Diseases Search
Close Button
 
 

Gout pain में कौन से food triggers ध्यान रखने चाहिए?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

अक्सर हम सोचते हैं कि जोड़ों में अचानक होने वाला तेज़ दर्द या सूजन सिर्फ बढ़ती उम्र या थकान का नतीजा है। लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि किसी खास दिन दावत उड़ाने के बाद पैर के अंगूठे या घुटने में भयंकर चुभन होने लगती है? असल में हमारे खून और हमारे खाने का सीधा कनेक्शन है। जब शरीर में यूरिक एसिड नाम का रसायन हद से ज़्यादा बढ़ जाता है, तो वह जोड़ों में छोटे-छोटे क्रिस्टल के रूप में जमा होने लगता है। इसे ही गाउट कहते हैं।

सिर्फ दर्द की गोली खा लेने से यह बीमारी खत्म नहीं होती। जब तक आप अपनी थाली पर ध्यान नहीं देंगे, यह दर्द लौटकर आता रहेगा। यह समझना बहुत ज़रूरी है कि यह कोई आम जोड़ों का दर्द नहीं है, बल्कि आपके शरीर का आपको यह बताने का तरीका है कि उसे अंदरूनी सफाई की ज़रूरत है।

खाने की वजह से जोड़ों में दर्द क्यों बढ़ने लगता है

हमारे भोजन में एक खास तत्व होता है जिसे प्यूरीन कहते हैं। जब हमारा शरीर इस प्यूरीन को तोड़ता है, तो यूरिक एसिड बनता है। आम तौर पर हमारी किडनी इस एसिड को छानकर पेशाब के रास्ते बाहर निकाल देती है। लेकिन जब हम प्यूरीन से भरा खाना बहुत ज़्यादा खाते हैं, तो शरीर में यूरिक एसिड का सैलाब आ जाता है। ऐसे में किडनी इसे पूरी तरह बाहर नहीं निकाल पाती। यही बचा हुआ एसिड हमारे जोड़ों में सुई की तरह चुभने वाले कण बन जाता है, जिससे भयानक दर्द और सूजन होती है।

क्या सिर्फ मांस खाने से ही यूरिक एसिड बढ़ता है

जी नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है। कई लोग पूरी तरह शाकाहारी होते हैं, फिर भी उन्हें गाउट का अटैक आ जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि समस्या सिर्फ मांस में नहीं है, बल्कि कुछ दालें, सब्ज़ियाँ और मीठे ड्रिंक्स भी यूरिक एसिड को तेज़ी से बढ़ाते हैं। अगर आप कम पानी पीते हैं या आपका वज़न बहुत ज़्यादा है, तो भी सादा और घर का बना खाना आपके जोड़ों के लिए मुसीबत बन सकता है। गलत समय पर खाना और खराब पाचन भी यूरिक एसिड को खून में रोक कर रखता है।

यूरिक एसिड बढ़ने पर शरीर में क्या बदलाव आते हैं

जब खून में यूरिक एसिड बढ़ता है, तो शरीर के अंदर कई दिक्कतें एक साथ शुरू होती हैं:

  • जोड़ों में लालिमा: जिस जोड़ में एसिड जमा होता है, वह हिस्सा एकदम लाल और गर्म हो जाता है।
  • भयानक सूजन: पैर के अंगूठे या टखने में इतनी सूजन आ जाती है कि छूने पर भी चीख निकल जाए।
  • गुर्दे पर असर: ज़्यादा यूरिक एसिड किडनी में जाकर छोटी-छोटी पथरी बना सकता है।
  • चलने में लाचारी: दर्द इतना तेज़ होता है कि इंसान का ज़मीन पर पैर रखना मुश्किल हो जाता है।

गाउट के दर्द को आयुर्वेद किस नज़रिए से देखता है

आयुर्वेद के अनुसार, गाउट को वातरक्त कहा जाता है। इसका मतलब है जब शरीर में वात यानी हवा और रक्त यानी खून दोनों खराब हो जाते हैं, तो यह बीमारी पनपती है। जब आप बहुत ज़्यादा तीखा, खट्टा या भारी खाना खाते हैं, तो शरीर का पित्त और वात बिगड़ जाता है। यह बिगड़ा हुआ दोष खून को गंदा कर देता है और जोड़ों में जाकर रुक जाता है। आयुर्वेद मानता है कि जब तक आप शरीर से इस ज़हरीले तत्व को बाहर नहीं निकालेंगे और अपने वात को शांत नहीं करेंगे, तब तक जोड़ों की सूजन शांत नहीं होगी।

यूरिक एसिड को जड़ से खत्म करने वाली जड़ी-बूटियाँ

प्रकृति ने हमें ऐसी कई बेहतरीन जड़ी-बूटियाँ दी हैं जो जोड़ों की सूजन को सोख लेती हैं और एसिड को बाहर निकालती हैं:

  • गिलोय: यह खून को साफ करने और यूरिक एसिड को शरीर से बाहर निकालने की सबसे लाजवाब जड़ी-बूटी है।
  • अश्वगंधा: यह जोड़ों की कमज़ोरी को दूर करती है और दर्द सहने की ताकत देती है, साथ ही नसों को आराम पहुँचाती है।
  • पुनर्नवा: यह सूजन को जादुई तरीके से कम करती है और किडनी को साफ रखकर एसिड बाहर निकालती है।
  • त्रिफला: यह पेट को साफ रखता है जिससे शरीर में फालतू एसिड या ज़हर इकट्ठा नहीं हो पाता।

खानपान की वह गलतियां जो गाउट का दर्द बढ़ाती हैं

हम अनजाने में कई ऐसी चीज़ें खाते या पीते हैं जो यूरिक एसिड का लेवल रातों-रात बढ़ा देती हैं:

  • रेड मीट और सीफूड खाने से दर्द कई गुना बढ़ जाता है क्योंकि इनमें प्यूरीन कूट-कूटकर भरा होता है।
  • बीयर या शराब पीने से यूरिक एसिड बहुत तेज़ी से बढ़ता है और किडनी इसे बाहर निकालने में नाकाम हो जाती है।
  • बहुत ज़्यादा मीठा खाने और पैकेट वाले जूस पीने से शरीर में यूरिक एसिड का बनना तेज़ हो जाता है।
  • राजमा, छोले, पालक और गोभी का बहुत ज़्यादा सेवन कुछ लोगों में गैस और दर्द दोनों बढ़ा सकता है।
  • पानी कम पीने की आदत से किडनी एसिड को छान नहीं पाती और वह खून में ही घूमता रहता है।

किन दूसरी बीमारियों की वजह से यूरिक एसिड बढ़ता है

कई बार आप सब कुछ सही करते हैं, फिर भी कुछ दूसरी शारीरिक कमज़ोरियां गाउट को न्यौता देती हैं:

  • मोटापा: ज़्यादा वज़न वाले शरीर में यूरिक एसिड ज़्यादा बनता है और किडनी पर भी उसे निकालने का भारी बोझ पड़ता है।
  • शुगर और ब्लड प्रेशर: इन बीमारियों से जूझ रहे लोगों का मेटाबॉलिज़्म धीमा हो जाता है, जिससे गाउट का खतरा काफी बढ़ जाता है।
  • किडनी की कमज़ोरी: अगर गुर्दे ठीक से काम नहीं कर रहे हैं, तो वह एसिड को शरीर से बाहर नहीं फेंक पाते।

बिना दवा के गाउट के दर्द से राहत पाने के आसान तरीके

गाउट यानी यूरिक एसिड के दर्द को कम करने के लिए ये कुछ आसान घरेलू उपाय हैं।

  • जहाँ दर्द या सूजन है, वहाँ बर्फ से धीरे-धीरे सिकाई करें। इससे तुरंत राहत महसूस होती है।
  • दिन भर में ज्यादा से ज्यादा पानी पिएँ। इससे शरीर में बढ़ा हुआ यूरिक एसिड पेशाब के जरिए आसानी से बाहर निकल जाता है।
  • एक गिलास पानी में थोड़ा नींबू का रस या एक-दो चम्मच सेब का सिरका मिलाकर पिएँ। यह शरीर में एसिड के असर को कम करने में मदद करता है।
  • चेरी खाना या इसका जूस पीना काफी फायदेमंद है। यह जोड़ों में दर्द और सूजन पैदा करने वाले क्रिस्टल्स को कम करने में मदद करती है। 

जोड़ों को स्वस्थ रखने के लिए रोज़मर्रा की आदतें

अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में छोटे-छोटे बदलाव करके आप गाउट के अटैक से बच सकते हैं:

  • धीरे-धीरे अपना वज़न कम करें, इससे जोड़ों पर दबाव घटेगा और शरीर हल्का महसूस करेगा।
  • संतरा, अमरूद या आंवला जैसी विटामिन सी वाली चीज़ें खाएं, यह यूरिक एसिड को कंट्रोल में रखती हैं।
  • रोज़ाना थोड़ा पैदल चलें, इससे जोड़ों में जकड़न नहीं होती, लेकिन तेज़ दर्द के समय चलने से बचें और आराम करें।

एलोपैथी और आयुर्वेद में यूरिक एसिड का इलाज कैसे होता है

पहलू आधुनिक चिकित्सा (एलोपैथी) आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
मुख्य लक्ष्य यूरिक एसिड के कारण की पहचान कर दवाओं से उसे नियंत्रित करना और दर्द में राहत देना। आहार-विहार, जीवनशैली और समग्र स्वास्थ्य के संतुलन पर ध्यान देना।
उपचार का तरीका आवश्यकतानुसार यूरिक एसिड कम करने वाली दवाइयाँ, दर्द निवारक दवाएँ और चिकित्सकीय निगरानी। जड़ी-बूटियाँ, संतुलित आहार, दिनचर्या और जीवनशैली में सुधार।
शरीर पर दृष्टिकोण वैज्ञानिक जाँच और रोग की स्थिति के आधार पर उपचार। व्यक्ति की प्रकृति, पाचन और समग्र स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर देखभाल।
असर होने की गति कई उपचार अपेक्षाकृत जल्दी राहत दे सकते हैं। नियमित पालन के साथ धीरे-धीरे लाभ दिखाई दे सकते हैं।
दीर्घकालिक दृष्टिकोण रोग नियंत्रण, नियमित फॉलो-अप और भविष्य की जटिलताओं की रोकथाम पर ज़ोर। स्वस्थ जीवनशैली और संतुलित आदतों के माध्यम से दीर्घकालिक स्वास्थ्य बनाए रखने पर बल।

डॉक्टर के पास कब जाना ज़रूरी है

घरेलू उपाय अपनाने के बाद भी अगर दर्द कम न हो, तो डॉक्टर से मिलना बहुत ज़रूरी हो जाता है:

  • जब जोड़ों में सूजन इतनी बढ़ जाए कि आपको तेज़ बुखार आने लगे।
  • लगातार कई दिनों तक दर्द सहने के बाद भी कोई आराम न मिले।
  • जब दर्द की वजह से आपका चलना-फिरना पूरी तरह बंद हो जाए।
  • सूजन वाली जगह एकदम सुन्न पड़ जाए या वहाँ का रंग बदलने लगे।

निष्कर्ष

हमेशा याद रखें कि गाउट का दर्द कोई ऐसी बीमारी नहीं है जिसे ठीक न किया जा सके। यह सिर्फ आपके शरीर का आपको यह बताने का तरीका है कि आपके खाने-पीने का तरीका सही नहीं है। अपनी थाली से उन चीज़ों को हटा दें जो यूरिक एसिड बढ़ाती हैं। खुद को चुस्त रखें और खूब सारा पानी पिएँ। जब आपका खून साफ रहेगा और पाचन सही रहेगा, तो यकीनन आपके जोड़ भी पूरी तरह मज़बूत और दर्द से मुक्त रहेंगे।

References

https://www.healthline.com/health/gout

https://www.healthline.com/health/how-long-does-gout-last

https://www.niams.nih.gov/health-topics/gout

https://www.cdc.gov/arthritis/gout/index.html

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

टमाटर को लेकर अलग-अलग राय है, पर इसे कम मात्रा में ही खाना बेहतर है क्योंकि कुछ लोगों में यह दर्द बढ़ा सकता है।

मूंग की दाल सबसे हल्की और पचने में आसान होती है, इसलिए इसे सबसे सुरक्षित माना जाता है।

नहीं, कम मलाई वाला दूध या ताज़ा दही यूरिक एसिड को शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है।

उस जगह को ऊंचा रखें, बर्फ की सिकाई करें और शरीर से एसिड निकालने के लिए खूब सारा पानी पिएँ।

सफेद चावल में प्यूरीन बहुत कम होता है, इसलिए इसे सीमित मात्रा में आराम से खाया जा सकता है।

चेरी, सेब और नींबू यूरिक एसिड के असर को कम करने में बहुत असरदार होते हैं।

बिना चीनी की ब्लैक कॉफी यूरिक एसिड को कम कर सकती है, लेकिन ज़्यादा चाय पीने से एसिडिटी और दर्द बढ़ सकता है।

यूरिक एसिड के क्रिस्टल भारी होते हैं और खून के बहाव के साथ शरीर के सबसे निचले हिस्से यानी पैर के अंगूठे में जाकर जमा हो जाते हैं।

सही खानपान, अच्छी जीवनशैली और वज़न कंट्रोल करने से इसके दर्द को हमेशा के लिए दूर रखा जा सकता है।

हां, हल्का व्यायाम शरीर को स्वस्थ रखता है, लेकिन अगर जोड़ों में तेज़ दर्द हो तो उस वक्त ज़्यादा चलने से बचना चाहिए।

Top Ayurveda Doctors

Social Timeline

Our Happy Patients

  • Sunita Malik - Knee Pain
  • Abhishek Mal - Diabetes
  • Vidit Aggarwal - Psoriasis
  • Shanti - Sleeping Disorder
  • Ranjana - Arthritis
  • Jyoti - Migraine
  • Renu Lamba - Diabetes
  • Kamla Singh - Bulging Disc
  • Rajesh Kumar - Psoriasis
  • Dhruv Dutta - Diabetes
  • Atharva - Respiratory Disease
  • Amey - Skin Problem
  • Asha - Joint Problem
  • Sanjeeta - Joint Pain
  • A B Mukherjee - Acidity
  • Deepak Sharma - Lower Back Pain
  • Vyjayanti - Pcod
  • Sunil Singh - Thyroid
  • Sarla Gupta - Post Surgery Challenges
  • Syed Masood Ahmed - Osteoarthritis & Bp
Book Free Consultation Call Us