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Night Shift से Body Clock बिगड़ता है - Fix करने का Practical Plan

Information By Dr. Keshav Chauhan

आजकल बीपीओ (BPO), आईटी (IT), और अस्पतालों में नाइट शिफ्ट (Night Shift) करने वाले लोगों का 'बॉडी क्लॉक' (Body Clock) पूरी तरह बिगड़ चुका है। दिन में सोना और रात में जागना शरीर के प्राकृतिक चक्र के खिलाफ है। एलोपैथी में नींद न आने या दिन भर की थकावट को मिटाने के लिए अक्सर स्लीपिंग पिल्स (Sleeping Pills) और कैफीन (Caffeine) का सहारा लिया जाता है। ये दवाइयाँ कुछ समय के लिए दिमाग को सुन्न कर नींद तो ला देती हैं, लेकिन जड़ पर काम न करने से इनकी भयंकर लत लग जाती है और शरीर अंदर से खोखला हो जाता है। आयुर्वेद के अनुसार, रात में जागने (रात्रि जागरण) से शरीर में 'वात' (Vata) और 'पित्त' (Pitta) दोष भयंकर रूप से भड़क जाते हैं और जठराग्नि सुस्त पड़ जाती है। जीवा आयुर्वेद प्राकृतिक जड़ी-बूटियों और एक 'प्रैक्टिकल प्लान' के ज़रिए आपके नर्वस सिस्टम को हील कर इस भयंकर खतरे को जड़ से मिटाता है ताकि आप अपनी ड्यूटी और सेहत दोनों को बैलेंस कर सकें।

Night Shift से Body Clock (Circadian Rhythm) का बिगड़ना असल में क्या है?

हमारे दिमाग में एक 'मास्टर क्लॉक' होती है जिसे सर्कैडियन रिदम (Circadian Rhythm) कहते हैं। यह क्लॉक सूरज की रोशनी के हिसाब से काम करती है। रात होने पर दिमाग 'मेलाटोनिन' (Melatonin) नाम का स्लीप हार्मोन बनाता है और दिन में 'कॉर्टिसोल' (Cortisol) बनाकर हमें एक्टिव रखता है। जब आप नाइट शिफ्ट करते हैं, तो कृत्रिम रोशनी के कारण दिमाग भयंकर कंफ्यूजन में आ जाता है। वह रात में स्लीप हार्मोन बनाता है (जब आपको काम करना होता है) और सुबह जब आप सोने जाते हैं, तो सूरज की रोशनी के कारण कॉर्टिसोल बन जाता है। स्लीपिंग पिल्स सिर्फ दिमाग को बेहोश करती हैं, जबकि असली गड़बड़ी शरीर के अंदर हार्मोन्स के भयंकर असंतुलन और नसों के तनाव में चल रही होती है।

Body Clock बिगड़ने के भयंकर शारीरिक संकेत

जब आपका प्राकृतिक स्लीप-वेक साइकिल (Sleep-Wake Cycle) डैमेज हो जाता है, तो शरीर द्वारा दिए जाने वाले डरावने लक्षण इस प्रकार हैं:

  • भयंकर अनिद्रा (Insomnia): सुबह शिफ्ट से आने के बाद भयंकर थकान होने के बावजूद नींद न आना या बार-बार आँख खुलना।
  • पेट में भयंकर गैस और एसिडिटी: रात को 2 या 3 बजे हैवी खाना खाने से पाचन तंत्र पूरी तरह जाम हो जाना और सुबह भयंकर एसिडिटी होना।
  • ब्रेन फॉग (Brain Fog) और चिड़चिड़ापन: दिमाग का सुन्न रहना, याददाश्त कमज़ोर होना और छोटी-छोटी बातों पर भयंकर गुस्सा आना।
  • अचानक वज़न बढ़ना: मेटाबॉलिज़्म के पूरी तरह क्रैश हो जाने के कारण बिना ज़्यादा खाए भी पेट का भयंकर रूप से बाहर निकल आना।

ये संकेत अगर लगातार दिखें तो तुरंत स्लीपिंग पिल्स रोकें और अपनी दिनचर्या को सुधारने के लिए चिकित्सक से परामर्श लें।

Night Shift के कारण शरीर खराब होने के असली और छिपे हुए कारण

सिर्फ नींद की कमी ही नहीं, आपके शरीर को अंदर से खोखला करने वाले ये गहरे अंदरूनी कारण होते हैं:

  • भयंकर 'वात' प्रकोप: आयुर्वेद के अनुसार, रात का समय आराम का होता है। रात भर जागने से शरीर में भयंकर रुखापन और 'वात' (हवा) बढ़ जाती है, जो जोड़ों का दर्द और एंग्ज़ायटी (Anxiety) लाती है।
  • कफ का समय और पित्त का भड़कना: रात को पित्त और वात भड़कते हैं, जबकि दिन में जब आपको सोना होता है, तब कफ का समय होता है। यह उल्टा चक्र पूरे शरीर के दोषों को भयंकर रूप से बिगाड़ देता है।
  • रात को मंद 'अग्नि': रात के समय जठराग्नि (Digestion) सबसे कमज़ोर होती है। नाइट शिफ्ट में भारी खाना खाने से वह पचता नहीं है और भयंकर 'आम' (Toxins) बनकर खून को दूषित करता है।

इन 'Hidden Risks' को अनदेखा करने के गंभीर जोखिम

इस स्थिति को अगर सिर्फ 'रूटीन' मानकर अनदेखा किया जाए, तो यह कई गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है:

  • हार्ट अटैक और बीपी का खतरा: लगातार वात और तनाव बढ़ने से दिल की धड़कन अनियमित हो जाती है और कम उम्र में ही हार्ट अटैक का भयंकर जोखिम बन जाता है।
  • गंभीर डिप्रेशन (Severe Depression): हार्मोन्स के असंतुलन से दिमाग का सेरोटोनिन (Serotonin) लेवल गिर जाता है, जिससे इंसान भयंकर डिप्रेशन में चला जाता है।
  • डायबिटीज़ और फैटी लिवर: मेटाबॉलिज़्म क्रैश होने से शरीर इंसुलिन का सही इस्तेमाल नहीं कर पाता, जो भविष्य में भयंकर डायबिटीज़ का कारण बनता है।

Body Clock पर आयुर्वेद का क्या चमत्कारी नज़रिया है?

आयुर्वेद में 'निद्रा' (नींद) को जीवन के तीन मुख्य स्तंभों (उपस्तंभ) में से एक माना गया है। आयुर्वेद के अनुसार, 'रात्रि जागरण' (रात में जागना) शरीर के ओजस (Immunity) को पूरी तरह सुखा देता है। आधुनिक विज्ञान सिर्फ बाहर से मेलाटोनिन की गोलियाँ खिलाने पर ज़ोर देता है, जबकि जीवा आयुर्वेद के डॉक्टर नाड़ी देखकर मर्ज़ को पकड़ते हैं कि रात्रि जागरण से वात भड़का है या पित्त। आयुर्वेद का मकसद आपको नशे की गोलियाँ देना नहीं है, बल्कि वो चाहते हैं कि 'प्रैक्टिकल प्लान' और जड़ी-बूटियों के ज़रिए आपकी नसें शांत हों, वात संतुलित हो, और दिन के समय भी आपको गहरी और प्राकृतिक नींद आ सके।

जीवा आयुर्वेद Body Clock को हील करने के लिए कैसे काम करता है?

जीवा आयुर्वेद का उपचार दृष्टिकोण पूरी तरह से व्यक्तिगत है। इलाज शुरू करने से पहले आयुर्वेद एक्सपर्ट इन मुख्य बातों पर बारीकी से ध्यान देते हैं:

  • कस्टमाइज़्ड इलाज: हर व्यक्ति का शरीर और शिफ्ट का समय अलग होता है, इसलिए इलाज पूरी तरह उनके अनुकूल ही तय किया जाता है।
  • लक्षणों की पहचान: मरीज़ की नींद की क्वालिटी, गैस की समस्या और मानसिक तनाव की बारीकी से जाँच की जाती है।
  • पुरानी मेडिकल हिस्ट्री: मरीज़ द्वारा ली जा रही स्लीपिंग पिल्स या भारी कैफीन का पूरा रिकॉर्ड देखा जाता है।
  • सटीक इलाज की रूपरेखा: कुपित वात-पित्त दोषों को पकड़ने के बाद ही नसों को ताकत देने और नींद को गहरा करने का सबसे सटीक आयुर्वेदिक इलाज शुरू किया जाता है।

नसों को शांत और नींद को गहरी करने वाली अचूक जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद में नर्वस सिस्टम को रिलैक्स करने, वात शांत करने और प्राकृतिक नींद लाने के लिए ये जड़ी-बूटियाँ बेहद असरदार हैं:

  • जटामांसी (Jatamansi): यह आयुर्वेद में दिमाग को शांत करने और बिना किसी नशे के भयंकर गहरी नींद लाने की सबसे चमत्कारी जड़ी-बूटी है।
  • अश्वगंधा (Ashwagandha): यह नाइट शिफ्ट के भयंकर शारीरिक और मानसिक तनाव (Cortisol) को सोख लेता है और मांसपेशियों की थकान दूर करता है।
  • ब्राह्मी (Brahmi): यह नसों को शीतलता देती है और 'ब्रेन फॉग' को खत्म कर फोकस को प्राकृतिक रूप से बढ़ाती है।
  • आंवला (Amla): यह रात भर जागने और चाय-कॉफी पीने से शरीर में भड़के हुए पित्त (गर्मी) को शांत करता है।

नर्वस सिस्टम को 'रीसेट' करने की पंचकर्म चिकित्सा

प्राकृतिक तरीके से शरीर को अंदर से शुद्ध कर, स्ट्रेस को 'रीसेट' (Reset) करने की आयुर्वेदिक प्रक्रिया:

  • शिरोधारा (Shirodhara): माथे पर औषधीय तेल की धार गिराने की यह थेरेपी दिमाग के भयंकर तनाव को तुरंत शांत करती है और 'मास्टर क्लॉक' को रिलैक्स कर प्राकृतिक नींद लाती है।
  • पादाभ्यंग (Padabhyanga): दिन में सोने से पहले पैरों के तलवों की गाय के घी या औषधीय तेल से मालिश करना भयंकर वात को शांत करता है और तुरंत गहरी नींद लाता है।

Night Shift वालों के लिए Practical Diet & Lifestyle Plan (Fixing the Clock)

आयुर्वेदिक वेलनेस में यह समझना बहुत ज़रूरी है कि जड़ी-बूटियाँ तभी काम करेंगी जब आपका रूटीन सही होगा:

क्या खाएँ (Diet Plan)?

  • शिफ्ट के दौरान: रात को 12 बजे के बाद भारी खाना बिल्कुल न खाएँ। सिर्फ मूंग दाल का सूप, मखाने या भुने चने लें। भारी खाना भयंकर गैस बनाता है।
  • सोने से पहले: सुबह घर आकर खाली पेट न सोएँ। सोने से पहले आधे गिलास गर्म दूध में चुटकी भर जायफल (Nutmeg) और एक चम्मच गाय का घी डालकर पिएँ। यह वात को शांत कर अचूक नींद लाता है।

क्या न करें (Lifestyle Mistakes)?

  • कैफीन पर रोक: शिफ्ट के आखिरी 4 घंटों में चाय या कॉफी बिल्कुल न पिएँ, यह आपके दिमाग को भयंकर अलर्ट कर देगी और घर जाकर नींद नहीं आएगी।
  • ब्लैकआउट कर्टेन्स (Blackout Curtains): सुबह घर आकर कमरे को बिल्कुल अँधेरा (गुफा जैसा) कर लें। सूरज की रोशनी मेलाटोनिन को मार देती है। आँखों पर स्लीप मास्क लगाएँ।
  • स्क्रीन टाइम: सोने से एक घंटे पहले फोन बिल्कुल बंद कर दें। स्क्रीन की नीली रोशनी (Blue light) नींद की भयंकर दुश्मन है।

जीवा आयुर्वेद में रोगी की गहराई से जाँच कैसे होती है?

जीवा आयुर्वेद में मरीज़ की जाँच सिर्फ नींद न आने की बात सुनकर नहीं, बल्कि पूरे शरीर की समझ के साथ की जाती है।

  • सबसे पहले आपकी परेशानी, शिफ्ट की टाइमिंग और दिन में सोने के माहौल को आराम से सुना जाता है।
  • आपके द्वारा इस्तेमाल की गई नींद की गोलियों और कैफीन (कॉफी/चाय) की हिस्ट्री के बारे में पूछा जाता है।
  • आपके आहार, रात को खाने के समय और पेट साफ (कब्ज़) होने की स्थिति पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
  • नाड़ी जाँच और शरीर की प्रकृति को जानकर वात-पित्त के भयंकर असंतुलन का पता लगाया जाता है।

हमारे यहाँ आपके इलाज का सफर कैसे होता है?

जीवा आयुर्वेद में हम इलाज की पूरी प्रक्रिया को बहुत ही व्यवस्थित और सही क्रम में रखते हैं, ताकि आपको अपनी बीमारी के लिए सबसे सटीक समाधान मिल सके।

  • अपनी जानकारी साझा करें: इलाज की शुरुआत के लिए अपनी सेहत से जुड़ी जरूरी जानकारी दें। इसके लिए आप सीधे +919266714040 पर कॉल करके अपनी समस्या बता सकते हैं।
  • डॉक्टर से अपॉइंटमेंट तय करें: आपकी सुविधा के अनुसार डॉक्टर से बात करने का समय तय किया जाता है, आप क्लिनिक विजिट या ₹49 में वीडियो कंसल्टेशन के जरिए घर बैठे भी जुड़ सकते हैं।
  • बीमारी को समझना: डॉक्टर आपसे विस्तार से बात करके आपकी तकलीफ, लाइफस्टाइल और शरीर की प्रकृति (Prakriti) को समझते हैं, ताकि बीमारी की असली वजह तक पहुँचा जा सके।
  • कस्टमाइज्ड ट्रीटमेंट प्लान: पूरी जांच के बाद आपके लिए एक पर्सनलाइज्ड इलाज योजना बनाई जाती है, जिसमें आयुर्वेदिक दवाइयाँ, डाइट और लाइफस्टाइल सुधार शामिल होते हैं, ताकि आपको अंदर से स्थायी राहत मिल सके।

बॉडी क्लॉक को 'रीसेट' होने में कितना समय लगता है?

जीवा आयुर्वेद में इलाज पूरी तरह से हर मरीज़ के हिसाब से किया जाता है:

  • हल्की समस्या में सुधार: अगर आपने सही प्रैक्टिकल प्लान अपना लिया है, तो 2 से 3 हफ्तों में ही गैस खत्म हो जाती है और दिन में 5-6 घंटे की नींद आने लगती है।
  • पुरानी बीमारी का समय: अगर आप सालों से नाइट शिफ्ट में हैं और स्लीपिंग पिल्स ले रहे हैं, तो वात को पूरी तरह शांत होने और नसों को 'रीसेट' होने में 2 से 4 महीने लग सकते हैं।
  • स्थायी परिणाम: मरीज़ अगर जीवा की जड़ी-बूटियों (जटामांसी, अश्वगंधा) और ब्लैकआउट रूटीन का कड़ाई से पालन करता है, तो शिफ्ट के दौरान भी वह पूरी तरह स्वस्थ रहता है।

जीवा आयुर्वेद में इलाज का अनुमानित खर्च

आपके स्वास्थ्य के लिए आवश्यक आर्थिक निवेश को समझना बहुत महत्वपूर्ण है। जीवा आयुर्वेद में, हम अपनी सेवाओं के खर्च में पूरी पारदर्शिता रखते हैं, जिससे आप अपनी चिकित्सीय ज़रूरतों के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प चुन सकें।

इलाज का खर्च

जो मरीज़ मानक और निरंतर देखभाल चाहते हैं, उनके लिए दवा और परामर्श का मासिक खर्च आमतौर पर Rs.3,000 से Rs.3,500 के बीच होता है। कृपया ध्यान दें कि यह एक अनुमानित आधार है। अंतिम खर्च मरीज़ की स्थिति की सटीक प्रकृति और गंभीरता पर गहराई से निर्भर करता है।

प्रोटोकॉल

अधिक व्यापक और व्यवस्थित दृष्टिकोण के लिए, हम विशेष पैकेज प्रोटोकॉल प्रदान करते हैं। ये योजनाएँ शारीरिक लक्षणों और समग्र जीवनशैली सुधार दोनों को संबोधित करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।

पैकेज में शामिल हैं:

इस प्रोटोकॉल के खर्च में Rs.15,000 से Rs.40,000 तक का एकमुश्त भुगतान शामिल है, जो इलाज की पूरी 3 से 4 महीने की अवधि को कवर करता है।

जीवाग्राम

गहन और पूरी तरह से समर्पित देखभाल की आवश्यकता वाले मरीज़ों के लिए, हमारे जीवाग्राम केंद्र उपचार का बेहतरीन अनुभव प्रदान करते हैं। जीवाग्राम एक शांत, पर्यावरण के अनुकूल माहौल में स्थित एक समग्र स्वास्थ्य केंद्र है।

कार्यक्रम में आमतौर पर शामिल हैं:

जीवाग्राम में 7-दिनों के स्वास्थ्य प्रवास का खर्च लगभग ₹1 लाख है, जो आपके शरीर और दिमाग को फिर से तरोताज़ा करने में मदद करने के लिए निरंतर व्यक्तिगत देखभाल सुनिश्चित करता है।

लोग जीवा आयुर्वेद पर क्यों भरोसा करते हैं?

जीवा आयुर्वेद में हमारा मकसद सिर्फ लक्षणों को कुछ समय के लिए दबाना नहीं, बल्कि बीमारी की असली वजह को जड़ से खत्म करना है। यही वह खास बात है जिसकी वजह से लाखों मरीज़ हम पर दिल से भरोसा करते हैं।

  • जड़ कारण पर ध्यान: सिर्फ लक्षण नहीं, बीमारी की असली वजह को समझकर इलाज किया जाता है।
  • व्यक्तिगत उपचार: हर मरीज के शरीर, प्रकृति और लाइफस्टाइल के अनुसार अलग प्लान बनाया जाता है।
  • सिस्टेमैटिक जांच: वात असंतुलन और मेटाबॉलिज्म को गहराई से समझकर इलाज तय किया जाता है।
  • प्राकृतिक दवाइयाँ: शुद्ध जड़ी-बूटियों पर आधारित दवाइयाँ, बिना शरीर पर अतिरिक्त बोझ डाले।
  • अनुभवी डॉक्टर: आयुर्वेद विशेषज्ञों की टीम द्वारा लगातार मार्गदर्शन दिया जाता है।
  • बेहतर परिणाम: 90%+ मरीजों में धीरे-धीरे स्पष्ट और सकारात्मक सुधार देखा गया है।

आधुनिक चिकित्सा (Allopathy) और आयुर्वेदिक उपचार में क्या बड़ा अंतर है?

पहलू आधुनिक चिकित्सा आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
इलाज का मुख्य लक्ष्य दवाओं, मेलाटोनिन या व्यवहारिक थेरेपी से नींद को सुधारना नर्वस सिस्टम, दिनचर्या और मानसिक संतुलन को बेहतर बनाकर प्राकृतिक नींद को सपोर्ट करना
नज़रिया समस्या को स्लीप डिसऑर्डर, तनाव या न्यूरोकेमिकल असंतुलन के रूप में देखना इसे वात-पित्त असंतुलन, रात्रि जागरण और समग्र जीवनशैली से जोड़कर देखना
उपचार तरीका स्लीप मेडिकेशन, CBT-I, रिलैक्सेशन तकनीक और मेडिकल मैनेजमेंट जटामांसी, शिरोधारा, ध्यान, योग और आयुर्वेदिक दिनचर्या पर ज़ोर
डाइट और लाइफस्टाइल कैफीन कम करना, नियमित स्लीप शेड्यूल और स्क्रीन टाइम नियंत्रण की सलाह वात-शामक आहार, समय पर भोजन, तेल मालिश और स्लीप हाइजीन को महत्वपूर्ण मानना
लंबा असर कुछ लोगों को लंबे समय तक उपचार या निगरानी की आवश्यकता हो सकती है जीवनशैली संतुलन और मानसिक शांति के माध्यम से दीर्घकालिक नींद सुधार पर ज़ोर

डॉक्टर की सलाह कब लें?

नाइट शिफ्ट के दौरान अगर ये भयंकर संकेत दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए:

  • लगातार 4-5 दिन तक पलक भी न झपकना और दिमाग में भयंकर शोर या ख्यालों का चलना।
  • शिफ्ट के दौरान सीने में भयंकर भारीपन, दिल की तेज़ धड़कन और घबराहट होना।
  • बिना किसी कारण के अचानक रोने का मन करना या आत्महत्या जैसे भयंकर विचार आना (Severe Depression)।
  • पेट में भयंकर जलन और मल (Stool) से खून आना (अत्यधिक पित्त के कारण)।

निष्कर्ष

निष्कर्ष: आयुर्वेद के अनुसार, नाइट शिफ्ट और रात्रि जागरण शरीर के वात और पित्त दोष को भयंकर रूप से भड़काकर 'ओजस' को खत्म कर देते हैं। स्लीपिंग पिल्स (Sleeping Pills) खाकर दिमाग को सुन्न करना आपके नर्वस सिस्टम को पूरी तरह डैमेज कर सकता है। असली इलाज एक 'प्रैक्टिकल प्लान' अपनाना है—दिन में अँधेरे कमरे में सोना, रात को कैफीन व भारी खाना बंद करना और जटामांसी व अश्वगंधा जैसी चमत्कारी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों का सपोर्ट लेना। जीवा आयुर्वेद आपके बिगड़े हुए 'बॉडी क्लॉक' को प्राकृतिक रूप से इस तरह सेट कर देता है कि आप नाइट शिफ्ट करते हुए भी बिना किसी भयंकर गोली के जीवन भर स्वस्थ और एक्टिव बने रहें।

FAQs

नींद की गोलियाँ दिमाग को प्राकृतिक नींद नहीं देतीं, बल्कि उसे सुन्न (Sedate) कर देती हैं। इनके लगातार इस्तेमाल से लत लग जाती है, सुबह भयंकर सिरदर्द (Hangover) रहता है और याददाश्त कमज़ोर हो जाती है।

लंबे समय तक कृत्रिम मेलाटोनिन खाने से शरीर का अपना प्राकृतिक मेलाटोनिन बनाने का सिस्टम सुस्त पड़ जाता है। आयुर्वेद में जटामांसी जैसी जड़ी-बूटियाँ शरीर को खुद मेलाटोनिन बनाने में मदद करती हैं।

रात के समय जठराग्नि (पाचन) बहुत कमज़ोर होती है। इसलिए पिज़्ज़ा या भारी खाना न खाएँ। सिर्फ मूंग की दाल का सूप, रोस्टेड मखाने या एक कटोरी पपीता लें, जो आसानी से पच जाए।

सूरज की रोशनी (UV Rays) दिमाग को सिग्नल देती है कि सुबह हो गई है, जिससे 'कॉर्टिसोल' (Wake-up hormone) बन जाता है। इसलिए बाहर निकलते समय गॉगल्स पहनें और कमरे में ब्लैकआउट पर्दे (Blackout curtains) लगाएँ।

बिल्कुल नहीं। जटामांसी 100% सुरक्षित और गैर-नशीली (Non-addictive) आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है। यह केवल नसों के भयंकर वात को शांत करती है और प्राकृतिक गहरी नींद लाती है।

सोने से पहले अपने पैरों के तलवों पर थोड़ा सा गाय का घी या सरसों का तेल रगड़ें (पादाभ्यंग)। यह वात को नीचे की तरफ खींचता है और नींद को बार-बार टूटने से रोकता है।

क्योंकि वे रात को 'पित्त' के समय पर जागते हैं और गरिष्ठ भोजन करते हैं। चाय-कॉफी पीने से पेट में भयंकर तेज़ाब बनता है। इसे 'अम्लपित्त' कहते हैं, जिसे ठीक करने के लिए रात का खाना हल्का रखना ज़रूरी है।

शिफ्ट की शुरुआत में (रात 8-10 बजे) कॉफी पी जा सकती है, लेकिन शिफ्ट खत्म होने के 4 से 5 घंटे पहले कैफीन बिल्कुल छोड़ दें, वरना यह आपके दिमाग को दिन में सोने नहीं देगा।

सामान्य लोगों के लिए दिन में सोना (दिवास्वप्न) कफ बढ़ाता है, लेकिन जो लोग 'रात्रि जागरण' (नाइट शिफ्ट) करते हैं, आयुर्वेद उन्हें दिन में खाली पेट सोने की अनुमति देता है ताकि वात शांत हो सके।

नींद लाने के लिए आधा गिलास गर्म दूध में चुटकी भर जायफल (Nutmeg) और आधा चम्मच गाय का घी डालकर पीना सबसे चमत्कारी उपाय है। यह दिमाग की नसों को तुरंत रिलैक्स कर देता है।

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