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Water reminder routine health में कैसे मदद करता है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

अक्सर हम सोचते हैं कि पानी सिर्फ तब पीना चाहिए जब गला सूखने लगे या तेज़ प्यास लगे। लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि काम की भागदौड़ में हम अक्सर पानी पीना ही भूल जाते हैं? जब आप दिनभर पानी नहीं पीते, तो शाम तक सिर में अजीब सा भारीपन और शरीर में भयंकर थकान होने लगती है। दरअसल, हमारे शरीर का 70 प्रतिशत हिस्सा पानी ही है। जब हम शरीर को सही समय पर पानी नहीं देते, तो इसका सीधा असर हमारे खून, किडनी और दिमाग पर पड़ता है। सिर्फ एक बार में बोतल भर पानी पी लेने से यह कमी पूरी नहीं होती। शरीर को यह बताना बहुत ज़रूरी है कि उसे समय-समय पर नमी की ज़रूरत है, और यहीं काम आता है 'वाटर रिमाइंडर रूटीन'।

पानी का अलार्म सेट करना क्यों ज़रूरी है?

हमारे शरीर का सिस्टम कुछ ऐसा है कि कई बार दिमाग प्यास और भूख के बीच का फर्क ही भूल जाता है। जब आपको पानी की ज़रूरत होती है, तो दिमाग आपको भूख का सिग्नल दे देता है और आप पानी पीने की जगह कुछ खाने लगते हैं। एक वाटर रिमाइंडर (यानी पानी पीने की याद दिलाने वाला रूटीन) आपके शरीर को 'ड्राई मोड' में जाने से रोकता है। जब आप अलार्म के हिसाब से हर घंटे थोड़ा-थोड़ा पानी पीते हैं, तो शरीर की मशीनरी बिना रुके काम करती है। किडनी शरीर की सारी गंदगी आराम से बाहर निकाल पाती है और खून गाढ़ा नहीं होता।

क्या सिर्फ प्यास लगने पर ही पानी पीना चाहिए?

नहीं, यह एक बहुत बड़ी गलतफहमी है। प्यास लगना दरअसल आपके शरीर का आखिरी अलार्म होता है। जब आपको तेज़ प्यास महसूस होती है, तब तक आपका शरीर पहले ही अंदर से डिहाइड्रेट (सूखना) हो चुका होता है। अगर आप प्यास लगने का इंतज़ार कर रहे हैं, तो आप अपने शरीर को नुकसान पहुँचा रहे हैं। एक सही वाटर रिमाइंडर रूटीन आपको प्यास लगने से पहले ही पानी पीने की याद दिलाता है। इससे आपके शरीर के अंदरूनी अंगों को कभी भी सूखेपन का सामना नहीं करना पड़ता और आपकी एनर्जी का लेवल दिनभर एक जैसा बना रहता है।

जब शरीर सूखता है, तो अंदर क्या-क्या बिगड़ता है?

जब हम काम में खो जाते हैं और पानी नहीं पीते, तो हमारे शरीर के अंदर बहुत सारे बदलाव एक साथ होते हैं:

  • खून का गाढ़ा होना: पानी की कमी से खून गाढ़ा हो जाता है, जिससे दिल को उसे पंप करने में बहुत ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है।
  • मांसपेशियों में ऐंठन: शरीर में नमी न होने से नसें सिकुड़ने लगती हैं और पैरों या कमर में अचानक तेज़ दर्द या खिंचाव होने लगता है।
  • कब्ज़ की शुरुआत: आंतों को खाना आगे बढ़ाने के लिए पानी चाहिए होता है। सूखापन आंतों में खाने को जमा कर देता है।
  • थकान और सुस्ती: ऊर्जा बनाने वाली कोशिकाओं को पानी नहीं मिलता, जिससे आप बिना कुछ किए ही थका हुआ महसूस करते हैं।

कम पानी पीने से शरीर में कौन सी बड़ी बीमारियाँ पनपती हैं?

अगर आप रोज़ाना पानी पीने में कंजूसी करते हैं, तो इसे बिल्कुल भी हल्के में न लें। यह आगे चलकर किसी गंभीर बीमारी का रूप ले सकता है:

  • किडनी स्टोन (पथरी): पानी कम होने से यूरिन में मौजूद मिनरल्स जमने लगते हैं, जो बाद में सख्त होकर पथरी बन जाते हैं।
  • यूरिन इन्फेक्शन (UTI): पानी कम पीने से पेशाब की नली में बैक्टीरिया जमा हो जाते हैं, जिससे भयंकर जलन और इन्फेक्शन होता है।
  • गंभीर माइग्रेन: दिमाग की नसों में पानी की कमी होने से लगातार सिरदर्द और माइग्रेन की समस्या घर कर जाती है।
  • स्किन की बीमारियाँ: पसीना न निकलने से शरीर का ज़हर अंदर ही रहता है, जिससे चेहरे पर मुहाँसे और त्वचा पर खुजली शुरू हो जाती है।

पानी पीने का सही तरीका: आयुर्वेद क्या कहता है?

आयुर्वेद के अनुसार, पानी पीने का भी एक सलीका होता है। गटागट खड़े होकर पानी पीना शरीर में फायदे की जगह नुकसान करता है। आयुर्वेद में 'उषापान' यानी सुबह उठकर बासी मुँह गुनगुना पानी पीने का बहुत महत्व बताया गया है। जब आप ज़मीन पर उकड़ू बैठकर, घूँट-घूँट करके पानी पीते हैं, तो आपके मुँह की लार भी पानी के साथ पेट में जाती है। यह लार पेट के एसिड को पूरी तरह शांत कर देती है। वाटर रिमाइंडर आपको सिर्फ पानी पीना नहीं, बल्कि रुककर, बैठकर और तसल्ली से पानी पीना भी सिखाता है।

सादे पानी के अलावा शरीर को हाइड्रेट रखने वाली देसी चीज़ें

प्रकृति ने हमें पानी के अलावा भी बहुत सी ऐसी चीज़ें दी हैं जो शरीर की प्यास बुझाती हैं और तरावट देती हैं:

  • नारियल पानी: यह शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को तुरंत पूरा करता है और अंदरूनी गर्मी को जड़ से खींच लेता है।
  • खीरा और तरबूज़: इनमें 90 प्रतिशत से ज़्यादा पानी होता है। स्नैक्स के टाइम पर वाटर रिमाइंडर बजने पर आप इन्हें खा सकते हैं।
  • छाछ (मट्ठा): यह आंतों को ठंडा रखती है और खाने को पचाने के साथ-साथ शरीर को नमी भी देती है।
  • नींबू पानी: यह न सिर्फ शरीर को हाइड्रेट करता है, बल्कि विटामिन सी देकर इम्युनिटी भी बढ़ाता है।

क्या डिहाइड्रेशन से हमारा दिमाग भी सुन्न पड़ जाता है?

बिल्कुल! हमारा दिमाग 70% से अधिक पानी से बना है। जब आप पानी नहीं पीते, तो दिमाग की कोशिकाएँ सचमुच सिकुड़ने लगती हैं। इसी वजह से जब आप डिहाइड्रेटेड होते हैं, तो आपको कोई भी चीज़ याद रखने में परेशानी होती है, किसी काम में मन नहीं लगता और बेवजह गुस्सा आने लगता है। इसे 'ब्रेन फॉग' कहा जाता है। जैसे ही आपका रिमाइंडर बजता है और आप एक गिलास पानी पीते हैं, दिमाग को तुरंत ऑक्सीजन मिलती है और सुस्ती एक झटके में उड़ जाती है।

प्यास बुझाने के नाम पर हम रोज़ क्या गलतियाँ करते हैं?

  • फ्रिज का चिल्ड पानी पीना: एकदम बर्फीला पानी गले की नसों को सिकोड़ देता है और पाचन की आग को बुझा देता है।
  • खाने के तुरंत बाद भरपेट पानी: यह खाने को पचने नहीं देता, बल्कि पेट में खाने को सड़ाकर गैस और भारीपन बनाता है।
  • खड़े होकर पानी पीना: खड़े होकर पानी पीने से पानी तेज़ी से घुटनों और जोड़ों की तरफ जाता है, जिससे आगे चलकर गठिया हो सकता है।
  • पानी की जगह कोल्ड ड्रिंक पीना: मीठे और कार्बोनेटेड ड्रिंक्स प्यास तो नहीं बुझाते, उलटा शरीर का बचा-खुचा पानी भी सोख लेते हैं।
  • एक ही बार में बहुत सारा पानी: दिनभर प्यासे रहने के बाद अचानक एक लीटर पानी पीने से किडनी पर बहुत भारी दबाव पड़ता है।

किन बीमारियों में पानी का लेवल अचानक गिर जाता है?

कई बार आप रिमाइंडर के हिसाब से पानी पीते हैं, फिर भी कुछ शारीरिक दिक्कतों के कारण शरीर सूखने लगता है:

  • डायबिटीज़ : ब्लड शुगर बढ़ने पर शरीर उसे यूरिन के ज़रिए बाहर निकालने की कोशिश करता है, जिससे बार-बार पेशाब आता है और पानी की कमी हो जाती है।
  • बुखार या वायरल: शरीर का तापमान बढ़ने पर पसीने और साँसों के ज़रिए पानी बहुत तेज़ी से उड़ने लगता है।
  • डायरिया : इसमें आंतें पानी सोखना बंद कर देती हैं और शरीर का सारा ज़रूरी तरल पदार्थ बाहर निकल जाता है।

एक ही साँस में गट-गट पानी पीने की आदत कितनी खतरनाक?

जब हम रिमाइंडर लगाना भूल जाते हैं और शाम को याद आने पर एक साथ 3-4 गिलास पानी पी लेते हैं, तो यह बहुत बड़ा खतरा बन सकता है। एक साथ बहुत ज़्यादा पानी पीने से खून में सोडियम का लेवल अचानक गिर जाता है। इस स्थिति को 'वाटर इंटॉक्सिकेशन' कहते हैं। इससे आपके दिमाग में सूजन आ सकती है, चक्कर आ सकते हैं और उल्टियाँ शुरू हो सकती हैं। इसीलिए वाटर रिमाइंडर का असली मकसद थोड़ा-थोड़ा पानी दिनभर बाँटकर पीना है, न कि एक ही बार में टंकी फुल करना।

बिना भूले पानी पीने के कुछ आसान तरीके

आप अपने रोज़मर्रा के कामों को पानी पीने की आदत के साथ जोड़कर इस रूटीन को आसान बना सकते हैं:

  • अपने फोन में एक अच्छा सा वाटर रिमाइंडर ऐप डाल लें जो हर घंटे एक हल्की सी टोन बजाए।
  • एक मार्कर वाली पानी की बोतल खरीदें जिस पर लिखा हो कि कितने बजे तक कितना पानी खत्म करना है।
  • इसे अपनी आदतों से जोड़ लें जैसे सुबह उठते ही एक गिलास, नहाने के बाद एक गिलास, और खाना खाने से आधा घंटा पहले एक गिलास।
  • अगर सादा पानी बोरिंग लगता है, तो उसमें पुदीने के कुछ पत्ते या नींबू के टुकड़े डाल लें इसे डिटॉक्स वाटर कहते हैं।

दिनभर खुद को तरोताज़ा रखने की आदतें

अगर आप खुद को हमेशा एनर्जेटिक देखना चाहते हैं, तो अपनी लाइफस्टाइल में ये छोटी बातें शामिल करें:

  • बोतल हमेशा साथ रखें: आप जहाँ भी जाएँ, अपनी पानी की बोतल अपने साथ रखें। सामने पानी दिखेगा तो आप खुद-ब-खुद पिएंगे।
  • अलार्म को इग्नोर न करें: जब भी फोन में रिमाइंडर बजे, उसे बंद करने से पहले एक घूँट पानी ज़रूर पिएं।
  • पसीने का हिसाब रखें: अगर आप वर्कआउट कर रहे हैं या धूप में हैं, तो अपने नॉर्मल रूटीन से थोड़ा ज़्यादा पानी पिएं।

वात, पित्त और कफ के हिसाब से पानी का नियम

आयुर्वेद सिर्फ यह नहीं कहता कि पानी पियो, बल्कि यह भी बताता है कि आपकी तासीर क्या है। अगर आपके शरीर में 'वात' ज़्यादा है, तो आपको हल्का गुनगुना पानी पीना चाहिए। अगर आपका 'पित्त' बढ़ा हुआ है, तो मटके का ठंडा पानी आपके लिए अमृत है। वहीं, जिन लोगों को 'कफ' की शिकायत रहती है, उन्हें पानी में थोड़ा सा शहद या सोंठ मिलाकर पीना चाहिए। एक सही वाटर रिमाइंडर रूटीन आपको अपनी इसी तासीर के हिसाब से पानी का समय तय करने में मदद करता है।

डॉक्टर की सलाह कब लेनी चाहिए?

घरेलू तौर पर पानी पीने के बाद भी अगर ये लक्षण दिखें, तो आपको तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए:

  • जब यूरिन का रंग एकदम गहरा पीला या सरसों के तेल जैसा हो जाए और जलन हो।
  • आपको अचानक से बहुत तेज़ चक्कर आने लगें और आँखों के सामने अंधेरा छा जाए।
  • जब होंठ और जीभ पूरी तरह सूखकर फटने लगें और साँस लेने में भी गर्मी महसूस हो।
  • दिल की धड़कन बिना कुछ किए ही बहुत तेज़ हो जाए और ब्लड प्रेशर गिर जाए।

पानी की कमी का इलाज: आधुनिक विज्ञान बनाम पुरानी परंपरा

पहलू आधुनिक विज्ञान (एलोपैथी) आयुर्वेदिक परंपरा
पानी पीने का आधार उम्र, वजन, मौसम और गतिविधि के अनुसार पानी की मात्रा तय की जाती है। प्यास, प्रकृति और शरीर की आवश्यकता के अनुसार पानी पीने पर ज़ोर दिया जाता है।
डिहाइड्रेशन का प्रबंधन गंभीर डिहाइड्रेशन में ORS या IV फ्लूइड्स (ड्रिप) का उपयोग किया जाता है। शरीर में जल संतुलन बनाए रखने के लिए दिनचर्या और आहार पर ध्यान दिया जाता है।
पानी पीने का तरीका पर्याप्त मात्रा में नियमित रूप से पानी पीने की सलाह दी जाती है। बैठकर, धीरे-धीरे और सही समय पर पानी पीने की सलाह दी जाती है।
बर्तनों का महत्व पानी की स्वच्छता और सुरक्षा पर अधिक ध्यान दिया जाता है। तांबे या मिट्टी के बर्तन में रखा पानी उपयोग करने की परंपरा है।
मुख्य दृष्टिकोण शरीर में पर्याप्त हाइड्रेशन बनाए रखना प्रमुख लक्ष्य है। हाइड्रेशन के साथ-साथ शरीर के प्राकृतिक संतुलन पर भी ध्यान दिया जाता है।

निष्कर्ष 

पानी कोई ऐसी चीज़ नहीं है जिसे आप फुर्सत मिलने पर पिएं; यह आपके शरीर का पेट्रोल है। वाटर रिमाइंडर रूटीन कोई बंदिश नहीं है, बल्कि यह आपके अपने शरीर के साथ दोस्ती करने का एक तरीका है। जब आप सही समय पर पानी पीते हैं, तो आपकी त्वचा चमकती है, पेट साफ रहता है और दिमाग तेज़ दौड़ता है। इसलिए अपनी इस भागती हुई ज़िंदगी में, अपने फोन के अलार्म का इस्तेमाल सिर्फ सुबह उठने के लिए न करें, बल्कि अपने शरीर को सींचने के लिए भी करें। खुश रहिए और याद से पानी पीते रहिए!

References :

https://www.healthline.com/nutrition/how-to-drink-more-water

https://www.healthline.com/nutrition/best-time-to-drink-water

https://www.cdc.gov/healthy-weight-growth/water-healthy-drinks/index.html

https://www.cdc.gov/healthy-weight-growth/water-healthy-drinks/index.html

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

नहीं, ये ऐप्स बहुत ही बेसिक होते हैं। ये सिर्फ आपके समय को ट्रैक करते हैं और नोटिफिकेशन भेजते हैं। इनसे बैटरी की खपत बहुत ही मामूली होती है।

सर्दियों में हमें प्यास बहुत कम लगती है, पसीना भी नहीं आता, इसलिए हम पानी पीना बिल्कुल भूल जाते हैं। असल में सर्दियों में ही रिमाइंडर की सबसे ज़्यादा ज़रूरत होती है ताकि शरीर अंदर से गर्म और हाइड्रेटेड रहे।

सोने से ठीक पहले बहुत सारा पानी पीने से आपको रात में बार-बार टॉयलेट जाने के लिए उठना पड़ सकता है, जिससे आपकी नींद खराब होगी। सोने से कम से कम एक घंटे पहले अपना पानी का कोटा पूरा कर लेना बेहतर है।

हालाँकि स्पार्कलिंग वाटर में कैलोरी नहीं होती, लेकिन इसमें कार्बन डाइऑक्साइड होती है। इसे कभी-कभार पिया जा सकता है, लेकिन रोज़मर्रा के रिमाइंडर में इसे सादे पानी से बदलना पेट में गैस और ब्लोटिंग पैदा कर सकता है।

तांबे के बर्तन में 8-10 घंटे रखा पानी सुबह खाली पेट पीना फायदेमंद है, लेकिन दिनभर लगातार सिर्फ तांबे के बर्तन से ही पानी पीने से शरीर में तांबे (Copper) की मात्रा बढ़ सकती है, जो नुकसानदेह है।

बच्चों को खेल-खेल में पानी पिलाना पड़ता है। उनके लिए आप कलरफुल टाइम-मार्क वाली बोतल ला सकते हैं या उन्हें सिखा सकते हैं कि जब भी वे टॉयलेट जाएँ, वापस आकर थोड़ा पानी ज़रूर पिएं।

बिल्कुल नहीं। चाय और कॉफी में कैफीन होता है, जो शरीर से यूरिन के ज़रिए पानी को बाहर निकालता है (Diuretic effect)। अगर आप एक कप कॉफी पीते हैं, तो उसे बैलेंस करने के लिए आपको एक गिलास अतिरिक्त पानी पीना चाहिए।

स्मार्टफोन न होने पर आप अपनी घड़ी के हर घंटे बजने वाले अलार्म का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा, अपने काम करने की डेस्क या रसोई में एक बड़ी पानी की बोतल सामने रखना सबसे अच्छा प्राकृतिक रिमाइंडर है।

हाँ, आजकल ऐसी बोतलें आ गई हैं जिनमें सेंसर लगे होते हैं। जब आपके पानी पीने का समय होता है, तो बोतल के नीचे लगी लाइट अपने आप चमकने लगती है। यह उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो फोन से दूर रहते हैं।

ब्रेस्टफीडिंग कराने वाली महिलाओं को आम इंसान के मुकाबले ज़्यादा पानी की ज़रूरत होती है। उन्हें रिमाइंडर सेट करके दिन में कम से कम 10 से 12 गिलास तरल पदार्थ लेना चाहिए, क्योंकि उनके शरीर से दूध के रूप में पानी लगातार बाहर निकलता है।

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