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Triglycerides 300+ — Cholesterol से ज़्यादा खतरनाक

Information By Dr. Keshav Chauhan
  • category-iconPublished on 13 May, 2026
  • category-iconUpdated on 13 May, 2026
  • category-iconHeart Health
  • blog-view-icon5006

आजकल लोगों में ट्राइग्लिसराइड्स (Triglycerides) बढ़ने की समस्या तेज़ी से बढ़ रही है, और 300+ का स्तर 'कोलेस्ट्रॉल (Cholesterol) से भी ज़्यादा खतरनाक' माना जाता है। यह भयंकर स्थिति हार्ट अटैक, फैटी लिवर और स्ट्रोक का डर बढ़ाकर लोगों के आत्मविश्वास और दिमागी शांति को पूरी तरह खत्म कर देती है। एलोपैथी में इन लक्षणों को दबाने के लिए अक्सर खून पतला करने वाली या स्टेटिन (Statins) गोलियाँ दी जाती हैं। ये दवाइयाँ कुछ समय के लिए ब्लड रिपोर्ट को साफ ज़रूर करती हैं, लेकिन जड़ पर काम न करने से माँसपेशियों में दर्द बढ़ता है और शरीर अंदर से कमज़ोर हो जाता है। आयुर्वेद के अनुसार, यह समस्या खराब मेटाबॉलिज़्म और 'कफ-मेद' दोष के भड़कने से जुड़ी है। जीवा आयुर्वेद प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से मेटाबॉलिज़्म को संतुलित कर इस समस्या को जड़ से मिटाता है ताकि आपकी प्राकृतिक सेहत वापस लौट सके।

Triglycerides 300+ असल में क्या है?

ट्राइग्लिसराइड्स रक्त में पाए जाने वाले एक प्रकार के फैट (Lipids) हैं। जब हम ज़रूरत से ज़्यादा कैलोरी खाते हैं, तो शरीर उसे तुरंत ऊर्जा में बदलने के बजाय ट्राइग्लिसराइड्स में बदलकर जमा कर लेता है। जब रक्त में इसका स्तर 300+ के पार चला जाता है, तो खून भयंकर रूप से गाढ़ा और चिपचिपा होने लगता है। बढ़ा हुआ ट्राइग्लिसराइड्स धमनियों (Arteries) की दीवारों को कड़ा और संकरा कर देता है, जिससे रक्त का प्रवाह धीमा हो जाता है। यह कोलेस्ट्रॉल से भी ज़्यादा खतरनाक इसलिए है क्योंकि यह सीधे लिवर और पैंक्रियास पर हमला करता है। स्टेटिन गोलियों का इस्तेमाल सिर्फ बाहरी और अस्थायी इलाज है, जबकि असली गड़बड़ी शरीर के अंदर मंद पड़ी पाचन अग्नि में चल रही होती है।

Triglycerides 300+ में दिखने वाले इन हार्मोनल और शारीरिक लक्षणों के भयंकर संकेत

ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर जब 300 के पार होता है, तो शरीर द्वारा दिए जाने वाले भयंकर लक्षण इस प्रकार हैं:

  • सीने में भारीपन (Chest Heaviness): थोड़ा सा चलने या सीढ़ियाँ चढ़ने पर साँस फूलना और सीने के बाएँ (Left) हिस्से में दबाव या दर्द महसूस होना।
  • लगातार थकान (Chronic Fatigue): खून गाढ़ा होने से शरीर के अंगों तक ऑक्सीजन नहीं पहुँच पाती, जिससे बिना कोई काम किए भी भयंकर कमज़ोरी और सुस्ती रहती है।
  • त्वचा पर पीले चकत्ते (Xanthomas): आँखों के पलकों के ऊपर, कोहनियों या घुटनों के पास फैट के पीले-पीले दाने या उभार निकल आना।
  • पेट का मोटापा (Abdominal Obesity): पेट के आस-पास बहुत तेज़ी से चर्बी का जमा होना और फैटी लिवर (Fatty Liver) के कारण पेट के ऊपरी हिस्से में भारीपन रहना।

ये संकेत अगर लगातार दिखें तो तुरंत अपने ब्लड टेस्ट (Lipid Profile) कराएँ और चिकित्सक से परामर्श लें।

Triglycerides बढ़ने के असली कारण

धमनियों में फैट जमने और खून गाढ़ा होने के पीछे गहरे अंदरूनी कारण होते हैं:

  • कमज़ोर 'अग्नि' और इंसुलिन रेजिस्टेंस: जब शरीर की पाचन अग्नि मंद होती है और इंसुलिन का सही इस्तेमाल नहीं हो पाता, तो शरीर चीनी और कार्बोहाइड्रेट को सीधे ट्राइग्लिसराइड्स (फैट) में बदल देता है।
  • रक्त में 'आम' का संचय: खराब पाचन और जंक फूड से बना 'आम' (Toxins) रक्त को दूषित करता है। यह खून को गाढ़ा बनाकर धमनियों में भयंकर ब्लॉकेज पैदा करता है।
  • विरुद्ध आहार और जंक फूड: तली-भुनी चीज़ें, रिफाइंड तेल और बहुत ज़्यादा मीठा खाने से शरीर का मेटाबॉलिज़्म सुस्त हो जाता है और लिवर पर दबाव पड़ता है।
  • शारीरिक निष्क्रियता (Sedentary Lifestyle): व्यायाम की कमी और एक ही जगह घंटों बैठे रहने से शरीर की कैलोरी बर्न नहीं होती, जिससे फैट सीधा खून में तैरने लगता है।

Triglycerides 300+ को अनदेखा करने के गंभीर जोखिम

इस भयंकर स्थिति को अगर सिर्फ मामूली कोलेस्ट्रॉल मानकर अनदेखा किया जाए, तो यह कई गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है:

  • हार्ट अटैक और स्ट्रोक (Heart Attack & Stroke): खून गाढ़ा होने से दिल को रक्त पंप करने में भयंकर मेहनत करनी पड़ती है, जिससे धमनियों में क्लॉट (थक्का) बनने और हार्ट अटैक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
  • अक्यूट पैंक्रियाटाइटिस (Acute Pancreatitis): ट्राइग्लिसराइड्स 500 या उससे ज़्यादा होने पर पैंक्रियास में भयंकर सूजन आ जाती है, जो एक जानलेवा स्थिति बन सकती है।
  • फैटी लिवर डिज़ीज़: अतिरिक्त फैट सीधे लिवर में जाकर जमा हो जाता है, जिससे लिवर का आकार बढ़ जाता है और भविष्य में सिरोसिस (Cirrhosis) का खतरा रहता है।

Triglycerides 300+ पर आयुर्वेद का क्या नज़रिया है?

आयुर्वेद में उच्च ट्राइग्लिसराइड्स को 'मेदो रोग' और रक्त में 'आम' (विषाक्त पदार्थों) के जमा होने से जोड़कर देखा जाता है। आयुर्वेद के अनुसार, कफ दोष के बिगड़ने और जठराग्नि (पाचन तंत्र) के सुस्त होने से रस और मेद धातु दूषित हो जाती हैं। जब यह 'आम' रक्त में मिलता है, तो खून चिपचिपा हो जाता है (धमनियों की ब्लॉकेज)। जीवा आयुर्वेद के डॉक्टर नाड़ी देखकर मर्ज़ को पकड़ते हैं कि मेटाबॉलिज़्म किस दोष की वजह से बिगड़ा है। आयुर्वेद में बस खून पतला करने वाली गोलियाँ खिलाना मकसद नहीं है, बल्कि वो चाहते हैं कि बीमारी जड़ से ठीक हो, लिवर साफ हो, और शरीर फैट को ऊर्जा में बदलना सीखे।

जीवा आयुर्वेद Triglycerides को संतुलित करने के लिए कैसे काम करता है?

जीवा आयुर्वेद का उपचार दृष्टिकोण पूरी तरह से व्यक्तिगत है। इलाज शुरू करने से पहले आयुर्वेद एक्सपर्ट इन मुख्य बातों पर बारीकी से ध्यान देते हैं:

  • कस्टमाइज़्ड इलाज: हर व्यक्ति का शरीर और स्वास्थ्य (प्रकृति) अलग होता है, इसलिए इलाज पूरी तरह से उनके अनुकूल ही तय किया जाता है।
  • लक्षणों की पहचान: मरीज़ को दिख रही थकान, साँस फूलने और सीने के भारीपन की बारीकी से जाँच की जाती है।
  • पुरानी मेडिकल हिस्ट्री: मरीज़ द्वारा ली जा रही स्टेटिन (Statins) या अन्य हार्ट की दवाओं का पूरा रिकॉर्ड देखा जाता है।
  • सटीक इलाज की रूपरेखा: कुपित कफ और वात दोषों को पकड़ने के बाद ही अग्नि को तेज़ करने और खून को प्राकृतिक रूप से पतला करने का सबसे सटीक आयुर्वेदिक इलाज शुरू किया जाता है।

Triglycerides को प्राकृतिक रूप से मिटाने वाली अचूक जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद में धमनियों को ताकत देने, ब्लॉकेज खोलने और फैट को घटाने के लिए ये जड़ी-बूटियाँ बेहद असरदार हैं:

  • अर्जुन (Arjuna): यह हृदय के लिए सबसे बेहतरीन जड़ी-बूटी है। यह धमनियों की सूजन कम करती है और खून को प्राकृतिक रूप से साफ और पतला रखती है।
  • गुग्गुल (Guggulu): यह शरीर की कोशिकाओं से ज़िद्दी फैट को पिघलाने और बढ़ा हुआ ट्राइग्लिसराइड्स जड़ से कम करने में बेहद असरदार है।
  • लहसुन (Garlic/Rasona): यह रक्त वाहिकाओं में जमे कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स को काटता है और शरीर के 'आम' को बाहर निकालता है।
  • त्रिकटु (Trikatu): सोंठ, काली मिर्च और पिप्पली का मिश्रण जठराग्नि (Metabolism) को इतना तेज़ कर देता है कि शरीर अतिरिक्त फैट को तुरंत जला देता है।

रक्त और लिवर को साफ करने की पंचकर्म चिकित्सा

प्राकृतिक तरीके से शरीर को अंदर से शुद्ध कर, मेटाबॉलिज़्म को 'रीसेट' (Reset) करने की आयुर्वेदिक प्रक्रिया:

  • उद्वर्तन (Udvartana): औषधीय जड़ी-बूटियों के सूखे पाउडर से शरीर की मालिश की जाती है। यह सीधे त्वचा के नीचे जमा कफ और मेद (फैट) को पिघलाकर ट्राइग्लिसराइड्स को कम करता है।
  • विरेचन (Virechana): शरीर से पुराने रसायनों और टॉक्सिन्स को निकालने के लिए यह एक अचूक चिकित्सा है। औषधीय दवाइयाँ देकर पेट साफ कराया जाता है, जिससे लिवर से सारा भयंकर फैट और पित्त बाहर निकल जाता है।

Triglycerides के ट्रिगर्स को खत्म करने वाला शुद्ध आहार

आयुर्वेदिक वेलनेस में यह समझना बहुत ज़रूरी है कि इस बीमारी में आहार ही आपकी सबसे बड़ी दवा है:

क्या खाएँ?

  • सुपाच्य और हल्का भोजन: मूंग की दाल, लौकी और पेठे का इस्तेमाल बढ़ाएँ, यह पाचन तंत्र पर बोझ नहीं डालते।
  • लहसुन और मेथी: सुबह खाली पेट लहसुन की कली और मेथी दाना का पानी लेना ट्राइग्लिसराइड्स को तेज़ी से कम करता है।
  • फाइबर युक्त आहार: ओट्स, साबुत अनाज और हरी सब्ज़ियाँ खाएँ, जो खून से चिपचिपे फैट को स्पंज की तरह सोख कर बाहर निकाल देती हैं।

क्या न खाएँ?

  • चीनी और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट: मिठाइयाँ, कोल्ड ड्रिंक्स और चीनी का सेवन बिल्कुल बंद कर दें, क्योंकि यही शरीर में जाकर सीधे ट्राइग्लिसराइड्स बनते हैं।
  • मैदा और बेकरी उत्पाद: बिस्कुट, पिज़्ज़ा, और रिफाइंड आटा शरीर में भयंकर 'आम' और ब्लॉकेज बढ़ाते हैं।
  • जंक फूड और शराब: तली-भुनी चीज़ें और शराब लिवर पर सीधा वार करती हैं, जिससे लिपिड प्रोफाइल की रिपोर्ट और ज़्यादा खराब हो जाती है।

जीवा आयुर्वेद में गहराई से जाँच कैसे होती है?

जीवा आयुर्वेद में मरीज़ की जाँच सिर्फ लिपिड प्रोफाइल की रिपोर्ट देखकर नहीं, बल्कि पूरी समझ के साथ की जाती है।

  • सबसे पहले आपकी परेशानी, थकान और साँस फूलने की रफ्तार को आराम से सुना जाता है।
  • आपके द्वारा इस्तेमाल की गई स्टेटिन या अन्य गोलियों की हिस्ट्री के बारे में पूछा जाता है।
  • आपके आहार, तनाव और पेट साफ (कब्ज़) होने की स्थिति पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
  • नाड़ी जाँच और शरीर की प्रकृति को जानकर 'आम' और मंद अग्नि के स्तर का पता लगाया जाता है।

हमारे यहाँ आपके इलाज का सफर कैसे होता है?

जीवा आयुर्वेद में हम इलाज की पूरी प्रक्रिया को बहुत ही व्यवस्थित और सही क्रम में रखते हैं, ताकि आपको अपनी बीमारी के लिए सबसे सटीक समाधान मिल सके।

  • अपनी जानकारी साझा करें: इलाज की शुरुआत के लिए अपनी सेहत से जुड़ी जरूरी जानकारी दें। इसके लिए आप सीधे 0129 4264323 पर कॉल करके अपनी समस्या बता सकते हैं।
  • डॉक्टर से अपॉइंटमेंट तय करें: आपकी सुविधा के अनुसार डॉक्टर से बात करने का समय तय किया जाता है, आप क्लिनिक विजिट या ₹49 में वीडियो कंसल्टेशन के जरिए घर बैठे भी जुड़ सकते हैं।
  • बीमारी को समझना: डॉक्टर आपसे विस्तार से बात करके आपकी तकलीफ, लाइफस्टाइल और शरीर की प्रकृति (Prakriti) को समझते हैं, ताकि बीमारी की असली वजह तक पहुँचा जा सके।
  • कस्टमाइज्ड ट्रीटमेंट प्लान: पूरी जांच के बाद आपके लिए एक पर्सनलाइज्ड इलाज योजना बनाई जाती है, जिसमें आयुर्वेदिक दवाइयाँ, डाइट और लाइफस्टाइल सुधार शामिल होते हैं, ताकि आपको अंदर से स्थायी राहत मिल सके।

पूरी तरह ठीक होने में कितना समय लगता है?

जीवा आयुर्वेद में इलाज पूरी तरह से हर मरीज़ के हिसाब से किया जाता है:

  • हल्की समस्या में सुधार: अगर ट्राइग्लिसराइड्स अभी बढ़ना शुरू हुआ है (200-300 के बीच), तो आहार बदलने और दवाइयों से 6 से 8 हफ्तों में ही रिपोर्ट साफ होने लगती है।
  • पुरानी बीमारी का समय: अगर स्तर 400 या 500+ है और आप सालों से दवाइयाँ खा रहे हैं, तो लिवर और मेटाबॉलिज़्म को पूरी तरह 'रीसेट' होने में 6 से 9 महीने लग सकते हैं।
  • स्थायी परिणाम: मरीज़ अगर जड़ी-बूटियों और शुद्ध आहार का कड़ाई से पालन करता है, तो भविष्य में रोज़ाना स्टेटिन गोलियों के बिना भी हृदय स्वस्थ रहता है और यह भयंकर खतरा खत्म हो जाता है।

जीवा आयुर्वेद में इलाज का अनुमानित खर्च

आपके स्वास्थ्य के लिए आवश्यक आर्थिक निवेश को समझना बहुत महत्वपूर्ण है। जीवा आयुर्वेद में, हम अपनी सेवाओं के खर्च में पूरी पारदर्शिता रखते हैं, जिससे आप अपनी चिकित्सीय ज़रूरतों के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प चुन सकें।

इलाज का खर्च

जो मरीज़ मानक और निरंतर देखभाल चाहते हैं, उनके लिए दवा और परामर्श का मासिक खर्च आमतौर पर Rs.3,000 से Rs.3,500 के बीच होता है। कृपया ध्यान दें कि यह एक अनुमानित आधार है। अंतिम खर्च मरीज़ की स्थिति की सटीक प्रकृति और गंभीरता पर गहराई से निर्भर करता है।

प्रोटोकॉल

अधिक व्यापक और व्यवस्थित दृष्टिकोण के लिए, हम विशेष पैकेज प्रोटोकॉल प्रदान करते हैं। ये योजनाएँ शारीरिक लक्षणों और समग्र जीवनशैली सुधार दोनों को संबोधित करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।

पैकेज में शामिल हैं:

इस प्रोटोकॉल के खर्च में Rs.15,000 से Rs.40,000 तक का एकमुश्त भुगतान शामिल है, जो इलाज की पूरी 3 से 4 महीने की अवधि को कवर करता है।

जीवाग्राम

गहन और पूरी तरह से समर्पित देखभाल की आवश्यकता वाले मरीज़ों के लिए, हमारे जीवाग्राम केंद्र उपचार का बेहतरीन अनुभव प्रदान करते हैं। जीवाग्राम एक शांत, पर्यावरण के अनुकूल माहौल में स्थित एक समग्र स्वास्थ्य केंद्र है।

कार्यक्रम में आमतौर पर शामिल हैं:

जीवाग्राम में 7-दिनों के स्वास्थ्य प्रवास का खर्च लगभग ₹1 लाख है, जो आपके शरीर और दिमाग को फिर से तरोताज़ा करने में मदद करने के लिए निरंतर व्यक्तिगत देखभाल सुनिश्चित करता है।

लोग जीवा आयुर्वेद पर क्यों भरोसा करते हैं?

जीवा आयुर्वेद में हमारा मकसद सिर्फ लक्षणों को कुछ समय के लिए दबाना नहीं, बल्कि बीमारी की असली वजह को जड़ से खत्म करना है। यही वह खास बात है जिसकी वजह से लाखों मरीज़ हम पर दिल से भरोसा करते हैं।

  • जड़ कारण पर ध्यान: सिर्फ लक्षण नहीं, बीमारी की असली वजह को समझकर इलाज किया जाता है।
  • व्यक्तिगत उपचार: हर मरीज के शरीर, प्रकृति और लाइफस्टाइल के अनुसार अलग प्लान बनाया जाता है।
  • सिस्टेमैटिक जांच: वात असंतुलन और मेटाबॉलिज्म को गहराई से समझकर इलाज तय किया जाता है।
  • प्राकृतिक दवाइयाँ: शुद्ध जड़ी-बूटियों पर आधारित दवाइयाँ, बिना शरीर पर अतिरिक्त बोझ डाले।
  • अनुभवी डॉक्टर: आयुर्वेद विशेषज्ञों की टीम द्वारा लगातार मार्गदर्शन दिया जाता है।
  • बेहतर परिणाम: 90%+ मरीजों में धीरे-धीरे स्पष्ट और सकारात्मक सुधार देखा गया है।

आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेदिक उपचार में क्या अंतर है?

पहलू आधुनिक चिकित्सा आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
इलाज का मुख्य लक्ष्य ट्राइग्लिसराइड्स और कोलेस्ट्रॉल को दवाओं, डाइट और लाइफस्टाइल बदलाव से नियंत्रित करना पाचन शक्ति (अग्नि), मेटाबॉलिज़्म और जीवनशैली संतुलन पर ध्यान देना
नज़रिया हृदय और रक्तवाहिनियों के जोखिम को कम करने पर फोकस शरीर के समग्र संतुलन, आहार और दिनचर्या को महत्व देना
उपचार तरीका Statins, फाइब्रेट्स, ओमेगा-3, एक्सरसाइज़ और मेडिकल मॉनिटरिंग का उपयोग अर्जुन, गुग्गुल जैसी पारंपरिक जड़ी-बूटियों, योग और संतुलित आहार का सहारा
डाइट और लाइफस्टाइल कम तेल-चीनी वाला भोजन, वजन नियंत्रण और नियमित व्यायाम की सलाह सात्विक भोजन, नियमित दिनचर्या और पाचन सुधारने वाले आहार पर ज़ोर
लंबा असर सही इलाज और लाइफस्टाइल से हृदय रोग का जोखिम कम किया जा सकता है लंबे समय तक अनुशासित जीवनशैली से समग्र स्वास्थ्य और संतुलन बनाए रखने का लक्ष्य

Triglycerides 300+ के भयंकर लक्षण दिखने पर डॉक्टर की सलाह कब लें?

फैट और ब्लॉकेज के संकेत दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए यदि:

  • थोड़ा सा चलने पर ही सीने में दर्द या भारीपन महसूस होने लगे।
  • लगातार भयंकर थकान रहे और शरीर में कोई ऊर्जा न बचे।
  • आँखों के आस-पास या कोहनियों पर फैट के पीले चकत्ते नज़र आने लगें।
  • पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द हो, जो पैंक्रियास में भयंकर सूजन का संकेत हो सकता है।

निष्कर्ष:

आयुर्वेद के हिसाब से ट्राइग्लिसराइड्स 300+ का स्तर मुख्य रूप से खराब मेटाबॉलिज़्म और दूषित 'आम' के कारण बिगड़े हुए कफ और मेद दोष से जुड़ी समस्या है। अप्राकृतिक जीवनशैली से बना यह चिपचिपा 'आम' आपकी धमनियों को ब्लॉक करता है। सिर्फ खून पतला करने की गोली खाने से रिपोर्ट कुछ दिन के लिए साफ दिखती है लेकिन बीमारी अंदर ही रहती है और हार्ट पर खतरा बना रहता है। इलाज में शरीर की शुद्धि, अर्जुन और गुग्गुल जैसी जड़ी-बूटियाँ और लहसुन-मेथी का शुद्ध आहार सबसे ज़्यादा आवश्यक है, जिससे आपका हृदय बिना किसी कृत्रिम गोली के जीवन भर सेहतमंद बना रहे।

FAQs

हाँ, जब आयुर्वेदिक इलाज से शरीर की 'अग्नि' (पाचन तंत्र) ठीक होती है और 'आम' शरीर से बाहर निकलता है, तो अर्जुन और गुग्गुल जैसी जड़ी-बूटियों की मदद से बिना केमिकल वाली दवाओं के इसे प्राकृतिक रूप से कम किया जा सकता है।

नहीं, दोनों अलग हैं। ट्राइग्लिसराइड्स वह फैट है जिसे शरीर ऊर्जा के रूप में इस्तेमाल न करके जमा कर लेता है, जबकि कोलेस्ट्रॉल का उपयोग शरीर कोशिकाओं और हार्मोन्स के निर्माण में करता है। दोनों के बढ़ने से धमनियों में ब्लॉकेज होती है।

बिल्कुल। खाली पेट लहसुन और मेथी दाना प्राकृतिक रूप से खून को साफ करते हैं और मेटाबॉलिज़्म को तेज़ करते हैं। इससे शरीर में जमा फैट पिघलने लगता है और धमनियों की ब्लॉकेज खुल जाती है।

हाँ। चीनी, मिठाइयाँ और कोल्ड ड्रिंक्स शरीर में जाकर सीधे ट्राइग्लिसराइड्स के रूप में लिवर और खून में जमा हो जाते हैं। इसलिए मीठा खाना सबसे ज़्यादा खराब है।

हाँ, यह एक भयंकर स्थिति है। यह खून को बहुत गाढ़ा बना देता है, जिससे दिल को रक्त पंप करने में अत्यधिक ज़ोर लगाना पड़ता है और धमनियों में थक्का (Clot) बनने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

बिल्कुल। रोज़ाना तेज़ कदम चलने या व्यायाम करने से शरीर की कैलोरी बर्न होती है और सुस्त पड़ा मेटाबॉलिज़्म एक्टिव हो जाता है, जिससे फैट खून में जमा होने के बजाय ऊर्जा में बदल जाता है।

हाँ, शराब ट्राइग्लिसराइड्स का सबसे बड़ा दुश्मन है। शराब में मौजूद खाली कैलोरी और शुगर को लिवर सीधे ट्राइग्लिसराइड्स में बदल देता है, जिससे इसका स्तर रातों-रात तेज़ी से बढ़ जाता है।

हाँ। आजकल खराब लाइफस्टाइल, पिज़्ज़ा-बर्गर, जंक फूड और शारीरिक मेहनत न करने के कारण कम उम्र के युवाओं और बच्चों में भी यह भयंकर समस्या देखने को मिल रही है।

एलोपैथी में अक्सर गोलियाँ ताउम्र खानी पड़ती हैं। लेकिन आयुर्वेद में सही डाइट, जड़ी-बूटियों (अर्जुन, त्रिकटु) और पंचकर्म के ज़रिए शरीर अपना काम प्राकृतिक रूप से करना सीख जाता है, जिससे दवाइयों की ज़रूरत हमेशा के लिए खत्म हो जाती है।

हाँ, भयंकर तनाव के दौरान शरीर में 'कॉर्टिसोल' हार्मोन निकलता है जो मेटाबॉलिज़्म को धीमा कर देता है और शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस पैदा करता है, जिससे ट्राइग्लिसराइड्स और कोलेस्ट्रॉल दोनों तेज़ी से बढ़ने लगते हैं।

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