।

शरीर में बिना वजह पसीना क्यों आता है

हमारे शरीर का तापमान संभालने का एक पूरा सिस्टम होता है। जब शरीर ज्यादा गर्म हो जाता है, तो दिमाग पसीने वाली ग्रंथियों को चालू होने का संदेश भेजता है। लेकिन कई बार हमारा नर्वस सिस्टम बिना बात के ही बहुत तेज़ काम करने लगता है। ऐसे में बिना किसी गर्मी या थकावट के भी ग्रंथियाँ पसीना बनाने लगती हैं। इस हालत में इंसान के हाथ, पैर के तलवे, चेहरे और कांख से इतना पानी निकलता है कि कपड़े तक भीग जाते हैं। इसे शरीर की एक तरह की गड़बड़ी मान सकते हैं जहाँ दिमाग और पसीने की ग्रंथियों के बीच का तालमेल पूरी तरह बिगड़ जाता है।

क्या हमेशा मौसम की गर्मी ही पसीने की असली वजह होती है?

जी नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है। कई बार आप बिल्कुल शांत बैठे होते हैं, मौसम भी ठंडा होता है, फिर भी आपके हाथों में पसीना आ जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि पसीने का सीधा नाता हमारे मन और भावनाओं से भी है। जब आप डरे हुए होते हैं, किसी बात को लेकर बहुत गहरी चिंता में होते हैं या अचानक कोई बुरी खबर सुन लेते हैं, तो आपका शरीर तनाव में आ जाता है। इस दिमागी दबाव के कारण शरीर का तापमान थोड़ा बढ़ जाता है और उसे तुरंत ठंडा करने के लिए शरीर पसीना बाहर निकालने लगता है।

दिमागी तनाव और बेचैनी का पसीने से क्या लेना-देना है?

जब हम परेशान होते हैं, तो हमारे शरीर के अंदर कई सारे बदलाव एक साथ होते हैं:

  • तनाव वाले हार्मोन: चिंता के समय शरीर में ऐसे हार्मोन तेज़ हो जाते हैं जो दिल की धड़कन और खून का बहाव बढ़ा देते हैं।
  • शरीर का गर्म होना: खून का बहाव तेज़ होने से शरीर के अंदर भयंकर गर्मी पैदा होती है।
  • रोमछिद्रों का खुलना: इस अचानक बढ़ी हुई गर्मी को बाहर फेंकने के लिए त्वचा के सारे छेद खुल जाते हैं और पसीना बहने लगता है।
  • नसों में सिकुड़न: घबराहट की वजह से नसें तन जाती हैं, जिससे शरीर को सामान्य होने में बहुत समय लगता है।

क्या बहुत ज़्यादा पसीना आना किसी गंभीर बीमारी का संकेत है?

अगर आपको बैठे-बैठे बहुत ज़्यादा पसीना आ रहा है, तो इसे यूं ही न टालें। यह शरीर में पनप रही किसी बड़ी दिक्कत का इशारा हो सकता है:

  • ब्लड शुगर का गिरना: जब शरीर में अचानक ताकत या शुगर की कमी होती है, तो बहुत तेज़ ठंडा पसीना आता है।
  • थायराइड की समस्या: इस ग्रंथि के बिगड़ने से शरीर का तापमान नियंत्रण से बाहर हो जाता है और बेवजह पसीना आता है।
  • दिल की बीमारियाँ: अगर सीने में भारीपन के साथ माथे पर ठंडा पसीना आए, तो यह दिल के दौरे की सबसे बड़ी और शुरुआती चेतावनी है।
  • अंदरूनी इन्फेक्शन: शरीर में छिपे हुए किसी बड़े संक्रमण की वजह से रात के समय सोते हुए बहुत पसीना आता है।

आयुर्वेद के नज़रिए से पसीने और शरीर की गर्मी को कैसे समझें?

आयुर्वेद के अनुसार, हमारा शरीर वात, पित्त और कफ से मिलकर बना है। पसीने का सीधा संबंध पित्त यानी शरीर की गर्मी और आग वाले तत्व से है। जब खानपान या गलत आदतों की वजह से शरीर का पित्त बहुत ज़्यादा बढ़ जाता है, तो शरीर उस फालतू गर्मी को बाहर निकालने के लिए पसीने का सहारा लेता है। आयुर्वेद मानता है कि जब तक आप अपने शरीर की अंदरूनी गर्मी को शांत नहीं करेंगे, पसीने की यह दिक्कत कभी दूर नहीं होगी। इसे शांत करने के लिए पेट और मन दोनों को ठंडा रखना पड़ता है।

शरीर की फालतू गर्मी और पसीना सोखने वाली असरदार जड़ी-बूटियाँ

प्रकृति ने हमें ऐसी कई बेहतरीन चीज़ें दी हैं जो शरीर को अंदर से ठंडा रखने का काम बहुत खूबी से करती हैं:

  • चंदन: चंदन का लेप माथे पर लगाने या इसका शर्बत पीने से शरीर की भयंकर गर्मी तुरंत शांत होती है।
  • खस: यह एक बहुत ही ठंडी जड़ी-बूटी है, जिसका पानी पीने से ज़्यादा पसीना आने की समस्या काफी हद तक कम हो जाती है।
  • धनिया के बीज: रात भर पानी में भीगे हुए धनिए का पानी सुबह पीने से बढ़ा हुआ पित्त काबू में आ जाता है।
  • पुदीना: यह सीधे आपके पेट की गर्मी को मारता है और नसों को आराम देकर पसीना निकलने की प्रक्रिया को धीमा करता है।

क्या हर समय ख्यालों में उलझे रहने से भी शरीर में पसीना बढ़ता है?

बिल्कुल! आप जितना ज़्यादा सोचते हैं, आपका दिमाग उतना ही ज़्यादा थकता है और तनाव में रहता है। ज़्यादा सोचने पर हमारे शरीर का अलार्म सिस्टम    चालू हो जाता है। शरीर को लगता है कि सामने कोई बड़ा खतरा है और वह उससे लड़ने के लिए खुद को तैयार करता है। इसी दिमागी भागदौड़ में साँस तेज़ हो जाती है और माथे से खूब सारा पसीना निकलने लगता है। इसलिए कहा जाता है कि अगर मन शांत रहे तो शरीर का तापमान भी हमेशा एकदम सही रहता है।

हमारी वो आम गलतियाँ जो शरीर में गर्मी और पसीना दोनों बढ़ाती हैं

हम अक्सर अनजाने में कुछ ऐसा खा या पी लेते हैं जो हमारी परेशानी को दोगुना कर देता है:

  • खाली पेट चाय-कॉफी: यह नसों में तुरंत उत्तेजना बढ़ाती है जिससे गर्मी और पसीना दोनों ज़्यादा आते हैं।
  • बहुत ज़्यादा तीखा खाना: पेट के अंदर आग पैदा करता है जिसे निकालने के लिए शरीर पानी छोड़ता है।
  • शराब और सिगरेट: शरीर के खून को बहुत गर्म कर देते हैं जिससे त्वचा के रोमछिद्रों से पसीना छलकने लगता है।
  • सिंथेटिक और टाइट कपड़े: ये कपड़े हवा को शरीर तक पहुँचने नहीं देते, जिससे पसीना सूखने की बजाय और बहने लगता है।
  • पानी बहुत कम पीना: शरीर खुद को ठंडा नहीं रख पाता और पसीने की ग्रंथियों पर बेकार का दबाव पड़ता है।
  • भीग जाता है।

बिना दवाई के पसीने की समस्या से छुटकारा पाने के आसान घरेलू नुस्खे

आप कुछ बहुत ही आसान और घरेलू तरीके अपनाकर इस परेशानी से काफी आराम पा सकते हैं:

  • दिन भर में भरपूर मात्रा में पानी पिएँ और नींबू पानी जैसी ठंडी चीज़ें अपनी डाइट में ज़रूर शामिल करें।
  • नहाने के पानी में थोड़ा सा फिटकरी का पाउडर या नीम के पत्ते मिला लें, इससे पसीने की बदबू और ज़्यादा पसीना आना दोनों कम हो जाते हैं।
  • हमेशा सूती और ढीले-ढाले कपड़े पहनें ताकि शरीर को भरपूर हवा लगती रहे और पसीना बहुत आसानी से सूख जाए।
  • जब भी आपको अंदर से घबराहट लगे तो बस 5 मिनट के लिए आँखें बंद करके आराम से लंबी और गहरी साँसें लें, पसीना आना तुरंत कम हो जाएगा।

शरीर को अंदर से ठंडा रखने के लिए रोज़मर्रा की ज़िंदगी में करें ये छोटे बदलाव

अपनी दिनचर्या में थोड़ा सा सुधार करके आप बहुत बड़े फायदे देख सकते हैं:

  • पानी वाले फल खाएँ: अपने खाने में खीरा, तरबूज और संतरा जैसी चीज़ें ज़्यादा खाएँ जिनमें पानी बहुत अच्छी मात्रा में होता है।
  • सुबह की सैर करें: रोज़ सुबह हल्की सैर करने से शरीर का तापमान सही बना रहता है और खून का बहाव सुधरता है।
  • समय पर सोएँ: रात को समय पर सोने की आदत डालें ताकि शरीर की थकावट दूर हो सके और नसें एकदम शांत रहें।
  • ध्यान और योग: रोज़ कुछ देर शांत बैठकर ध्यान लगाएँ, यह दिमाग की उलझन को सुलझाता है और शरीर को रिलैक्स करता है।

आयुर्वेद पसीने की इस परेशानी को जड़ से कैसे खत्म करता है?

आयुर्वेद सिर्फ पसीना आना बंद नहीं करता, बल्कि शरीर के अंदर बढ़ी हुई गर्मी का जड़ से इलाज करता है। इसमें सबसे पहले डॉक्टर आपकी नाड़ी देखकर आपके शरीर का बढ़ा हुआ पित्त समझते हैं। शरीर से फालतू गर्मी और ज़हर निकालने के लिए कुछ खास आयुर्वेदिक लेप और तेलों से मालिश की जाती है। इसके साथ ही आपका डाइट प्लान कुछ इस तरह सेट किया जाता है जो आपके खून को साफ रखे। इससे शरीर खुद-ब-खुद अपना तापमान सही रखना सीख जाता है।

पसीने की समस्या के लिए आपको डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए?

घरेलू उपाय अपनाने के बाद भी अगर समस्या बनी रहे, तो आपको डॉक्टर के पास ज़रूर जाना चाहिए:

  • जब रात को सोते समय इतना पसीना आए कि आपके कपड़े और बिस्तर पूरी तरह पानी-पानी हो जाएँ।
  • पसीने के साथ-साथ अगर सीने में भारीपन, बाँह में दर्द, चक्कर या साँस लेने में तकलीफ होने लगे।
  • बिना डाइटिंग या कसरत के अचानक आपका वज़न बहुत तेज़ी से गिरने लगे।
  • पसीना आने के साथ बहुत ज़्यादा कमज़ोरी महसूस हो और आँखों के सामने अंधेरा छाने लगे।

आधुनिक इलाज और आयुर्वेदिक तरीके में क्या फर्क है?

पहलू आधुनिक चिकित्सा (एलोपैथी) आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
मुख्य लक्ष्य अत्यधिक पसीने (Hyperhidrosis) के कारण की पहचान कर लक्षणों को नियंत्रित करना। शरीर के संतुलन, आहार-विहार और समग्र स्वास्थ्य पर ध्यान।
उपचार का तरीका मेडिकेटेड लोशन, एंटीपर्सपिरेंट, दवाइयाँ या आवश्यकता अनुसार अन्य चिकित्सकीय उपचार। जड़ी-बूटियाँ, आहार-विहार, पंचकर्म और पारंपरिक उपचार पद्धतियाँ।
शरीर पर प्रभाव कई उपचार अपेक्षाकृत जल्दी राहत दे सकते हैं और कारण के अनुसार चुने जाते हैं। धीरे-धीरे सुधार और शरीर के समग्र संतुलन पर ज़ोर।
असर होने की गति कई मामलों में जल्दी परिणाम मिल सकते हैं। प्रभाव नियमित पालन के साथ धीरे-धीरे दिखाई देता है।
दीर्घकालिक दृष्टिकोण रोग नियंत्रण, कारण का उपचार और नियमित फॉलो-अप पर ध्यान। संतुलित जीवनशैली और आहार के माध्यम से दीर्घकालिक स्वास्थ्य बनाए रखने का प्रयास।
जीवनशैली की भूमिका चिकित्सकीय उपचार के साथ स्वच्छता, उचित कपड़े और ट्रिगर्स से बचाव की सलाह। दिनचर्या, संतुलित भोजन और प्राकृतिक जीवनशैली को महत्वपूर्ण माना जाता है।

आखिरी और सबसे ज़रूरी बात जो आपको हमेशा याद रखनी चाहिए

हमेशा याद रखें कि पसीना आना कोई बुरी बात नहीं है, यह हमारे शरीर का सफाई अभियान है। लेकिन जब यह हद से ज़्यादा बढ़ जाए, तो यह शरीर की एक पुकार है जिसे आपको कभी अनसुना नहीं करना चाहिए। अपनी इस भागदौड़ भरी ज़िंदगी में थोड़ा ठहराव लाएँ। शरीर को अंदर से ठंडा रखने वाले काम करें। तनाव को खुद पर हावी न होने दें। जब आपका मन और शरीर दोनों अंदर से शांत रहेंगे, तो पसीने की यह बेकाबू नदियाँ खुद ब खुद रुक जाएँगी और आप बहुत सुकून महसूस करेंगे।

References

https://www.healthline.com/health/sweating

https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/30589248/

https://www.healthdirect.gov.au/excessive-sweating-hyperhidrosis

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

हाँ, रोज़मर्रा के काम और गर्मी में पसीना आना आम बात है, लेकिन बिना कुछ किए आराम करते समय भी पसीना आना ध्यान देने वाली बात है।

जब पसीने की ग्रंथियाँ ज़रूरत से ज़्यादा काम करती हैं, तो डॉक्टरों की भाषा में इसे एक खास बीमारी माना जाता है, जिसमें इंसान को बिना गर्मी के पसीना आता रहता है।

बिल्कुल, जब मन में बेचैनी होती है तो शरीर तनाव वाले हार्मोन बनाता है, जिससे शरीर की गर्माहट बढ़ती है और पानी बाहर निकलने लगता है।

रात को पसीना आना खून में शुगर की कमी, किसी अंदरूनी इन्फेक्शन या हार्मोन के बहुत बड़े बदलाव का सीधा संकेत हो सकता है।

हाँ, चाय और कॉफी में मौजूद तत्व नसों को तुरंत उत्तेजित करते हैं, जिससे शरीर में गर्मी पैदा होती है और रोमछिद्रों से पसीना बढ़ता है।

यह दिल के दौरे का एक बहुत बड़ा और शुरुआती लक्षण हो सकता है, ऐसे में बिना देरी किए तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए।

ठंडे पानी से नहाने से शरीर का तापमान कुछ देर के लिए बिल्कुल सामान्य हो जाता है, जिससे पसीने से तुरंत और अच्छी राहत मिलती है।

नहाने के पानी में नीम के ताज़े पत्ते या थोड़ी सी फिटकरी मिलाने से बदबू पैदा करने वाले कीटाणु मर जाते हैं और त्वचा साफ रहती है।

सूती कपड़े हवा को शरीर तक बहुत आसानी से पहुँचने देते हैं और पसीना जल्दी सोख लेते हैं, जिससे त्वचा को साँस लेने का पूरा मौका मिलता है।

हाँ, आयुर्वेद शरीर की अंदरूनी गर्मी और बिगड़े हुए पित्त को कुदरती चीज़ों से शांत करके इस समस्या को हमेशा के लिए जड़ से ठीक करने में मदद करता है।

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