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Rajma-chawal, dal-chawal या roti-sabzi: digestion के लिए क्या बेहतर है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

हमारे भारतीय घरों में राजमा-चावल, दाल-चावल और रोटी-सब्जी हर दिन का खाना है। कोई राजमा-चावल का दीवाना है, तो किसी को दाल-चावल खाकर ही असली सुकून मिलता है। कई बार हम आपस में बहस भी करते हैं कि इनमें से सबसे अच्छा और हल्का खाना कौन सा है।

लेकिन सबके लिए कोई एक खाना सबसे अच्छा नहीं हो सकता। खाना पचना सिर्फ इस बात पर निर्भर नहीं करता कि आपकी प्लेट में क्या है। यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि आपने उसे कैसे पकाया है, आप उसे किस समय खा रहे हैं और आपके शरीर को किस चीज़ की आदत है। जो खाना एक इंसान को बहुत आराम देता है, वही खाना दूसरे के पेट में गैस और भारीपन कर सकता है।

खाना कैसे पचता है और भोजन का उस पर क्या असर होता है?

हमारा पेट एक मशीन की तरह है। हम जो भी खाते हैं, यह मशीन उसे पीसकर छोटे-छोटे टुकड़ों में बांट देती है, ताकि हमारे शरीर को काम करने की ताकत मिल सके।

अगर आप ऐसा खाना खाते हैं जिसमें फाइबर (रेशा) और प्रोटीन सही मात्रा में है, तो इस मशीन को काम करने में आसानी होती है। लेकिन अगर आप बहुत ज़्यादा तेल-मसाले वाला या बहुत भारी खाना खा लेते हैं, तो पेट की इस मशीन पर बहुत ज़्यादा लोड पड़ जाता है। नतीजा? खाना ठीक से पचता नहीं है और पेट में भारीपन, गैस या जलन होने लगती है। 

राजमा-चावल: फायदे, स्वाद और पचने से जुड़ी ज़रूरी बातें

राजमा-चावल का नाम सुनते ही संडे की दोपहर याद आ जाती है। राजमा में शरीर को ताकत देने वाला प्रोटीन, आयरन और बहुत सारा फाइबर होता है। जब हम इसे चावल के साथ मिलाकर खाते हैं, तो यह एक पूरा और बहुत ही ताकतवर खाना बन जाता है।

लेकिन, पचने के मामले में राजमा थोड़ा नखरे वाला होता है। राजमा के दाने के ऊपर का छिलका थोड़ा सख्त होता है और इसमें कुछ ऐसी चीज़े होती हैं जिन्हें पचाने में हमारे पेट को बहुत मेहनत करनी पड़ती है। यही वजह है कि राजमा खाने के बाद कई लोगों को पेट फूलने या गैस की शिकायत होती है और नींद भी बहुत आती है।

अगर आप चाहते हैं कि राजमा आसानी से पच जाए, तो उसे बनाने का तरीका सही होना चाहिए। राजमा को रात भर पानी में ज़रूर भिगोएं। सुबह उस पानी को फेंक दें और साफ पानी में उबालें। छौंक लगाते समय हींग और अजवाइन या जीरे का इस्तेमाल ज़रूर करें। इससे राजमा पेट में गैस नहीं बनाएगा।

दाल-चावल: पेट के लिए सबसे हल्का और सुकून देने वाला खाना

दाल-चावल को अगर दुनिया का सबसे आरामदायक खाना कहा जाए, तो गलत नहीं होगा। जब हम बीमार होते हैं, बहुत थके होते हैं या बाहर का उल्टा-सीधा खाकर पेट खराब कर लेते हैं, तो हमारी मां सबसे पहले दाल-चावल या खिचड़ी ही बनाकर देती है।

दाल-चावल पचने में बहुत ही आसान होता है। मूंग या मसूर की दाल तो पेट में जाते ही घुल जाती है। दाल से हमें अच्छा प्रोटीन मिलता है और चावल से तुरंत ताकत मिलती है। क्योंकि चावल बहुत जल्दी पच जाता है और दाल पेट को आराम देती है, इसलिए दाल-चावल खाने के बाद पेट एकदम हल्का महसूस होता है।

छोटे बच्चों, घर के बड़े-बुजुर्गों और जिनका पाचन कमज़ोर है, उनके लिए दाल-चावल से बेहतर कोई दूसरा खाना नहीं हो सकता। अगर इसमें एक चम्मच शुद्ध देसी घी डाल लिया जाए, तो इसका स्वाद और पचने की ताकत दोनों बढ़ जाते हैं।

रोटी और सब्जी: हर दिन की ज़रूरत, फाइबर और सेहत का खजाना

रोटी और सब्जी हमारे घरों में दोनों समय खाई जाती हैं। गेहूं की रोटी में फाइबर (रेशा) बहुत अच्छी मात्रा में होता है। और जब हम इसके साथ हरी सब्जियां (जैसे पालक, लौकी, तोरी, भिंडी) खाते हैं, तो हमारे शरीर को हर तरह के विटामिन मिल जाते हैं।

रोटी खाने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसे खाने के लिए हमें इसे बहुत चबाना पड़ता है। चबाने से मुंह में जो पानी (लार) बनता है, वह खाने को पचाने में बहुत मदद करता है। इसके अलावा, रोटी धीरे-धीरे पचती है, जिससे हमें लंबे समय तक भूख नहीं लगती और शरीर को लगातार ताकत मिलती रहती है।

लेकिन रोटी-सब्जी तभी फायदेमंद है जब सब्जी को कम तेल और कम मसाले में पकाया गया हो। अगर आप सब्जी में ढेर सारा तेल डाल देंगे, तो वही सेहतमंद खाना आपके पेट में जलन और भारीपन पैदा कर देगा।

एक्सपर्ट डॉक्टर की विशेष सलाह

सामान्य स्थिति में रोटी-सब्जी या कभी-कभार राजमा-चावल खाना ठीक हो सकता है, लेकिन राजमा से पेट में गैस बनना, ब्लोटिंग (पेट फूलना), भारीपन महसूस होना या गेहूं की रोटी पचने में ज्यादा समय लगना नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। बेहतर पाचन के लिए तीनों में से दाल-चावल को ही प्राथमिकता देना जरूरी है।

किस भोजन में गैस और भारीपन ज़्यादा होता हैं?

हर इंसान का शरीर अलग है, लेकिन अगर हम आम तौर पर देखें तो:

  • राजमा-चावल: यह पचने में सबसे ज़्यादा समय लेता है और इसमें गैस बनने की संभावना सबसे ज़्यादा होती है।
  • रोटी-सब्जी: यह आमतौर पर गैस नहीं बनाती। लेकिन अगर आप गोभी, कटहल या अरबी जैसी भारी सब्जियां खा रहे हैं, तो कुछ लोगों को गैस हो सकती है।
  • दाल-चावल: यह सबसे कम गैस बनाता है। हालांकि, उड़द की दाल या चने की दाल कुछ लोगों के पेट में भारीपन कर सकती है, जबकि मूंग की दाल बिल्कुल गैस नहीं बनाती।

अक्सर पेट खराब होने की वजह खाना नहीं, बल्कि ज़रूरत से ज़्यादा खा लेना होता है।

आपकी उम्र और काम के हिसाब से क्या सबसे अच्छा है?

खाना हमेशा अपनी मेहनत और काम के हिसाब से चुनना चाहिए।

  • अगर आप दिन भर दौड़-भाग का काम करते हैं, जिम जाते हैं या बहुत मेहनत करते हैं, तो राजमा-चावल आपके लिए बहुत अच्छा है क्योंकि यह आपको भरपूर ताकत और प्रोटीन देगा।
  • अगर आप दिन भर ऑफिस में कुर्सी पर बैठे रहते हैं, तो आपके लिए रोटी-सब्जी और थोड़ा सा सलाद सबसे अच्छा है। यह आपको मोटा नहीं होने देगा और पच भी आसानी से जाएगा।
  • अगर आपका पेट अक्सर खराब रहता है, आप बीमार हैं या आपकी उम्र ज़्यादा है, तो आपके लिए दाल-चावल सबसे सुरक्षित और अच्छा विकल्प है।

पकाने और खाने का तरीका क्यों इतना ज़रूरी है?

एक ही खाना अगर अलग-अलग तरीके से पकाया जाए, तो उसका पेट पर असर भी बदल जाता है। अगर आप दाल को बिना हींग-जीरे के बघारे खाएंगे, तो वह नुकसान कर सकती है। खाने को हमेशा कम तेल में और धीमी आंच पर पकाना चाहिए।

खाने का तरीका भी बहुत मायने रखता है। आजकल लोग टीवी या मोबाइल देखते हुए खाना खाते हैं। इस चक्कर में वे खाने को बिना चबाए सीधा निगल लेते हैं और उन्हें पता ही नहीं चलता कि उन्होंने कितना ज़्यादा खा लिया है। खाने को हमेशा शांति से बैठकर और खूब चबाकर खाना चाहिए। इससे खाना जल्दी पचता है।

पेट (Digestion) को हमेशा ठीक रखने के बहुत ही आसान उपाय

अगर आप चाहते हैं कि आप जो भी खाएं, वह आसानी से पच जाए, तो इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखें:

  • खाने का एक समय तय करें। रोज उसी समय पर खाना खाएं।
  • दिन भर में खूब सारा पानी पिएं, लेकिन खाना खाते समय बहुत ज़्यादा पानी न पिएं।
  • खाने को 32 बार चबाने की कोशिश करें।
  • खाना खाने के तुरंत बाद बिस्तर पर न लेटें। कम से कम 15-20 मिनट धीरे-धीरे टहलें।
  • रात का खाना हमेशा हल्का रखें और सोने से दो घंटे पहले खा लें।
  • बहुत ज़्यादा पैकेट वाला, तला-भुना या बाहर का खाना कम कर दें।

किन लोगों को अपना खास ध्यान रखना चाहिए?

अगर आपको अक्सर गैस, एसिडिटी, या बार-बार पेट खराब होने की समस्या रहती है, तो आपको वह खाना पहचानना होगा जो आपको परेशान करता है। अगर राजमा खाने से दिक्कत होती है, तो उसे खाना कम कर दें। जिन्हें शुगर (डायबिटीज) की बीमारी है, उन्हें चावल कम और रोटी या सब्जियाँ ज़्यादा खानी चाहिए। हमेशा अपने शरीर की आवाज सुनें।

निष्कर्ष

राजमा-चावल, दाल-चावल और रोटी-सब्जी, ये तीनों ही हमारे देसी खाने की शान हैं। इनमें से कोई भी खाना बुरा नहीं है। सबसे अच्छा खाना वही है जिसे खाने के बाद आपका पेट भारी न हो, आपको सुस्ती न आए और आपको काम करने की अच्छी ताकत मिले।

सही मात्रा में खाएं, चबाकर खाएं और खुश होकर खाएं। आपका पेट हमेशा आपका साथ देगा।

References

Your Digestive System & How it Works - NIDDK 

Introduction to the Digestive System | SEER Training 

Physiology, Digestion - StatPearls - NCBI Bookshelf 

Digestive System: MedlinePlus 

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

रात में राजमा-चावल कुछ लोगों के लिए भारी पड़ सकता है, खासकर यदि पाचन कमज़ोर हो। यदि खाना हो तो कम मात्रा में खाएं और सोने से कम से कम 2–3 घंटे पहले भोजन करें।

हाँ, यदि दाल बदल-बदलकर खाई जाए और साथ में सब्ज़ी व सलाद भी शामिल हो, तो दाल-चावल रोज़ के संतुलित भोजन का हिस्सा बन सकता है।

ग्लूटेन एलर्जी या सीलिएक रोग वाले लोग गेहूं की रोटी की जगह ज्वार, बाजरा, रागी या चावल के आटे से बनी रोटी खा सकते हैं।

अधिकांश स्वस्थ लोगों के लिए सीमित मात्रा में दही के साथ ये भोजन सुरक्षित हो सकता है। लेकिन यदि दही खाने से पेट फूलता है या बार-बार सर्दी-जुकाम रहता है, तो इसे अपनी सहनशीलता के अनुसार लें।

हाँ। प्रेशर कुकर में दाल, राजमा और अन्य दालें अच्छी तरह गल जाती हैं, जिससे वे सामान्यतः पचाने में आसान हो जाती हैं।

यदि भोजन को सही तरीके से ठंडा करके फ्रिज में रखा गया हो और दोबारा अच्छी तरह गर्म किया गया हो, तो इसे खाया जा सकता है। लंबे समय तक बाहर रखा हुआ भोजन खाने से बचें।

भारी भोजन होने के कारण राजमा-चावल व्यायाम से ठीक पहले खाने की बजाय 2–3 घंटे पहले खाना बेहतर माना जाता है। व्यायाम से पहले हल्का भोजन अधिक आरामदायक रहता है।

बच्चों के लिए तीनों भोजन संतुलित आहार का हिस्सा हो सकते हैं। उनकी उम्र, भूख और पाचन के अनुसार मात्रा और विविधता बनाए रखना अधिक महत्वपूर्ण है।

नहीं। अचार और पापड़ में अक्सर नमक और तेल अधिक होता है। इन्हें रोज़ की बजाय कभी-कभार और सीमित मात्रा में खाना बेहतर है।

सौंफ कुछ लोगों में भोजन के बाद ताजगी और हल्कापन महसूस कराने में मदद कर सकती है। हालांकि, लगातार पाचन संबंधी समस्याओं के लिए केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए।

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