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Vegetarian हूँ, Alcohol नहीं - फिर भी Fatty Liver क्यों? NAFLD का सच

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 27 May, 2026
  • category-iconUpdated on 15 Jun, 2026
  • category-iconLiver and Gall
  • blog-view-icon5031

अक्सर लोगों को लगता है कि 'फैटी लिवर' (Fatty Liver) तो सिर्फ उन लोगों को होता है जो बहुत ज्यादा शराब पीते हैं। लेकिन आज क्लिनिक में ऐसे-ऐसे लोग आ रहे हैं जो पक्के शाकाहारी हैं, जिन्होंने आज तक शराब को हाथ भी नहीं लगाया, फिर भी उनकी रिपोर्ट में 'फैटी लिवर' निकल रहा है। यह सुनकर वे एकदम हैरान रह जाते हैं!

सच्चाई यह है कि फैटी लिवर का कनेक्शन सिर्फ शराब से नहीं है। हमारा गलत खान-पान, बढ़ा हुआ वज़न, मीठे का लालच, टेंशन, दिनभर कुर्सी पर बैठे रहना और बिगड़ा हुआ पाचन ये सब मिलकर लिवर पर चर्बी चढ़ा देते हैं। शुरू में इसके कोई खास लक्षण नहीं दिखते, इसलिए यह बीमारी अंदर ही अंदर चुपचाप बढ़ती रहती है।

आयुर्वेद साफ कहता है कि जब पाचन और शरीर की अंदरूनी सफाई सुस्त पड़ जाती है, तब सबसे ज्यादा मार लिवर पर पड़ती है। इसलिए सिर्फ शराब से दूर रहना ही काफी नहीं है, अपनी पूरी लाइफस्टाइल सुधारना ज़रूरी है।

फैटी लिवर क्या होता है और NAFLD किसे कहते हैं? 

फैटी लिवर का मतलब है लिवर के अंदर धीरे-धीरे चर्बी (Fat) का जमा हो जाना। शुरू-शुरू में कोई दिक्कत महसूस नहीं होती, लेकिन धीरे-धीरे यह चर्बी लिवर के काम करने की स्पीड को सुस्त कर देती है। जब यह बीमारी उन लोगों को होती है जो बिल्कुल शराब नहीं पीते, तो इसे मेडिकल भाषा में NAFLD (Non-Alcoholic Fatty Liver Disease) कहते हैं।

यहीं पर सबसे बड़ा सवाल आता है  “मैं तो शराब पीता ही नहीं, फिर मेरे लिवर में चर्बी कैसे आ गई?” इसका जवाब है आपका खराब पाचन, बढ़ा हुआ वज़न, बहुत ज़्यादा मीठा और पैकेट बंद खाना, फिजिकल एक्टिविटी की कमी और ठप पड़ा हुआ मेटाबॉलिज़्म। ये सब शराब से कम नुकसान नहीं करते।

फैटी लिवर के ग्रेड कितने होते हैं?

फैटी लिवर को 3 स्टेज (ग्रेड) में बांटा गया है। यह इस पर निर्भर करता है कि लिवर पर कितनी चर्बी जम चुकी है:

  • ग्रेड 1: यह बिल्कुल शुरुआती स्टेज है। लिवर में थोड़ी सी चर्बी जमा होती है और ज़्यादातर लोगों को इसका पता भी नहीं चलता। थोड़ा सा खान-पान और रूटीन सुधारकर इसे बहुत आसानी से ठीक किया जा सकता है।
  • ग्रेड 2: इस स्टेज में चर्बी काफी बढ़ जाती है और लिवर का काम सुस्त पड़ने लगता है। आपको हर वक्त थकावट, पेट भारी रहना, गैस, अपच और सुस्ती महसूस होने लगती है। इस स्टेज पर आकर सीरियस होना बहुत ज़रूरी है।
  • ग्रेड 3: यह खतरे की घंटी है। लिवर पर बहुत ज्यादा चर्बी जम चुकी होती है और उसमें सूजन या कड़ापन (Stiffness) आने लगता है। अगर अब भी ध्यान न दिया, तो आगे चलकर लिवर डैमेज होने का पूरा खतरा रहता है।

शाकाहारी लोगों में फैटी लिवर इतनी तेज़ी से क्यों बढ़ रहा है?

सिर्फ 'वेज' (शाकाहारी) होना इस बात की गारंटी नहीं है कि आप 100% फिट हैं। अगर आप शाकाहारी होकर भी हर वक्त मीठा, मैदा और तला हुआ खा रहे हैं, तो लिवर पर चर्बी चढ़ना तय है। इसके पीछे ये आदतें ज़िम्मेदार हैं:

  • मैदा और सफेद आटा: रोज़ ब्रेड, बिस्कुट, नमकीन और मैदे वाली चीज़ें ठूंसने से शरीर में चर्बी तेज़ी से बढ़ती है, जो सीधे लिवर पर जाकर चिपक जाती है।
  • मीठे का लालच: ज़्यादा चीनी, मीठी चाय, कोल्ड ड्रिंक्स और मिठाइयां शरीर में एनर्जी को ब्लॉक कर देती हैं। यही एक्स्ट्रा चीनी बाद में फैट (चर्बी) बन जाती है।
  • बाहर का तला-भुना और पैकेट वाला खाना: बाज़ार की तली-भुनी चीज़ें लिवर की मशीनरी को एकदम सुस्त और कमज़ोर कर देती हैं।
  • दिनभर बैठे रहना: अगर आप शरीर से कोई मेहनत नहीं कर रहे हैं, तो खाना पचेगा कैसे? वो एक्स्ट्रा एनर्जी चर्बी बनकर जमा हो जाएगी।
  • हर वक्त मुँह चलाना: थोड़ा-थोड़ा करके दिनभर बिस्कुट, नमकीन या चाय पीते रहने से शरीर का सिस्टम कभी रिलैक्स नहीं हो पाता।
  • रात को देर से सोना और टेंशन: नींद न आने और स्ट्रेस से पेट का पाचन बिगड़ता है, जिससे शरीर में गंदगी जमा होने लगती है।

शरीर क्या इशारे देता है जब फैटी लिवर बढ़ने लगता है? 

शुरू में तो पता ही नहीं चलता। ज़्यादातर लोगों को इसका पता तब लगता है जब वो किसी और चीज़ का टेस्ट कराते हैं। लेकिन धीरे-धीरे शरीर ये सिग्नल देने लगता है:

  • थकावट: रात भर सोने के बाद भी सुबह उठकर शरीर में जान न लगना।
  • पेट के ऊपरी हिस्से में भारीपन: सीधे हाथ की तरफ पसलियों के नीचे (जहां लिवर होता है) हर वक्त हल्का भारीपन या अजीब सा दबाव महसूस होना।
  • पाचन हमेशा खराब रहना: गैस बनना, पेट फूलना और थोड़ा सा खाते ही पेट भारी हो जाना।
  • पेट का बाहर निकलना: कमर और पेट के आस-पास चर्बी का तेज़ी से बढ़ना फैटी लिवर का सबसे बड़ा और पक्का इशारा है।
  • सुस्ती और आलस: किसी भी काम में मन न लगना और हर वक्त पड़े रहने का दिल करना।
  • स्किन का रंग बदलना: कुछ लोगों की गर्दन के पीछे या अंडरआर्म्स की स्किन अचानक काली पड़ने लगती है।

फैटी लिवर का असर सिर्फ लिवर तक नहीं रुकता! 

फैटी लिवर कोई छोटी-मोटी दिक्कत नहीं है। जब लिवर सुस्त पड़ता है, तो उसका असर पूरे शरीर पर भयंकर तरीके से दिखता है:

  • शुगर का बढ़ना: लिवर कमज़ोर होने से शरीर का शुगर बैलेंस बिगड़ जाता है और डायबिटीज होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
  • कोलेस्ट्रॉल बिगड़ना: लिवर ही खराब चर्बी को कंट्रोल करता है। लिवर सुस्त हुआ तो बैड कोलेस्ट्रॉल अपने आप बढ़ जाएगा।
  • ब्लड प्रेशर (BP) हाई होना: खून के बहाव में रुकावट आने से बीपी हाई होने लगता है।
  • दिल की बीमारी: फैटी लिवर वालों को हार्ट अटैक या दिल की बीमारियों का रिस्क बहुत ज्यादा रहता है।
  • मोटापा और पेट की चर्बी: लाख डाइटिंग करने के बाद भी पेट की चर्बी कम न होना इसी का नतीजा है।

क्या फैटी लिवर दोबारा बिल्कुल ठीक (नॉर्मल) हो सकता है? 

अच्छी खबर यह है कि ग्रेड 1 और ग्रेड 2 फैटी लिवर को आप अपनी मेहनत से पूरी तरह नॉर्मल कर सकते हैं। लेकिन यह सिर्फ गोलियां खाकर ठीक नहीं होगा।

आपको अपनी डाइट सुधारनी होगी, रूटीन सही करना होगा, वज़न घटाना होगा, नींद पूरी लेनी होगी और थोड़ी कसरत करनी होगी। रिसर्च कहती है कि अगर आप अपना 5 से 10% वज़न भी कम कर लें, तो लिवर एकदम क्लीन होने लगता है। यह बीमारी एक दिन में नहीं आई थी, इसलिए ठीक होने में भी थोड़ा वक्त लगेगा।

कौन सी आदतें फैटी लिवर को ठीक होने से रोकती हैं?

अगर आप दवा खा रहे हैं लेकिन ये गलतियां कर रहे हैं, तो आपका लिवर कभी ठीक नहीं होगा:

  • रात-रात भर जागना।
  • कोल्ड ड्रिंक्स या पैकेट वाले मीठे जूस पीना।
  • हर दूसरे दिन बाहर का जंक फूड या भारी खाना खाना।
  • दिनभर बस कुर्सी या सोफे पर जमे रहना।
  • टेंशन और स्ट्रेस में आकर ज़रूरत से ज़्यादा खाना (Emotional Eating)।
  • बहुत तेज़ी से वज़न का बढ़ना।

आयुर्वेद के नज़रिए से: फैटी लिवर क्यों और कैसे होता है?

आयुर्वेद का बड़ा सीधा सा मानना है कि फैटी लिवर की असल शुरुआत आपके कमज़ोर हाज़मे से होती है। जब पेट की पाचक अग्नि (जठराग्नि) सुस्त पड़ जाती है, तो खाया हुआ भोजन पचने के बजाय पेट में ही सड़ने लगता है। यही सड़ा हुआ खाना 'आम' यानी एक तरह की ज़हरीली गंदगी बन जाती है।

यह गंदगी धीरे-धीरे खिसकर लिवर पर जमा होने लगती है और उसके काम में रुकावट पैदा करती है। इसके ऊपर से, जब शरीर में 'कफ' दोष बिगड़ता है, तो जो चर्बी पैदा होती है, वह सीधा जाकर लिवर के आस-पास ही चिपक जाती है।

फैटी लिवर को ठीक करने का आयुर्वेदिक तरीका

आयुर्वेद में इलाज का मतलब सिर्फ लिवर से चर्बी खुरच कर निकाल देना नहीं है। यहां असली मकसद आपके पूरे शरीर की अंदर से सफाई करना और बिगड़े हुए सिस्टम को वापस पटरी पर लाना है:

  • पेट की आग तेज़ करना: सबसे पहला काम पाचन को दुरुस्त करना है। जब खाना सही से पचेगा, तो शरीर में नया आम बनना बंद हो जाएगा।
  • अंदरूनी गंदगी की सफाई: शरीर के अंदर जो गंदगी और टॉक्सिन्स पहले से जमा हो चुके हैं, उन्हें बाहर निकाला जाता है। इससे लिवर का बोझ एकदम हल्का हो जाता है और वह रिलैक्स होकर अपना काम कर पाता है।
  • कफ और चर्बी पर कंट्रोल: आपकी बॉडी की ज़रूरत के हिसाब से एक सही डाइट तय की जाती है। यह डाइट बिगड़े हुए कफ को शांत करती है और शरीर में जमी फालतू चर्बी को गलाने का काम करती है।

फैटी लिवर में असरदार आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ

ये देसी जड़ी-बूटियां लिवर की सिर्फ ऊपरी साफ-सफाई करके नहीं छोड़ देतीं। इनका असली टारगेट होता है लिवर पर बैठी उस सालों पुरानी जिद्दी चर्बी को काटना और उसे वापस एक नई मशीन जैसा बना देना:

  • कुटकी: जब बात हाज़मे की आती है, तो कुटकी किसी बड़े वरदान से कम नहीं लगती। लिवर के ऊपर जो मोटी चर्बी जम जाती है, उसे गलाने और लिवर के फंक्शन को दोबारा सेट करने में कुटकी का वाकई कोई मुकाबला नहीं है।
  • कालमेघ: यह स्वाद में आपको भले ही बहुत कड़वा लगे, लेकिन लिवर को अंदर से डिटॉक्स करने का यह सबसे सॉलिड तरीका माना जाता है। यह सारी सूजन को उतार देता है और लिवर को बिल्कुल नया और साफ़ कर देता है।
  • त्रिफला: अगर आपका पेट साफ़ रहेगा तो लिवर भी हेल्दी बना रहेगा। आंतों में सालों से फंसी गंदगी को बाहर निकालने और कब्ज़ जैसी चिड़चिड़ी दिक्कत को जड़ से मिटाने के लिए त्रिफला एक बहुत ही पुराना और आज़माया हुआ नुस्खा है।
  • गिलोय: गिलोय को सिर्फ बुखार उतारने या इम्युनिटी बढ़ाने तक सीमित मत समझिए। यह फैटी लिवर की सूजन को भी बहुत तेज़ी से खींचने की ताकत रखती है। यह लिवर को अंदर से इतना फौलादी बना देती है कि वह जल्दी दोबारा बीमार न पड़े।

लिवर को रिलैक्स करने वाली कमाल की आयुर्वेदिक थेरेपी 

हमारी दादियों-नानियों के ज़माने के इन परखे हुए तरीकों का बस एक ही काम है पूरे शरीर को अंदर से नहला-धुला कर एकदम नया कर देना:

  • पंचकर्म: ये खून और शरीर के कोने-कोने से ज़हरीली गंदगी को निचोड़ लेता है, जिससे लिवर का सारा लोड तुरंत खत्म हो जाता है।
  • विरेचन: ये शरीर की ऐसी डीप-क्लीनिंग है जो बेकाबू हो चुके पित्त की गर्मी को शांत कर देती है। एक बार ये हो जाए, तो लिवर की सफाई और चर्बी गलने की स्पीड अपने आप डबल हो जाती है।
  • उद्वर्तन (सूखे पाउडर से रगड़ाई): इसमें जड़ी-बूटियों वाले चूर्ण से पूरे बदन की ज़ोरदार रगड़ाई की जाती है। सच बताऊं तो जो चर्बी बिल्कुल पत्थर बन चुकी है, उसे तोड़ने का इससे बढ़िया कोई आयुर्वेदिक जुगाड़ नहीं है।
  • अभ्यंग (तेल की मालिश): जब जड़ी-बूटियों वाले हल्के गुनगुने तेल से बदन की चंपी होती है, तो शरीर का ब्लड सर्कुलेशन एकदम फास्ट हो जाता है। और इसी तेज़ खून के बहाव का सीधा फायदा थके हुए लिवर को जल्दी रिकवर होने में मिलता है।

मरीज़ों का भरोसा – उनके जीवन बदलने वाले अनुभव

मुझे लिवर सिरोसिस की समस्या डायग्नोज़ हुई थी, जिसके बाद मुझे इंफेक्शन भी हो गया। चलने में दिक्कत, खाने में परेशानी और कब्ज जैसी समस्याएँ बढ़ती चली गईं। मैं एक प्राइवेट हॉस्पिटल में 5 दिन भर्ती भी रहा, लेकिन वहाँ से कोई खास आराम नहीं मिला। इसके बाद मैंने डॉ. प्रताप चौहान का कार्यक्रम देखा और दोस्तों से बात करने के बाद जीवा आयुर्वेद आने का निर्णय लिया। यहाँ मुझे पहले 10 दिनों के लिए पंचकर्म उपचार दिया गया। धीरे-धीरे थेरेपी के साथ मुझे बिना ज्यादा दवाइयों के काफी बेहतर महसूस होने लगा। यहाँ का स्टाफ, वातावरण और लाइफस्टाइल बहुत अच्छे हैं। आज मैं पहले से काफी बेहतर महसूस करता हूँ और मेरी स्थिति में सुधार हुआ है।

डाइट में क्या-क्या बदलाव करें? 

फैटी लिवर होने पर खाना सिर्फ पेट भरने के लिए नहीं होता, यह इलाज का ही एक हिस्सा बन जाता है। आपको ऐसा खाना चाहिए जो लिवर पर रत्ती भर भी बोझ न डाले:

  • ताज़ा और हल्का खाना: हमेशा ताज़ा और गर्म खाना ही खाएं जो जल्दी पच जाए। भारी, मसालेदार और बासी खाने से बिल्कुल दूर रहें।
  • हरी सब्ज़ियां और घर का खाना: अपनी थाली में हरी सब्ज़ियों को बढ़ाएं। बाहर के पैकेट बंद और जंक फूड को पूरी तरह से 'ना' कह दें।
  • मीठा और मैदा तुरंत बंद: चीनी, मिठाइयां, कोल्ड ड्रिंक्स और मैदे से बनी चीज़ें (ब्रेड, बिस्कुट) सीधे लिवर पर जाकर चर्बी बन जाती हैं। इन्हें आज ही छोड़ दें।
  • मूंग की दाल: मूंग दाल पचने में बहुत हल्की होती है और सुस्त लिवर को बिल्कुल परेशान नहीं करती।
  • घी-तेल लिमिट में: बहुत ज्यादा तला-भुना खाने से लिवर ठप पड़ जाता है। थोड़ा बहुत देसी घी खाएं, लेकिन लिमिट में।
  • खूब पानी पिएं: दिन भर हल्का गुनगुना पानी पीते रहें ताकि शरीर की गंदगी पसीने और यूरिन के रास्ते बाहर निकलती रहे।
  • टाइम पर खाएं: लेट-नाइट (देर रात) भारी खाना खाना लिवर का सबसे बड़ा दुश्मन है। अपना एक पक्का टाइमटेबल बनाएं।

डॉक्टर के पास कब भागना चाहिए? 

फैटी लिवर के इशारों को अगर हल्के में लिया, तो आगे चलकर लिवर फेल होने का रिस्क रहता है। अगर ये दिक्कतें हो रही हैं, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें:

  • रात भर सोने के बाद भी शरीर में भयंकर थकावट और जान न लगना।
  • पेट में सीधे हाथ की तरफ (पसलियों के ठीक नीचे) हर वक्त भारीपन या मीठा-मीठा दर्द रहना।
  • पाचन पूरी तरह बिगड़ जाना, भयंकर गैस बनना और भूख का एकदम मर जाना।
  • आंखों का सफेद हिस्सा पीला पड़ने लगना (पीलिया का लक्षण) या स्किन पर बहुत खुजली होना।
  • बिना ज्यादा खाए अचानक से पेट का बाहर निकल आना।

निष्कर्ष 

फैटी लिवर को सिर्फ शराब पीने वालों की बीमारी समझना आजकल की सबसे बड़ी गलतफहमी है। जंक फूड खाना, हर वक्त कुर्सी पर जमे रहना, हद से ज्यादा मीठा ठूंसना और सुस्त पाचन ये सब मिलकर बिना शराब पिए भी लिवर का सत्यानाश कर रहे हैं।

शुरू में तो शरीर कोई खास अलार्म नहीं बजाता, लेकिन धीरे-धीरे पूरी मशीनरी सुस्त पड़ जाती है। सिर्फ दवाइयों के भरोसे मत बैठिए। अगर आप अपना लाइफस्टाइल सुधार लें, ताज़ा खाना खाएं, अच्छी नींद लें और रोज़ थोड़ी कसरत करें, तो आपका लिवर खुद-ब-खुद एकदम साफ और फिट हो जाएगा। आयुर्वेद भी यही कहता है पाचन सही तो सब सही!

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

लंबे समय तक खाली पेट रहने की आदत कुछ लोगों में पाचन और शरीर की ऊर्जा प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है। इससे कमज़ोरी, गैस और भारीपन महसूस हो सकता है। हल्का और संतुलित सुबह का भोजन शरीर को बेहतर सहारा दे सकता है। नियमित समय पर भोजन करना लिवर के लिए भी उपयोगी माना जाता है। बहुत देर तक भूखे रहने और फिर एक साथ भारी भोजन करने से बचना बेहतर माना जाता है।

हाँ, कई लोगों में फैटी लिवर के दौरान लगातार थकान और सुस्ती महसूस हो सकती है। शरीर में ऊर्जा का संतुलन प्रभावित होने पर व्यक्ति जल्दी थका हुआ महसूस कर सकता है। पर्याप्त आराम के बाद भी शरीर भारी लग सकता है। यदि यह समस्या लगातार बनी रहे, तो जांच करवाना बेहतर माना जाता है।

लगातार मानसिक तनाव शरीर की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकता है। इससे पाचन कमज़ोर पड़ सकता है और शरीर में असंतुलन बढ़ सकता है। कई लोगों में तनाव के दौरान गलत खान-पान और कम नींद की समस्या भी बढ़ जाती है। यही आदतें धीरे-धीरे लिवर पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती हैं।

बहुत अधिक तला, मसालेदार और पैकेट वाला भोजन शरीर के लिए भारी माना जाता है। ऐसे भोजन में अधिक तेल, नमक और चीनी हो सकती है, जो लिवर पर असर डाल सकती है। कभी-कभार सीमित मात्रा में लेना अलग बात है, लेकिन नियमित सेवन समस्या बढ़ा सकता है। घर का ताजा और हल्का भोजन अधिक बेहतर माना जाता है।

हाँ, ऐसा संभव माना जाता है। कुछ लोगों का वज़न सामान्य दिखने के बावजूद शरीर के भीतर चर्बी जमा होने लगती है। खासकर पेट के आसपास बढ़ती चर्बी और कम शारीरिक गतिविधि इसमें भूमिका निभा सकती है। इसलिए केवल वज़न देखकर शरीर की पूरी स्थिति का अंदाजा लगाना सही नहीं माना जाता।

लगातार देर रात तक जागने की आदत शरीर की प्राकृतिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है। इससे पाचन, नींद और ऊर्जा संतुलन बिगड़ सकता है। कई लोगों में देर रात खाने की आदत भी जुड़ जाती है, जो लिवर पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती है। समय पर सोना और पर्याप्त नींद लेना महत्वपूर्ण माना जाता है।

हाँ, कुछ लोगों में गैस, पेट फूलना और भोजन के बाद भारीपन जैसी परेशानी महसूस हो सकती है। कमज़ोर पाचन और शरीर की धीमी कार्यप्रणाली इसके पीछे कारण हो सकते हैं। यदि यह समस्या बार-बार हो रही हो, तो खान-पान और दिनचर्या पर ध्यान देना ज़रूरी माना जाता है।

बहुत अधिक मात्रा में मीठी चीजें शरीर में अतिरिक्त चर्बी बढ़ाने का कारण बन सकती हैं। इसलिए कुछ लोगों को बहुत मीठे फलों का सेवन सीमित मात्रा में करने की सलाह दी जाती है। संतुलन बनाए रखना अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। ताजे और प्राकृतिक भोजन को प्राथमिकता देना बेहतर होता है।

नियमित चलना और हल्की शारीरिक गतिविधि शरीर की ऊर्जा प्रक्रिया को सक्रिय रखने में सहायक मानी जाती है। इससे वज़न संतुलित रखने और शरीर की सुस्ती कम करने में मदद मिल सकती है। लगातार बैठे रहने की आदत समस्या बढ़ा सकती है। रोज़ थोड़ी देर चलना शरीर के लिए लाभकारी माना जाता है।

हाँ, कई लोगों में लंबे समय तक कोई स्पष्ट संकेत दिखाई नहीं देते। अक्सर जांच के दौरान ही इसका पता चलता है। यही कारण है कि इसे धीरे-धीरे बढ़ने वाली समस्या माना जाता है। समय-समय पर जांच और शरीर के छोटे संकेतों पर ध्यान देना महत्वपूर्ण माना जाता है।

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