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Indian thali में क्या बदलें अगर sugar और weight दोनों control करने हैं?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

जब भी किसी को पता चलता है कि उसका शुगर लेवल बढ़ रहा है या मशीन पर वज़न ज़्यादा दिखने लगता है, तो सबसे पहला ख्याल यही आता है कि "अब से खाना आधा कर दो।" हम में से ज़्यादातर लोग यही गलती करते हैं। भूखे रहना या सिर्फ उबली हुई सब्जियां खाना किसी भी परेशानी का सही इलाज नहीं है।

असली समस्या यह नहीं है कि हम कितना खा रहे हैं, बल्कि यह है कि हम 'क्या' खा रहे हैं और हमारी थाली में किन चीजों का बैलेंस है। हमारी भारतीय थाली (दाल, रोटी, सब्जी, दही) दुनिया के सबसे अच्छे और पौष्टिक खानों में से एक है। इसमें सब कुछ है, बस हमें उसे सजाने और खाने का तरीका थोड़ा सा बदलना है।

अगर आप शुगर को बढ़ने से रोकना चाहते हैं और अपना पेट भी अंदर करना चाहते हैं, तो आपको खाना छोड़ने की नहीं, बल्कि अपनी थाली में कुछ बहुत ही आसान और छोटे बदलाव करने की ज़रूरत है। 

Indian थाली में हम सबसे आम गलती क्या करते हैं?

कल रात आपके घर में जो थाली लगी थी, वह कैसी दिख रही थी? 

ज़्यादातर घरों में थाली का आधा हिस्सा 3-4 रोटियों या ढेर सारे चावल से भरा होता है। एक छोटी सी कटोरी में दाल होती है और थोड़ा सा अचार।

यही सबसे बड़ी गलती है। रोटी और चावल में बहुत सारा 'कार्बोहाइड्रेट' (यानी शुगर) होता है। जब आप ढेर सारा चावल या रोटी खाते हैं, तो वह पेट में जाकर शुगर में बदल जाता है और आपके खून में शुगर का लेवल एकदम से ऊपर भागने लगता है। इसके साथ ही, दाल और सब्जी कम होने की वजह से आपको थोड़ी देर में फिर से तेज़ भूख लग जाती है और आप फिर से कुछ न कुछ मीठा या नमकीन खाने लगते हैं, जिससे वज़न तेज़ी से बढ़ता है।

भारतीय थाली, शुगर और वज़न: आयुर्वेदिक दृष्टिकोण 

आयुर्वेद के अनुसार, पारंपरिक भारतीय थाली में गेहूं और चावल जैसे भारी अनाजों की अधिकता शरीर में कफ दोष को बढ़ाती है। इससे पेट की जठराग्नि धीमी पड़ जाती है और भोजन पूरी तरह पचने के बजाय 'आम' (विषाक्त अवशेष) बनाने लगता है। यह बढ़ा हुआ कफ और 'आम' मिलकर शरीर के सूक्ष्म स्रोतों में रुकावट पैदा करते हैं, जिससे फैट (मेद धातु) असामान्य रूप से जमा होने लगता है और मेटाबॉलिज़्म बिगड़ने के कारण ब्लड शुगर व वज़न दोनों अनियंत्रित हो जाते हैं। 

एक सही और सेहतमंद प्लेट कैसी दिखनी चाहिए?

अगर आप शुगर और वज़न दोनों को कंट्रोल करना चाहते हैं, तो आपको अपनी थाली को तीन हिस्सों में बांटना होगा:

  • आधी प्लेट: आपकी थाली का पूरा आधा हिस्सा कच्ची या पकी हुई सब्जियों (सलाद, हरी सब्जियां) से भरा होना चाहिए।
  • एक चौथाई (1/4) हिस्सा: इसमें आपको प्रोटीन वाली चीजें रखनी हैं (जैसे गाढ़ी दाल, पनीर, राजमा या छोले)।
  • एक चौथाई (1/4) हिस्सा: यह हिस्सा आपके अनाज (रोटी या चावल) के लिए है। यानी 3-4 रोटी की जगह सिर्फ 1 या 2 रोटी।

जब आप इस तरह से खाते हैं, तो आपका पेट भी भरता है, खून में शुगर भी नहीं बढ़ती और वज़न भी कंट्रोल में रहता है।

सफेद चावल और मैदे वाली रोटी में क्या बदलाव करें?

सफेद चावल और मैदा पचने में बहुत ही हल्के होते हैं। जैसे ही आप इन्हें खाते हैं, ये तुरंत खून में घुलकर शुगर बढ़ा देते हैं।

  • चावल की जगह क्या लें? सफेद चावल को बिल्कुल छोड़ना ज़रूरी नहीं है, लेकिन इसकी मात्रा कम कर दें। अगर हो सके तो ब्राउन राइस, क्यूकि इसमें फाइबर अधिक होता है, इसलिए समान मात्रा में खाने पर कई लोगों में सफेद चावल की तुलना में ब्लड शुगर अपेक्षाकृत धीरे बढ़ सकती है। 
  • रोटी कैसी हो? सिर्फ गेहूं के आटे की रोटी खाने के बजाय, उसमें थोड़ा सा बेसन, रागी, या बाजरे का आटा मिला लें (मल्टीग्रेन आटा)। इससे रोटी भारी हो जाती है और पेट लंबे समय तक भरा रहता है।

थाली में प्रोटीन बढ़ाना क्यों इतना ज़रूरी है?

प्रोटीन एक ऐसा जादू है जो आपका वज़न कम करने और शुगर कंट्रोल करने में सबसे बड़ी मदद कर सकता है। प्रोटीन पचने में बहुत समय लेता है। जब आप दाल या पनीर खाते हैं, तो यह आपके पेट को घंटों तक फुल (भरा हुआ) रखता है और आपको बार-बार भूख नहीं लगने देता।

प्रोटीन के लिए अपनी थाली में ये चीजें ज़रूर रखें:

  • एक बड़ी कटोरी गाढ़ी दाल (पानी वाली नहीं)।
  • घर का बना ताज़ा पनीर।
  • राजमा, छोले या लोबिया की सब्जी।
  • ताज़ी दही।
  • अंकुरित अनाज (स्प्राउट्स)।

एक्सपर्ट डॉक्टर की विशेष सलाह

भारतीय थाली में गेहूं की रोटी और चावल का ज़्यादा होना हमारी सामान्य आदत हो सकती है, लेकिन अगरवज़न लगातार बढ़ रहा है या शुगर अनियंत्रित है, तो खाने में सिंपल कार्बोहाइड्रेट (सफेद चावल, गेहूं, आलू) की अधिकता को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में अपनी आधी थाली को हरी सब्जियों व सलाद से भरना और गेहूं-चावल की जगह दाल, पनीर और मिलेट्स (ज्वार, बाजरा) शामिल करना बहुत जरूरी है।

फाइबर (रेशा) बढ़ाने के आसान तरीके

फाइबर हमारे पेट के लिए झाड़ू का काम करता है। फाइबर वाली चीजें खाने से पेट साफ रहता है और सबसे ज़रूरी बात, यह खाने को खून में जल्दी घुलने नहीं देता, जिससे शुगर हमेशा कंट्रोल में रहती है।

  • खाना शुरू करने से पहले एक प्लेट भरकर खीरा, ककड़ी, टमाटर और गाजर का सलाद खाएं। जब आपका आधा पेट सलाद से भर जाएगा, तो आप रोटी अपने आप कम खाएंगे।
  • खाने में लौकी, तोरी, भिंडी, बीन्स और पालक जैसी हरी सब्जियों का ज़्यादा इस्तेमाल करें।
  • डिब्बे वाले जूस पीने के बजाय हमेशा पूरा फल काटकर चबाकर खाएं।

घी और चिकनाई (Healthy Fat) से बिल्कुल न डरें

बहुत से लोग जब डाइटिंग शुरू करते हैं, तो घी और तेल बिल्कुल छोड़ देते हैं। यह एक बहुत बड़ी गलती है। हमारे शरीर के जोड़ों और दिमाग को सही से काम करने के लिए थोड़ा सा चिकनाई की ज़रूरत होती है।

  • दाल या रोटी पर एक छोटी चम्मच देसी घी लगाना सेहत के लिए बहुत अच्छा है। आयुर्वेद में सीमित मात्रा में घी को अग्नि के समर्थन वाला माना गया है। आधुनिक विज्ञान के अनुसार भी सीमित मात्रा में स्वस्थ वसा संतुलित भोजन का हिस्सा हो सकती है। 
  • शाम की भूख में चिप्स खाने के बजाय 4-5 भीगे हुए बादाम, 2 अखरोट या थोड़े से मूंगफली के दाने खाएं।
  • बस ध्यान रखें कि ये चीजें कटोरी भरकर नहीं, मुट्ठी भर ही खानी हैं।

वज़न और शुगर कम करने के लिए क्या खाना कम कर दें?

अगर आप सच में फर्क देखना चाहते हैं, तो इन चीजों से दूरी बना लें या इन्हें बहुत कम कर दें:

  • तली हुई चीजें: समोसा, कचौड़ी और बाजार के पकौड़े। इनमें इस्तेमाल होने वाला तेल बहुत खराब होता है।
  • मिठाइयां और चीनी: चाय में चीनी कम कर दें और बाहर की मिठाइयों से बचें।
  • मीठे पेय: बाजार में मिलने वाले कोल्ड ड्रिंक और जूस, जिनमें सिर्फ चीनी घुली होती है।
  • बिस्किट और बेकरी: चाय के साथ नमकीन या मैदा वाले बिस्किट खाने की आदत छोड़ दें।

खाने का सही समय और चबाने का तरीका

खाना सिर्फ पेट भरने के लिए नहीं है। आप उसे कैसे खाते हैं, यह बहुत ज़रूरी है।

  • चबा-चबाकर खाएं: जब हम टीवी या मोबाइल देखते हुए जल्दी-जल्दी खाते हैं, तो हम ज़रूरत से बहुत ज़्यादा खा लेते हैं। खाने को 32 बार चबाने की कोशिश करें ताकि वह मुंह में ही पानी बन जाए।
  • रात का खाना: रात को पाचन सुस्त हो जाता है। इसलिए रात का खाना सोने से कम से कम 2 से 3 घंटे पहले खा लें। रात को बहुत भारी खाना (जैसे छोले-भटूरे या बिरयानी) खाने से बचें।

वो आदतें जो थाली से भी ज़्यादा फर्क डालती हैं

सिर्फ खाना बदलने से सब कुछ नहीं होगा। शुगर और मोटापा आपकी पूरी लाइफस्टाइल से जुड़े हैं।

  • चलना-फिरना बहुत ज़रूरी: सुबह या शाम को कम से कम 30 से 40 मिनट तेज़-तेज़ पैदल चलें। इससे शरीर की एक्स्ट्रा शुगर एनर्जी में बदल जाती है।
  • गहरी नींद लें: रात को 7-8 घंटे की गहरी नींद लें। अगर नींद पूरी नहीं होती है, तो शरीर चिड़चिड़ा हो जाता है और शुगर लेवल बढ़ जाता है।
  • टेंशन कम ले: ज़्यादा स्ट्रेस लेने से शरीर में गलत हार्मोन्स बनते हैं जो वज़न बढ़ाते हैं।
  • पानी खूब पिएं: दिन भर में कम से कम 10-12 गिलास पानी पिएं ताकि शरीर की गंदगी बाहर निकल सके।

निष्कर्ष

अगर आपको शुगर और वज़न दोनों को कंट्रोल करना है, तो आपको भूखे रहने या अपना पसंदीदा खाना हमेशा के लिए छोड़ने की कोई ज़रूरत नहीं है।

बस अपनी भारतीय थाली में थोड़ा सा समझदारी भरा बदलाव करें। रोटी-चावल को आधा कर दें और उसकी जगह पर ढेर सारी सब्जियां, सलाद और कटोरी भर दाल/पनीर ले आएं। साथ में दिन में थोड़ा पैदल चलें, मीठा कम खाएं और अच्छी नींद लें।

ये बदलाव शुरू में थोड़े मुश्किल लग सकते हैं, लेकिन जब कुछ ही हफ्तों में आप खुद को शीशे में पतला होता देखेंगे और आपका डॉक्टर आपकी शुगर रिपोर्ट देखकर मुस्कुराएगा, तो आपको लगेगा कि ये सारे बदलाव सच में बहुत काम के थे!

References

Manage Blood Sugar | Diabetes | CDC

Diabetes and Dietary Supplements: What You Need To Know | NCCIH 

Weight control behaviors among adult men and women: cause for concern? - PubMed 

Steps for Losing Weight | Healthy Weight and Growth | CDC

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

हाँ, मिलेट्स सीमित मात्रा में रोज़ खाए जा सकते हैं। इन्हें दाल, सब्ज़ी और सलाद के साथ संतुलित रूप में खाने से ब्लड शुगर को बेहतर तरीके से नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है।

मूंग दाल, मसूर दाल और चना दाल का ग्लाइसेमिक प्रभाव अपेक्षाकृत कम माना जाता है। अलग-अलग दालों को बदल-बदलकर खाना सबसे अच्छा विकल्प है।

हर बार ज़रूरी नहीं। ब्राउन राइस में फाइबर अधिक होता है, लेकिन इसकी मात्रा फिर भी नियंत्रित रखनी चाहिए। सही पोर्शन और संतुलित थाली सबसे ज़्यादा महत्वपूर्ण है।

यह उम्र, लिंग, शारीरिक गतिविधि, स्वास्थ्य और वज़न पर निर्भर करता है। अपनी ज़रूरत के अनुसार सही कैलोरी तय करने के लिए डॉक्टर या डाइटिशियन से सलाह लेना बेहतर होता है।

सरसों का तेल, मूंगफली का तेल, तिल का तेल और सीमित मात्रा में घी अच्छे विकल्प हो सकते हैं। किसी भी तेल का अधिक मात्रा में सेवन करने से बचना चाहिए।

हाँ, लेकिन उनकी उम्र, पाचन क्षमता, दवाओं और स्वास्थ्य समस्याओं के अनुसार थाली में बदलाव किए जा सकते हैं। ज़रूरत पड़ने पर डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह लें।

हाँ। संतुलित भारतीय थाली, जिसमें सब्ज़ियाँ, प्रोटीन और नियंत्रित मात्रा में अनाज हों, प्रीडायबिटीज़ में ब्लड शुगर और वज़न को नियंत्रित रखने में मदद कर सकती है।

नाश्ते में मूंग चीला या वेजिटेबल ओट्स, दोपहर में आधी प्लेट सब्ज़ी, दाल और 1–2 रोटी, तथा रात में हल्की सब्ज़ी, दाल और सलाद एक अच्छा विकल्प हो सकता है।

नहीं। पोर्शन का आकार उम्र, शारीरिक गतिविधि, लंबाई, वज़न और स्वास्थ्य के अनुसार अलग हो सकता है। इसलिए सभी के लिए एक ही मात्रा उपयुक्त नहीं होती।

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