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Working Professional को 35 की उम्र में BP — Stress या और कारण?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 11 May, 2026
  • category-iconUpdated on 13 Jun, 2026
  • category-iconHeart Health
  • blog-view-icon5064

सुबह उठकर लैपटॉप खोलना, ऑफिस की मीटिंग्स में घंटों बिताना, ईएमआई (EMI) की टेंशन और वीकेंड पर बाहर का जंक फूड, आज के वर्किंग प्रोफेशनल्स (Working Professionals) की ज़िंदगी इसी चक्र में घूम रही है। 30-35 की उम्र, जो पहले करियर की उड़ान और शारीरिक ऊर्जा का सबसे बेहतरीन समय मानी जाती थी, आज वही उम्र अस्पतालों के चक्कर काटने में बीत रही है। जब सिर में भारी दर्द या अचानक घबराहट होने पर डॉक्टर आपको बताता है कि "आपका ब्लड प्रेशर (Blood Pressure) हाई है," तो पैरों तले ज़मीन खिसक जाती है।

ज़्यादातर युवा इसे सिर्फ 'स्ट्रेस' (Stress) मानकर या तो नज़रअंदाज़ कर देते हैं, या फिर जीवन भर के लिए ब्लड प्रेशर की एक गोली (Anti-hypertensive pill) खाना शुरू कर देते हैं। लेकिन क्या 35 की उम्र में नसों का इस कदर तन जाना केवल ऑफिस के स्ट्रेस का नतीजा है? सच्चाई यह है कि यह बढ़ा हुआ बीपी कोई बीमारी नहीं, बल्कि आपके शरीर का वह चीखता हुआ अलार्म है जो बता रहा है कि आपकी 'सुविधाजनक' लेकिन ज़हरीली जीवनशैली ने आपके हृदय और नर्वस सिस्टम को अंदर से पूरी तरह थका दिया है।

35 की उम्र में ब्लड प्रेशर अचानक क्यों बढ़ने लगता है? (असली कारण)

हम सारा दोष बॉस और ऑफिस के स्ट्रेस पर डाल देते हैं, लेकिन हाई ब्लड प्रेशर (Hypertension) आपके पूरे लाइफस्टाइल के क्रैश (Crash) होने का नतीजा है:

  • लगातार बैठे रहना (Sedentary Lifestyle): ऑफिस की कुर्सी पर रोज़ाना 8-10 घंटे लंबे समय तक बैठे रहने से शरीर का ब्लड सर्कुलेशन सुस्त पड़ जाता है। धमनियों (Arteries) का लचीलापन खत्म होने लगता है, जिससे खून पंप करने के लिए हार्ट को ज़्यादा ज़ोर लगाना पड़ता है।
  • कॉर्टिसोल (Stress Hormone) का ओवरलोड: डेडलाइन्स और टारगेट्स का मानसिक तनाव शरीर को हमेशा 'फाइट या फ्लाइट' (Fight or Flight) मोड में रखता है। इससे नसों में लगातार सिकुड़न (Constriction) बनी रहती है।
  • नींद की बर्बादी और स्क्रीन टाइम: रात को 1-2 बजे तक मोबाइल या लैपटॉप की ब्लू लाइट (Blue light) देखते रहना। यह सीधा आपकी प्राकृतिक 'स्लीप क्लॉक' को तबाह करता है, जिससे नर्वस सिस्टम को रिकवर होने का समय ही नहीं मिलता।
  • जठराग्नि का नाश और 'आम' (Toxins): समय की कमी के कारण पैकेटबंद खाना, अत्यधिक कैफीन (कॉफी) और रिफाइंड तेल का सेवन। यह पाचन तंत्र में ज़हरीला 'आम' बनाता है, जो नसों में जाकर उन्हें कड़ा (Stiff) कर देता है।

दोषों के अनुसार हाई ब्लड प्रेशर के प्रकार

हर युवा का स्ट्रेस और खानपान अलग होता है। आयुर्वेद के अनुसार, शरीर के बिगड़े हुए दोषों के आधार पर हाई बीपी मुख्य रूप से तीन प्रकारों में सामने आता है:

  • वात-प्रधान हाई BP: यह एंग्जायटी और ओवरथिंकिंग (Overthinking) वाले प्रोफेशनल्स में आम है। इसमें ब्लड प्रेशर अचानक ऊपर-नीचे होता है। इंसान को घबराहट, एंग्जायटी और पैनिक, और रातों को नींद न आने की भयंकर शिकायत रहती है।
  • पित्त-प्रधान हाई BP: जो युवा बात-बात पर गुस्सा करते हैं या 'बर्नआउट' (Burnout) का शिकार हैं, उनका पित्त भड़क जाता है। इसमें चेहरा और आँखें लाल रहती हैं, भयंकर सिरदर्द होता है और हमेशा सीने में जलन व गर्माहट महसूस होती है।
  • कफ-प्रधान हाई BP: लगातार बैठे रहने से जिनका वज़न बढ़ना शुरू हो जाता है, उनके रक्त में कोलेस्ट्रॉल और फैट जमने लगता है। इसमें बीपी लगातार हाई रहता है और शरीर में हर वक्त एक भारी सुस्ती (Lethargy) छाई रहती है।

क्या आपका शरीर भी हाई BP के ये खतरनाक अलार्म बजा रहा है?

हाई ब्लड प्रेशर को 'साइलेंट किलर' (Silent Killer) कहा जाता है क्योंकि यह शुरुआत में कोई बड़ा दर्द नहीं देता। लेकिन 30-35 की उम्र में शरीर ये खामोश संकेत ज़रूर देता है:

  • सुबह उठते ही सिर के पिछले हिस्से में भारी दर्द: अक्सर सुबह गर्दन और सिर के पिछले हिस्से (Occipital region) में भारीपन या धड़कता हुआ दर्द महसूस होना।
  • अचानक दिल की धड़कन का महसूस होना (Palpitations): आराम से बैठे हुए या लेटे हुए अचानक अपनी ही दिल की धड़कन का बहुत तेज़ या भारी महसूस होना।
  • दिमाग पर हमेशा धुंध (Brain Fog) और चिड़चिड़ापन: छोटी-छोटी बातों पर भयंकर गुस्सा आना, फोकस न कर पाना और लगातार एक थकावट सी महसूस होना।
  • सांस फूलना और धुंधला दिखना: सीढ़ियाँ चढ़ने पर असामान्य रूप से सांस का उखड़ जाना या कंप्यूटर स्क्रीन देखते-देखते अचानक आँखों के आगे धुंधलापन आना।

BP को कंट्रोल करने के चक्कर में युवा क्या गलतियाँ करते हैं और उनकी जटिलताएं?

"मेरी तो अभी उम्र ही क्या है?" यह सोचकर युवा घबराहट में ऐसे शॉर्टकट्स अपना लेते हैं जो उनके हार्ट को स्थायी रूप से डैमेज कर सकते हैं:

  • केवल गोली पर निर्भर हो जाना: डॉक्टर से बीपी की गोली लिखवा लेना और यह सोचना कि अब वह रोज़ाना जंक फूड खा सकते हैं और रात भर जाग सकते हैं। गोली केवल नंबर कम करती है, नसों की ब्लॉकेज नहीं खोलती।
  • नमक तो छोड़ना, लेकिन पैकेटबंद खाना नहीं: घर के खाने में नमक कम कर देना, लेकिन ऑफिस में रोज़ाना चिप्स, सूप, या सॉस खाना जिनमें सोडियम (Sodium) और प्रिजर्वेटिव्स की मात्रा भयंकर होती है।
  • अत्यधिक और भारी जिम करना: फिटनेस के नाम पर अचानक बहुत भारी वज़न उठाना या एक्सट्रीम कार्डियो करना, जो कमज़ोर हार्ट पर भारी दबाव (Cardiac Stress) डालता है।
  • भविष्य की गंभीर जटिलताएं: 35 की उम्र में अगर बीपी को प्राकृतिक रूप से रिवर्स न किया जाए, तो 45-50 तक आते-आते यह सीधे हार्ट अटैक, स्ट्रोक (Stroke) या किडनी फेलियर का कारण बन जाता है।

आयुर्वेद हाई ब्लड प्रेशर और स्ट्रेस के इस विज्ञान को कैसे समझता है?

आधुनिक विज्ञान जहाँ केवल हार्ट की पंपिंग और ब्लड वेसल्स के सिकुड़ने (Vasoconstriction) पर ध्यान देता है, वहीं आयुर्वेद इसे 'व्यान वात', 'प्राण वात' और 'रक्त धातु' के असंतुलन के रूप में समझता है।

  • प्राण वात और व्यान वात का भड़कना: दिमाग को 'प्राण वात' चलाता है और पूरे शरीर में खून का संचार 'व्यान वात' करता है। अत्यधिक स्ट्रेस से प्राण वात भड़कता है, जो सीधा व्यान वात को डिस्टर्ब कर देता है, जिससे रक्त का प्रवाह अनियंत्रित (हाई बीपी) हो जाता है।
  • रक्त धातु की अशुद्धि: पैकेटबंद खाना और रिफाइंड तेल शरीर में 'आम' (Toxins) बनाते हैं। यह आम जब 'रक्त धातु' (Blood) में मिलता है, तो खून गाढ़ा और अशुद्ध हो जाता है, जिसे धकेलने के लिए हार्ट को ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है।
  • स्रोतस (Channels) में रुकावट: धमनियों (Arteries) को आयुर्वेद में रस/रक्त वह स्रोतस कहा गया है। कफ और आम के जमने से ये स्रोतस ब्लॉक हो जाते हैं और अपनी लोच (Elasticity) खो बैठते हैं।

ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने और नसों को शांत करने वाली आयुर्वेदिक डाइट

आपका खाना ही आपके ब्लड प्रेशर की सबसे बड़ी दवा है। अपने हार्ट को सुरक्षित रखने और स्ट्रेस को काटने के लिए अपनी आयुर्वेदिक डाइट में ये बदलाव तुरंत करें।

आहार की श्रेणी क्या खाएं (फायदेमंद - धमनियों को खोलने और बीपी नॉर्मल करने वाले) क्या न खाएं (ट्रिगर फूड्स - बीपी और स्ट्रेस बढ़ाने वाले)
अनाज (Grains) पुराना जौ (Barley), ओट्स, रागी, दलिया, छिलके वाली मूंग दाल। मैदा, वाइट ब्रेड, पैकेटबंद नूडल्स, बासी और गरिष्ठ खाना।
वसा (Fats) देसी गाय का शुद्ध घी (सीमित मात्रा में), कच्ची घानी सरसों का तेल, ऑलिव ऑयल। रिफाइंड ऑयल, डालडा, बहुत ज़्यादा मेयोनेज़, बाज़ार का तला-भुना।
सब्ज़ियाँ (Vegetables) लौकी (हार्ट के लिए अमृत), परवल, कद्दू, पालक, लहसुन (Garlic)। अत्यधिक आलू, भारी बैंगन, डिब्बाबंद और फ्रोज़न (Frozen) सब्ज़ियाँ।
फल और मेवे (Fruits & Nuts) आंवला, सेब, पपीता, तरबूज़, रात भर भीगे हुए अखरोट और बादाम। पैकेटबंद फलों के रस (जिनमें कृत्रिम चीनी होती है), नमकीन रोस्टेड नट्स।
पेय पदार्थ (Beverages) अर्जुन की चाय, धनिए का पानी, लौकी का ताज़ा रस, छाछ। एनर्जी ड्रिंक्स, बहुत ज़्यादा डार्क कॉफी (कैफीन), शराब (Alcohol)।

हार्ट को फौलादी बनाने के लिए जड़ी-बूटियाँ

प्रकृति ने हमें ऐसे कई जादुई रसायन दिए हैं, जो बिना किसी साइड-इफेक्ट के ब्लड प्रेशर को नीचे लाते हैं और स्ट्रेस के हॉर्मोन्स को शांत कर देते हैं:

  • अर्जुन: आयुर्वेद में हार्ट (हृदय) के लिए अर्जुन से बड़ी कोई औषधि नहीं है। यह धमनियों के ब्लॉक को खोलता है, हार्ट की पंपिंग को मज़बूत करता है और ब्लड प्रेशर को प्राकृतिक रूप से नॉर्मल करता है।
  • सर्पगंधा: यह आयुर्वेद की सबसे शक्तिशाली जड़ी-बूटी है जो तेज़ी से बढ़े हुए ब्लड प्रेशर को तुरंत शांत करती है और भयंकर एंग्जायटी व अनिद्रा (Insomnia) को खत्म करती है।
  • अश्वगंधा: ऑफिस के भयंकर स्ट्रेस और कॉर्टिसोल लेवल को गिराने के लिए अश्वगंधा शरीर को तनाव सहने की भारी ताकत देता है।
  • ब्राह्मी: 35 की उम्र में काम के प्रेशर से जब दिमाग सुन्न पड़ने लगे, तो ब्राह्मी नर्वस सिस्टम को फौलादी शांति और ठंडक प्रदान करती है।
  • लहसुन: रोज़ाना सुबह खाली पेट लहसुन की एक या दो कली (पानी के साथ) निगलने से खून पतला होता है, कोलेस्ट्रॉल घटता है और वात दोष शांत होता है।

स्ट्रेस और BP को शांत करने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरेपीज़

जब स्ट्रेस बहुत गहराई तक नसों में जम चुका हो और दिमाग रिलैक्स (Relax) करना भूल गया हो, तो पंचकर्म की ये बाहरी थेरेपीज़ शरीर को तुरंत रीबूट कर देती हैं:

  • शिरोधारा: माथे पर औषधीय तेल की लगातार धारा गिराने की यह जादुई शिरोधारा प्रक्रिया नर्वस सिस्टम के सारे ओवरलोड को तुरंत शांत कर देती है। यह हाई बीपी के लिए एक रामबाण चिकित्सा है।
  • हृद बस्ती: सीने पर (हृदय के स्थान पर) आटे का घेरा बनाकर उसमें हल्का गर्म औषधीय तेल रोका जाता है। यह थेरेपी सीधे हृदय की मांसपेशियों को ताकत देती है और घबराहट (Palpitations) को मिटाती है।
  • अभ्यंग: गुनगुने वात-शामक औषधीय तेलों से की जाने वाली यह संपूर्ण शारीरिक अभ्यंग मालिश शरीर की जकड़न को खत्म करती है और ब्लड सर्कुलेशन को सामान्य करती है।
  • विरेचन: लिवर और रक्त की डीप-क्लीनिंग के लिए यह प्रक्रिया की जाती है। यह खून से अतिरिक्त पित्त (गर्मी) और टॉक्सिन्स को बाहर निकालकर धमनियों को साफ करती है।

ब्लड प्रेशर के प्राकृतिक रूप से नॉर्मल (Normal) होने में कितना समय लगता है?

बरसों की गलत लाइफस्टाइल और भयंकर स्ट्रेस से थके हुए नर्वस सिस्टम को दोबारा प्राकृतिक अवस्था में लाने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है:

  • शुरुआती 1-2 महीने: आपकी जठराग्नि सुधरेगी। पेट की गैस और एसिडिटी शांत होंगी। सिर का भारीपन कम होने लगेगा और रात को गहरी नींद आनी शुरू हो जाएगी।
  • 3-4 महीने: मेध्य और हृद्य रसायनों (जैसे अर्जुन और ब्राह्मी) के प्रभाव से धमनियों की कड़ापन (Stiffness) कम होगा। आपका बीपी प्राकृतिक रूप से सामान्य रेंज (Normal range) में आने लगेगा।
  • 5-6 महीने: आपका नर्वस सिस्टम और मेटाबॉलिज़्म पूरी तरह से रीबूट हो जाएगा। आप बिना किसी भारी एलोपैथिक गोली के अपने ब्लड प्रेशर और स्ट्रेस को आसानी से कंट्रोल कर सकेंगे।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

हाई ब्लड प्रेशर के इलाज को लेकर आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के नज़रिए में एक बहुत बड़ा और बुनियादी अंतर है।

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा (Symptomatic care) आयुर्वेद (Holistic care)
इलाज का मुख्य लक्ष्य खून की नसों को ज़बरदस्ती चौड़ा करने या हार्ट रेट कम करने के लिए गोलियाँ (Beta-blockers, ACE inhibitors) देना। प्राण वात को शांत करना, जठराग्नि को बढ़ाना और अर्जुन जैसी औषधियों से हार्ट की मांसपेशियों को प्राकृतिक ताकत देना।
बीमारी को देखने का नज़रिया इसे केवल हार्ट और ब्लड वेसल्स (Blood vessels) की एक क्रोनिक और लाइलाज बीमारी मानना। इसे अशुद्ध रक्त, कमज़ोर पाचन, और 'सुविधाजनक जीवनशैली' के कारण हुए भयंकर वात-पित्त प्रकोप का सिंड्रोम मानना।
डाइट और लाइफस्टाइल केवल नमक कम करने और स्ट्रेस न लेने की आम सलाह दी जाती है। व्यक्ति की प्रकृति के अनुसार दोष-शामक आहार, योगासन, सही स्लीप रूटीन और 'क्लीन ईटिंग' को ही इलाज का आधार माना जाता है।
लंबा असर गोलियाँ जीवन भर खानी पड़ती हैं और डोज़ अक्सर बढ़ती चली जाती है। शरीर अंदर से इतना मज़बूत और शांत हो जाता है कि वह प्राकृतिक रूप से ब्लड प्रेशर को खुद कंट्रोल करना सीख जाता है।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?

हालांकि आयुर्वेद हाई ब्लड प्रेशर को प्राकृतिक रूप से कंट्रोल कर सकता है, लेकिन अगर आपको अपने शरीर में ये कुछ गंभीर और अचानक होने वाले बदलाव दिखें, तो तुरंत मेडिकल इमरजेंसी में संपर्क करें:

  • सीने में भारी दबाव और दर्द: अगर बैठे-बैठे सीने में ऐसा भयंकर भारीपन महसूस हो जो बायीं बांह, पीठ या जबड़े तक जा रहा हो और साथ में बहुत पसीना आए।
  • सांस लेने में भारी तकलीफ: अगर बिना कोई भारी काम किए अचानक सांस इस कदर फूलने लगे कि बात करना या लेटना भी मुश्किल हो जाए।
  • अचानक बोलने में लड़खड़ाहट या शरीर का सुन्न होना: अगर चेहरे, हाथ या पैर का कोई हिस्सा अचानक सुन्न पड़ जाए या बात समझने में दिक्कत हो (यह स्ट्रोक का लक्षण हो सकता है)।
  • आँखों के आगे अचानक अंधेरा छाना: अगर विज़न एकदम से धुंधला हो जाए या सिर में अब तक का सबसे भयंकर फटने वाला दर्द उठे।

निष्कर्ष

35 की उम्र में 'हाई बीपी' (High BP) का टैग लगना कोई बुढ़ापे की शुरुआत नहीं है; यह आपकी भागदौड़ भरी ज़िंदगी का वह चीखता हुआ अलार्म है जो बता रहा है कि लगातार बैठे रहने, जंक फूड खाने और रात-रात भर जागने से आपके शरीर का नर्वस सिस्टम और हार्ट पूरी तरह से थक (Burnout) चुका है। जब आप इस अलार्म को रोज़ाना केवल एक 'बीपी की गोली' से सुन्न करके उसी ज़हरीले रूटीन में वापस लौट जाते हैं, तो आप अपनी धमनियों को हील करने के बजाय उन्हें अंदर ही अंदर और ज़्यादा डैमेज कर रहे होते हैं। इस गोलियों के जाल और डिजिटल स्ट्रेस के खतरनाक चक्र से बाहर निकलें। रात को सही समय पर सोएं, अपनी डाइट में पुराना चावल, लौकी और शुद्ध गाय का घी शामिल करें। अर्जुन, अश्वगंधा और ब्राह्मी जैसी जादुई आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करें, और पंचकर्म की शिरोधारा व अभ्यंग थेरेपी से अपने उबलते हुए दिमाग को बर्फ जैसी शांति दें। 35 की उम्र में बीमारियों से समझौता न करें, और अपने हार्ट व नर्वस सिस्टम को स्थायी रूप से फौलादी बनाने के लिए आज ही जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

बिल्कुल नहीं। 30-35 की उम्र में हाई बीपी ज़्यादातर खराब लाइफस्टाइल (Secondary Hypertension) और स्ट्रेस का नतीजा होता है। अगर आप आयुर्वेद के ज़रिए अपने पाचन (Gut), स्लीप रूटीन और तनाव को सुधार लें, तो इसे 100% रिवर्स और कंट्रोल किया जा सकता है।

नमक पूरी तरह छोड़ना शरीर के लिए खतरनाक हो सकता है (इलेक्ट्रोलाइट इम्बैलेंस)। आपको सफेद रिफाइंड नमक और पैकेटबंद खाने (चिप्स, सॉस, नमकीन) में छिपे हुए सोडियम को छोड़ना है। घर के खाने में प्राकृतिक सेंधा नमक (Pink Himalayan Salt) का संतुलित उपयोग पूरी तरह सुरक्षित है।

शत-प्रतिशत। कैफीन नर्वस सिस्टम को ओवर-एक्टिव कर देता है (Adrenaline बढ़ाता है), जिससे नसें सिकुड़ जाती हैं और बीपी तुरंत बढ़ जाता है। अगर आपको स्ट्रेस और हाई बीपी है, तो डार्क कॉफी आपके लिए सीधा ज़हर है।

अर्जुन हृदय के लिए आयुर्वेद का सबसे बड़ा रसायन है। इसमें प्राकृतिक रूप से Coenzyme Q10 और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं। यह धमनियों (Arteries) की सूजन को कम करता है, हार्ट की पंपिंग को सुधारता है और खून के बहाव को बिल्कुल स्मूद (Smooth) कर देता है।

बिल्कुल। जब आप लगातार भविष्य या ऑफिस के बारे में सोचते हैं (क्रोनिक स्ट्रेस), तो शरीर का सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम हमेशा चालू (ON) रहता है। इससे कॉर्टिसोल का लेवल नीचे नहीं आता और नसें 24 घंटे कसी (Stiff) रहती हैं, जिससे बीपी हमेशा हाई बना रहता है।

अगर आपका बीपी कंट्रोल में नहीं है, तो अचानक भारी वज़न (Heavy Gym) उठाना हार्ट पर कार्डियक स्ट्रेस डाल सकता है, जिससे बीपी खतरनाक स्तर तक स्पाइक (Spike) कर सकता है। शुरुआत में योगासन, अनुलोम-विलोम और हल्की ब्रिस्क वॉक (Brisk Walk) सबसे सुरक्षित और बेहतरीन व्यायाम हैं।

शिरोधारा में माथे के मध्य (थर्ड आई) पर गुनगुने औषधीय तेल की लगातार धारा गिराई जाती है। यह सीधे तौर पर आपके ओवर-एक्टिव नर्वस सिस्टम को शांत (Parasympathetic mode) करती है, जिससे स्ट्रेस हॉर्मोन्स तुरंत गिर जाते हैं और बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर कुछ ही मिनटों में सामान्य होने लगता है।

बहुत गहरा संबंध है। जब आप रात को गहरी नींद (Deep sleep) में होते हैं, तो शरीर आपके ब्लड प्रेशर को प्राकृतिक रूप से नीचे (Dip) लाता है और नसों को रिपेयर करता है। जो लोग रात को 6-7 घंटे नहीं सोते, उनका बीपी 24 घंटे हाई बना रहता है।

हाँ, लहसुन में एलिसिन (Allicin) नाम का तत्व होता है, जो खून को प्राकृतिक रूप से पतला करता है और धमनियों की जकड़न को कम करके उन्हें चौड़ा (Vasodilation) करता है। रोज़ाना सुबह लहसुन की एक कली पानी के साथ लेना वात और बीपी दोनों को शांत करता है।

कभी भी एलोपैथिक बीपी की गोली अचानक (Cold turkey) नहीं छोड़नी चाहिए। ऐसा करने से रिबाउंड हाइपरटेंशन (Rebound Hypertension) होता है, जिसमें बीपी एकदम से बहुत खतरनाक स्तर तक पहुँच सकता है। आयुर्वेदिक इलाज के साथ धीरे-धीरे लाइफस्टाइल सुधारकर डॉक्टर की सलाह से ही डोज़ कम की जानी चाहिए।

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