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Creatinine बढ़ने का मतलब Dialysis ही है? सच क्या है जानिए

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

ज़रा उस पल के बारे में सोचिए जब आपने अपनी ब्लड रिपोर्ट हाथ में ली और आपकी नज़र 'क्रिएटिनिन' के बढ़े हुए आंकड़ों पर पड़ी। इंटरनेट पर एक छोटा सा सर्च करते ही आपके सामने 'किडनी फेलियर' और 'डायलिसिस' जैसे डरावने शब्द आने लगते हैं। मन में सबसे पहला सवाल यही उठता है "क्या अब मेरी किडनी कभी ठीक नहीं होगी? क्या अब मुझे पूरी उम्र मशीनों डायलिसिस के सहारे गुज़ारनी पड़ेगी?"

अगर आप या आपके परिवार में कोई इस डर से गुज़र रहा है, तो यह ब्लॉग आपके लिए एक उम्मीद की किरण है। सबसे पहले यह समझना ज़रूरी है कि बढ़ा हुआ क्रिएटिनिन सिर्फ़ एक 'अलार्म' है, 'आख़िरी स्टेशन' नहीं। यह शरीर का एक इशारा है कि आपकी किडनी को अब आपके साथ और सही उपचार की ज़रूरत है।

क्रिएटिनिन क्या है? शरीर के इस 'वेस्ट प्रोडक्ट' का विज्ञान समझें

क्रिएटिनिन कोई बीमारी नहीं है, बल्कि यह हमारे शरीर के मेटाबॉलिज्म का एक सामान्य हिस्सा है। जब हम अपनी मांसपेशियों का उपयोग करते हैं, तो 'क्रिएटिन' नामक तत्व ऊर्जा बनाने के दौरान टूटता है और क्रिएटिनिन बनाता है। स्वस्थ किडनी का काम इस वेस्ट को खून से छानकर पेशाब के ज़रिए बाहर निकालना है। जब किडनी की छानने की रफ़्तार कम होती है, तो यह खून में जमा होने लगता है। सरल शब्दों में, यह सिर्फ़ एक सूचक है जो बताता है कि किडनी की 'सफ़ाई' क्षमता प्रभावित हुई है।

क्रिएटिनिन बढ़ने का मतलब डायलिसिस ही है? सच क्या है जानिए

क्या बढ़ता हुआ क्रिएटिनिन हमेशा डायलिसिस का संकेत है? डरें नहीं, सच जानें जैसे ही कोई मरीज़ अपनी ब्लड रिपोर्ट में क्रिएटिनिन का स्तर बढ़ा हुआ देखता है, उसके ज़हन में सबसे पहला और डरावना शब्द 'डायलिसिस' ही आता है। इंटरनेट पर मौजूद आधी-अधूरी जानकारी इस डर को और बढ़ा देती है। लेकिन यहाँ रुककर सच समझना ज़रूरी है बढ़ा हुआ क्रिएटिनिन सिर्फ़ एक 'अलार्म' है, 'आख़िरी स्टेशन' नहीं। यह इस बात का संकेत है कि आपकी किडनी को मदद की ज़रूरत है, न कि इस बात का कि वह पूरी तरह ख़राब हो चुकी है। डर को छोड़कर अगर सही समय पर सही कदम उठाए जाएं, तो डायलिसिस की नौबत को टाला जा सकता है।

सिर्फ़ क्रिएटिनिन नहीं, आपकी किडनी की सेहत का असली पैमाना है GFR

अक्सर लोग सिर्फ़ क्रिएटिनिन की संख्या देखकर परेशान हो जाते हैं, लेकिन डॉक्टर हमेशा EGFR Estimated Glomerular Filtration Rate पर ध्यान देते हैं। क्रिएटिनिन उम्र, वज़न और लिंग के हिसाब से बदल सकता है, लेकिन GFR यह बताता है कि आपकी किडनी हर मिनट कितने प्रतिशत खून छान रही है। यदि आपका क्रिएटिनिन थोड़ा बढ़ा है लेकिन GFR स्थिर है, तो स्थिति उतनी गंभीर नहीं होती जितनी आप सोच रहे हैं। अपनी रिपोर्ट देखते समय हमेशा इन दोनों के तालमेल को समझें।

क्रिएटिनिन बढ़ने के 5 चौंकाने वाले कारण जो किडनी की बीमारी नहीं हैं

हर बार क्रिएटिनिन बढ़ना किडनी फेलियर नहीं होता, इसके कुछ अन्य कारण भी हो सकते हैं

डिहाइड्रेशन पानी की कमी शरीर में पानी की बहुत कमी होने पर क्रिएटिनिन अस्थायी रूप से बढ़ जाता है।

हैवी वर्कआउट जिम में बहुत भारी वज़न उठाना या इंटेंस कसरत मांसपेशियों को तोड़ती है, जिससे क्रिएटिनिन बढ़ सकता है।

प्रोटीन सप्लीमेंट्स ज़्यादा मात्रा में रेड मीट या व्हे प्रोटीन का सेवन इसे बढ़ा सकता है।

दवाइयों का प्रभाव कुछ पेनकिलर्स या एंटीबायोटिक्स किडनी पर दबाव डालती हैं।

मांसपेशियों में चोट अगर शरीर के किसी हिस्से में मसल डैमेज हुआ है, तो भी रिपोर्ट ऊपर आ सकती है।

क्या एक बार क्रिएटिनिन बढ़ने पर इसे वापस सामान्य किया जा सकता है?

इसका जवाब स्थिति के 'टाइप' पर निर्भर करता है

 1.एक्यूट किडनी इंजरी AKI यदि क्रिएटिनिन अचानक बढ़ा है जैसे इंफेक्शन या डिहाइड्रेशन से, तो सही इलाज से यह बिल्कुल नॉर्मल हो सकता है।

 2.क्रॉनिक किडनी डिजीज CKD यदि किडनी को लंबे समय से डायबिटीज़ या बीपी से नुक़सान पहुँचा है, तो इसे पूरी तरह नॉर्मल करना मुश्किल होता है, लेकिन इसे स्थिर ज़रूर किया जा सकता है ताकि डायलिसिस की ज़रूरत न पड़े।

आयुर्वेद की दृष्टि क्यों बढ़ता क्रिएटिनिन किडनी का 'आख़िरी स्टेशन' नहीं है?

आयुर्वेद में किडनी को 'वृक्क' कहा जाता है और क्रिएटिनिन का बढ़ना 'वृक्क विकार' या वात-पित्त दोषों के असंतुलन का परिणाम है। आधुनिक चिकित्सा जहाँ सिर्फ़ क्रिएटिनिन के नंबरों को कम करने के लिए डायलिसिस का सहारा लेती है, वहीं आयुर्वेद किडनी के सूक्ष्म छिद्रों Nephrons की मरम्मत करने पर ध्यान देता है। आयुर्वेद मानता है कि अगर हम शरीर के विषाक्त तत्वों को अन्य रास्तों से बाहर निकाल दें और जड़ी-बूटियों से किडनी को पोषण दें, तो वह दोबारा काम करने लायक बन सकती है।

किडनी को नया जीवन देने वाली जादुई जड़ी-बूटियाँ

ये औषधियां किडनी के मरीज़ों के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं

पुनर्नवा यह किडनी की कोशिकाओं को दोबारा जीवित करने में मदद करती है और सूजन घटाती है।

वरुण यह पेशाब के बहाव को सुचारू बनाती है और यूरिया-क्रिएटिनिन के स्तर को कम करने में सहायक है।

गोक्षुर यह मूत्र मार्ग की सफ़ाई करती है और नसों को ताकत देती है।

कासनी यह लिवर और किडनी दोनों की सेहत को मज़बूत बनाती है।

पलाश यह किडनी के फ़िल्टर को साफ़ रखने और जलन को शांत करने में मदद करती है।

क्या सिर्फ़ डाइट बदलने से क्रिएटिनिन कम हो सकता है?

खान-पान में बदलाव किडनी के बोझ को 50% तक कम कर देता है।

क्या खाएं

लौकी, तोरई और परवल ये सब्ज़ियां आसानी से पचती हैं और किडनी पर बोझ नहीं डालतीं।

मूंग की दाल प्रोटीन का सबसे सुरक्षित और हल्का स्रोत।

गुनगुना पानी किडनी की सफ़ाई के लिए घूँट-घूँट कर पर्याप्त पानी पिएं।

पुराना चावल यह पाचन में हल्का और वात को शांत रखने वाला होता है।

लाल शिमला मिर्च और पत्तागोभी इनमें पोटेशियम कम होता है, जो किडनी के लिए सुरक्षित है।

क्या न खाएं

पालक और टमाटर इनमें ऑक्सालेट ज़्यादा होता है जो पथरी और किडनी की सूजन बढ़ा सकता है।

नमक और सोडा सोडियम किडनी पर दबाव डालता है और शरीर में सूजन पैदा करता है।

दही और पनीर ज़्यादा प्रोटीन और पोटेशियम वाली डेयरी चीज़ों से बचें।

खट्टे फल संतरा, नींबू इनमें पोटेशियम ज़्यादा हो सकता है।

पैकेज्ड और जंक फूड इनमें छिपे हुए प्रिजर्वेटिव्स किडनी के सबसे बड़े दुश्मन हैं।

लाभदायक आयुर्वेदिक थेरेपी 

पंचकर्म किडनी के मरीज़ों के शरीर से 'वेस्ट' बाहर निकालने का एक प्रभावी ज़रिया है। चूँकि किडनी अपना काम नहीं कर पा रही, इसलिए हम त्वचा और अन्य अंगों के ज़रिए गंदगी बाहर निकालते हैं

बस्ती Medicinal Enema यह किडनी के विकारों के लिए सबसे श्रेष्ठ है।

स्वेदन Steam पसीने के ज़रिए शरीर के टॉक्सिन्स को बाहर निकाला जाता है।

विरेचन यह शरीर से पित्त और टॉक्सिन्स को बाहर निकालकर आंतों को पूरी तरह 'रीसेट' कर देता है।

ठीक होने में कितना समय लगता है?

क्रिएटिनिन को कम करना और किडनी की कार्यक्षमता GFR को सुधारना एक क्रमिक प्रक्रिया है

15 दिन से 1 महीना शुरुआती सुधार इलाज के पहले महीने में मरीज़ को शारीरिक लक्षणों में सुधार महसूस होने लगता है। पैरों की सूजन कम होने लगती है, भूख में सुधार होता है और यूरिया का स्तर गिरने से जी मिचलाना बंद हो जाता है।

1 से 3 महीने किडनी फंक्शन का स्थिरीकरण इस दौरान क्रिएटिनिन का स्तर स्थिर होना शुरू होता है। औषधियाँ किडनी के 'नेफ्रॉन्स' की सूजन को कम करती हैं, जिससे किडनी की छानने की क्षमता बेहतर होती है। डायलिसिस पर चल रहे मरीज़ों की डायलिसिस की फ्रीक्वेंसी इस चरण में कम होने लगती है।

3 से 6 महीने दीर्घकालिक मजबूती यह चरण किडनी के ऊतकों के पुनर्जीवन का होता है। इसमें न केवल क्रिएटिनिन नियंत्रित रहता है, बल्कि हीमोग्लोबिन के स्तर में भी सुधार आता है और मरीज़ अपनी पुरानी ऊर्जा वापस महसूस करने लगता है।

आयुर्वेदिक इलाज से क्या फ़ायदे मिलते हैं?

Jiva Ayurveda का उपचार सिर्फ़ एक पर्चा नहीं, बल्कि किडनी को दोबारा सक्रिय करने की एक संपूर्ण प्रक्रिया है

नेफ्रॉन रिपेयर Nephron Repair आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां किडनी की सूक्ष्म फिल्टर इकाइयों की मरम्मत करती हैं, जिससे किडनी प्राकृतिक रूप से खून साफ़ करने लगती है।

डायलिसिस की निर्भरता में कमी उचित उपचार से शरीर के टॉक्सिन्स दवाओं के ज़रिए बाहर निकलने लगते हैं, जिससे बार-बार डायलिसिस कराने की ज़रूरत कम हो जाती है।

अन्य अंगों की सुरक्षा किडनी फेलियर का असर अक्सर दिल और लिवर पर भी पड़ता है। आयुर्वेद पूरे शरीर को डिटॉक्स करता है, जिससे अन्य महत्वपूर्ण अंग सुरक्षित रहते हैं।

साइड-इफ़ेक्ट मुक्त समाधान जहाँ भारी एलोपैथिक दवाएं कभी-कभी किडनी पर दबाव डालती हैं, वहीं आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ किडनी को पोषण देती हैं।

मानसिक और शारीरिक ऊर्जा जब शरीर से 'यूरिमिक टॉक्सिन्स' बाहर निकल जाते हैं, तो मरीज़ की दिमागी धुंध Brain Fog ख़त्म होती है और वह ज़्यादा सक्रिय महसूस करता है।

मरीज़ों का भरोसा उनके जीवन बदलने वाले अनुभव

मेरा नाम विक्रम दास है, मैं लखनऊ का रहने वाला हूँ और यहाँ मैं जीवा आयुर्वेदिक क्लीनिक पर आया हूँ। मुझे किडनी की प्रॉब्लम थी, क्रिएटिनिन काफी अधिक हो गया था, करीब 7.6 के आसपास आ गया था। और जो डॉक्टर ने बोला कि दूसरी जो रिपोर्ट्स थीं, वह काफी मॉडर्न पैरामीटर्स से बाहर चला गया था।

मेरा  कोलेस्ट्रॉल भी बढ़ गया था, यूरिक एसिड भी हो गया था, इन सभी के लिए मैं यहाँ आया। यहाँ डॉक्टर से ट्रीटमेंट लिया, करीब एक साल पहले मैंने शुरू किया और अब ये सभी मेरे कंट्रोल के अंदर आ गए हैं। मैं काफी रिलीफ महसूस कर रहा हूँ, मुझे स्वास्थ्य में सुधार हुआ है और मैं लगातार अभी ठीक महसूस करता हूँ। जीवा आयुर्वेदा से संपर्क करने से मुझे बहुत फायदा हुआ।

आधुनिक उपचार और आयुर्वेदिक उपचार में अंतर

विशेषता आधुनिक चिकित्सा Allopathy आयुर्वेदिक चिकित्सा Ayurveda
मुख्य फोकस यह मुख्य रूप से मैनेजमेंट पर ध्यान देती है। किडनी फेल होने पर डायलिसिस से खून साफ किया जाता है यह रिपेयर और रीजनरेशन पर ध्यान देता है, ताकि बचे हुए नेफ्रॉन्स को दोबारा सक्रिय किया जा सके
दवाइयों का तरीका बीपी और शुगर कंट्रोल के लिए सिंथेटिक दवाएं दी जाती हैं, जो लंबे समय में किडनी पर दबाव डाल सकती हैं पुनर्नवा, वरुण और गोक्षुर जैसी जड़ी-बूटियां किडनी को पोषण देती हैं और टॉक्सिन्स बाहर निकालती हैं
इलाज की प्रक्रिया क्रिएटिनिन ज्यादा बढ़ने पर डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट को अंतिम विकल्प माना जाता है रक्त शुद्धि और बस्ती चिकित्सा से शरीर की प्राकृतिक सफाई कर डायलिसिस की निर्भरता कम करने का प्रयास
जड़ की पहचान लक्षणों और लैब रिपोर्ट Creatinine/BUN को तुरंत नियंत्रित करने पर फोकस शरीर की अग्नि और दोष वात-पित्त के असंतुलन को ठीक कर बीमारी की जड़ पर काम

डॉक्टर से कब मिलना चाहिए? 

अगर आप नीचे दिए गए लक्षणों में से किसी का भी अनुभव कर रहे हैं, तो इसे 'सिर्फ थकान' या 'उम्र का असर' समझकर नज़रअंदाज़ न करें। ये संकेत बताते हैं कि आपकी किडनी मुश्किल में है

पेशाब में बदलाव बार-बार पेशाब आना खासकर रात में, पेशाब का रंग गहरा होना या उसमें झाग बनना, जो प्रोटीन लीक होने का संकेत है।

शरीर में सूजन Oedema सुबह सोकर उठने पर आँखों के नीचे सूजन होना या शाम तक टखनों और पैरों में भारीपन महसूस होना।

लगातार थकान और साँस फूलना बिना मेहनत किए थकान होना और सीढ़ियाँ चढ़ते समय साँस फूलना, क्योंकि किडनी खराब होने पर खून की कमी होने लगती है।

स्वाद में बदलाव और जी मिचलाना मुँह का स्वाद धात्विक Metallic taste हो जाना, भूख न लगना और सुबह के समय उल्टी जैसा महसूस होना।

त्वचा में खुजली और सूखापन जब खून में यूरिया और टॉक्सिन्स बढ़ जाते हैं, तो त्वचा में तेज़ खुजली होने लगती है।

निष्कर्ष

क्रिएटिनिन का बढ़ना आपके जीवन का अंत नहीं, बल्कि संभलने की एक चेतावनी है। डायलिसिस और ट्रांसप्लांट की डरावनी बातों के बीच आयुर्वेद एक उम्मीद की किरण है। सही जड़ी-बूटियों, संतुलित डाइट और पंचकर्म के साथ, आपकी किडनी को दोबारा मज़बूत बनाया जा सकता है। याद रखें, आपकी सेहत आपके सही फैसलों पर टिकी है। जीवा आयुर्वेद से जुड़ें और अपनी किडनी को फिर से काम करने का एक मौका दें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

पीपल और नीम की छाल फ़ायदेमंद है, लेकिन बिना डॉक्टर की सलाह के इसे लेना पोटेशियम बढ़ा सकता है जो दिल के लिए ख़तरनाक हो सकता है।

हाँ, जब किडनी पानी और सोडियम नहीं छान पाती, तो वह पैरों और आँखों के नीचे सूजन के रूप में दिखने लगता है।

हीं, अनकंट्रोल्ड शुगर किडनी ख़राब करती है। हालांकि, कुछ पेनकिलर्स का दवाओं के साथ मेल नुक़सानदेह हो सकता है।

अमरूद (बिना बीज के), सेब और पपीता सीमित मात्रा में किडनी के लिए सबसे सुरक्षित फल माने जाते हैं।

जरूरी नहीं। यदि किडनी की क्षमता (GFR) में सुधार होता है, तो डॉक्टर डायलिसिस को कम या बंद करने का फैसला ले सकते हैं।

आयुर्वेद जड़ पर काम करता है, इसलिए इसमें 1 से 3 महीने का समय लग सकता है, लेकिन इसके परिणाम स्थायी और सुरक्षित होते हैं।

आयुर्वेद जड़ पर काम करता है, इसलिए इसमें 1 से 3 महीने का समय लग सकता है, लेकिन इसके परिणाम स्थायी और सुरक्षित होते हैं।

हर कमर दर्द किडनी का नहीं होता, लेकिन अगर दर्द पसलियों के नीचे पीछे की तरफ़ है, तो पेशाब की जांच 

ज़रूर कराएं।

किडनी की स्टेज के अनुसार डॉक्टर पानी की मात्रा तय करते हैं। बहुत ज़्यादा या बहुत कम पानी, दोनों ही कुछ स्थितियों में नुक़सानदेह हो सकते हैं।

नारियल पानी में पोटेशियम बहुत ज़्यादा होता है, इसलिए बढ़े हुए क्रिएटिनिन और पोटेशियम के मरीज़ों को इससे बचना चाहिए।

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